अंतरराष्ट्रीय
ग्लोबल हिंदू गठबंधन ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर कार्रवाई की मांग की
वॉशिंगटन, 10 फरवरी : बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। चुनाव की तारीख के ऐलान के बाद से हर दिन किसी ना किसी हिंदू को निशाना बनाया गया। अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ रही हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जाहिर की जा रही है।
हिंदू और कई धर्मों को मानने वाले समूहों के एक ग्लोबल गठबंधन ने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए तुरंत अंतरराष्ट्रीय एक्शन लेने की मांग की है। समूहों ने कहा कि हिंसा, धमकी और जबरदस्ती हटाने का लगातार पैटर्न बना हुआ है।
हिंदूज एडवांसिंग ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (एचएएचआरआई) ने अंतरराष्ट्रीय एक्शन की मांग की है। यह हिंदूपैक्ट की एक पहल है। समूह ने कहा कि 15 देशों के 125 से ज्यादा संगठनों और लोगों ने इस अपील से संबंधित पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
चिट्ठी में सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दखल देने की अपील की गई है। एचएएचआरआई के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राहुल सुर ने कहा, “बांग्लादेश के हिंदू देश के मूल निवासी हैं, जिन्हें यूएन कन्वेंशन ऑन द राइट्स ऑफ इंडिजिनस पीपल्स, 2007 के तहत भेदभाव से अपनी जिंदगी और संस्कृति की सुरक्षा का हक है। हम जो देख रहे हैं, वह बिल्कुल उल्टा है। यह कभी-कभार होने वाली हिंसा या अलग-थलग अराजकता नहीं है। यह एक लगातार चलने वाला मानवाधिकार संकट है जिसकी जड़ में सजा से छूट है।”
चिट्ठी में हत्याओं और भीड़ की हिंसा का जिक्र किया गया है, जिसका हाल ही में बांग्लादेश में उदाहरण देखने को मिला। इसके अलावा चिट्ठी में मंदिरों और घरों पर हमलों का जिक्र है। इसमें हिंदुओं को टारगेट करने के लिए ईशनिंदा के आरोपों के इस्तेमाल की ओर भी इशारा किया गया है।
इसमें 18 दिसंबर, 2025 को दीपू चंद्र दास की सरेआम हत्या का जिक्र किया गया है। उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। हत्या का वीडियो ऑनलाइन बहुत फैल गया। इस घटना ने दुनिया भर का ध्यान खींचा।
सबमिट के मुताबिक, बांग्लादेश में अगस्त 2024 और 30 नवंबर 2025 के बीच अल्पसंख्यकों पर 2,673 हमले हुए। ये हमले पिछली सरकार के हटने के बाद हुए। गठबंधन ने कहा कि हिंदू समुदाय में डर फैल गया है।
चिट्ठी में उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है, जिसमें अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग भी शामिल है और 2025 में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती धमकी और हिंसा का जिक्र है।
हिंदूपैक्ट के फाउंडर और एग्जीक्यूटिव चेयर अजय शाह ने कहा कि डेमोग्राफिक बदलाव एक गहरी समस्या दिखाता है। शाह ने कहा, “सिर्फ ये नंबर ही एक भयानक कहानी बताते हैं। एक लोकतंत्र चुनिंदा तौर पर अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकती। जब लगातार हिंसा और धमकी के कारण कोई अल्पसंख्यक इस पैमाने पर सिकुड़ती है, तो यह सरकार और ग्लोबल सिस्टम की नाकामी है, जिसका मकसद ऐसे नतीजों को रोकना है।”
गठबंधन ने कहा कि 1951 में बांग्लादेश की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 22 फीसदी थी। यह आंकड़ा अब 7 फीसदी से कम है। इसने कहा कि हर साल लगभग 230,000 हिंदू देश छोड़ देते हैं। समूह ने इस ट्रेंड को धार्मिक हत्या बताया।
इसके अलावा, चिट्ठी में अमेरिका से कार्रवाई करने की अपील की गई है। इसमें वाशिंगटन से एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम भेजने के लिए कहा गया है। इसमें ट्रेड पेनल्टी लगाने की अपील की गई है। इसमें सताए गए हिंदुओं के लिए रिफ्यूजी प्रोटेक्शन की मांग की गई है। इसमें यूएन पीसकीपिंग मिशन में बांग्लादेश की भूमिका की समीक्षा करने की भी मांग की गई है।
अपील में यूरोपीय यूनियन से सजा देने वाले टैरिफ लगाने की अपील की गई है। इसमें ईयू जांच मिशन की भी मांग की गई है। एचएएचआरआई की मांग है कि संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएं इन गलत कामों की निंदा करें और उल्लंघन की एक स्वतंत्र जांच की मांग करें।
एचएएचआरआई ने कहा कि 25 से ज्यादा अमेरिकी शहरों में रैलियां की गईं। समूहों ने यूएन हाई कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट्स को एक याचिका भी दी। इसमें कहा गया कि दुनिया भर में हजारों लोगों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।
सूर ने कहा, “याचिका, रैलियां और फॉर्मल सबमिशन मिलकर दिखाते हैं कि यह चिंता सिर्फ नीति बनाने के स्तर तक ही सीमित नहीं है। सभी धर्मों के आम नागरिक मांग कर रहे हैं कि सार्वभौमिक मानवाधिकार मानक को एक जैसा लागू किया जाए।”
बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया है। यूएन रिपोर्ट्स और अमेरिकी कांग्रेस में पहले भी उठाया गया है। भारत और अमेरिका ने भी क्षेत्रीय और बहुपक्षीय फोरम में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को उठाया है।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
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ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
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