अंतरराष्ट्रीय
टैरिफ पर सुप्रीम फैसले के बाद अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर क्या होगा इसका असर? ट्रंप ने दिया ये जवाब
नई दिल्ली, 21 फरवरी : अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट की तरफ से टैरिफ लगाए जाने के बाद से लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है। कि इसका असर भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापारिक समझौते पर किस तरह से पड़ेगा, भारत को कोई लाभ मिलेगा या नहीं। यह सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछा गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस सवाल के जवाब में कहा, “नहीं, कुछ नहीं बदला। वे टैरिफ देंगे, और हम टैरिफ नहीं देंगे। भारत के साथ हमारी डील यह है कि वे टैरिफ देंगे। यह पहले जैसा नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी एक जेंटलमैन हैं, असल में एक बहुत अच्छे इंसान हैं, लेकिन वह उन लोगों से कहीं ज्यादा स्मार्ट थे। वह हमें लूट रहे थे। इसलिए हमने भारत के साथ एक डील की और अब यह एक निष्पक्ष समझौता है। हम उन्हें टैरिफ नहीं दे रहे हैं, वे टैरिफ दे रहे हैं। हमने थोड़ा फ्लिप किया।”
सवाल ये भी है कि क्या इससे भारत को कोई फायदा होगा? बता दें, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में भारत के ऊपर 25 फीसदी टैरिफ लगाया। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत के ऊपर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। इस तरह कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया, हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच जो हाल ही में अंतरिम व्यापार समझौता हुआ, उसमें इंडिया पर 25 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी किया गया। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने को लेकर जो 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया था, उसे भी हटाने की बात की गई।
अब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जो फैसला आया, उसके बाद ट्रंप ने ग्लोबली 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इसका ये मतलब है कि अन्य देशों की तरह भारत पर भी 10 फीसदी टैरिफ लागू होगा। हालांकि, भारतीय निर्यातकों के लिए यह थोड़ी सी चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि भारतीय निर्यात पर फिलहाल 3 फीसदी का एमएफएन लागू है। हालांकि, ट्रंप के नए टैरिफ के बाद इसमें 10 फीसदी का अलग शुल्क लागू हो सकता है।
व्हाइट हाउस ने इस संबंध में बताया कि यह घोषणा 150 दिनों के लिए अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली चीजों पर 10 प्रतिशत एड वेलोरम इंपोर्ट ड्यूटी लगाती है। यह टेम्पररी इंपोर्ट ड्यूटी 24 फरवरी को सुबह 12:01 बजे ईस्टर्न स्टैंडर्ड टाइम के हिसाब से लागू होगी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने या यूएस के सामने आने वाली बुनियादी इंटरनेशनल पेमेंट समस्याओं को ज्यादा असरदार तरीके से हल करने के लिए कुछ सामान पर टेम्पररी इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी।
इन प्रोडक्ट् में कुछ जरूरी मिनरल, करेंसी और बुलियन में इस्तेमाल होने वाले मेटल, एनर्जी और एनर्जी प्रोडक्ट; प्राकृतिक संसाधन और फर्टिलाइजर जिन्हें अमेरिका में उगाया, माइन किया या किसी और तरह से प्रोड्यूस नहीं किया जा सकता या जिन्हें घरेलू मांग को पूरा करने के लिए काफ़ी मात्रा में उगाया, माइन किया या प्रोड्यूस नहीं किया जा सकता; कुछ खेती के प्रोडक्ट, जिनमें बीफ, टमाटर और संतरे शामिल हैं; फार्मास्यूटिकल्स और फार्मास्यूटिकल सामग्री; कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स; पैसेंजर गाड़ियां, कुछ हल्के ट्रक, कुछ मीडियम और हेवी-ड्यूटी गाड़ियां, बसें, और पैसेंजर गाड़ियों, हल्के ट्रकों, हेवी-ड्यूटी गाड़ियों और बसों के कुछ पार्ट्स; कुछ एयरोस्पेस प्रोडक्ट और जानकारी वाली चीजें (जैसे, किताबें), डोनेशन, और साथ में सामान शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय
चीनी राज्य परिषद ने ‘भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ की जारी

बीजिंग, 10 अप्रैल : चीनी राज्य परिषद द्वारा जारी ‘चीन (भीतरी मंगोलिया) पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ 9 अप्रैल को सार्वजनिक की गई। इसके साथ ही चीन में पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्रों की कुल संख्या 23 हो गई है।
समग्र योजना भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र को सुधारों में अधिक स्वायत्तता प्रदान करती है, जिससे इसे प्रायोगिक परियोजनाएं संचालित करने और व्यापक क्षेत्रों में गहन स्तर पर मौलिक, एकीकृत और विशिष्ट अन्वेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इसमें 19 सुधार और नवाचार उपायों की रूपरेखा दी गई है, जिनमें सीमा व्यापार में नवाचार और विकास, अंतरराष्ट्रीय रसद सेवाओं को मजबूत करना, वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के रूपांतरण और अनुप्रयोग की दक्षता में सुधार करना और विभिन्न क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान का विस्तार करना शामिल है।
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