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Sunday,13-September-2026
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मध्य पूर्व में शांति से सोने और चांदी में लौटी रौनक, करीब एक प्रतिशत तक भागे

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सोने और चांदी सोमवार को तेजी के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में दोनों की कीमती धातुओं के दाम एक प्रतिशत तक चढ़ गए थे।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,43,106 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,43,575 रुपए प्रति 10 ग्राम खुला।

सुबह 9:45 पर सोना 907 रुपए या 0.63 प्रतिशत की मजबूती के साथ 1,44,013 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,43,575 रुपए प्रति 10 ग्राम न्यूनतम स्तर और 1,44,111 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ है।

सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखी जा रही है। चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,22,138 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,23,500 रुपए प्रति किलो पर खुला। फिलहाल यह 2,066 रुपए या 0.93 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,24,204 रुपए प्रति किलो पर थी।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,23,500 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,24,632 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। सोना 0.47 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,090 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.95 प्रतिशत की मजबूती के साथ 59 डॉलर प्रति औंस पर थी।

जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी में तेजी की वजह डॉलर इंडेक्स का कमजोर होना है, जो कि अमेरिका-ईरान में तनाव कम होने के बाद गिरावट देखने को मिली है। फिलहाल यह 0.25 प्रतिशत घटकर 101.03 पर आ गया था।

डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी मुद्रा डॉलर की दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं- यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक- के मुकाबले स्थिति को दिखाता है।

इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.23 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 87.80 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 85.20 डॉलर प्रति बैरल पर था।

व्यापार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ईरानी समकक्ष से की मुलाकात, भारत-ईरान आर्थिक सहयोग को नई गति देने पर हुई चर्चा

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को ईरान के वित्त मंत्री डॉ. सैयद अली मदनिजादेह के साथ बैठक कर दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। यह मुलाकात राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान हुई, जहां दोनों पक्षों ने साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, निर्मला सीतारमण ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ईरान की सक्रिय भागीदारी और वित्तीय ट्रैक के तहत हुई चर्चाओं में उसके रचनात्मक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स जैसे मंच विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

बैठक में भारत और ईरान के बीच व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने के उपायों पर विचार हुआ। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने और सहयोग के अवसरों की पहचान करने पर जोर दिया।

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत विभिन्न ब्रिक्स और साझेदार देशों के साथ आर्थिक एवं निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए सक्रिय पहल कर रहा है। बीते शनिवार को वित्त मंत्री सीतारमण ने एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की अध्यक्ष जू जियायी से भी मुलाकात की थी। उस बैठक में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन संपर्क परियोजनाओं को समर्थन देने, स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण बढ़ाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और एआईआईबी की वैश्विक भूमिका को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई थी।

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने हाल ही में रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ भी बैठक की थी। दोनों पक्षों ने भारत-रूस आर्थिक सहयोग को और सशक्त बनाने, वित्तीय सेवाओं में साझेदारी बढ़ाने तथा द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी। प्रस्तावित बीआईटी का उद्देश्य दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह को बढ़ाना और आर्थिक जुड़ाव के लिए एक स्थिर एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी ढांचा तैयार करना है।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026 को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। समापन संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घोषणा पत्र ब्रिक्स देशों के साझा संकल्पों को स्पष्ट दिशा देता है और अब सदस्य देशों की जिम्मेदारी है कि वे इन संकल्पों को ठोस परिणामों में बदलें।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स नेताओं के बीच हुई चर्चाओं को सार्थक और रचनात्मक बताते हुए कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था को पुरानी संस्थागत संरचनाओं के माध्यम से प्रभावी ढंग से नहीं संभाला जा सकता। उन्होंने अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक वैश्विक शासन व्यवस्था की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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राष्ट्रीय समाचार

टेस्ला लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को अगली पीढ़ी की रोडस्टर को करेगी लॉन्च

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इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने घोषणा की कि कंपनी लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को रोडस्टर लॉन्च करेगी। टेस्ला रोडस्टर की पहली जनरेशन को करीब एक दशक पहले बाजार में उतारा गया था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टेस्ला ने एक पोस्ट में कहा, “गो फॉर लॉन्च”, साथ ही इसमें एक पोस्टर भी था, जिसमें इसकी तारीख एक अक्टूबर दी गई थी।

इस पोस्ट के रिप्लाई में मस्क ने कहा, “नई टेस्ला रोडस्टर 10.01 को लॉन्च की जाएगी।”

इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में अगस्त में दावा किया गया था कि टेस्ला नए डिजाइन वाली रोडस्टर को जल्द ही लॉन्च करने की योजना बना रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस इवेंट में स्पेसएक्स के साथ मिलकर बनाए गए कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स वाले लिमिटेड-एडिशन वर्जन का डेमो दिखाया जा सकता है।

टेस्ला ने सबसे पहले 2017 में अगली पीढ़ी की रोडस्टर लाने का ऐलान किया था और कहा था कि इसकी डिलीवरी 2020 में शुरू हो जाएगी, लेकिन इस प्रोग्राम में बार-बार देरी हुई है।

यह कदम टेस्ला द्वारा पिछले हफ्ते ऑस्टिन, टेक्सास के कुछ इलाकों में अपनी दो-सीटर साइबरकैब में राइड्स की सुविधा शुरू करने के बाद उठाया गया है। इस साइबरकैब में न तो स्टीयरिंग व्हील है और न ही पैडल। मस्क ने इस गाड़ी को टेस्ला को ड्राइवरलेस गाड़ियों के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बनाने के लिए अहम बताया है।

खबरों के मुताबिक, नई रोडस्टर अब एक आम हाई-परफॉर्मेंस ईवी से बदलकर पूरी तरह से नई कार्बन-फाइबर हाइपरकार बन गई है।

नई रोडस्टर के लॉन्च से पहले टेस्ला के शेयर में तेजी देखी गई। बीते एक महीने में टेस्ला ने 7 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है। हालांकि, सालाना आधार पर इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।

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व्यापार

मध्य पूर्व में तनाव असर! एफपीआई ने सितंबर में अब तक 14,474 करोड़ रुपए की बिकवाली की

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की ओर से इस महीने अब तक (1-12 सितंबर तक) 14,474 करोड़ रुपए इक्विटी मार्केट से निकाले गए हैं। इससे पहले जुलाई और अगस्त में सकारात्मक इनफ्लो दर्ज किया गया था।

वहीं, प्राइमरी मार्केट (आईपीओ) में एफपीआई निवेश अब तक सकारात्मक 1,336 करोड़ रुपए पर बना हुआ है, जिससे इस साल प्राइमरी मार्केट में कुल एफपीआई निवेश बढ़कर 47,183 करोड़ रुपए हो गया है।

इस बीच, पूरे हफ्ते भारतीय इक्विटी बाजार पर काफी दबाव बना रहा और निफ्टी 50 में लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट दर्ज की गई।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और महंगाई, ग्लोबल ब्याज दरों और आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस कारण बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई और हफ्ते के दौरान प्रमुख सेक्टर गिरावट के साथ बंद हुए।

मार्केट के जानकारों का कहना है कि घरेलू इक्विटी के लिए कच्चे तेल की कीमतें एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशकों के सतर्क बने रहे और उनकी लगातार बिकवाली घरेलू इक्विटी के लिए एक बड़ी बाधा बन रही है।

इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पिछले हफ्ते 6,419.46 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की, जिससे विदेशी बिकवाली के असर को कम करने और घरेलू इक्विटी मार्केट में और गिरावट को रोकने में मदद मिली।

आगे चलकर, एफपीआई का निवेश ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर से काफी हद तक प्रभावित होगा।

जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और बढ़ती महंगाई का मतलब है कि मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होगी, जिससे बॉन्ड यील्ड और बढ़ेगी।

आने वाले हफ्ते में ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक और जियो-पॉलिटिकल जोखिमों के कारण भारतीय इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। कच्चे तेल की कीमतें, मध्य पूर्व में घटनाक्रम और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलती उम्मीदें मार्केट के मूड को तय करने वाले मुख्य कारक होंगे।

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