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Wednesday,17-June-2026
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भारत-वियतनाम रक्षा संबंधों को नई मजबूती, रक्षा मंत्री ने की उच्चस्तरीय वार्ता

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भारत और वियतनाम के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में हुए इस समझौते से दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

रक्षा मंत्री ने इसे दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी में एक बड़ा और भविष्य उन्मुख कदम बताया है। इसके अलावा वियतनाम के साथ समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, सैन्य प्रशिक्षण तथा क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। दरअसल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने आधिकारिक दौरे पर वियतनाम में हैं। यहां मंगलवार को उन्होंने वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल फान वान जियांग के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच तेजी से मजबूत हो रहे रक्षा संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई।

बैठक के बाद रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। भारत इस साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दौरे के दौरान दोनों रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त रूप से वियतनाम एयर फोर्स ऑफिसर कॉलेज में स्थापित भाषा प्रयोगशाला का उद्घाटन भी किया। इसे दोनों देशों के सैन्य सहयोग और प्रशिक्षण संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस पहल से सैन्य अधिकारियों के बीच बेहतर संवाद और प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। भारत और वियतनाम के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग को नई दिशा मिली है। दोनों पक्षों ने इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया।

अपनी यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री ने वियतनाम के राष्ट्रपिता और महान क्रांतिकारी नेता हो ची मिन्ह की समाधि पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह अवसर हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती का था। राजनाथ सिंह ने कहा कि हो ची मिन्ह का दृष्टिकोण, नेतृत्व और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के प्रति उनका समर्पण आज भी दुनिया की कई पीढ़ियों को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम की मित्रता साझा मूल्यों, पारस्परिक सम्मान और ऐतिहासिक विश्वास पर आधारित है।

गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने रणनीतिक और रक्षा सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है। वियतनाम को भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है और दोनों देश चीन की बढ़ती आक्रामकता तथा क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर जोर दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा मंत्री का यह दौरा भारत-वियतनाम संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन को भी मजबूत करेगा। इससे पहले सोमवार को रक्षा मंत्री ने हनोई में कहा कि भारत न्यूक्लियर ब्लैकमेल को स्वीकार नहीं करेगा। परमाणु धमकी के सामने भारत नहीं झुकेगा।

उन्होंने कहा कि हम परमाणु हथियार पहले इस्तेमाल न करने की नीति के प्रति प्रतिबद्ध है। हमारी नीति हमेशा शांति और जिम्मेदारी पर आधारित रही है, लेकिन भारत किसी भी प्रकार के ‘न्यूक्लियर ब्लैकमेल’ को स्वीकार नहीं करेगा। यदि कोई देश भारत को परमाणु धमकी देने की कोशिश करेगा, तो भारत उसके सामने झुकने वाला नहीं है।

रक्षा मंत्री राजनाथ ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने एक बार फिर दुनिया को देश की सैन्य क्षमता, साहस और निर्णायक शक्ति का परिचय कराया है। भारतीय जवानों ने जिस प्रकार अद्भुत पराक्रम दिखाया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि आज का भारत कमजोर नहीं, बल्कि हर चुनौती का जवाब देने में सक्षम एक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

ट्रंप और पीएम मोदी के बीच होगी द्विपक्षीय बातचीत; व्यापार, एआई और वैश्विक सुरक्षा पर जोर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को जी7 नेताओं, आउटरीच पार्टनर्स और प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित वर्किंग लंच से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

बैठक के दौरान दोनों नेता आर्थिक विकास, सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), निवेश साझेदारी और विभिन्न वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।

इससे पहले मंगलवार को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया।

‘नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को पुनर्स्थापित करना’ विषय पर आयोजित जी7 वर्किंग सत्र से पहले दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की। इस सत्र में जी7 देशों, साझेदार देशों, विश्व बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने शनिवार को कहा था कि यह बैठक उस समय होगी, जब दोनों नेता जी7 नेताओं, आउटरीच पार्टनर्स और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख अधिकारियों के साथ वर्किंग लंच में शामिल होने वाले होंगे।

एवियन पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह विश्व नेताओं से मिलने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने को लेकर उत्साहित हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “जी7 शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांस के एवियन पहुंच गया हूं। विश्व नेताओं के साथ बातचीत करने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए उत्सुक हूं। भारत अधिक टिकाऊ और समृद्ध विश्व के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

भारत को 15 से 17 जून तक आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भारत के साथ-साथ ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विश्व नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। यह जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की 13वीं और प्रधानमंत्री मोदी की लगातार सातवीं भागीदारी होगी।

16 और 17 जून को जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र आयोजित किए गए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी अन्य आमंत्रित देशों के नेताओं के साथ हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, चर्चा का मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और विकास के लिए एकजुटता को मजबूत करने, समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा देने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग पर रहेगा।

विदेश मंत्रालय ने कहा, “जी7 समिट में भारत की नियमित भागीदारी शांति, सुरक्षा, विकास और पर्यावरण की स्थिरता से जुड़ी ग्लोबल चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका और योगदान को बढ़ती मान्यता को दर्शाती है। साथ ही, जी7 और जी20 व ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने लगातार ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं, चिंताओं और विकास संबंधी आकांक्षाओं को प्रमुखता से उठाया है।”

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

मस्कट: भारत भेजे गए एमटी सेट्टेबेलो हमले में मारे गए दो भारतीय नाविकों के पार्थिव शरीर

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ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को बताया कि जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर हुए हमले में जान गंवाने वाले दो भारतीय समुद्री कर्मियों के पार्थिव शरीर भारत भेज दिए गए हैं।

दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

दूतावास ने कहा, “ आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया, जिन्होंने एमटी सेट्टेबेलो पर हुए दुखद हमले में अपनी जान गंवाई, उनके पार्थिव शरीर भारत वापस भेज दिए गए हैं। इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं।”

मंगलवार को दूतावास ने यह भी बताया था कि जहाज के सभी 21 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित रूप से ओमान से भारत लौट रहे हैं। रवाना होने से पहले भारत के ओमान में राजदूत प्रशांत पीसे ने चालक दल से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया।

ओमान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, पलाऊ ध्वज वाले जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर 30 समुद्री मील दूर सोहर के पास हमला हुआ था। इस घटना के बाद 21 भारतीयों को बचा लिया गया, जबकि 3 नाविकों की मौत हो गई।

दूतावास ने बताया कि ओमान मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया।

इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कूटनीतिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बात कर इस हमले पर विरोध दर्ज कराया।

विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर कहा था कि नागरिक जहाजों पर इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया था कि उसने उस जहाज को निशाना बनाया था, क्योंकि वह ईरान से तेल ले जाने और अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप था। सेना के अनुसार कार्रवाई के दौरान जहाज को निष्क्रिय किया गया।

भारत ने इस घटना को गंभीर बताते हुए नागरिक समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की अपील की है।

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भारत ने अफगानिस्तान को भेजी जरूरी दवाओं की बड़ी खेप : विदेश मंत्रालय

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भारत सरकार ने एक बार फिर मदद का हाथ बढ़ाते हुए अफगानिस्तान को आवश्यक दवाओं की बड़ी खेप भेजी है। इस सहायता के माध्यम से भारत ने अफगान जनता के स्वास्थ्य, कल्याण और राहत प्रयासों के प्रति अपने निरंतर सहयोग को दोहराया है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है और कठिन परिस्थितियों में भी वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, ” भारत ने 5 टन जरूरी दवाओं की खेप अफगानिस्तान भेजी है। इस तरह हमने अफगान जनता के कल्याण और मानवीय सहायता पहुंचाने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता सुनिश्चित की है।”

यह नई खेप अफगानिस्तान की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने और वहां की तत्काल चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से भेजी गई है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान को दवाइयों, खाद्यान्न, टीकों और अन्य मानवीय सहायता सामग्री की आपूर्ति करता रहा है।

हाल के वर्षों में भारत ने अफगानिस्तान को जीवनरक्षक दवाइयां, खाद्य सहायता और आपदा राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। नई खेप इसी मानवीय सहयोग की निरंतरता का हिस्सा है।

अप्रैल में भी भारत ने टीबी टीकाकरण कार्यक्रम को बल देने के लिए 13 टन बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीके और इससे जुड़े सामानों की खेप भेजी थी।इसकी पुष्टि भी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर की थी।

इसी साल बाढ़ और भूकंप ने अफगानिस्तान में भारी तबाही मचाई थी। जिसके बाद भारत की ओर से 5 अप्रैल को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री (एचएडीआर) पहुंचाई गई थी।

वहीं, मार्च में, भारत ने अफगानिस्तान को 2.5 टन आपातकालीन दवाएं, मेडिकल डिस्पोजेबल, किट और उपकरण भेजे थे। यह मदद काबुल के एक अस्पताल पर पाकिस्तानी हमले में घायल हुए लोगों की सहायता के लिए दी गई थी। पाकिस्तान के एक हमले में काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2,000 बिस्तरों वाले ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 250 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

भारत पिछले कई वर्षों से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी के बीच नवंबर 2025 में हुई बैठक में व्यापार, संपर्क और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई थी।

बैठक के बाद जयशंकर ने कहा था कि भारत अफगान जनता के विकास और कल्याण के लिए अपने समर्थन को जारी रखेगा। दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया था।

इससे पहले भारत ने अफगानिस्तान के भूकंप प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और खाद्य सहायता भी भेजी थी। बाल्ख, समनगन और बगलान प्रांतों में आए विनाशकारी भूकंप (2025) के बाद भारत ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए खाद्यान्न और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई थी।

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