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Wednesday,23-September-2026
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सीएम ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को पत्र, कहा- बिना गलती के परेशान किए जा रहे वोटर

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कोलकाता, 12 जनवरी: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में हो रही कथित गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया से आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और कई योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

ममता बनर्जी ने पत्र में लिखा कि जिन मतदाताओं को सुनवाई नोटिस भेजे जा रहे हैं, वे पहले से ही वर्ष 2002 की मतदाता सूची से स्वयं या अपने परिजनों के माध्यम से मैप किए जा चुके हैं। ऐसे मामलों में सुनवाई नोटिस जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे न केवल मतदाताओं में भ्रम फैल रहा है, बल्कि उन्हें बेवजह मानसिक और प्रशासनिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

साथ ही, इन नोटिसों को लेकर फील्ड में काम कर रही टीमों को भी जनता के विरोध और नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि मतदाता इसे बिना किसी गलती के उत्पीड़न मान रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने एसआईआर के दौरान सामने आ रही दो बड़ी खामियों की ओर विशेष रूप से ध्यान दिलाया। पहली खामी यह है कि सुनवाई के दौरान मतदाता अपनी पात्रता से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में इन दस्तावेजों की कोई पावती या रसीद उन्हें नहीं दी जा रही। बाद में जब सत्यापन या अगली सुनवाई होती है, तो वही दस्तावेज ‘रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं’ बताए जाते हैं और इसी आधार पर मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाते हैं। ममता बनर्जी ने इसे पूरी तरह से गलत और अस्वीकार्य प्रक्रिया बताया।

उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की रसीद न देना मतदाताओं को असहाय बना देता है और उन्हें प्रशासनिक लापरवाही का शिकार होना पड़ता है। यह पूरी प्रक्रिया तकनीकी औपचारिकताओं पर आधारित और यांत्रिक हो गई है, जिसमें विवेकपूर्ण निर्णय का अभाव है। इससे एसआईआर का मूल उद्देश्य ही विफल हो रहा है, जिसका मकसद मतदाता सूची को शुद्ध और मजबूत बनाना है, न कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं को बाहर करना।

दूसरी बड़ी खामी के रूप में मुख्यमंत्री ने 2002 की मतदाता सूचियों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया का जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि पुराने, गैर-डिजिटाइज्ड मतदाता रिकॉर्ड को एआई टूल के जरिए स्कैन और अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया गया, जिसमें नाम, उम्र, लिंग, रिश्ते और अभिभावक के नाम जैसी जानकारियों में गंभीर गलतियां हुईं। इन त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की श्रेणी में डाल दिया गया।

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि पिछले 23 वर्षों में कई मतदाताओं ने फॉर्म-8 के जरिए अपने विवरण सही कराए थे, जिन्हें विधिसम्मत सुनवाई के बाद चुनाव अधिकारियों ने मंजूरी दी थी और वे 2025 की मतदाता सूची में शामिल हैं। इसके बावजूद, अब चुनाव आयोग उन्हीं मतदाताओं से दोबारा पहचान और पात्रता साबित करने को कह रहा है, जो पूरी तरह मनमाना और असंवैधानिक है।

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि प्रक्रिया को फिर से 2002 पर ले जाया जा रहा है, तो क्या इसका मतलब यह है कि पिछले दो दशकों में किए गए सभी संशोधन अवैध थे?

उन्होंने कहा कि नाम या उम्र में मामूली अंतर जैसे ‘केआर’ और ‘कुमार’ या ‘शेख’ और ‘एसके’ जैसी त्रुटियों को बिना सुनवाई के, टेबल-टॉप स्तर पर ही सुलझाया जा सकता है।

बनर्जी ने चुनाव आयोग से अपील की कि वह इन मुद्दों पर तत्काल ध्यान दे ताकि नागरिकों की पीड़ा समाप्त हो, प्रशासनिक तंत्र पर अनावश्यक दबाव न पड़े, और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

राष्ट्रीय समाचार

जयपुर के मर्सिडीज वर्कशॉप में आग, आठ लग्जरी कारें जलकर हुईं राख

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राजस्थान के जयपुर में बालाजी मार्केट स्थित मर्सिडीज वर्कशॉप में भीषण आग लग गई, जिससे लगभग आठ कारें और महंगे स्पेयर पार्ट्स व एक्सेसरीज जलकर खाक हो गए।

आग से निकला घना धुआं लगभग पांच किलोमीटर दूर से ही दिखाई दे रहा था। यह घटना मंगलवार देर रात हुई।

यह वर्कशॉप सांगानेर सदर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने की कोशिशें शुरू कर दीं। एहतियात के तौर पर आसपास के इलाके की बिजली भी काट दी गई ताकि आग को फैलने से रोका जा सके।

जब आग लगी, तो वर्कशॉप में नई और पुरानी मिलाकर 50 से ज्यादा गाड़ियां खड़ी थीं। इससे पहले कि फायर फाइटर्स आग पर काबू पाते, तेज लपटों ने करीब आठ गाड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। फायर फाइटर्स और पुलिसकर्मियों ने समय रहते कई अन्य गाड़ियों को वर्कशॉप से ​​बाहर निकाल लिया, जिससे और ज्यादा नुकसान होने से बच गया।

फायर ऑफिसर उषा शर्मा ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए करीब 10 फायर टेंडर तैनात किए गए थे। बताया जा रहा है कि फायर टेंडर्स ने लगभग दो घंटे तक आग बुझाने के दौरान 20 से ज्यादा चक्कर लगाए। सांगानेर सदर एसएचओ कमलेश शर्मा ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान कई गाड़ियों को सुरक्षित रूप से परिसर से बाहर निकाला गया। साथ ही, इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

शुरुआती जांच से पता चलता है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी हो सकती है। हालांकि, आग लगने की सही वजह का अभी आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल पाया है। पुलिस और फायर विभाग के अधिकारी वर्कशॉप के अंदर गाड़ियों, स्पेयर पार्ट्स और अन्य सामान को हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं।

इससे पहले दिन में जयपुर में नारायण सिंह सर्कल के पास एक मॉल में भी मंगलवार दोपहर 2 बजे आग लग गई थी, जिससे मॉल के अंदर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। आग का पता चलते ही मॉल की बिजली सप्लाई तुरंत बंद कर दी गई। दो फायर टेंडर मौके पर पहुंचे और करीब 30 मिनट में आग पर काबू पा लिया।

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राष्ट्रीय समाचार

एशियन डेवलपमेंट बैंक ने भारत की 2026 की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया

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एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने 2026 (वित्त वर्ष 2026-27) के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया है। यह उसके पहले के 6.6 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक अधिक है।

एडीबी ने एक बयान में कहा कि दक्षिण एशिया के लिए इस साल की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें भारत के आर्थिक विकास में मजबूत सरकारी निवेश और निर्यात में ठोस वृद्धि की अहम भूमिका है।

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि 2025 के 5.5 प्रतिशत से घटकर इस साल 5 प्रतिशत रह सकती है। इसके बाद 2027 (वित्त वर्ष 2027-28) में यह मामूली बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो सकती है।

2026 का यह अनुमान जुलाई में जारी पिछले अनुमान से 0.1 प्रतिशत अंक अधिक है।

एडीबी के अध्यक्ष मासातो कांडा ने कहा, “क्षेत्र लचीला बना हुआ है, लेकिन जोखिम बढ़ रहे हैं।”

मजबूत हो रहा ला नीना के विपरीत अल नीनो और शुष्क परिस्थितियों के कारण फसल उत्पादन कम हो सकता है और जलविद्युत उत्पादन घट सकता है। इससे खाद्य और ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं और सबसे कमजोर वर्गों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ सकता है।

कांडा ने कहा कि लंबे समय से जारी ऊर्जा संकट और वित्तीय बाजारों में फिर से बढ़ते जोखिमों के बीच सरकारों के लिए सबसे अधिक प्रभावित लोगों की सुरक्षा और तैयारी करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि एडीबी ऐसे प्रयासों का मजबूती से समर्थन कर रहा है।

एडीबी ने कहा कि मजबूत निवेश, सरकार का प्रोत्साहन और वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) निवेश चक्र से बढ़े मजबूत टेक्नोलॉजी निर्यात आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत होता अल नीनो ऊर्जा तथा खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

एशियन डेवलपमेंट आउटलुक (एडीओ) सितंबर 2026 में एडीबी ने 2026 के लिए क्षेत्रीय महंगाई का अनुमान जुलाई के 4.3 प्रतिशत से घटाकर 4.2 प्रतिशत कर दिया है। कीमतों को स्थिर करने के उपायों ने लगातार ऊंची ऊर्जा कीमतों के प्रभाव को आंशिक रूप से कम किया है।

एडीओ सितंबर 2026 के अनुसार, क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के परिदृश्य के सामने दो प्रमुख जोखिम हैं।

पहला जोखिम बढ़ता संघर्ष है, विशेष रूप से मध्य पूर्व में संघर्ष के विस्तार और रूस-यूक्रेन युद्ध के तेज होने का। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊंची और अस्थिर बनी रह सकती हैं तथा इसका असर अन्य जिंसों पर भी पड़ सकता है।

दूसरा जोखिम बहुत मजबूत अल नीनो है, जिसके 2027 की पहली तिमाही तक बने रहने का अनुमान है। इससे ऊर्जा की मांग बढ़ सकती है और कृषि उत्पादन घट सकता है, जिससे ईंधन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

एडीबी ने कहा कि एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों के मूल्यांकन में तेज गिरावट, वित्तीय परिस्थितियों का सख्त होना और व्यापार नीति को लेकर फिर से बढ़ती अनिश्चितता भी आर्थिक वृद्धि के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकती है।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर में आर्थिक गतिविधियां रहीं मजबूत, पीएमआई 56 के पार

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भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रही हैं और इससे कंपोजिट पीएमआई 56.5 पर रहा है, जो कि अगस्त में 54.3 पर था। यह जानकारी एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई डेटा में बुधवार को दी गई।

एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों सेक्टर्स के डेटा को शामिल किया जाता है।

आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों कंपनियों ने मजबूत ग्रोथ दिखाई है। इस दौरान नए ऑर्डर और नौकरियों में भी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, महंगाई का दबाव कम हुआ और कारोबारी भरोसा मजबूत हुआ।

आंकड़े के अनुसार, सितंबर में निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई है और यह जून के बाद सबसे उच्चतम स्तर पर हैं। साथ ही, संबंधित इंडेक्स अपने लंबे समय के औसत से ऊपर पहुंच गया है।

एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग में मजबूती के कारण प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में तेजी आई है। आउटपुट और नए घरेलू ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं। मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव के कारण कंपनियों ने अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर बनाना शुरू कर दिया है।”

भंडारी ने बताया कि इनपुट की खरीद में तेजी आई है और तैयार माल के स्टॉक का इंडेक्स अब साढ़े 11 साल के उच्चतम स्तर पर है। मैन्युफैक्चरर्स के लिए कीमतों का दबाव बढ़ा है और आउटपुट की कीमतों में महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जो मार्जिन बचाने की नई कोशिश का संकेत है।

सितंबर में भारतीय प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के कुल नए बिजनेस में तेजी से बढ़ोतरी हुई।

दोनों सेक्टर में डिमांड बढ़ी, लेकिन सामान बनाने वाली कंपनियों में यह तेजी ज्यादा साफ तौर पर देखी गई। यहां, सेल्स में बढ़ोतरी सर्विस कंपनियों के मुकाबले ज्यादा रही और यह सात महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

सर्विस क्षेत्र की कंपनियों ने बताया कि मार्केटिंग की कोशिशों से ऑर्डर मिलने में मदद मिली, सर्वे के क्वालिटेटिव हिस्से में प्रॉपर्टी, ट्रांसपोर्ट सर्विस और नई ट्रैवल बुकिंग के लिए ज्यादा मांग का जिक्र किया गया है।

वहीं, डेटा से पता चला कि सामान बनाने वाली कंपनियों ने एल्युमीनियम प्रोडक्ट, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, खाने-पीने की चीजों, फार्मास्युटिकल सामान और आम तौर पर नए मॉडलों की डिमांड में बढ़ोतरी की सूचना दी।

इसके अलावा, सितंबर में कुल रोजगार में मजबूत बढ़ोतरी हुई, क्योंकि कंपनियों ने आउटपुट और नए ऑर्डर में लगातार बढ़ोतरी के बीच अपनी स्टाफिंग क्षमता को बढ़ाना जारी रखा। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस, दोनों सेक्टर में नौकरियां पैदा हुईं और विस्तार की दरें लगभग एक जैसी रहीं।

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