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ईरान के विदेश मंत्री ने यूएस-इजरायल पर नरसंहार का लगाया आरोप, बोले-‘यूएन का बुनियादी मूल्य संकट में है’

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तेहरान, 27 मार्च : ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर नरसंहार करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के तमाम देशों से अमेरिका-इजरायल के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले का जिक्र करते हुए अराघची ने शुक्रवार दोपहर को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को बताया कि ईरान के मिनाब में शजारेह तैयबेह गर्ल्स स्कूल पर हुए क्रूर हमले को सही नहीं ठहराया जा सकता, न ही इसे दबाया जा सकता है। इस पर चुप्पी और बेपरवाही से नहीं देखा जाना चाहिए। यह हमला जानबूझकर बेरहमी से किया गया था। संयुक्त राष्ट्र का बुनियादी मूल्य और मानवाधिकार का पूरा ढांचा गंभीर खतरे में हैं।

विदेश मंत्री अराघची ने कहा, “ईरान खुद को दो जबरदस्ती करने वाली न्यूक्लियर सरकारों यानी अमेरिका और इजरायल, की तरफ से थोपे गए एक गैर-कानूनी युद्ध के बीच में पाता है। यह हमला साफ तौर पर बिना किसी वजह के और बहुत बेरहम है। उन्होंने यह हमला 28 फरवरी को शुरू किया जब ईरान और अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अमेरिका की कही जा रही चिंताओं को हल करने के मकसद से एक डिप्लोमैटिक प्रक्रिया में लगे हुए थे। नौ महीने में दूसरी बार, उन्होंने बातचीत को रोककर और पटरी से उतारकर डिप्लोमेसी को धोखा दिया।”

उन्होंने कहा कि इस हमले के सबसे डरावने उदाहरणों में से एक दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर सोची-समझी और धीरे-धीरे किया गया हमला था, जहां 175 से ज्यादा स्टूडेंट्स और टीचर्स को जानबूझकर और बेरहमी से मार डाला गया था। यह हमला केवल एक बड़े संकट की झलक भर है, जिसके पीछे कहीं अधिक गंभीर अत्याचार छिपे हुए हैं। इसमें मानवाधिकारों और मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघनों को सामान्य बना देना और बिना सजा के जघन्य अपराध करने की हिम्मत शामिल है।

अराघची ने कहा कि अमेरिका और इजरायल हमेशआ खुद को सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सबसे सटीक सैन्य और डेटा सिस्टम होने का दावा करते हैं। ऐसे में अगर वो यह कहते हैं कि ये हमला जानबूझकर और पहले से प्लान किया गया नहीं था, तो इसे माना नहीं जाना चाहिए। उम्होंने कहा कि स्कूल को टारगेट करना एक वॉर क्राइम और इंसानियत के खिलाफ एक ऐसा अपराध है जिसकी सभी को साफ और बिना शर्त निंदा करनी चाहिए। इसके अपराधियों की साफ और साफ जवाबदेही तय करनी चाहिए।

ईरानी विदेश मंत्री ने वीडियो जारी कर कहा कि इस दुखद घटना को न तो सही ठहराया जा सकता है, न ही छिपाया जा सकता है, और न ही इसे चुपचाप या नजरअंदाज करके देखा जाना चाहिए। मिनाब में शजारेह तैयबेह स्कूल पर हमला न तो कोई हादसा था और न ही कोई गलत अंदाजा। इस जुर्म को सही ठहराने की कोशिश में अमेरिका के उलटे-सीधे बयान किसी भी तरह से उन्हें जिम्मेदारी से बरी नहीं करते। एक आम नागरिक जगह पर ऐसे बेरहम हमले की बुराई करना, जहां सबसे मासूम लोग शिक्षा की तलाश में इकट्ठा होते हैं, यह सिर्फ मानवाधिकार के दायरे में एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं है; यह एक नैतिक और जरूरी बात है। हमारी अंतरात्मा हमें किसी भी अदालत से कहीं ज्यादा गहराई से जज करेगी।

उन्होंने कहा, “शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल इस गैर-कानूनी युद्ध के पिछले सत्ताईस दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए घिनौने जुर्मों का अकेला शिकार नहीं है। हमलावरों ने मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का बड़े पैमाने पर और सिस्टमैटिक तरीके से, पहले कभी नहीं देखे गए और बहुत बेरहम तरीके से उल्लंघन किया है। युद्ध के कानूनों या इंसानियत और सभ्यता के बुनियादी उसूलों की कोई परवाह किए बिना, उन्होंने आम लोगों और आम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। पूरे ईरान में 600 से ज्यादा स्कूल तबाह हो गए हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण हजार से ज्यादा छात्र और शिक्षक मारे गए या घायल हुए हैं। हमलावर घमंड से कोई रहम नहीं, कोई राहत नहीं का नारा लगाते हैं। वो ईरान के जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने की धमकी देते हैं, उन्होंने अस्पतालों, एम्बुलेंस, मेडिकल कर्मचारियों, रेड क्रिसेंट के मदद करने वाले कर्मचारियों, रिफाइनरियों, पानी के सोर्स और रहने की जगहों को निशाना बनाया है।”

अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए, उन्होंने कहा कि सिर्फ “वॉर क्राइम” और “मानवता के खिलाफ अपराध” शब्द उनके किए जा रहे जुल्मों की गंभीरता को बताने के लिए काफी नहीं हैं। टारगेट करने का तरीका और उनकी बयानबाजी, इस बात में कोई शक नहीं छोड़ती कि उनका साफ इरादा नरसंहार करना है।

अराघची ने कहा, “ईरान के नेक लोगों के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का यह गलत और मनमाना युद्ध, कब्जे वाले फिलिस्तीन, लेबनान और दूसरी जगहों पर पहले हुई अराजकता और अपराधों के सामने चुप्पी का सीधा नतीजा है। नाइंसाफी के सामने बेपरवाही और चुप्पी कभी भी शांति और सुरक्षा नहीं लाएगी; बल्कि, इससे और ज्यादा असुरक्षा और अधिकारों का और ज्यादा उल्लंघन होगा। संयुक्त राष्ट्र का बुनियादी मूल्य और मानवाधिकार का पूरा ढांचा गंभीर खतरे में हैं।

ईरानी विदेश मंत्री ने दुनिया के सभी देशों से अमेरिका-इजरायल के हमले के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा, “आप सभी को हमलावरों की खुलकर निंदा करनी चाहिए और यह दिखाना चाहिए कि देशों का समुदाय और इंसानियत की सामूहिक अंतरात्मा उन्हें ईरान के लोगों के खिलाफ किए जा रहे भयानक अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराएगी। ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा। ईरानी लोग एक शांतिप्रिय और इज्जतदार देश हैं, जो दुनिया की सबसे अमीर सभ्यताओं में से एक के वारिस हैं। हालांकि, उन्होंने बेरहम हमलावरों के खिलाफ खुद का बचाव करने का पक्का इरादा और संकल्प दिखाया है, जो अपराध करने की कोई सीमा नहीं मानते; यह बचाव तब तक जारी रहेगा जब तक जरूरी है।”

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कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

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कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।

कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।

इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।

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अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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