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ईरान युद्ध के बीच बदलते समीकरणों के चलते चीन ने बदला अपना रुख

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वॉशिंगटन, 27 मार्च : अमेरिकी सरकार के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चीन ईरान विवाद पर अपने नजरिए को बदल रहा है। पूर्व अधिकारी ने कहा कि चीन अमेरिका के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की तैयारी के लिए तनाव कम करने के लिए समर्थन का संकेत दे रहा है।

यह बात ऐसे समय में आई है जब प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने चीन जाने का प्लान बना रहे हैं, जबकि खाड़ी में लड़ाई बढ़ती जा रही है।

पूर्व अधिकारी ने कहा, “यह बहुत अच्छी बात है कि राष्ट्रपति इस बड़े युद्ध के बीच में चीन जाने के लिए तैयार थे।” उन्होंने इस समय को बहुत अजीब बताया।”

बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अप्रैल में चीन के दौरे पर जाने वाले थे। हालांकि, हालिया हमलों और तनाव की वजह से अब चर्चा हो रही है कि वह मई में चीन दौरे पर जाएंगे। ट्रंप के चीन दौरे को लेकर अधिकारी ने कहा कि एशिया भर के देश प्रस्तावित समिट पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि इससे इलाके की स्थिरता और आर्थिक हालात पर असर पड़ सकता है।

अधिकारी ने कहा, “एशिया का हर देश देख रहा है और उम्मीद कर रहा है कि जब राष्ट्रपति ट्रंप चीन आएंगे तो क्या उम्मीद की जा सकती है।”

अमेरिकी सरकार के एक दूसरे पुराने अधिकारी ने कहा कि हाल की आर्थिक बातचीत के बाद इस लड़ाई ने दोनों पक्षों को फिर से सोचने का मौका दिया है।

पेरिस में हुई बातचीत का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा, “खाड़ी में ऑपरेशन दोनों पक्षों के लिए ज्यादा समय पाने का एक पॉलिटिकल कवर बन गया।”

अधिकारी ने कहा कि चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति की मेजबानी के लिए तैयार होने का संकेत देना जारी रखा है। हालांकि, अभी इस दौरे से संबंधित डिटेल्स को लेकर कुछ भी तय नहीं हुआ है।

अधिकारी ने कहा, “चीनियों ने आज सुबह कमोबेश संकेत दिया कि वे अभी भी उनकी (ट्रंप की) मेजबानी के लिए तैयार होंगे, लेकिन तारीखें कन्फर्म नहीं कीं।”

इसके साथ ही, हाल की डिप्लोमैटिक बातचीत के बाद लड़ाई पर चीन के मैसेज में बदलाव के संकेत दिखे हैं।

एक तीसरे पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “शांति को बढ़ावा देने, ईरानियों को बातचीत की टेबल पर लाने पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।” उन्होंने इस बदलाव को छोटा लेकिन ध्यान देने लायक बताया।

अधिकारी ने आगे कहा कि अमेरिका के लिए एक शांति प्रस्ताव था, जिससे पता चलता है कि बीजिंग उच्च स्तरीय बातचीत से पहले हालात को स्थिर करना चाहता है। बदलते हालात ईरान विवाद और बड़ी अमेरिकी-चीन बातचीत के बीच के संबंध को भी दिखाते हैं।

दूसरे अधिकारी ने एजेंडा के संभावित विस्तार की ओर इशारा करते हुए कहा, “अमेरिका के बातचीत करने वाले अब किस हद तक, ईरानी तेल की चीनी खरीद जैसी बातें उठाना शुरू करेंगे।”

अधिकारी ने ईरान को चीन के संभावित समर्थन के बारे में भी चिंता जताई। अधिकारी ने कहा, “झगड़े से पहले, चीनियों ने ईरानियों को एंटी शिप मिसाइल बेचने की बात की थी।” उन्होंने कहा कि ऐसे विकास पर करीब से नजर रखी जाएगी।

इन मुश्किलों के बावजूद, दोनों पक्ष बातचीत बनाए हुए दिख रहे हैं। समिट को लेकर चीन की ओर से मिल रहे संकेतों को लेकर अधिकारी ने कहा, “मुझे लगता है यह उनके हित में है और यह हमारे भी हित में है।”

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी कॉरिडोर में से एक है, जो दुनिया भर में तेल और गैस शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। किसी भी रुकावट का ग्लोबल मार्केट पर तुरंत असर पड़ता है, खासकर एनर्जी इंपोर्ट पर निर्भर बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर।

अमेरिका-चीन के संबंध व्यापार, तकनीक और सुरक्षा में प्रतिस्पर्धा और समय-समय पर जुड़ाव से पहचाने जाते रहे हैं। एक एक्टिव संघर्ष के बीच एक संभावित समिट इस बात पर जोर देता है कि कैसे भू-राजनीतिक संकट और बड़ी ताकतों के बीच बातचीत तेजी से आपस में जुड़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय

कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

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कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।

कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।

इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।

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अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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