अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरानी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान, ओमान और तुर्किए के अधिकारियों से फोन पर की बात, क्षेत्रीय घटनाक्रम पर हुई चर्चा
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ईरान पर अमेरिका के नए हमलों के बाद अपने ओमानी और तुर्किए समकक्षों के साथ बातचीत की। ईरानी विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, अराघची ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ के साथ भी फोन पर बात की। तीनों नेताओं के साथ अलग-अलग फोन कॉल में इलाके के नए विकास पर चर्चा की।
मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि ओमानी विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी और तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान के साथ फोन पर बातचीत में अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट में हाल के घटनाक्रम और आम चिंता के दूसरे मुद्दों पर चर्चा की।
बयान में कहा गया कि उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने और आगे तनाव बढ़ने से रोकने के लिए डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाने और संपर्क और तालमेल बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
ईरानी विदेश मंत्रालय की ओर से साझा बयान के अनुसार, पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ असीम मुनीर के साथ फोन पर हुई बातचीत में, अराघची ने ईरान पर हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की और इसे यूएन चार्टर और हाल ही में हस्ताक्षर किए गए ईरान-अमेरिका शांति समझौते (एमओयू) का खुला उल्लंघन बताया।
अराघची ने अमेरिकी सेना के किसी भी कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी और ईरान के अपनी क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने के पक्के इरादे को दोहराया।
अमेरिका ने कहा कि उसकी सेना ने बुधवार और गुरुवार को ईरान के अंदर कई ठिकानों पर हमले किए। यह हमले होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर ईरान के नए हमलों के जवाब में किए गए।
अमेरिका ने कहा कि इस ऑपरेशन का मकसद इस अहम जलमार्ग में कमर्शियल जहाजों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कम करना था।
ईरानी अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के रात भर के हमलों में 14 लोग मारे गए और 78 अन्य घायल हो गए और एक पुल और एक रेलवे को नुकसान पहुंचा।
जवाबी कार्रवाई में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स और सेना ने कहा कि उन्होंने कुवैत, बहरीन, कतर और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस और जगहों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
ताजा तनाव इस पृष्ठभूमि के बीच आया है, जब ईरान और अमेरिका ज्ञापन समझौते के तहत 60 दिन की बातचीत कर रहे हैं, जिसका मकसद अंतिम समझौते पर पहुंचना है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जापान में 1,800 लोगों ने रस्सियों से खींचकर 360 टन का किला फिर अपनी जगह पहुंचाया

जापान में 400 साल पुराने ऐतिहासिक हिरोसाकी कैसल (किले) को उसकी पुरानी जगह पर वापस पहुंचाने के लिए करीब 1,800 लोगों ने रस्सियों के सहारे 360 टन वजनी किले के मुख्य टावर को खींचा। यह अनोखी कवायद देश के आओमोरी प्रांत में सप्ताहांत के दौरान हुई और इसमें पारंपरिक जापानी तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
प्रतिभागियों ने 30 मीटर लंबी रस्सियों को खींचते हुए किले के टावर को रेल जैसी पटरी पर आगे बढ़ाया। शनिवार को टावर को 1.13 मीटर और रविवार को 1.09 मीटर, यानी कुल 2.22 मीटर आगे खिसकाया गया। लोगों की टीमें बारी-बारी से रस्सियां खींचती रहीं और पूरे अभियान के दौरान उत्साह बढ़ाने के लिए जापानी नारे लगाए गए।
जापानी न्यूज एजेंसी क्योडो के अनुसार, इस अभियान के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। आयोजकों को 1,800 स्थानों के लिए करीब 8,000 आवेदन मिले, यानी उपलब्ध अवसरों से लगभग चार गुना ज्यादा। प्रतिभागी सिर्फ हिरोसाकी शहर से ही नहीं, बल्कि जापान के दूसरे हिस्सों और विदेशों से भी पहुंचे।
किले को खींचने के लिए ‘हिकिया’ नाम की पारंपरिक तकनीक अपनाई गई। इसमें किसी ऐतिहासिक इमारत को तोड़ने के बजाय उसे रोलर्स और रेल की मदद से धीरे-धीरे दूसरी जगह ले जाया जाता है। हिरोसाकी कैसल के अधिकारियों के मुताबिक, यह तकनीक प्राचीन जापान में इस्तेमाल होती रही है और करीब एक सदी बाद पहली बार किसी किले को इस तरह स्थानांतरित करने में इसका इस्तेमाल किया गया।
हिरोसाकी कैसल की पत्थर की दीवार को भूकंप से नुकसान पहुंचा था। इसकी मरम्मत के लिए 2015 में करीब 360 टन वजनी मुख्य टावर को उसकी मूल जगह से हटाकर लगभग 80 मीटर दूर ले जाया गया था। दीवार की मरम्मत दिसंबर 2024 में पूरी हुई और उसके 2,185 पत्थरों को उनकी मूल स्थिति में दोबारा लगाया गया।
अब टावर को वापस लाने का काम चल रहा है। अगस्त के अंत तक करीब 4,100 लोगों की मदद से इसे हाथों से कुल पांच मीटर तक खींचने की योजना है। इसके बाद बाकी करीब 73 मीटर की दूरी मशीनों की मदद से तय की जाएगी और पूरे साल के अंत तक टावर को उसकी मूल जगह पर वापस पहुंचाने का लक्ष्य है।
हिरोसाकी कैसल का निर्माण 1611 में हुआ था। मौजूदा मुख्य टावर 1810 में बनाया गया था। यह जापान में बचे केवल 12 ऐतिहासिक किला-टावरों में शामिल है और उत्तर-पूर्वी तोहोकू क्षेत्र में ऐसा एकमात्र टावर है।
मरम्मत पूरी होने के बाद भी पर्यटकों को इसे देखने के लिए इंतजार करना होगा। संरक्षण कार्य के कारण किले के मुख्य टावर को 2033 तक पर्यटकों के लिए फिर से खोलने की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
कनाडा और अमेरिका दौरे पर जाएंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आर्थिक और वित्तीय साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा फोकस

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगी, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के साथ भारत की आर्थिक और वित्तीय साझेदारी को मजबूत करना, निवेश संबंधों को गहरा करना और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर सहयोग को आगे बढ़ाना है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के पहले चरण में सीतारमण कनाडा के टोरंटो पहुंचेंगी, जहां वह कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के साथ आयोजित होने वाले पहले आर्थिक एवं वित्तीय संवाद में भाग लेंगी। यह मंच दोनों देशों को व्यापक आर्थिक परिस्थितियों, वित्तीय क्षेत्र सहयोग, द्विपक्षीय निवेश अवसरों और साझा वैश्विक प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। इसके साथ ही भारत-कनाडा संबंधों के आर्थिक और वित्तीय स्तंभ को और मजबूत करने पर भी चर्चा होगी।
टोरंटो में वित्त मंत्री एक विशेष निवेश गोलमेज बैठक में भी शामिल होंगी, जिसमें ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, उद्योग प्रमुखों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। इस बैठक का उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच कारोबारी संपर्क बढ़ाना, नए निवेश अवसरों की पहचान करना और दीर्घकालिक व्यावसायिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करना है। इस दौरान गिफ्ट सिटी-आईएफएससी में उपलब्ध अवसरों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सीतारमण कनाडा स्थित विभिन्न कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इन चर्चाओं में भारत की विकास संभावनाओं, निवेश वातावरण और भारतीय बाजार में कनाडाई कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के अवसरों पर विशेष ध्यान रहेगा।
कनाडा के बाद वित्त मंत्री अमेरिका जाएंगी, जहां उनका कार्यक्रम शिकागो, एशविल (नॉर्थ कैरोलिना) और न्यूयॉर्क में आयोजित होगा। शिकागो में वह प्रमुख निवेशकों के साथ एक गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगी और निजी क्षेत्र के अग्रणी उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगी। इन चर्चाओं का केंद्र भारत में निवेश अवसर, आर्थिक परिदृश्य तथा भारत-अमेरिका व्यापार एवं निवेश संबंधों को मजबूत करना होगा।
इस दौरान वह यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के पोल्स्की सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन का भी दौरा करेंगी, जहां नवाचार, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी आधारित विकास के क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर चर्चा हो सकती है।
यात्रा के अगले चरण में एशविल में वित्त मंत्री जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी। अमेरिका की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वैश्विक आर्थिक विकास, वित्तीय स्थिरता, निवेश और अन्य प्रमुख आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होगी।
न्यूयॉर्क में सीतारमण अग्रणी कंपनियों के मुख्य अधिकारियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ निवेशक गोलमेज बैठक में हिस्सा लेंगी। इसके अलावा, उन्हें नैस्डैक द्वारा विशेष बेल-रिंगिंग समारोह में भी आमंत्रित किया गया है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा वित्तीय बाजारों में तेजी से बढ़ती तकनीकी भूमिका, प्रौद्योगिकी और पूंजी बाजारों के बदलते संबंधों तथा वैश्विक निवेश रुझानों को समझने का भी अवसर प्रदान करेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान का दावा: दक्षिणी फार्स प्रांत में मिला 212 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा प्राकृतिक गैस भंडार

ईरान ने घोषणा की है कि उसके दक्षिणी फार्स प्रांत में 212 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा प्राकृतिक गैस का भंडार मिला है।
ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने रविवार को सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि इस भंडार से 160 अरब क्यूबिक मीटर से अधिक गैस निकाली जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस गैस क्षेत्र का विकास जल्द से जल्द शुरू करने के लिए अधिकारी तेजी से जरूरी कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने इस गैस को ‘स्वीट’ प्राकृतिक गैस बताया। इसका मतलब है कि इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा बहुत कम है, जिससे गैस के उत्पादन और विकास की लागत कम हो सकती है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब ईरान का ऊर्जा क्षेत्र कई महीनों से उसके बुनियादी ढांचे पर हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के असर का सामना कर रहा है।
पाकनेजाद ने कहा कि यह खोज ‘देश के ऊर्जा भविष्य के लिए एक बेहद मजबूत आधार साबित होगी।’
इस बीच, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है, तो एक भी बूंद तेल का निर्यात नहीं होगा, न होर्मुज स्ट्रेट के जरिए और न ही पर्शियन गल्फ के किसी अन्य हिस्से से। ईरान, ईरानी जनता के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक युद्ध में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई मानेगा।”
उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के जवाब में आई।
ट्रंप ने बुधवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा था कि ईरान को समर्थन देने वाले किसी भी देश के खिलाफ ‘अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई’ की जाएगी।
उन्होंने कहा, “यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।” ट्रंप ने इस कदम को ‘आर्थिक डी-डे” बताया।
18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में चल रहे संघर्षों को समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तनाव खत्म करने की बात शामिल थी।
इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करके एक अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद इन वार्ताओं का भविष्य फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
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