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Saturday,26-September-2026
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महाराष्ट्र

अंधेरी: एक्टर अक्षय कुमार, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कमिश्नर भूषण गगरानी, ​​विधायक अमित सट्टम और हारून खान की मौजूदगी में फ्लावर फेस्टिवल का उद्घाटन।

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मुंबई: रंग-बिरंगे फूलों से बने वाद्य यंत्रों की प्रतिकृतियां… फूलों से सजे मोर, तितलियां, हाथी, घोड़े और सनाई, चौघड़े, तुरही… फूलों की भरमार… अद्भुत पेटुनिया, ब्रोकली, साल्विया के पौधे। गेंदा, गुलाब, मोगरा आदि सुगंधित फूल… पौधे… बेलें, सब्जियां… और इन सबके लिए खाद, गमले आदि से सजे अंधेरी फूल महोत्सव का आज अभिनेता पद्मश्री श्री अक्षय कुमार के हाथों उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर मुंबई महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगरानी, ​​विधायक अमित साटम, विधायक हारून खान, नगरसेविका सुधा सिंह, नगरसेवक दीपक कोटेकर, नगरसेवक एम. रोहन राठौड़, नगरसेवक अनीश मकवानी, नगरसेविका सुनीता मेहता, नगरसेवक विट्ठल भंडेरी, नगरसेवक रूपेश सावरकर, नगरसेविका सावरकर, नगरसेविका भाग्यश्री कापसे, पश्चिम परिक्षेत्र के सहायक आयुक्त चक्रपाणि आले, मनपा उद्यान अधीक्षक जितेंद्र परदेशी और विभिन्न गणमान्य उपस्थित थे। हाल ही में, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने साउथ मुंबई में मुंबई फ्लावर फेस्टिवल ऑर्गनाइज़ किया था। लगभग 1.5 लाख मुंबईकरों ने इसमें हिस्सा लिया और एग्ज़िबिशन का मज़ा लिया। इस एग्ज़िबिशन के बाद, अब अंधेरी में भी फ्लावर फेस्टिवल ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है। यह दो दिन का फेस्टिवल अंधेरी रोड पर मौजूद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पुष्पा नरसी अड्यार में ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है। फ्लावर फेस्टिवल शनिवार, 14 फरवरी और रविवार, 15 फरवरी, 2026 को सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक सभी नागरिकों के लिए खुला है। अंधेरी फ्लावर फेस्टिवल को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। यहां पेड़, गमले, फर्टिलाइज़र, गार्डन के औज़ार, अलग-अलग पौधे और पेड़ों की नर्सरी, फूलों की दवाइयां, पेस्टिसाइड, स्प्रेयर, फर्टिलाइज़र वगैरह के लिए हॉल भी हैं। इसके साथ ही, अलग-अलग तरह के बोनसाई, सजावटी पौधे, फूल, सब्जियां, मेडिसिनल पौधे भी डिस्प्ले के लिए रखे गए हैं।
एक्टर अक्षय कुमार ने कहा, मुंबई बहुत बिज़ी शहर है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने एक सुंदर फ्लावर फेस्टिवल ऑर्गनाइज़ किया है। यह फ्लावर फेस्टिवल साल में दो बार होना चाहिए। फ्लावर फेस्टिवल में एक बात महसूस होती है, वह है यहां आकर ‘रुक जाना’। ज़िंदगी में ‘रुकना’ बहुत ज़रूरी है। ज़िंदगी में आकर शांत हो जाओ। यहाँ आओ, बैठो, देखो… ये फूल तुमसे कुछ कहना चाहते हैं, कि ये तुम्हारी ज़िंदगी में ‘शांति’ लाते हैं। खुद को खिलाओ। किसी से मुकाबला मत करो, बस खुद को खिलने दो और जब सब खिलते हैं, तभी एक ‘बगीचा’ बनता है। सबके पास बहुत सारे काम होते हैं। मैं भी बहुत काम करता हूँ। लेकिन मैं शाम 6 बजे के बाद खुद को पूरी तरह से आराम देता हूँ। क्योंकि सबसे ज़रूरी चीज़ है सेहत। हमें अपनी सेहत का बहुत ध्यान रखना चाहिए और फूलों का त्योहार आपको इस बारे में जागरूक करता है। मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कमिश्नर भूषण गगरानी ने कहा, फूलों का त्योहार मुंबई के पर्यावरण की रक्षा के लिए उठाया गया एक ज़रूरी कदम है। हम इस मुहिम और इस विरासत को और ऊँचे लेवल पर ले जाना चाहते हैं, ताकि हर मुंबईकर इसमें शामिल हो। प्रकृति का यह खजाना म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन या किसी एक व्यक्ति का नहीं होना चाहिए, यह हर मुंबईकर का खजाना है। हम सब इसे बचाना चाहते हैं।
MLA श्री अमित सट्टम ने कहा कि हम सभी को मुंबई शहर को हमेशा साफ़ और सुंदर रखना चाहिए। इसके लिए एक्टर ने एक सफाई कॉम्पिटिशन का आइडिया पेश किया। जिसमें अंधेरी का मुकाबला पारला से, पारला का सांताक्रूज से, सांताक्रूज का बांद्रा से, बांद्रा का माहिम से, माहिम का दादर से और दादर का मालाबार हिल से हो, उन्होंने सफाई का मुकाबला करने का सुझाव दिया। आने वाले समय में हम इस बारे में जरूर सोचेंगे। मुंबई अभी स्वच्छ भारत में नौवें नंबर पर है। MLA सट्टम ने यह भी कहा कि हम जल्द ही मुंबई को नंबर एक पर लाने की कोशिश करेंगे। अंधेरी में पहले फूल मेले में लोकल नागरिक, म्युनिसिपल स्कूलों के छात्र, युवा, सीनियर सिटिजन वगैरह आ रहे हैं।

महाराष्ट्र

मुंबई में गणेश विसर्जन के दौरान दो गुटों में हुआ विवाद, 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

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मुंबई के मालवणी (मलाड) इलाके में गणपति विसर्जन के दौरान विवाद, मारपीट, गाली-गलौज और जुलूस में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मालवाणी पुलिस ने शिकायतकर्ता के आधार पर आदिल (24), सुनील शेख (25), गौस (22), अजगर (23), जाकिर (26), जुबेर (25) और हुसेन (24) के खिलाफ का मामला दर्ज कर इनकी तलाश कर रही है।

पुलिस के अनुसार, 25 सितंबर की शाम करीब 7:15 बजे निरंकार नगर, एनटीसी स्कूल रोड, गेट नंबर 7, मालवणी, मालाड पश्चिम में गणपति विसर्जन के दौरान गणपति मंडप के प्रवेश द्वार के पास कोल्ड पायरो उपकरण लगाया गया था। इससे निकलने वाले कृत्रिम आग जैसे प्रभाव को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे सामने स्थित दुकान में आग लग सकती है। इसी बात को लेकर आदिल, सुनील शेख, गौस, अजगर और जाकिर ने गणपति मंडल के कार्यकर्ताओं से विवाद करने लगे।

पुलिस के मुताबिक, जुबेर और हुसैन ने रोहित ठाकुर और सुशील महतो के साथ हाथापाई की। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अयान शेख नामक व्यक्ति हाथ में एक मटका लेकर आया और महिला कार्यकर्ताओं के सामने गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने के लिए दौड़ा।

अनंत चतुर्दशी के दिन शुक्रवार सुबह, लालबाग, परेल, गिरगांव और अन्य क्षेत्रों के पूजनीय गणपति प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा शुरू हुई। ढोल-ताशा, नासिक बाजा और बैंजो की थापों पर लाउडस्पीकर के साथ-साथ गुलाल उड़ाते हुए और भीलतू वाद्ययंत्रों (बीम) का प्रयोग करते हुए जुलूस रवाना हुआ। ‘लालबागचा राजा,’ ‘मुंबईचा राजा,’ ‘परेलचा राजा,’ ‘गिरगांवचा राजा,’ ‘गिरगांवचा महाराजा,’ ‘भगवान गणपति’ और गणेशोत्सव मंडलों की गणेश प्रतिमाएं सुबह की ध्वनि के साथ विसर्जन स्थलों की ओर रवाना हुईं। ‘लालबागचा राजा’ के दर्शन के लिए लालबाग बाजार के बाहर भक्तों की भारी भीड़ जमा थी। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। भगदड़ से बचने के लिए ‘सड़क अवरोध’ लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया गया।

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के 265 तालुकों को सीएम फडणवीस ने किया सूखा घोषित, और सूखे से निपटने के कई उपायों की घोषणा

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूखे से प्रभावित किसानों और नागरिकों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 358 तालुकों (तहसील) में से 265 में सूखा घोषित किया गया है। जिन 265 तालुकों में ‘ट्रिगर-1’ के मानक पूरे हुए हैं, उन्हें सूखा-प्रभावित घोषित किया गया है। इससे पता चलता है कि राज्य के लगभग 75 प्रतिशत तालुकों में अब सूखे जैसे हालात हैं।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सूखे से निपटने के कई उपायों की घोषणा की है। इसके तहत लैंड रेवेन्यू में छूट, फसल लोन का रीस्ट्रक्चर, खेती से जुड़े लोन की रिकवरी पर रोक, खेती के पंपों के मौजूदा बिजली बिल में छूट (7.5 हॉर्सपावर कैपेसिटी वाले इलेक्ट्रिक पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ है, अब उससे ज़्यादा कैपेसिटी वाले इलेक्ट्रिक पंपों को भी छूट), स्कूल-कॉलेज के छात्रों की परीक्षा शुल्क में छूट, एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के तहत नियमों में ढील देकर अधिक से अधिक काम शुरू किए जाएंगे।

इसके अलावा, जहां जरूरी होगा वहां पीने के टैंकर पहुंचाए जाएंगे। किसानों के खेती के पंपों का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा, खेती पर निर्भर किसानों-खेती मजदूरों को अनाज मिलेगा, जानवरों के लिए चारे का इंतजाम, बड़े पैमाने पर पानी बचाने का काम किया जाएगा। पिछले आदेश के मुताबिक, पेयजल और जानवरों के लिए पानी की प्लानिंग जारी रहेगी। सभी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को पंचनामा प्रक्रिया तुरंत पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही फसलों की हालत दिखाने वाली तस्वीरें और जीपीएस से डेटा इकट्ठा करने के आदेश जारी किए गए हैं।

इसके पहले 24 सितंबर वाशिम दौरे पर पहुंचे देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार जल्द ही प्रभावित इलाकों में गंभीर सूखा घोषित करने के लिए एक सरकारी आदेश (जीआर) जारी करेगी। साथ ही, खेती-किसानी के बढ़ते संकट से जूझ रहे राज्य में उन सभी पात्र किसानों को फसल कर्ज माफी का लाभ दिया जाएगा, जो पिछली योजनाओं में छूट गए थे।

सीएम ने गांव में किसानों को संबोधित करते हुए लोगों को भरोसा दिलाया था कि सरकारी तंत्र ग्रामीण राहत कार्यों को प्राथमिकता देगा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि आर्थिक मदद के अलावा, राज्य प्रशासन पीने के पानी की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने, मवेशियों के लिए चारा बांटने और फसल के नुकसान का आकलन (पंचनामा) तेजी से करने के लिए आपातकालीन उपाय कर रहा है।

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र यूसीसी कमेटी से पूर्व जज के इस्तीफे पर जयराम रमेश बोले-‘हर राज्य का अलग यूसीसी संविधान की भावना के खिलाफ’

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महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित समिति से हाईकोर्ट के एक पूर्व जज के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संचार) और सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि इस इस्तीफे ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और समिति के कामकाज पर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें हर राज्य अपना अलग-अलग समान नागरिक संहिता बनाए? इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। क्या डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान निर्माताओं ने कभी सोचा था कि एक राजनीतिक दल की राजनीतिक चालों के हिसाब से राज्य अलग-अलग यूसीसी बनाने की होड़ करेंगे? इसका जवाब भी नहीं है।

कांग्रेस नेता ने 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 17 जून 2016 को मोदी सरकार ने ही यूसीसी के सवाल को विस्तृत अध्ययन के लिए विधि आयोग के पास भेजा था। आयोग ने व्यापक रिसर्च के बाद 31 अगस्त 2018 को अपना कंसल्टेशन पेपर प्रकाशित किया था। इसके पेज 7 के पैराग्राफ 1.15 में स्पष्ट कहा गया था कि “इस स्तर पर समान नागरिक संहिता बनाना न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।” आयोग ने अलग-अलग पारिवारिक कानूनों में मौजूद भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की थी।

रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने उसी आयोग की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया, जिसे उसने खुद जिम्मा सौंपा था क्योंकि तथ्य उसके राजनीतिक एजेंडे से मेल नहीं खाते थे। पिछले तीन वर्षों में भाजपा शासित राज्यों ने यूसीसी के अपने-अपने वर्जन जबरन पारित कराए हैं। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू हो गया जबकि गुजरात में 24 मार्च 2026, असम में 27 मई 2026 और मध्य प्रदेश में 21 जुलाई 2026 को विधानसभा में विधेयक पारित किया गया।

उन्होंने कहा कि ये राज्यस्तरीय यूसीसी एक जैसे भी नहीं हैं। इनमें अलग-अलग प्रावधान, अलग-अलग दंड और कई छूट हैं। उत्तराखंड का यूसीसी कई पितृसत्तात्मक परंपराओं को आज भी जारी रखे हुए है और कानून का पालन करने वाले निवासियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर रहा है।

जयराम रमेश ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। एनडीए के बाकी दलों की आवाज को दबा दिया गया है। कांग्रेस के अनुसार, मोदी सरकार के लिए यूसीसी कोई कानूनी सुधार नहीं बल्कि विभाजन, व्यवधान और ध्यान भटकाने का औजार है, जो समाज को स्थायी ध्रुवीकरण में बनाए रखने का साधन है।

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