मनोरंजन
राजामौली के जन्मदिन पर महेश बाबू, जूनियर एनटीआर और रामचरण ने दी शुभकामनाएं
साउथ इंडस्ट्री के मशहूर निर्देशक एसएस राजामौली शनिवार को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास अवसर पर साउथ इंडस्ट्री के सुपरस्टार्स ने न सिर्फ जन्मदिन की बधाई बल्कि, उनके लंबे स्वास्थ्य की कामना भी की।
अभिनेता महेश बाबू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निर्देशक की तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वह हंसते हुए नजर आ रहे हैं। महेश बाबू ने निर्देशक के साथ काम करने को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा, “आपको अब तक का सबसे यादगार जन्मदिन मुबारक हो एसएस राजामौली सर। हम साथ में जिस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं वह जल्दी आए, क्योंकि अब मैं इसका और इंतजार नहीं कर सकता हूं।”
अभिनेता जूनियर एनटीआर ने फिल्ममेकर एसएस राजामौली को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि वह अपनी फिल्मों से लगातार एक नया मुकाम हासिल करते हैं और फिर खुद ही उसे पार कर जाते हैं।
एक्टर ने राजामौली के साथ इंस्टाग्राम पर तस्वीर शेयर की, जिसमें पर्दे के पीछे की उनकी दोस्ती की झलक देखने को मिली। तस्वीर में जूनियर एनटीआर पीछे से राजामौली को गले लगाते हुए नजर आ रहे हैं। दोनों इस पल में काफी खुश दिख रहे हैं।
राजामौली ने काले रंग के कपड़े पहने हुए हैं और मुस्कुरा रहे हैं, जबकि जूनियर एनटीआर उनके कंधे पर झुके हुए प्यार से उन्हें पकड़े हुए हैं। जूनियर एनटीआर ने लिखा, “जन्मदिन मुबारक हो उस शख्स को, जो लगातार ऊंचाइयां बढ़ाता है और फिर खुद ही उसे पार कर जाता है। लव यू जक्कन्ना एसएस राजामौली।”
अभिनेता रामचरण ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए निर्देशक को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने एक्स पर नोट शेयर कर फिल्म वारणसी को लेकर उत्सुकता जाहिर की। उन्होंने लिखा, “जन्मदिन मुबारक हो मेरे प्यारे एसएस राजामौली गारू। आपके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और कई और सालों तक भारतीय सिनेमा का नाम रोशन करने की कामना करता हूं। वाराणसी के साथ आप जो शानदार फिल्म बना रहे हैं, उसे देखने का बेसब्री से इंतजार है।”
मनोरंजन
जन्मदिन विशेषः दोस्ती के लिए बने नेता, फिर छोड़ दी राजनीति, जानें अमिताभ के सियासी करियर की कहानी

सदी के महानायक और बिग बी अमिताभ बच्चन का 11 अक्टूबर को जन्म दिन है। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में जन्मे अमिताभ बच्चन प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन के बेटे हैं। बॉलीवुड में सफलता के ऊंचे पायदान को छूने वाले बिग बी राजनीति में भी हाथ आजमा चुके हैं, हालांकि यहां उनकी पारी सिनेमा जैसी हिट साबित नहीं हुई थी।
फिल्मों में ‘एंग्री यंग मैन’ के तौर पर सिस्टम से लड़ने वाले अमिताभ बच्चन ने असल जिंदगी में भी राजनीति का रुख किया था। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अमिताभ बच्चन ने अपने बचपन के दोस्त राजीव गांधी को भावुक रूप से समर्थन देने के लिए कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की। 1984 में अपने जिगरी दोस्त राजीव गांधी के कहने पर उन्होंने इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। उन्होंने 8वें लोकसभा चुनाव में अपने गृहनगर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) सीट से चुनाव लड़ा। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता हेमवती नंदन बहुगुणा को एकतरफा मुकाबले में ऐतिहासिक मतों के अंतर से हराया, जो चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक थी।
जब अमिताभ बच्चन का राजनीतिक करियर शीर्ष पर था, तभी 1987 में देश के चर्चित बोफोर्स घोटाले में उनका और उनके भाई अजिताभ बच्चन का नाम आया। हालांकि उन पर लगे सभी आरोप झूठे साबित हुए, लेकिन मीडिया ट्रायल और विपक्षी दलों के विरोध से परेशान होकर उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किए बिना जुलाई 1987 में लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। साल 2012 में उन्हें इस मामले में पूरी तरह क्लीन चिट मिल गई थी।
इस्तीफा देने के बाद अमिताभ बच्चन ने सक्रिय राजनीति से हमेशा के लिए तौबा कर ली और दोबारा कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। उस दौरान अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल मुश्किल दौर से गुजर रही थी और गांधी परिवार से कोई मदद न मिलने पर अमर सिंह ने उनकी आर्थिक मदद की। अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं। जया बच्चन साल 2004 से लगातार समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से राज्यसभा सांसद के रूप में राजनीति में सक्रिय हैं। इसके अलावा, दिवंगत नेता अमर सिंह के साथ उनकी करीबी के चलते एक समय उनका झुकाव अप्रत्यक्ष रूप से समाजवादी पार्टी की तरफ देखा गया था।
एक इंटरव्यू में राजनीति और चुनाव लड़ने के बारे में बॉलीवुड के शहंशाह ने कहा था, “मेरा वह फैसला भावनात्मक था। मैं एक दोस्त की मदद करना चाहता था इसलिए राजनीति में आया। राजनीति में आने के बाद पता चला यहां भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। मुझे लगा कि मैं यह नहीं कर सकता और इसलिए राजनीति छोड़ दी।”
मनोरंजन
कंगना रनौत और एनडीए नेताओं ने सीजेपी के प्रदर्शन को बताया सोची-समझी साजिश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन के आह्वान पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद समेत एनडीए नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। एनडीए नेताओं ने सीजेपी के प्रदर्शन को सोची-समझी साजिश करार दिया है।
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने मीडिया से बातचीत में कहा, “देश-विरोधी तत्व, आतंकवादी ताकतें और अंतरराष्ट्रीय साजिशें इस समय हमारे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। देश और उसके नागरिकों को परेशान करने के लिए किसी न किसी बहाने से तरह-तरह की साजिशें रची जा रही हैं।”
मथुरा में भाजपा विधायक श्रीकांत शर्मा ने आईएएनएस से कहा, “कुछ लोग सोची-समझी साजिश के तहत भारत को बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह तो बस वोटर लिस्ट को शुद्ध करने की प्रक्रिया है, फिर भी इतना हंगामा हो रहा है। वोटर लिस्ट में मौजूद गड़बड़ियों को ठीक किया जा रहा है।”
उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने कहा, “हर किसी को लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने का अधिकार है। लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन चलाना सबका अधिकार है। हालांकि, बिना किसी जांच-पड़ताल के किसी पर आरोप लगाना या किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाना सही नहीं है, और मुझे लगता है कि यह अनुचित है।”
जंतर-मंतर पर सीईसी के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन का समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा समर्थन किए जाने पर मंत्री संजय निषाद ने कहा, “देश की जनता सर्वोपरि है। सरकार हो या विपक्ष, जनता जिसे पसंद करती है, उसे सत्ता में बैठाती है और जिसे नापसंद करती है, उसे बाहर कर देती है। अब, जो व्यक्ति बाहर है, वह बयानबाजी के अलावा और क्या कर सकता है?”
पटना में भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “सीजेपी ने शुरू में प्रश्न पत्र लीक होने के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया, यह दावा करते हुए कि वे छात्रों के हितों के लिए लड़ रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सरकार ने उनकी मांग पूरी की और छात्रों व युवाओं द्वारा उठाई गई मांगों पर ध्यान दिया। जंतर-मंतर पर उनके द्वारा की गई गुंडागर्दी और अराजक स्थिति के बावजूद, जिससे आम जनता को परेशानी हुई, उन्हें माफ कर दिया गया और उनकी मांगें मान ली गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छात्रों और युवाओं के हित में कड़े कानून बनाए जाएंगे और उन्हें माफ कर दिया गया। दो महीने में ही सीजेपी के लोगों का असली चेहरा सबके सामने आ गया है।”
छत्तीसगढ़ के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी लोकतंत्र और संविधान का सम्मान करती है। संविधान हर व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार देता है, लेकिन यह मौलिक अधिकार इस शर्त के अधीन है कि इससे दूसरों को असुविधा न हो।”
मनोरंजन
जया बच्चन के सपोर्ट में आईं तनीषा मुखर्जी, पैपराजी को दी उनसे दूर रहने की नसीहत

हर साल की तरह इस साल भी मुंबई में ‘नॉर्थ बॉम्बे दुर्गा पूजा” का भव्य आयोजन होने जा रहा है। दुर्गा पूजा के दौरान बॉलीवुड हस्तियां माता रानी का आशीर्वाद लेने आती है। हाल ही में काजोल की छोटी बहन और अभिनेत्री तनिषा मुखर्जी ने पैप्स से अपील कि की वह दुर्गा पूजा के समय अभिनेत्री जया बच्चन को परेशान न करें।
दुर्गा पूजा के एक इवेंट में मीडिया से बात करते हुए तनीषा ने कहा, “मैं देख रही हूं कि आप लोग जया आंटी को बहुत परेशान कर रहे हैं। मैं देखती हूं कि आपके कुछ रिपोर्टर्स जानबूझकर उन्हें उकसाने की कोशिश करते हैं, तो मेरी आप सभी से रिक्वेस्ट है कि हमारी दुर्गा पूजा में ऐसा मत कीजिएगा।” तनीषा मुखर्जी ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “हमारी जया आंटी को परेशान मत कीजिए, ओके?”
इतना ही नहीं, तनीषा ने भीड़ को लेकर भी लोगों से अपील की। उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान पंडाल में लाखों लोग आते हैं, इसलिए धक्का-मुक्की न करें, एक-दूसरे का ख्याल रखें और थोड़ी शिष्टता और इंसानियत बनाए रखें।
बता दें, जया बच्चन और पैपराजी के बीच की नोकझोंक अक्सर सुर्खियों में रहती है। जया कई बार पब्लिक में फोटो खींचने पर नाराजगी जता चुकी हैं। वहीं, जया बच्चन भी हर साल इस दुर्गा पूजा पंडाल में आती हैं और तनुजा मुखर्जी परिवार के साथ उनका काफी पुराना और करीबी रिश्ता है।
पूजा का मुखर्जी परिवार में खास महत्व रखता है। नॉर्थ बॉम्बे सार्बोजनिन दुर्गा पूजा मुंबई की सबसे पुरानी और भव्य पूजाओं में से एक है, जिसकी स्थापना 1948 में अभिनेत्री काजोल और निर्देशक अयान मुखर्जी के दादा पद्मश्री शशधर मुखर्जी और उनकी पत्नी श्रीमती सतीरानी मुखर्जी ने की थी। अयान मुखर्जी, अभिनेत्री काजोल और तनिषा मुखर्जी के चचेरे भाई हैं। अयान मुखर्जी के पिता (देब मुखर्जी) और काजोल के पिता (शोमू मुखर्जी) सगे भाई थे।
पहली पूजा सांताक्रूज के श्री मंडल हॉल में हुई थी, तब से यह सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से और भी बड़ी होती चली गई। यह मुंबई के सबसे पुराने और भव्य दुर्गा पूजा आयोजनों में से एक है, जिसे पहले काजोल के चाचा और अयान मुखर्जी के पिता देब मुखर्जी संभालते थे। उनके निधन के बाद पूरा परिवार मिलकर इस परंपरा को आगे निभा रहा है।
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र2 years agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
महाराष्ट्र2 years agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
राजनीति2 years agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल2 years agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
