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Friday,10-July-2026
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मध्यपूर्व तनाव के बीच सोने और चांदी का दाम करीब आधा प्रतिशत फिसला

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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सोने और चांदी की शुरुआत शुक्रवार को लाल निशान में हुई और इससे दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब आधा प्रतिशत कम हो गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,45,300 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 410 रुपए प्रति 10 ग्राम या 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,44,890 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें और गिरावट देखी गई। यह सुबह 10 बजे 696 रुपए प्रति 10 ग्राम या 0.48 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,44,603 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

सोने के साथ चांदी में भी गिरावट देखने को मिली, हालांकि, यह काफी सीमित थी।

चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,26,377 रुपए प्रति किलो के मुकाबले करीब सपाट 2,26,368 रुपए प्रति किलो पर खुला।

खबर लिखे जाने तक यह 244 रुपए प्रति किलो या 0.11 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,26,133 रुपए प्रति किलो पर था।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। कॉमेक्स पर सोना 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,128 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.18 प्रतिशत की तेजी के साथ 60.86 डॉलर प्रति औंस पर था।

विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है और अमेरिका की ओर से हवाई हमले करने के बाद ईरान ने भी करार जवाब दिया है और मध्य पूर्व में अमेरिका के कई ठिकानों को निशाना बनाया है।

रिपोर्ट्स में बताया गया कि गुरुवार को ईरान के दक्षिणी तटीय और पूर्वी प्रांतों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में, ईरानी सेना ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।

बाद में ईरानी मीडिया ने दक्षिणी ईरान में कई धमाकों की खबर दी, जिनमें बुशहर (जहां देश का एक परमाणु संयंत्र है), कोनारक, चोघादक और बंदर अब्बास शामिल हैं।

राष्ट्रीय समाचार

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, घबराने की जरूरत नहीं: डब्ल्यूटीसी चेयरमैन विजय कलंत्री

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वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (डब्ल्यूटीसी) के चेयरमैन विजय कलंत्री ने गुरुवार को कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था इस चुनौती का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

न्यूज एजेंसी से बातचीत में विजय कलंत्री ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं और भारतीय रुपए पर भी दबाव बना है।

उन्होंने कहा कि इस अनिश्चित माहौल का असर निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा है, जिसके कारण शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिली है।

विजय कलंत्री ने कहा, “कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव आ सकता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।”

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा, “भारत पहले भी ऐसे दौर का सफलतापूर्वक सामना कर चुका है, जब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई थीं। हमारी अर्थव्यवस्था ने पहले भी कई वैश्विक संकटों के दौरान मजबूती दिखाई है और मौजूदा परिस्थितियों से निपटने में भी सक्षम है।”

कलंत्री ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति अभी लगातार बदल रही है और आगे क्या होगा, यह अमेरिका, ईरान और अन्य वैश्विक पक्षों के अगले कदमों पर निर्भर करेगा। ऐसे में भारत को घबराने के बजाय अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम पर करीबी नजर रखने की जरूरत है। लेकिन भारत पहले भी ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुका है और मुझे विश्वास है कि देश मौजूदा अनिश्चितताओं से भी मजबूती के साथ निपटेगा।”

डब्ल्यूटीसी के चेयरमैन ने दोहराया, “घबराने की जरूरत नहीं है। फिलहाल वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता जरूर है, लेकिन भारत पहले भी ऊंची तेल कीमतों के दौर से सफलतापूर्वक निकल चुका है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।”

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राष्ट्रीय समाचार

भारी गिरावट से उबरा बाजार, सेंसेक्स 238 अंक चढ़कर बंद; निफ्टी 24,000 के करीब

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पिछले दिन की भारी गिरावट से उबरते हुए भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में 0.30 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली।

बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 238.22 अंक यानी 0.31 प्रतिशत बढ़कर 76,741.82 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 80.75 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 23,962.80 पर पहुंच गया।

दिन के सत्र में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,503.60 से 72.53 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 76,576.14 पर खुला और दिन के कारोबार में यह 823.04 अंकों यानी 1.07 प्रतिशत की उछाल के साथ 77,326.65 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,882.05 से 0.19 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 23,928.95 पर खुला और दिन के कारोबार में यह 252.65 अंकों यानी 1.05 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,134.70 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान, लगभग 2,793 शेयरों में तेजी, 1,263 शेयरों में गिरावट और 167 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.38 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन काफी हद तक सकारात्मक रहा, अधिकांश सूचकांकों में खरीदारी देखी गई। निफ्टी रियल्टी शीर्ष लाभ कमाने वाला सूचकांक बनकर उभरा, जिसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, इसके बाद निफ्टी मीडिया (2 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (1.6 प्रतिशत) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.6 प्रतिशत) का स्थान रहा।

दूसरी ओर, निफ्टी आईटी में 0.47 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी ऑटो में 0.25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी 50 में, सन फार्मा 2.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाली कंपनी के रूप में उभरी, उसके बाद भारती एयरटेल (2.4 प्रतिशत), बजाज फिनसर्व (2.3 प्रतिशत), इंडिगो (2 प्रतिशत), इटरनल (2 प्रतिशत) और ग्रासिम तथा कोटक महिंद्रा बैंक (1.9 प्रतिशत) के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई।

दूसरी ओर, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज 5.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनी रही। इसके साथ ही मारुति सुजुकी (-1.7 प्रतिशत), ओएनजीसी (-1.4 प्रतिशत), इंफोसिस (-1.3 प्रतिशत), एनटीपीसी (-1.2 प्रतिशत) और हिंडाल्को (-1 प्रतिशत) के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।

इस दौरान, निवेशकों ने एक ही सत्र में 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की, क्योंकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के 471.2 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 476.4 लाख करोड़ रुपए हो गया।

इस बीच, भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 17 पैसे बढ़कर 95.38 पर बंद हुआ, जबकि पिछले दिन यह 95.55 पर बंद हुआ था।

एक बाजार विशेषज्ञ ने बताया कि गुरुवार के सत्र में बाजार में आई इस रिकवरी को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ताजा रिपोर्ट से भी समर्थन मिला। आईएमएफ ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। हालांकि आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान मामूली रूप से 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की मजबूती और वित्त वर्ष 2028 के लिए विकास दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किए जाने से भारत की मध्यम अवधि की आर्थिक संभावनाओं पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

आईएमएफ ने यह भी कहा कि हाल के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं और विभिन्न हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतक भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी गति अभी भी मजबूत बनी हुई है।

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व्यापार

मध्यपूर्व संकट से कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत : आईएमएफ

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इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे टकराव की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक संस्था ने भारत की 2026 की ग्रोथ का अनुमान थोड़ा घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि अगले साल ऊर्जा से जुड़ी दिक्कतों के कम होने पर देश की ग्रोथ और तेज होगी।

आईएमएफ ने अपने ताजा ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट में 2026 के लिए भारत की ग्रोथ का अनुमान अप्रैल के अनुमान से 0.1 प्रतिशत अंक घटा दिया, लेकिन 2027 के लिए अनुमान 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ा दिया।

आईएमएफ का कहना है कि उम्मीद से बेहतर आर्थिक गतिविधि और मजबूत घरेलू मांग देश के आउटलुक को सहारा दे रही है।

आईएमएफ अधिकारियों ने अपनी ताजा ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि भारत ने कई दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले ग्लोबल अनिश्चितता का बेहतर ढंग से सामना किया है, हालांकि मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव की वजह से ऊर्जा की बढ़ती कीमतें इस साल विकास दर पर असर डालेंगी।

आईएमएफ रिसर्च विभाग की प्रमुख डेनिज इगन ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों को बताया, “भारत के लिए, हमने इस साल के अनुमान को बहुत मामूली रूप से 0.1 प्रतिशत अंक घटाकर 6.4 कर दिया है। और अगले साल, यानी 2027 के लिए विकास दर के अनुमान को 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ा दिया है।”

इगन ने कहा, “अच्छी बात यह है कि हाल के डेटा में नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। साथ ही, अप्रैल तक के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर भी दिखाते हैं कि कुल मिलाकर आर्थिक गतिविधियों में काफी मजबूती बनी हुई है।”

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस साल ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने इस सकारात्मक गति के असर को खत्म कर दिया है। हालांकि,आईएफएफ को उम्मीद है कि अगले साल ये दबाव कम हो जाएंगे।

इगन ने कहा, “2027 की ओर बढ़ते हुए, हमें उम्मीद है कि भारत की ग्रोथ और मजबूत होगी क्योंकि एनर्जी शॉक का असर कम हो जाएगा और मीडियम-टर्म ग्रोथ लगभग 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।”

भारत के लिए यह नया अनुमान तब आया है जब आईएमएफ ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 3 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.4 प्रतिशत पर लगभग वैसा ही बनाए रखा है।

आईएमएफ का कहना है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था ने अब तक मिडिल ईस्ट के संघर्ष का सामना शुरुआती आशंकाओं से बेहतर तरीके से किया है।

इसके अतिरिक्त, आईएमएफ ने 2026 के लिए ग्लोबल हेडलाइन महंगाई का अनुमान भी बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है। उसका कहना है कि 2024 की शुरुआत से चल रहा महंगाई कम होने का ट्रेंड रुक गया है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तेजी से हो रहा इन्वेस्टमेंट एनर्जी की ऊंची कीमतों से हुए कुछ आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में मदद कर रहा है, जिससे ग्लोबल टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन से जुड़े देशों को फायदा हो रहा है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है, इसलिए ग्लोबल एनर्जी की कीमतें महंगाई, चालू खाते और कुल आर्थिक ग्रोथ पर असर डालने वाला एक अहम फैक्टर हैं। होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई में लंबे समय तक कोई रुकावट आने पर भारत के लिए आयात की लागत बढ़ सकती है और घरेलू ईंधन की कीमतों पर फिर से दबाव पड़ सकता है।

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