राष्ट्रीय
मुंबई मसाला: अब समय आ गया है कचरा मुक्त मुंबई का।
मुंबई: नव निर्वाचित पार्षदों का पहला कार्य मुंबई को कूड़ा-मुक्त बनाना होना चाहिए। कुछ दिन पहले हम अंधेरी गए थे और वहां हर जगह कूड़ा देखकर दंग रह गए। ऐसा लग रहा था मानो सफाईकर्मी छुट्टी पर चले गए हों। कुछ साल पहले एक कार्यकर्ता ने अग्निशमन दल की तर्ज पर कूड़ा-सफाई दल बनाने का सुझाव दिया था। विचार यह था कि नागरिक एक विशेष नंबर डायल कर सकें और कूड़ा उठाने वाले ट्रक आकर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर उठा ले जाएं। यह अच्छा विचार है, लेकिन मुंबईवासियों से भी थोड़ी नागरिक भावना दिखाने का आग्रह किया जाना चाहिए। कूड़ा फैलाने वालों पर कड़ी सजा होनी चाहिए। स्वच्छता के मुद्दे पर पूरे शहर को अभियान में क्यों न लगाया जाए? लक्ष्य यह होना चाहिए कि शहर को सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिले।
बहुत समय बाद हमने गिरगाँव चौपाटी पर अरब सागर के सामने स्थित शाकाहारी रेस्तरां रिवाइवल जाने का फैसला किया, जिसकी स्थापना 1947 में हुई थी। पहली मंजिल तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जहाँ आपका स्वागत एक विशाल मूर्ति द्वारा किया जाता है। अंदर का वातावरण उतना आकर्षक नहीं है और इसे नवीनीकरण की आवश्यकता है। कर्मचारी बहुत विनम्र थे और हमें एक ऐसी मेज पर बैठाया गया जहाँ से समुद्र का स्पष्ट दृश्य दिखाई दे रहा था।
सूप में ब्रोकली शोरबा शामिल था और स्टार्टर्स सेक्शन में एवोकैडो सेव पूरी जैसे दिलचस्प व्यंजन थे। हमने सीधे मुख्य भोजन पर जाने का फैसला किया और छोले की सब्जी, दाल मखनी, तंदूरी रोटी और लच्छा पराठा ऑर्डर किया। सब्जी तो बहुत अच्छी थी, लेकिन उसे एक छोटे, गंदे दिखने वाले एल्युमिनियम प्रेशर कुकर में परोसा गया था। दाल तो बहुत अच्छी थी, लेकिन लच्छा पराठा पूरी तरह से पका नहीं था और बहुत निराशाजनक था। कीमत औसतन 500 रुपये प्रति व्यंजन थी और हमें पैसे के हिसाब से 50% भी संतुष्टि नहीं मिली। काश हम बगल वाले क्रिस्टल या सड़क के उस पार ठक्कर में चले गए होते।
राजनीतिक विश्लेषक दावा कर रहे हैं कि एसएस (यूबीटी)-एमएनएस गठबंधन की हार का एक कारण राज ठाकरे द्वारा तमिलनाडु के युवा भाजपा नेता के. अन्नामलाई को “रसमलाई” कहना था! जाहिर तौर पर इसी वजह से दक्षिण भारतीय वोट बड़ी संख्या में भाजपा को मिले। मुझे यह सिद्धांत पचाना मुश्किल लगता है क्योंकि तमिलनाडु के बाहर अन्नामलाई को ज्यादा लोग नहीं जानते।
लेकिन राज द्वारा बाल ठाकरे के नारे “हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी” को दोहराने से सत्तर के दशक में शिवसैनिकों द्वारा दक्षिण भारतीयों पर किए गए हमलों की पुरानी यादें ताजा हो गईं। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के उम्मीदवार उन सभी वार्डों में जीते जहां पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने प्रचार किया था। मीठा बदला लेने के लिए भाजपा नेता तेजिंदर सिंह बग्गा ने ठाकरे को रस मलाई के डिब्बे भेजे। सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि परिणाम वाले दिन 10 करोड़ रुपये की रस मलाई बिक गई। पता चला है कि अन्नामलाई भाजपा द्वारा आयोजित की जा रही भव्य विजय रैली में विशेष अतिथि होंगे।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
राजनीति
पश्चिम बंगाल चुनाव : अमित शाह ने भाजपा का ‘भरोसा पत्र’ किया जारी, हर वर्ग को मिलेगा लाभ

amit
कोलकाता, 10 अप्रैल : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने शुक्रवार को चुनावी घोषणापत्र जारी किया, जिसे पार्टी ने ‘भरोसा पत्र’ नाम दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में इस संकल्प पत्र का अनावरण किया।
घोषणापत्र में महिलाओं, युवाओं और किसानों समेत सभी प्रमुख वर्गों को ध्यान में रखा गया है। इसमें कई योजनाओं और नकद सहायता के वादे भी शामिल हैं।
इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि यह संकल्प पत्र बंगाल को निराशा से बाहर निकालने का रास्ता दिखाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह दस्तावेज कानून का राज स्थापित करने, रोजगार बढ़ाने और ‘सोनार बंगला’ के निर्माण का भरोसा देता है। उन्होंने कहा, “यह संकल्प पत्र बंगाल के विकास का रोडमैप है, जो हर वर्ग के लोगों को नई दिशा देगा।”
अमित शाह ने राज्य की सत्ताधारी टीएमसी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता पहले वामपंथी सरकार से परेशान होकर ममता बनर्जी को सत्ता में लाई थी। फिर उन्हें दूसरी और तीसरी बार भी मौका दिया गया लेकिन सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी।
उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के शासन में ‘सिंडिकेट राज, गुंडाराज और घुसपैठ’ जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। अमित शाह ने कहा कि आज वही जनता, जिसने कभी ममता बनर्जी का समर्थन किया था, अब खुद को असुरक्षित और निराश महसूस कर रही है और बदलाव चाहती है।
संकल्प पत्र को लेकर अमित शाह ने कहा कि यह किसानों को कृषि संकट से उबारने, बेरोजगार युवाओं को अवसर देने और महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करने की दिशा में काम करेगा। साथ ही यह बंगाल की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने वाले हर नागरिक को नई उम्मीद और भरोसा देगा।
उन्होंने कहा कि यह घोषणापत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन के अनुरूप तैयार किया गया है और बंगाल के लिए विकास का स्पष्ट रोडमैप पेश करता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ लागू होगी। मैं लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि हम घुसपैठियों की पहचान करेंगे, उन्हें सूची से हटाएंगे और देश से बाहर भेज देंगे। सभी सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता मिलेगा और सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन दिया जाएगा। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में कुर्माली और राजबोंगशी भाषाओं को शामिल किया जाएगा। चावल, आलू और आम की खेती के लिए सहायता दी जाएगी। पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत सभी मछुआरों का पंजीकरण किया जाएगा और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पश्चिम बंगाल को एक अग्रणी औद्योगिक और मछली-निर्यात केंद्र बनाया जाएग।
उन्होंने कहा कि भाजपा हर महिला को 3,000 रुपए देगी। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी और बेरोजगार युवाओं को 3,000 रुपए दिए जाएंगे। ‘आयुष्मान भारत योजना’ के साथ-साथ केंद्र सरकार की सभी योजनाओं को लागू किया जाएगा। मुफ्त एचपीवी टीकाकरण, ब्रैस्ट कैंसर की जांच (स्क्रीनिंग), उत्तरी बंगाल में एम्स, आईआईटी और आईआईएम की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही एक ‘वंदे मातरम संग्रहालय’ की स्थापना की जाएगी और धार्मिक रीतिरिवाजों के पालन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाला कानून बनाया एगा।
राष्ट्रीय
शिवसेना (यूबीटी) सांसदों से गुप्त बैठक की खबरें अफवाह, एकनाथ शिंदे ने किया खंडन

मुंबई, 10 अप्रैल : महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं। खबरों में दावा किया जा रहा था कि एकनाथ शिंदे गुप्त रूप से शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों से संपर्क में हैं और उन्हें अपने गुट में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इस सिलसिले में कुछ गुप्त बैठकें भी हुई हैं।
हालांकि, इन सभी दावों पर अब खुद शिंदे का बयान सामने आया है। उन्होंने इन खबरों को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है। शिंदे ने साफ कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के साथ उनकी किसी भी तरह की कोई बैठक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें बेबुनियाद हैं और गलत इरादे से फैलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को गुमराह करना है।
शिंदे ने यह भी कहा कि पिछले डेढ़ साल से लगातार ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद उनके गुट में शामिल होने वाले हैं। लेकिन, अब तक इनमें कोई सच्चाई सामने नहीं आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन खबरों में कोई तथ्य नहीं है और इन्हें केवल सनसनी फैलाने के लिए प्रचारित किया जा रहा है।
इसके साथ ही शिंदे ने मीडिया से अपील की कि वह इस तरह की अपुष्ट और सनसनीखेज खबरों को प्रसारित करने से बचें। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पत्रकारिता के तहत तथ्यों की पुष्टि करना जरूरी है, ताकि जनता तक सही और सटीक जानकारी पहुंच सके।
वहीं, राजनीतिक हलकों में इन दावों को लेकर भले ही चर्चाएं जारी हों। लेकिन, शिंदे के इस बयान के बाद स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। फिलहाल, शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के पार्टी बदलने को लेकर कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं और इसे केवल अफवाह ही माना जा रहा है।
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