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Wednesday,01-July-2026
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सेना प्रमुख ने ‘विजय’ के विजन के साथ तय की भविष्य की दिशा

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भारतीय सेना के नए थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने सेना को तकनीक-सक्षम, आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार बल बनाने का संकल्प व्यक्त किया। इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को ‘विजय’ नामक रणनीतिक अवधारणा में समाहित किया है। यह विजन रक्षा मंत्री द्वारा घोषित ‘परिवर्तन के दशक’ की अवधारणा से प्रेरित है और आने वाले वर्षों में भारतीय सेना की कार्ययोजना का आधार बनेगा।

बुधवार को रक्षा मंत्रालय मुख्यालय में आयोजित समारोह में थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री द्वारा उन पर जताए गए विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया तथा राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। सीमाओं पर पारंपरिक चुनौतियों के साथ-साथ साइबर, अंतरिक्ष, सूचना और तकनीक आधारित नए खतरे भी सामने आ रहे हैं।

ऐसे समय में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण को नई गति और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। ऐसे में सेना प्रमुख का लक्ष्य सेना को ऐसी शक्ति में बदलना है जो तकनीकी रूप से सक्षम, बहुआयामी अभियानों के लिए तैयार और हर स्तर पर सशक्त हो। सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना, युद्ध के लिए तैयार और अनुभवी सैन्य बल है। ये युद्ध क्षेत्र की हर चुनौती का सामना करने के लिए सदैव तैयार और सक्षम है।

उन्होंने बताया कि ‘विजय’ का पहला स्तंभ सतर्कता और युद्धक तत्परता है। इसके अंतर्गत सीमाओं की सुरक्षा, उभरते खतरों पर निरंतर नजर, खुफिया क्षमता को मजबूत करना तथा हर परिस्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की तैयारी बनाए रखना शामिल है। सेना का उद्देश्य किसी भी सुरक्षा चुनौती का सामना करने के लिए उच्च स्तर की परिचालन क्षमता बनाए रखना होगा। दूसरा स्तंभ नवाचार और परिवर्तन है।

जनरल सेठ ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्धक्षेत्र को देखते हुए हथियारों के आधुनिकीकरण व सैन्य सिद्धांतों, रणनीतियों और संचालन पद्धतियों में भी बदलाव आवश्यक है। एआई, ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर क्षमताओं और उन्नत संचार तकनीकों के अधिक उपयोग पर विशेष बल दिया जाएगा। उनकी रणनीति में संयुक्तता और एकीकरण को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त अभियानों की क्षमता और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

यह दृष्टिकोण भविष्य के एकीकृत युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप माना जा रहा है। आत्मनिर्भरता भी उनके विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन, घरेलू उद्योगों के साथ सहयोग और भारतीय तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देकर सेना की आवश्यकताओं को देश के भीतर ही पूरा करने की दिशा में प्रयास तेज किए जाएंगे। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को भी लाभ होगा।

जनरल सेठ ने सैनिकों को भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उनके कल्याण, प्रशिक्षण, पेशेवर विकास और मनोबल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उनका मानना है कि आधुनिक उपकरणों और तकनीक के साथ-साथ सैनिकों का आत्मविश्वास और क्षमता ही सेना की वास्तविक ताकत है। नए थल सेनाध्यक्ष ने कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को लगातार विकसित करती रहेगी और देश की संप्रभुता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेगी। उन्होंने कहा कि एक अग्निवीर से लेकर सबसे वरिष्ठ वेटरन तक सब योद्धा हैं ये योद्धा हमारी सेना की सबसे बड़ी ताकत हैं ।

राष्ट्रीय समाचार

अदाणी ग्रीन एनर्जी 20 गीगावाट की ऑपरेशनल क्षमता वाली भारत की पहली रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बनी

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अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने बुधवार को घोषणा की कि उसने 20 गीगावाट की ऑपरेशनल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही, वह ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट के जरिए यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बन गई है।

बयान के अनुसार, अदाणी ग्रीन हर साल 52 अरब यूनिट से ज्यादा क्लीन एनर्जी बना रही है और यह उत्पादन भारत की कुल बिजली खपत का लगभग 3 प्रतिशत है।

एजीईएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा, “20 गीगावाट का आंकड़ा पार करना यह दिखाता है कि अनुशासित काम और दूर की सोच से क्या हासिल किया जा सकता है। आज, एजीईएल अपनी कुशल टीम और लंबे समय से साथ काम कर रहे पार्टनर्स के साथ मिलकर इतनी रिन्यूएबल बिजली पैदा कर रहा है जो लगभग मुंबई और नई दिल्ली की सालाना बिजली की कुल जरूरत के बराबर है। इससे देश की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत हो रही है और साथ ही क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ने की रफ्तार भी तेज़ हो रही है।”

यह उपलब्धि 2016 में तमिलनाडु के कामुथी में एजीईएल के पहले रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट के शुरू होने के एक दशक के भीतर हासिल हुई है, जो इसे भारत की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ने वाली ग्रीनफील्ड रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बनाती है।

कंपनी ने वित्त वर्ष 26 में 5,051 मेगावाट क्षमता जोड़ी, जो चीन के बाहर किसी भी कंपनी द्वारा सालाना जोड़ी गई सबसे अधिक रिन्यूएबल क्षमता है।

एजीईएल के ऑपरेशनल पोर्टफोलियो में लगभग 14.2 गीगावाट सोलर, 2.7 गीगावाट विंड और 3.3 गीगावाट विंड-सोलर हाइब्रिड क्षमता शामिल है।

इसके अलावा, एजीईएल ने 3.55 गीगावाट का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) शुरू किया है, जो चीन के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा डिप्लॉयमेंट है और दुनिया भर में सबसे तेजी से पूरा किए गए प्रोजेक्ट्स में से एक है।

सागर अदाणी ने कहा, “जैसे-जैसे भारत के पावर मिक्स में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ रही है, भरोसेमंद और जरूरत के हिसाब से उपलब्ध होने वाली क्लीन पावर देने के लिए बैटरी स्टोरेज अहम होता जा रहा है।”

एजीईएल की योजना वित्त वर्ष 27 में 10 गीगावाट बैटरी स्टोरेज जोड़ने और अगले पांच वर्षों में अपने पोर्टफोलियो को 50 गीगावाट तक बढ़ाने की है, ताकि 2030 तक 50 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।

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राष्ट्रीय समाचार

यूपीआई से लेनदेन में जून में 23 प्रतिशत की वृद्धि, वैल्यू करीब 29 लाख करोड़ रुपए रही

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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से लेनदेन जून में सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 22.72 अरब पर पहुंच गया है। इस दौरान इनकी वैल्यू 20 प्रतिशत बढ़कर 28.92 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से बुधवार को जारी डेटा में दी गई।

औसत आधार पर यूपीआई से जून में 75.7 करोड़ लेनदेन प्रतिदिन हुए है। इस दौरान प्रतिदिन लेनदेन की औसत वैल्यू 96,405 करोड़ रुपए रही है।

मई में यूपीआई लेनदेन की संख्या 23.20 अरब थी और इनकी वैल्यू 29.90 लाख करोड़ रुपए रही थी। इस दौरान औसतन, यूपीआई ने मई में हर दिन लगभग 74.8 करोड़ लेनदेन प्रोसेस किए, और प्रतिदिन लेनदेन की औसत वैल्यू लगभग 96,465 करोड़ रुपए रही।

10 साल पहले आम आदमी को डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए शुरू हुआ यूपीआई अब पूरे भारत में रोजाना करोड़ों लेनदेन को आसान बनाता है। यूपीआई लेनदेन की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में सिर्फ 2 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई है।

यूपीआई अब यूएआई, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिससे ग्लोबल फिनटेक सेक्टर में भारत की मौजूदगी मजबूत हुई है।

हाल ही में ग्रीस में यूपीआई के शुरू होने के बाद ग्राहक तुरंत, सुरक्षित और आसानी से पैसे भेज सकते हैं और लेनदेन की लागत पारंपरिक तरीकों की तुलना में बहुत कम हो गई है।

पिछले महीने, अमेरिका के पेमेंट सिस्टम के भविष्य पर चर्चा करते हुए अमेरिकी सांसदों ने भारत के यूपीआई का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे आधुनिक पब्लिक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा दे सकता है। इस दौरान फिनटेक कंपनियों ने कांग्रेस से अमेरिका के पेमेंट नेटवर्क तक पहुंच से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करने की मांग की।

भारत के साथ यह तुलना ‘हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी’ की ‘फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर बनी सब-कमेटी’ की सुनवाई के दौरान की गई। इसमें सांसदों ने इस बात पर विचार किया कि क्या अमेरिका को अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को आधुनिक बनाना चाहिए, ताकि योग्य नॉन-बैंक पेमेंट कंपनियों को पारंपरिक बैंकिंग बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे फेडरल रिजर्व के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच मिल सके।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण : जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची

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भारत रवाना होने से पहले आयोजित एक प्रेस वार्ता में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के साथ सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक हितों के आधार पर मजबूत साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं।

जापानी कैबिनेट के जनसंपर्क अधिकारी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट के जरिए इसकी जानकारी दी। पोस्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा,”अंतरराष्ट्रीय स्थिति में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच, भारत के साथ सहयोग का महत्व पहले से कहीं अधिक हो गया है। भारत और जापान मौलिक मूल्यों तथा रणनीतिक हितों को साझा करते हैं और यही हमारी साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।”

उन्होंने बताया कि इस यात्रा में जापान के कारोबारी जगत के 150 से अधिक प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। उनका उद्देश्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के सहयोग के माध्यम से भारत-जापान संबंधों का दायरा और व्यापक बनाना है।

जापानी प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि निवेश, व्यापार, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

ताकाइची ने विश्वास जताया कि भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी तथा सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की संयुक्त भागीदारी के जरिए एक मजबूत और टिकाऊ आर्थिक साझेदारी का निर्माण होगा।

जापान की प्रधानमंत्री बुधवार को तीन दिन के दौरे पर भारत आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संग उच्च स्तरीय वार्ता भी प्रस्तावित है। दोनों नेता 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

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