राष्ट्रीय समाचार
विधानसभा उपचुनाव: रुझान में पांच राज्यों की 7 सीटों पर भाजपा को बढ़त, बारामती से सुनेत्रा पवार आगे
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ कर्नाटक, नागालैंड, त्रिपुरा गुजरात और महाराष्ट्र की सात सीटों पर हुए उपचुनावों की मतगणना हो रही है। शुरुआती रुझान में 7 में से 5 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं जबकि महाराष्ट्र की बारामती सीट से महायुति उम्मीदवार और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार आगे चल रही है। वहीं, कर्नाटक की बागलकोट सीट पर कांग्रेस आगे चल रही है।
चुनाव आयोग के अनुसार, महाराष्ट्र की बारामती सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) उम्मीदवार सुनेत्रा पवार 53,250 वोटों से आगे चल रही हैं। अजित पवार का निधन 28 जनवरी 2026 को एक विमान हादसे में निधन हो गया था।
इसके अलावा रुझान में महाराष्ट्र की राहुरी सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अक्षय कर्डिले 29,675 वोटों से आगे चल रहे हैं, जबकि दूसरे नंबर पर एनसीपी (शरदचंद पवार) के मोकाटे गोविंद खांडू हैं। यह उपचुनाव शिवाजी कर्डिले के निधन के बाद हो रहा है। भाजपा ने इस सीट से उनके बेटे अक्षय कर्डिले को चुनावी मैदान में उतारा है।
कर्नाटक की दावणगेरे साउथ में भाजपा के श्रीनिवास टी दसाकरियप्पा 8539 वोटों से आगे चल रहे हैं जबकि कांग्रेस के सामर्थ शमनूर मल्लिकार्जुन दूसरे नंबर पर हैं। इसके अलावा बागलकोट से कांग्रेस के उमेश हुल्लप्पा मेती 9969 वोटों से आगे चल रहे हैं, वहीं भाजपा के चरंतीमठ वीरभद्राया दूसरे स्थान पर हैं।
त्रिपुरा की धर्मनगर से भाजपा के जाहर चक्रवर्ती 13,988 वोटों से आगे हैं, जबकि कांग्रेस के चयन भट्टाचार्य पीछे चल रहे हैं।
गुजरात की उमरेठ सीट से भाजपा के हर्षदभाई गोविंदभाई परमार करीब 21 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं, जबकि दूसरे नंबर पर कांग्रेस के उम्मीदवार भृगु राज सिंह चौहान हैं।
इसके साथ ही, नगालैंड की कोरिडांग सीट से भाजपा उम्मीदवार दाओचिर आई इम्चेन 1,599 वोटों से आगे हैं। हलांकि इस बार जीत का ताज किसके सिर पर सजेगा? यह तस्वीर पूरी तरह से शाम तक साफ हो पाएंगी।
अपराध
सीबीआई ने गुजरात के 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने रविवार को बताया कि यह कार्रवाई उन सिंडिकेट्स (गिरोहों) के खिलाफ सीबीआई की लगातार चल रही मुहिम का हिस्सा है, जो देशभर के नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
एजेंसी के अनुसार, सीबीआई ने ‘ऑपरेशन चक्र-6’ के तहत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अपराधों पर देशव्यापी कार्रवाई को तेज करते हुए 10 राज्यों में 22 जगहों पर एक साथ तलाशी ली। इसी कड़ी में गुजरात के एक बड़े डिजिटल अरेस्ट मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इस मामले में पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया था। साइबर अपराधियों ने पुलिस और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अधिकारी बनकर पीड़ित को 11.42 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास के रूप में हुई है। सीबीआई जांच के दौरान दोनों आरोपियों की अपराध से मिली रकम प्राप्त करने, उसकी लेयरिंग (कई खातों में घुमाने) और उसे आगे भेजने में भूमिका का पता चला।
जांच से यह भी पता चला कि उन्होंने कथित तौर पर एक कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल पीड़ित से ठगे गए 11.42 करोड़ रुपए में से 2.5 करोड़ रुपए प्राप्त करने के लिए किया था। साथ ही, ये दोनों मनी ट्रेल को छिपाने के इरादे से इन फंड्स को अपने साथियों के कई खातों में ट्रांसफर करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।
जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी और दूसरे साइबर अपराधों से कमाए गए पैसे को निकालने के लिए बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल करने और एपीके फाइलें इंस्टॉल करने में शामिल थे। उनके पास से जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस से कई ऐसे चैट, मैसेज और दस्तावेज भी मिले हैं, जो अपराध में उनकी भूमिका साबित करते हैं।
मनी ट्रेल के विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर तलाशी की गई। इस दौरान आपत्तिजनक बैंकिंग दस्तावेज, खाते से संबंधित रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए गए। सीबीआई ने कहा कि इन सबूतों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि राज्यों की सीमाओं के पार चल रहे डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट्स के बड़े वित्तीय और तकनीकी ढांचे का पता लगाया जा सके।
एजेंसी ने जानकारी दी कि सीबीआई ने अलग-अलग राज्यों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के कई मामले अपने हाथ में लिए हैं। इनमें से चार मामलों में पिछले 30 दिनों में सीबीआई ने 22 राज्यों में 142 जगहों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की है और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
राजनीति
मुझे तेज लहरों के बीच तैरना पसंद, सीईसी के खिलाफ महाभियोग की मांग के बीच राहुल गांधी का पोस्ट

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक ऐसा पोस्ट किया है जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। राहुल गांधी ने लिखा, “मुझे समुद्र में तब तैरना पसंद है, जब लहरें तेज हों। इससे यह सीखने को मिलता है कि उथल-पुथल भी शांति का ही एक रूप है।”
राहुल का यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की मीडिया रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग तेज कर दी है।
इससे पहले कांग्रेस समेत ‘इंडी’ गठबंधन के कई दलों ने सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली समेत पूरे देश में धरना प्रदर्शन किया था। दरअसल केरल कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन का कहना है कि ज्ञानेश कुमार ने उनसे संपर्क किया और उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा, यहां तक कि मंत्री पद की पेशकश भी की। ज्ञानेश कुमार को ऐसा प्रस्ताव देने का अधिकार किसने दिया? वे किसके अधिकार से बोल रहे थे और 2016 में भाजपा के लिए राजनीतिक भर्ती में चुनाव आयुक्त की कथित संलिप्तता क्यों थी?
इस पर राहुल गांधी ने पोस्ट किया, “पहले ज्ञानेश कुमार, जो उस समय एक सेवारत आईएएस अधिकारी थे – का इस्तेमाल भाजपा के लिए भर्ती करने में किया गया। फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बनाया और उन्हें भारत के चुनावों में मैच फिक्सिंग का जिम्मा सौंप दिया।”
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है और एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम काटे जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने एक अहम बैठक की और प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। आयोग ने कहा कि हाल के महीनों में देशभर में एसआईआर समेत कई फैसले लिए गए हैं।
इस प्रेस नोट के बाद से भाजपा कांग्रेस पर हमलावर है और कह रही है कि जब सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं तो फिर एक आयुक्त के मतभेद की बात कहां से आ रही है।
प्रेस रिलीज में कहा गया था, “24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का आदेश जारी किया गया था। इसकी शुरुआत बिहार से हुई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल और 30 अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया शुरू की गई। यह आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था।”
आयोग ने आगे बताया था कि 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर का कार्यक्रम 27 अगस्त 2025 को जारी किया गया था। वहीं 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह कार्यक्रम 14 मई 2026 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि तीसरे चरण के बाकी 12 राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की कुल संख्या का पता चल सकेगा।
राजनीति
राहुल गांधी की बातों से समाज में जाता है गलत संदेश : किरेन रिजिजू

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर दिए गए बयान को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “राहुल गांधी की बातों को समाज में बेवजह फैलाना सही नहीं है क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाता है।”
बता दें कि राहुल गांधी ने 24 सितंबर को एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि देश में सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी-इनकम्बेंसी कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के खिलाफ तो काम करती है लेकिन भाजपा के खिलाफ गायब हो जाती है। राहुल गांधी ने दावा किया था कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है।
राहुल गांधी ने कहा था कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और 50 वर्षों से भारतीय राजनीति को करीब से देख रहे हैं। उनके मुताबिक, भारत में एंटी-इनकम्बेंसी एक स्वाभाविक राजनीतिक ताकत है, जो हर सरकार के खिलाफ समय के साथ उभरती है। उन्होंने कहा था कि इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश युद्ध के बाद भारी लोकप्रियता हासिल की थी लेकिन कुछ ही समय में उनके खिलाफ भी सत्ता विरोधी माहौल बन गया। यही स्थिति कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ भी होती है लेकिन भाजपा के मामले में ऐसा नहीं दिखता।
उन्होंने कहा था, “मैं पूरी निश्चितता के साथ कह सकता हूं कि 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में धांधली हुई। मेरे पास इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। यह 99 प्रतिशत नहीं बल्कि 100 प्रतिशत निश्चित है।”
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी। उन्होंने दावा किया था कि अब चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्त भी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर आपत्ति जता रहे हैं और ज्ञानेश कुमार को मौजूदा अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा था कि चुनाव आयोग का सबसे बड़ा दायित्व मतदाता के वोट की रक्षा करना है। अगर वोट सुरक्षित नहीं रहेगा तो संविधान सही ढंग से काम नहीं करेगा, कानूनों की वैधता पर सवाल उठेंगे और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व खत्म हो जाएगा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि “पहले वोट चोरी हुई, फिर कानून चोरी हुई और अब संस्थाओं की चोरी हो रही है।” उन्होंने यह भी कहा था कि जिन सांसदों का चुनाव कथित “वोट चोरी” के जरिए हुआ है, उनके द्वारा बनाए गए कानून भी अवैध हैं। इस पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे राहुल गांधी की राजनीति का हिस्सा बताया था।
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