व्यापार
गिरावट के बाद बाजार में दिखी रौनक, सेंसेक्स 287 अंकों की बढ़त के साथ बंद, निफ्टी में 0.48 प्रतिशत की तेजी
वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते मंगलवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। पिछले सत्र की गिरावट से उबरते हुए प्रमुख घरेलू बेंचमार्कों ने 0.48 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 286.98 अंकों यानी 0.37 प्रतिशत बढ़कर 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 116 अंक यानी 0.48 प्रतिशत बढ़कर 24,335.55 पर बंद हुआ।
हालांकि दिन के सत्र में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,369.11 से 73.61 अंक फिसलकर 77,295.49 पर फ्लैट खुला, लेकिन दिन के दौरान एक समय इसने 297.28 अंक यानी 0.38 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,666.39 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।
वहीं, निफ्टी 50 सत्र के दौरान अपने पिछले बंद 24,219.05 से 43.29 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 24,175.75 पर खुला और एक समय इसने 115.5 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,334.55 का इंट्रा-डे हाई छुआ।
फार्मा और पीएसयू बैंकों के शेयरों में तेजी के चलते बेंचमार्क सूचकांकों ने नुकसान की भरपाई करते हुए उच्च स्तर पर कारोबार समाप्त किया।
व्यापक बाजार में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप में 0.54 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी मेटल का प्रदर्शन खराब रहा।
निफ्टी50 इंडेक्स में अदाणी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थकेयर, अपोलो हॉस्पिटल्स, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स, श्रीराम फाइनेंस, इंफोसिस और इटरनल के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जबकि एचडीएफसी लाइफ, सिप्ला और ओएनजीसी सबसे ज्यादा खराब प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान पर अमेरिका के बहुप्रतीक्षित प्रतिबंध बाजार की उम्मीदों से कम रहे, जिससे कच्चे तेल की कीमतें और बॉन्ड यील्ड अपने हालिया उच्चतम स्तर से नीचे आ गए। ऊर्जा लागत में इस राहत ने आज मासिक एक्सपायरी के दिन बाजार को थोड़ी बढ़त के साथ बंद होने में मदद की।
विशेषज्ञों ने आगे कहा कि व्यापक बाजार से बेहतर प्रदर्शन करते हुए, हेल्थकेयर और फाइनेंशियल सेक्टर में बढ़त देखी गई, क्योंकि घरेलू बॉन्ड बाजार में कुछ स्थिरता के संकेतों के बीच निवेशकों ने डिफेंसिव और घरेलू-केंद्रित सेक्टरों का रुख किया।
बाजार के भागीदार अब महंगाई और ब्याज दरों के आउटलुक पर बेहतर स्पष्टता के लिए इस सप्ताह के अंत में आने वाले महंगाई के आंकड़ों और फेड चेयर की टिप्पणियों का इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि, भारतीय इक्विटी के लिए निकट अवधि में सावधानी का रुख बने रहने की उम्मीद है, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच अनसुलझे तनाव के कारण तेल की कीमतें और बॉन्ड यील्ड अपेक्षाकृत ऊंचे बने हुए हैं, जिससे निवेशक मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक परिदृश्य में अचानक होने वाले बदलावों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं।
व्यापार
सोने में सीमित दायरे में कारोबार, चांदी की कीमत घटी

gold
सोने और चांदी में मंगलवार के शुरुआती सत्र में मिलाजुला कारोबार देखने को मिला। इस दौरान सोने में 0.15 प्रतिशत की बढ़त और चांदी में 0.22 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दोपहर 12 बजे सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 247 रुपए या 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,63,476 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,62,564 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,63,617 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ। यह दिखाता है कि सोने में सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है।
सुबह यह पिछली क्लोजिंग 1,63,229 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले मामूली कमजोरी के साथ 1,63,015 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला था।
वहीं, खबर लिखे जाने तक चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 542 रुपए या 0.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,43,678 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,44,420 रुपए प्रति किलो का उच्च स्तर और 2,42,299 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर छुआ।
सुबह यह पिछली क्लोजिंग 2,44,220 रुपए प्रति किलो के मुकाबले कमजोरी के साथ 2,42,299 रुपए प्रति किलो पर खुली थी।
जानकारों के मुताबिक, ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों और ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर दूसरे दर्जे के प्रतिबंध (सेकेंडरी सैंक्शन) के खतरे ने अनिश्चितता का एक नया दौर पैदा कर दिया है। इससे सोने की कीमतों में तेजी को सपोर्ट मिला है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमत फिर से 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई है, जो कि बीते तीन महीने का सबसे उच्चतम स्तर है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी के साथ और चांदी में करीब सपाट कारोबार हो रहा है। कॉमेक्स पर सोना 0.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,708 डॉलर प्रति औंस और चांदी सपाट कारोबार के साथ 68 डॉलर प्रति औंस पर थी।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार सपाट खुला, मेटल और एनर्जी में बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मंगलवार को सपाट हुई। सुबह 9:20 सेंसेक्स 46 अंक या 0.06 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 77,307 और निफ्टी 33 अंक या 0.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,196 पर था।
बाजार में बिकवाली का नेतृत्व मेटल और ऑटो स्टॉक्स कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑटो टॉप लूजर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी इन्फ्रा भी लाल निशान में थे।
दूसरी तरफ केवल निफ्टी मीडिया और निफ्टी पीएसयू बैंक ही हरे निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 34 अंक या 0.05 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ 63,785 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 36 अंक या 0.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,890 पर था।
सेंसेक्स पैक में ट्रेंट, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, इटरनल, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, टाइटन, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, एसबीआई, टाटा स्टील और इंडिगो गेनर्स थे। एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, मारुति सुजुकी, इन्फोसिस, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, एचयूएल, एशियन पेंट्स, टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा और एमएंडएम लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजार लाल निशान में थे। शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे। केवल टोक्यो हरे निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार मिलेजुले बंद हुए थे, जिसमें डाओ 0.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.75 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
जानकारों ने कहा कि ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों और ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर दूसरे दर्जे के प्रतिबंध (सेकेंडरी सैंक्शन) के खतरे ने अनिश्चितता का एक नया दौर पैदा कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा ऊंचे स्तर पर ही बनी रह सकती हैं, जिससे बाजार में तेजी पर रोक लग सकती है और यह एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
यूपीआई लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हुई : केंद्र

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई)पर वार्षिक लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गई है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में इनकी संख्या 1.78 करोड़ थी। यह जानकारी वित्त मंत्रालय की ओर से सोमवार को दी गई।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से 25 अगस्त, 2016 को यूपीआई को लॉन्च किया था। आज के समय में यह देश के डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ बन गया है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यूपीआई लेनदेन की कुल वैल्यू वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 2016-17 में 0.07 लाख करोड़ रुपए थी। यह बीते एक दशक में करीब 4,000 गुना की बढ़ोतरी दिखाता है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई के बड़े पैमाने, भरोसे और इंटरऑपरेबिलिटी को दुनिया भर में पहचान मिली है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने इसे ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है। 2025 तक, दुनिया भर में होने वाले रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत थी।
2026 में यूपीआई की ग्रोथ की रफ्तार और तेज हो गई है। मई में पहली बार यूपीआई लेनदेन की संख्या 2,300 करोड़ के आंकड़े को पार कर 2,320 करोड़ पर पहुंच गई। इसके बाद जुलाई में प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड 2,366 करोड़ लेनदेन हुए, जो इसके दस साल के सफर में सबसे अधिक मासिक लेनदेन का आंकड़ा है।
संस्थागत भागीदारी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। यूपीआई पर लाइव बैंकों की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 44 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 हो गई, जिसमें पब्लिक सेक्टर बैंक, प्राइवेट बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि मर्चेंट पेमेंट में यूपीआई को काफी ज्यादा अपनाया गया है। कुल लेनदेन की संख्या में पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन का हिस्सा 63 प्रतिशत था, जबकि कुल लेनदेन वैल्यू में पर्सन-टू-पर्सन का योगदान 71 प्रतिशत था।
डेटा से यह भी पता चलता है कि रोजमर्रा के छोटे-मोटे भुगतान के लिए यूपीआई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। वित्त वर्ष 26 में लगभग 86 प्रतिशत पी2एम लेनदेन 500 रुपए से कम के थे, जबकि 59 प्रतिशत पी2पी लेनदेन भी 500 रुपए से कम के थे।
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