राष्ट्रीय
एसबीआई फ्रॉड मामले में अनिल अंबानी से पूछताछ करेगी सीबीआई
नई दिल्ली, 19 मार्च : एसबीआई फ्रॉड मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) 19-20 मार्च के बीच राष्ट्रीय राजधानी में स्थित अपने मुख्यालय में पूछताछ करेगी।
सीबीआई की पूछताछ रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़ी हुई है, जिसे लेकर एसबीआई ने एफआईआर दर्ज कराई थी।
अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने बताया, “रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) के संबंध में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा दायर शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर के सिलसिले में अनिल डी. अंबानी 19 और 20 मार्च, 2026 को दिल्ली में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष पूछताछ के लिए पेश होंगे।”
प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह पेशी अंबानी इस मामले में सभी एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे।
पिछले सप्ताह, अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी से सीबीआई ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) से जुड़े 228 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी मामले में पूछताछ की थी। प्रमुख जांच एजेंसी ने उनसे दो दिनों तक पूछताछ की।
एजेंसी ने उनसे एक कथित बैंक धोखाधड़ी मामले के संबंध में पूछताछ की, जिसमें उनके साथ रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के पूर्व सीईओ और पूर्व पूर्णकालिक निदेशक रविंद्र सुधालकर और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
सीबीआई ने 6 दिसंबर, 2025 को रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), जय अनमोल अनिल अंबानी, रविंद्र सुधालकर, अज्ञात व्यक्तियों और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में केस दर्ज किया था।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कंपनी आरएचएफएल, उसके प्रमोटरों या निदेशकों और अज्ञात बैंक अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार का आरोप लगाया गया था, जिससे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (पूर्व-आंध्र बैंक) को 228.06 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।
इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) की 581 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति को जब्त कर लिया था।
अपराध
मुंबई में अभिनेत्री निमिषा नायर की कैब का पीछा करने वाले दो युवक हिरासत में, पुलिस ने नोटिस देकर छोड़ा

मुंबई, 20 मार्च : मुंबई में रोड रेज में अभिनेत्री निमिषा नायर ने दो युवकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले में मुंबई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया और उन्हें हिरासत में लेकर नोटिस देकर छोड़ दिया।
जानकारी के अनुसार यह घटना 17 मार्च तड़के की बताई जा रही है। अभिनेत्री निमिषा नायर अपने एक दोस्त के साथ उबर कैब से अंधेरी स्थित घर से नरिमन पॉइंट जा रही थीं। सुबह करीब 4:45 बजे जब उनकी कैब बांद्रा ईस्ट के खेरवाड़ी ब्रिज पर पहुंची, तब कैब ने एक मोटरसाइकिल को ओवरटेक किया। आरोप है कि किसी बात से मोटरसाइकिल सवार दोनों युवक नाराज हो गए थे और उन्होंने कैब का पीछा करना शुरू कर दिया था।
खेरवाड़ी पुलिस के अनुसार, दादर निवासी 25 और 27 वर्षीय युवकों ने कैब को रोकने की कोशिश की। उन्होंने कथित तौर पर कैब का दरवाजा खोलने की कोशिश की और ड्राइवर को धमकाया भी। स्थिति को देखते हुए निमिषा नायर ने घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। हालांकि, एक्ट्रेस ने सूझबूझ दिखाते हुए मोटरसाइकिल का रजिस्ट्रेशन नंबर नोट कर लिया था।
इसके बाद में निमिषा नायर ने इस घटना का वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया और पुलिस अधिकारियों को टैग करते हुए कार्रवाई की मांग की। पोस्ट वायरल होने के बाद मुंबई पुलिस ने उनसे संपर्क किया और रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर आरोपियों की पहचान की।
पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उन्हें नोटिस देकर छोड़ दिया गया। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपी अपने माता-पिता के साथ थाने पहुंचे थे और करीब एक दिन तक वहीं रहे। उनके परिजनों ने भी माना कि उनके बच्चों से गलती हुई है और वे आगे से इस तरह की किसी भी घटना में नहीं शामिल होंगे। इसके बाद दोनों आरोपियों को नोटिस देकर छोड़ दिया गया।
निमिषा नायर ने अपनी पोस्ट में कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करना जरूरी है, क्योंकि इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।
राष्ट्रीय
ईसीआई ने नागरिक स्वयंसेवकों को बोनस देने के मामले में बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी

कोलकाता, 19 मार्च : चुनाव आयोग ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार से एक रिपोर्ट मांगी। यह रिपोर्ट सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस, दोनों के तहत काम करने वाले नागरिक स्वयंसेवकों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल पुलिस के तहत आने वाले ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 हेतु एक तदर्थ बोनस देने की घोषणा किए जाने के बाद मांगी गई है।
यह घोषणा राज्य सचिवालय, नबन्ना से जारी एक नोटिफिकेशन के जरिए की गई।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, चुनावों से पहले की गई यह घोषणा महत्वपूर्ण है, क्योंकि नागरिक स्वयंसेवक पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं और चुनाव के दौरान अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ भी उठाते हैं। इसी संदर्भ में, इन वित्तीय लाभों के प्रावधान को उनकी सेवा की पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।
साथ ही, इस घोषणा पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। विपक्ष के एक धड़े ने आरोप लगाया कि ऐसे कदम चुनावों से पहले नागरिक स्वयंसेवकों को खुश करने के मकसद से उठाए गए हैं। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और वित्त विभाग की सिफारिशों के अनुसार उठाया गया है।
विपक्ष ने यह भी दावा किया है कि यह घोषणा विधानसभा चुनाव के नोटिफिकेशन के बाद की गई है, और इसलिए यह आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन है।
इस घटनाक्रम के बाद, चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
राज्य सरकार के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस के तहत सेवा देने वाले नागरिक स्वयंसेवक, साथ ही पश्चिम बंगाल पुलिस के तहत सेवा देने वाले ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों को इस चालू वित्त वर्ष के दौरान यह बोनस मिलेगा।
तदर्थ बोनस में एकमुश्त 600 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। 27 फरवरी को, राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए तदर्थ बोनस में बढ़ोतरी की घोषणा की थी; अब यह लाभ नागरिक स्वयंसेवकों और ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों तक भी बढ़ा दिया गया है।
इस घोषणा के साथ, नागरिक स्वयंसेवकों और ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों को अब 7,400 रुपए मिलेंगे, जो पहले 6,800 रुपए थे।
गौरतलब है कि 27 फरवरी को, राज्य वित्त विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें कहा गया था कि जो सरकारी कर्मचारी ‘उत्पादकता-आधारित बोनस योजना’ के दायरे में नहीं आते हैं, और जिनका 31 मार्च, 2026 तक संशोधित मासिक वेतन 46,000 रुपए से अधिक नहीं है, उन्हें प्रति व्यक्ति 7,400 रुपए का बोनस मिलेगा।
कुछ विशिष्ट शर्तों के अधीन, संविदा कर्मचारी और वे लोग जिन्होंने छह महीने की सेवा पूरी कर ली है, वे भी यह बोनस पाने के हकदार हैं। भुगतान पश्चिम बंगाल सेवा (वेतन और भत्तों का संशोधन) नियम, 2019 के अनुसार किया जाएगा। इसमें मकान किराया भत्ता, चिकित्सा भत्ता और सब्सिडी जैसे भत्ते शामिल नहीं हैं। यह भी ध्यान देने लायक है कि 15 मार्च को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से कुछ घंटे पहले ही, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरोहितों और मुअज्जनों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की थी।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, बनर्जी ने मासिक मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोतरी की घोषणा की। इस संशोधन के बाद, अब उन्हें हर महीने 2,000 रुपए मिलेंगे।
राजनीति
पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी का जाना तय है, भाजपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी : जनार्दन सिंह सिग्रीवाल

पटना, 19 मार्च : पश्चिम बंगाल में चुनाव की घोषणा होने के बाद बयानबाजियों का दौर भी शुरू हो गया है। इस बीच, भाजपा के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने गुरुवार को यहां कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जाना तय है। इस चुनाव में भाजपा विजयी होगी और वहां भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी।
पटना में मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोग भाजपा की सरकार के आने का इंतज़ार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होने के बाद ही कई स्थानों पर विरोध शुरू हो गया है। इधर, बिहार में नए मुख्यमंत्री के सवाल को लेकर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आगे जो भी मुख्यमंत्री होगा, उन्हें भी नीतीश कुमार का आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिलेगा।
उन्होंने कहा कि बिहार को और आगे बढ़ाना है, बिहार को विकसित बिहार बनाना है। इसके लिए हम सबको मजबूती के साथ आगे काम करना है और बिहार को विकसित प्रदेश बनाना है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के पहले बिहार में जंगलराज था, कहीं निकलना भी दूभर था। सड़कें, बिजली, पानी तक नहीं थी। लेकिन नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के तौर पर इस बिहार को सुधारते-सुधारते यहां तक लाने का काम किया है। आज भी जो उनके जो काम अधूरे हैं, उन्हें भी पूरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जो भी मुख्यमंत्री होंगे, उन्हें शुभकामनाएं हैं और हम सभी विकसित भारत और विकसित बिहार बनाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा और जदयू का गठबंधन काफी पुराना है। हमलोग वर्षों से एक साथ चलते रहे हैं और इसकी आदत भी है, इसलिए कहीं कोई समस्या नहीं है। दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुने जाने के बाद अब बिहार में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, जिसे लेकर बयानबाजी भी तेज है।
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