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Sunday,25-October-2026
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वैश्विक तनावों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सपाट खुला बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव, आईटी शेयरों ने किया सपोर्ट

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पश्चिम एशिया में जारी तनावों के बीच कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। यह लगातार सातवां दिन है जब प्रमुख बेंचमार्कों सेंसेक्स और निफ्टी में बिकवाली का दबाव बना रहा, लेकिन आईटी शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को कुछ समर्थन मिला।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) में उछाल के बीच, बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,235.46 से 17.41 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 77,218.05 पर सपाट खुला। हालांकि, बाद में गिरावट और बढ़ गई, और एक समय इसने 0.31 प्रतिशत यानी 244 अंक गिरकर 76,991.28 का इंट्रा-डे लो छुआ, जबकि 77,347.81 का स्तर दिन का हाई रहा।

वहीं, एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,154.90 से 0.01 प्रतिशत यानी 2.85 अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,152.05 पर सपाट खुला। हालांकि बाद के सत्र में गिरावट और बढ़ गई, और एक समय इसने 0.37 प्रतिशत या करीब 90 अंक फिसलकर 24,065.10 का दिन का लो और 24,172.85 का दिन का हाई छुआ।

खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 222.87 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,012.59 पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 74.00 (0.31 प्रतिशत) अंक गिरकर 24,080.90 पर ट्रेड करता नजर आया।

व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.39 प्रतिशत और 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

क्षेत्रवार प्रदर्शन में आईटी शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी सूचकांक 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष पर रहा। इसके अलावा, निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 0.59 प्रतिशत की तेजी और निफ्टी एफएमसीजी में 0.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। रियल्टी और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट्स) से जुड़े सूचकांकों में भी लगभग 0.2 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली, जबकि वहीं, ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली।

दूसरी ओर, मेटल और ऑटो शेयरों में दबाव बना रहा। निफ्टी मेटल 0.35 प्रतिशत टूट गया, जबकि निफ्टी ऑटो में 0.14 प्रतिशत की गिरावट रही। हेल्थकेयर, फार्मा और केमिकल्स से जुड़े सूचकांकों में भी हल्की कमजोरी दर्ज की गई।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा कमजोरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल कीमतों में तेजी बनी हुई है। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव पड़ा है।

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड वर्ष 2007 के बाद के उच्चतम स्तरों पर पहुंच गई है, जिससे वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत मजबूती दिखा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि की बेहतर संभावनाएं, वित्त वर्ष 2026-27 में कॉरपोरेट आय में सुधार की उम्मीद और घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी बाजार को सहारा दे रही है।

उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट गुणवत्तापूर्ण वृद्धि वाले शेयरों में निवेश बढ़ाने का अवसर हो सकती है। विशेष रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अभी भी अपेक्षाकृत बेहतर गति बनी हुई है।

इस बीच एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। सेमीकंडक्टर शेयरों में दबाव और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले तीन सप्ताह का उच्चतम स्तर है।

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने के संकेत और अमेरिका द्वारा युद्धविराम अवधि बढ़ाने से इनकार किए जाने के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति में स्पष्ट सुधार नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक बाजार को बड़े नुकसान से बचाए रख सकते हैं।

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मार्केट आउटलुक: फेड बैठक, तिमाही नतीजों और कच्चे तेल से तय होगी शेयर बाजार की चाल

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भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दौरान फेड बैठक, तिमाही नतीजों, कच्चे तेल की कीमते औरअमेरिका-ईरान तनाव बाजार की चाल निर्धारित करेंगे।

ब्याज दरों की समीक्षा के लिए अमेरिकी फेड की बैठक 27-28 अक्टूबर होगी। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक स्तर पर अस्थिरता से कारण महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। इस बैठक के फैसलों का ऐलान 28 अक्टूबर को किया जाएगा, जिस पर दुनियाभर के निवेशकों की निगाहें टिकी हुई हैं।

इसके अलावा, अमेरिका-ईरान तनाव भी बाजार के लिए काफी अहम होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान पर नई एयर स्ट्राक्स को लेकर बयान दे चुके हैं। इससे कच्चे तेल भी ऊपरी स्तरों पर बना हुआ हैं। अगले हफ्ते बाजार में यह फैक्टर्स अहम भूमिका निभाएंगे।

इसके अलावा, 26-30 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में कई बड़ी कंपनियां नतीजे जारी करेंगी। इंडियन ओवरसीज बैंक, महाराष्ट्र बैंक, मैनकाइंड, पेटीएम, एनडीटीवी, टाटा कंज्यूमर, एसीसी, बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, जेएसडब्ल्यू सीमेंट, जेएसडब्ल्यू इन्फ्रा, एलएंडटी, सेल, टाटा कैपिटल, अदाणी एटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स जैसी कंपनियां शामिल हैं।

भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता हफ्ता काफी नुकसान वाला रहा। इस दौरान व्यापक बाजार में गिरावट देखने को मिली।

19-23 अक्टूबर के कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 1,605.44 अंक या 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,123.83 और निफ्टी 546.15 अंक या 2.36 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,600.00 पर था।

लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में अधिक बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 3,329.10 अंक या 5.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,800.65 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1,390.35 अंक या 7.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,739.45 पर था।

सूचकांकों में सबसे ज्यादा गिरावट डिफेंस में देखी गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस 7.05 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप लूजर था। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 6.42 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 5.40 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 5.15 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 5.04 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 4.62 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 4.34 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई 3.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

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एलन मस्क ने एक्स मनी पर नए फीचर का किया ऐलान, लाइक बटन से यूजर भेज पाएंगे डॉलर

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एलन मस्क ने रविवार को एक्स मनी के प्रस्तावित फीचर का ऐलान किया। इसमें कोई भी यूजर, किसी अन्य यूजर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केवल लाइक बटन को लॉन्ग प्रेस करके आसानी से एक डॉलर भेज पाएगा।

सोशल मीडिया पर इस फीचर का ऐलान करते हुए मस्क ने कहा कि इससे कोई भी यूजर आसानी से एक्स प्लेटफॉर्म पर छोटी राशि किसी अन्य यूजर को भेज सकता है।

इस फीचर से यूजर्स के लिए कंटेंट क्रिएटर्स को टिप देना और अपनी पसंद की पोस्ट को सपोर्ट करना आसान हो जाएगा और इसके लिए उन्हें ऐप से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

यह प्रस्तावित पेमेंट सिस्टम, मस्क की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वे एक्स को एक “एवरीथिंग ऐप” (सब कुछ करने वाला ऐप) में बदलना चाहते हैं। इस ऐप में सोशल नेटवर्किंग, मैसेजिंग, पेमेंट और अन्य डिजिटल सेवाओं को एक ही इकोसिस्टम में शामिल किया जाएगा।

मस्क ने एक्स पर लिखा, “हम ‘लाइक’ बटन को लॉन्ग प्रेस करके, किसी को एक्स मनी के जरिए 1 डॉलर भेजने की सुविधा जोड़ रहे हैं।”

इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत, यूजर्स किसी पोस्ट के लेखक को 1 डॉलर का भुगतान कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें बस सामान्य ‘लाइक’ बटन को दबाकर रखना होगा, और यह ट्रांजैक्शन एक्स मनी के जरिए पूरा होगा।

हालांकि इस कॉन्सेप्ट ने यूजर्स और क्रिएटर्स के बीच काफी दिलचस्पी जगाई है, लेकिन कंपनी ने अभी तक इसे लागू करने की विस्तृत समय-सीमा या इसके लिए जरूरी शर्तों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

एक्स मनी को हाल ही में अमेरिका में लॉन्च किया गया है। यह पीयर-टू-पीयर (एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को) पैसे भेजने की सुविधा देता है, साथ ही इसमें एक एक्स वीजा डेबिट कार्ड भी मिलता है, जिसका इस्तेमाल फिजिकल और डिजिटल दोनों तरह के ट्रांजैक्शन के लिए किया जा सकता है। इस डेबिट कार्ड को एप्पल पे से भी जोड़ा जा सकता है, जिससे उन जगहों पर कॉन्टैक्टलेस पेमेंट किया जा सकता है जहां यह सुविधा उपलब्ध है।

प्लेटफॉर्म ने ऐसे फीचर्स को भी बढ़ावा दिया है जो अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन को आसान बनाते हैं। हालांकि, इसके सटीक फायदे और शर्तें यूजर की पात्रता और लागू नियमों के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।

फिलहाल, एक्स मनी का पूरा ध्यान अमेरिकी बाजार पर है। कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया है कि यह सर्विस या ‘लाइक’ बटन के जरिए भुगतान करने का नया फीचर भारत सहित अन्य देशों में कब उपलब्ध होगा, जबकि भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में से एक है।

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एलआरएस के तहत अगस्त में विदेशी बाजारों में भारतीयों का निवेश हुआ दोगुना, 321 मिलियन डॉलर के पार पहुंचा: आरबीआई डेटा

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विदेशी शेयर और बॉन्ड बाजारों में निवेश को लेकर भारतीयों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अक्टूबर 2026 बुलेटिन के अनुसार, उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत अगस्त 2026 में भारतीयों द्वारा विदेशी इक्विटी और डेट बाजारों में किया गया निवेश सालाना आधार पर 111 प्रतिशत बढ़कर 321.53 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो एक वर्ष पहले अगस्त 2025 में 152.18 मिलियन डॉलर था।

हालांकि मासिक आधार पर इस श्रेणी में निवेश में 7 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले जून 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश 460 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एलआरएस के तहत कुल बाहरी प्रेषण 28.98 अरब डॉलर रहा। अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट निवेश कुल एलआरएस प्रेषण का लगभग 11.7 प्रतिशत हिस्सा रहा, जबकि एक वर्ष पहले इसकी हिस्सेदारी केवल 5.8 प्रतिशत थी। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारतीय निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।

कुल एलआरएस प्रेषण अगस्त 2026 में बढ़कर 2.74 अरब डॉलर हो गया, जो अगस्त 2025 में 2.64 अरब डॉलर था। यह सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत और जुलाई 2026 की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत अधिक है। जुलाई 2026 में कुल बाहरी प्रेषण 2.58 अरब डॉलर दर्ज किया गया था।

यात्रा अब भी एलआरएस के तहत सबसे बड़ा खर्च का क्षेत्र बना हुआ है। अगस्त 2026 में विदेश यात्रा पर भारतीयों का खर्च 1.63 अरब डॉलर रहा, जो कुल बाहरी प्रेषण का करीब 59 प्रतिशत था। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1 प्रतिशत अधिक और जुलाई की तुलना में 11.4 प्रतिशत ज्यादा रहा।

विशेष रूप से कारोबारी यात्रा पर होने वाला खर्च जुलाई के 10.9 मिलियन डॉलर से बढ़कर अगस्त में 51 मिलियन डॉलर पहुंच गया, यानी इसमें लगभग पांच गुना उछाल दर्ज किया गया।

अन्य प्रमुख श्रेणियों में उपहार के रूप में भेजी गई राशि बढ़कर 215.72 मिलियन डॉलर हो गई, जबकि निकट संबंधियों के भरण-पोषण के लिए भेजी गई राशि 275.43 मिलियन डॉलर रही। विदेशों में अचल संपत्ति की खरीद के लिए 39.59 मिलियन डॉलर भेजे गए, जबकि विदेशी बैंकों में जमा (डिपॉजिट) के लिए 50.78 मिलियन डॉलर का प्रेषण दर्ज किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, चिकित्सा उपचार के लिए विदेश भेजी गई राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। अगस्त 2026 में मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए प्रेषण 21.3 प्रतिशत बढ़कर 4.84 मिलियन डॉलर पहुंच गया।

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