अंतरराष्ट्रीय
इजरायल की चेतावनी, ‘विदेशों में रहने वाले यहूदियों पर हमले का खतरा बढ़ा’, सतर्क रहने की सलाह
यरुशलम, 6 मार्च : ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की घोषणा की है। अन्य विदेशों में इजरायली नागरिकों की सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।
इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट में लिखा है, “आतंकवादी तत्व विदेशों में इजरायलियों को नुकसान पहुंचाने के मकसद से काम कर रहे हैं। इसको गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) विदेशों में रहने वाले इजरायलियों से सतर्कता बनाए रखने और सुरक्षा सावधानियों का पालन करने का आग्रह करती है।”
आधिकारिक घोषणा में कहा गया है, “ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन’ शुरू होने के बाद से दुनिया भर में इजरायली और यहूदी ठिकानों के खिलाफ ईरानी सुरक्षा एजेंसियों की ओर से आतंकवादी गतिविधियों और खतरों में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके अलावा, ईरान की ओर से इस क्षेत्र के देशों और सीमा से लगे देशों, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और जॉर्डन शामिल हैं, पर प्रत्यक्ष हमले हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में इजरायली लक्ष्यों पर हमलों की आशंका बढ़ रही है।”
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में हाल की कुछ घटनाओं का जिक्र किया गया है, जिसमें अलग-अलग देशों में इजरायली नागरिकों को निशाना बनाया गया। ‘लोन-वुल्फ’ हमलों का खतरा भी बढ़ा है। इसमें कहा गया है, “1 मार्च को टेक्सास के ऑस्टिन में अकेले हमलावर ने गोलीबारी की। 3 मार्च को टोरंटो में यहूदी ठिकानों पर गोलीबारी की गई। हमलावर अभी भी फरार है।”
फिलहाल, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) ने इजरायली लोगों से कहा है कि वे जिस भी देश में जा रहे हैं, वहां ज्यादा सावधानी बरतना जरूरी है।
इसके साथ ही, इजरायली नागरिकों के लिए कुछ खास दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। गाइडलाइंस के अनुसार, इजरायली नागरिक अगली सूचना तक संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते ट्रांजिट फ्लाइट लेने से बचें। सार्वजनिक स्थानों पर यहूदी या इजरायली पहचान से जुड़े संकेतों को छिपाकर रखें। दुनिया भर के सभी डेस्टिनेशन पर और खासकर ईरान, खाड़ी क्षेत्र की सीमा से लगे देशों और मौजूदा ट्रैवल अलर्ट वाले देशों में ज्यादा सावधानी बरतें। सोशल मीडिया पर रियल-टाइम पर्सनल जानकारी शेयर न करें।
इजरायली नागरिकों को यह भी दिशा निर्देश दिए गए हैं कि यहूदी या इजरायली के तौर पर पहचानी गई जगहों पर जाने से बचें। इजरायल या यहूदी धर्म से जुड़ी जगहों में होने पर अपने आसपास का पूरा ध्यान रखें। किसी खतरे या हमले की हालत में, तुरंत लोकल सिक्योरिटी फोर्स को इसकी जानकारी दें। हर खास देश के लिए एनएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई सलाह का पालन करें।
अंतरराष्ट्रीय
दुबई एयरपोर्ट ने ड्रोन हमले के बाद सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित किया

नई दिल्ली, 16 मार्च : दुबई एयरपोर्ट ने सोमवार को ऐलान किया है कि एक ड्रोन के फ्यूल टैंक से टकराने के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसने सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।
दुबई एयरपोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “सभी यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर डीएक्सबी (दुबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा) पर उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई हैं। ताजा उड़ान अपडेट के लिए कृपया अपनी एयरलाइन से संपर्क करें।”
दुबई नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी उड़ानों के बारे में ताजा जानकारी के लिए संबंधित एयरलाइंस से संपर्क करें।
दुबई मीडिया कार्यालय ने ‘एक्स’ पर लिखा, “आगे की जानकारी उपलब्ध होते ही आधिकारिक चैनलों के माध्यम से साझा की जाएगी।”
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक ड्रोन के ईंधन टैंक से टकराने के बाद आग लग गई, जिसके बाद आपातकालीन टीमों ने तुरंत कार्रवाई की और उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि दुबई नागरिक सुरक्षा दल को आग बुझाने के लिए तुरंत तैनात किया गया था और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा उपायों को सक्रिय करने के कारण किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।
दुबई नागरिक सुरक्षा दल को आग बुझाने के लिए तुरंत तैनात किया गया और सुरक्षा उपायों को लागू करने के बाद किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।
इस बीच, सोमवार को कोच्चि से दुबई जा रही एमिरेट्स की एक फ्लाइट हमले की सूचना मिलने के बाद वापस लौट गई।
सीआईएएल के प्रवक्ता ने बताया, “फ्लाइट ईके533 कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (सीआईएएल) से सुबह 4:30 बजे 325 लोगों को लेकर रवाना हुई थी। रास्ते में दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अचानक बंद होने के कारण विमान को वापस लौटने का निर्देश दिया गया।”
इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने संघर्ष शुरू होने के बाद से छह लोगों की मौत की सूचना दी है – चार नागरिक और दो सैन्यकर्मी। तकनीकी खराबी के कारण हुए हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सैनिकों की मौत हो गई थी।
अंतरराष्ट्रीय
फैक्ट चेक: पाकिस्तानी अकाउंट ने एआई की मदद से भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ के बयान को बदला

नई दिल्ली, 16 मार्च : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स की तरफ से भारत को लेकर फर्जी खबरें फैलाने की कोशिश लगातार जारी हैं। हालांकि, भारत के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और विदेश मंत्रालय के फैक्ट चेक अकाउंट लगातार पाकिस्तान के इस फर्जी प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश कर रहे हैं।
ताजा मामले में पीआईबी ने बताया कि पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स एक फर्जी वीडियो सर्कुलेट कर रहे हैं। इस वीडियो में पूर्व आर्मी चीफ, जनरल मनोज पांडे (रिटायर्ड), को भारतीय सेना के बारे में गलत बयान देते हुए दिखाया गया है।
पीआईबी फैक्ट चेक ने एआई से बनाई गई फेक वीडियो और ओरिजिनल वीडियो लगाकर सावधान रहने की अपील की और कहा, “सावधान! यह एक एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो है। पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे (रिटायर्ड) ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स ऐसे मैनिपुलेटेड वीडियो को एक कोऑर्डिनेटेड डिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन के हिस्से के तौर पर सर्कुलेट कर रहे हैं ताकि जनता को गुमराह किया जा सके और भारतीय सेना पर भरोसा कम किया जा सके। जानकारी साझा करने से पहले हमेशा आधिकारिक और भरोसेमंद सोर्स से जानकारी सत्यापित करें।”
बता दें, एआई की मदद से छेड़छाड़ करने के बाद पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे (रिटायर्ड) का वीडियो साझा किया जा रहा है, जिसमें वे इजरायल का समर्थन करने के नुकसान के बारे में बात कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि इसका सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि हमारी भारतीय सेना को हमेशा एक एथिकल फोर्स बनने की ट्रेनिंग दी गई थी।
फेक वीडियो में उनके हवाले से आगे कहा जाता है, “मेरी बात याद रखना, यह हालात पूरी तरह से बगावत की तरफ जा रहे हैं। हम सबने देखा है कि असम में क्या हो रहा है। हमारी आर्मी को इज़राइली इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिनका पहला इंस्ट्रक्शन यह होता है कि सभी मुस्लिम, सिख, रेंगमा और कुकी इंसान नहीं हैं। वे पहले उन्हें इंसानियत से दूर करना सिखाते हैं और फिर उन पर ज़ुल्म किया जाता है। यह अच्छा नहीं है। अगर यह चलता रहा तो इससे अंदरूनी बगावत हो जाएगी।”
वहीं हकीकत में पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे (रिटायर्ड) ने कहा था, “हमें न सिर्फ अभी के सुरक्षा खतरों की चुनौतियों से निपटने का अंदाजा लगाना चाहिए, बल्कि यह भी अंदाजा लगाना चाहिए कि भविष्य में क्या होने वाला है। एक बार जब आप अंदाजा लगा लेते हैं, तो आपको उसी हिसाब से खुद को तैयार करना होगा। आपके पास वे काबिलियत होनी चाहिए जो आपको भविष्य की लड़ाइयों को अच्छे से लड़ने में काबिल बनाए। इसलिए सेना को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। आम तौर पर सेनाओं पर पिछली लड़ाई की तैयारी करने का आरोप लगाया जाता है। आपको उसी हिसाब से तैयारी करनी होगी, लेकिन यह काम नहीं करेगा। हमें याद रखना होगा कि हम नई पीढ़ी की क्षमताएं हासिल कर रहे हैं।”
अंतरराष्ट्रीय
‘फर्जी न्यूज’ फैलाने को लेकर ईरानी सरकार और अमेरिकी मीडिया पर बरसे ट्रंप, बोले- ईरान सिर्फ एआई लड़ाई जीत सकता है

TRUMP
वाशिंगटन, 16 मार्च : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गलत सूचनाएं फैलाने को लेकर अमेरिकी मीडिया और ईरानी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान केवल एआई द्वारा निर्मित फर्जी वीडियो के सहारे दुष्प्रचार की लड़ाई जीतने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आगाह किया कि ईरान द्वारा ‘एआई’ का उपयोग सूचना युद्ध में एक घातक हथियार के रूप में किया जा रहा है, ताकि वैश्विक स्तर पर भ्रम फैलाया जा सके।
ईरान पर निशाना साधते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “ईरान को लंबे समय से मीडिया के जरिए तथ्यों से छेड़छाड़ और पब्लिक रिलेशन्स का मास्टर माना जाता है। वे सेना के हिसाब से बेअसर और कमजोर हैं, लेकिन वे फेक न्यूज मीडिया को गलत जानकारी देने में सच में अच्छे हैं। अब, एआई एक और गलत जानकारी का हथियार बन गया है जिसका ईरान काफी अच्छे से इस्तेमाल करता है। वे दिन-ब-दिन खत्म होते जा रहे हैं।”
ट्रंप ने पोस्ट में आगे कहा कि ईरान नकली बोट्स् दिखाकर बता रहा है कैसे ये बोट्स समुद्र में अलग-अलग जहाजों पर गोली चला रही थीं, जो बहुत बढ़िया, ताकतवर और खतरनाक दिखती हैं, लेकिन ये बोट्स हैं ही नहीं। यह सब गलत जानकारी है, जो यह दिखाने के लिए है कि उनकी पहले से हारी हुई सेना कितनी मजबूत है!
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टिंग पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान के हमले में अमेरिका के पांच रिफ्यूलिंग प्लेन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। इनमें से चार विमान पूरी तरह सुरक्षित और सेवा में हैं। केवल एक विमान को आंशिक क्षति पहुंची है, जो मरम्मत के बाद जल्द ही दोबारा उड़ान भरने के लिए तैयार हो जाएगा। जिन बिल्डिंग्स और शिप में आग लगी हुई दिखाई गई है, वे आग नहीं हैं; यह एआई से बनी फेक न्यूज है। उदाहरण के लिए, ईरान, फेक न्यूज मीडिया के साथ मिलकर काम करते हुए, हमारे महान यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर को, जो दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित शिप में से एक है, समुद्र में बेकाबू होकर जलता हुआ दिखा रहा है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि जिन मीडिया आउटलेट्स ने इस तरह की फेक न्यूज फैलाई है, उनके खिलाफ देशद्रोह का चार्ज लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “सच तो यह है कि ईरान खत्म हो रहा है और वे सिर्फ वही लड़ाइयां जीतते हैं जो वे एआई के जरिए बनाते हैं और जिन्हें भ्रष्ट मीडिया आउटलेट्स फैलाते हैं। रेडिकल लेफ्टविंग प्रेस यह अच्छी तरह जानता है, लेकिन फिर भी झूठी कहानियां और झूठ फैलाता रहता है।”
अमेरिकी मीडिया पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि झूठी खबरों की वजह से इनकी अप्रूवल रेटिंग इतनी कम है। इन मीडिया संस्थानों की कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें खुशी है कि फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (एफसीसी) के चेयरमैन ब्रेंडन कैर इन भ्रष्ट और बेहद पक्षपाती न्यूज संगठनों के लाइसेंस की समीक्षा कर रहे हैं। उनके अनुसार, इन संस्थानों को अमेरिकी एयरवेव का मुफ्त इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है, लेकिन वे इसका उपयोग खबरों और अपने कई कार्यक्रमों में गलत जानकारी फैलाने के लिए करते हैं। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि लेट-नाइट शो होस्ट्स को खराब रेटिंग के बावजूद भारी सैलरी मिलती है और जैसा कि वे अपने शो द अप्रेंटिस में कहते थे, उन्हें कभी फायर नहीं किया जाता।
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