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भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे सत्र में लाल निशान में खुला, मेटल इंडेक्स में दिखा सबसे ज्यादा दबाव

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मुंबई, 8 जनवरी: वैश्विक बाजार के मिले-जुले संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में लाल निशान में खुले। इस दौरान निफ्टी के अधिकतर इंडेक्स गिरावट के साथ ट्रेड करते नजर आए।

शुरुआती कारोबार में खबर लिखे जाने तक 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 71.73 अंक या 0.08 प्रतिशत गिरकर 84,889 के लेवल कारोबार कर रहा था, तो वहीं निफ्टी 26.95 अंक या 0.10 प्रतिशत गिरकर 26,114 पर था।

इस दौरान व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में हल्की 0.02 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली।

सेक्टरवार देखें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसमें 1.16 प्रतिशत की गिरावट आई, निफ्टी आईटी और पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.5-0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, तो वहीं निफ्टी फार्मा इंडेक्स 0.25 प्रतिशत गिर गया।

वैश्विक स्तर पर सभी की निगाहें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला से जुड़ी गतिविधियों पर बनी हुई है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।

सेंसेक्स पैक में एशियन पेंट्स, टीसीएस, कोटक बैंक, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट, सन फार्मा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एमएंडएम और बजाज फिनसर्व में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली, जिनमें 1.2 फीसदी तक की कमजोरी दर्ज की गई।

वहीं दूसरी ओर, बीईएल, ट्रेंट, टाइटन कंपनी, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, एचयूएल, एचसीएल टेक, इंडिगो और आईसीआईसीआई बैंक टॉप गेनर्स वाले शेयरों में शामिल रहे।

चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतों से मिल रहे सतर्क संकेतों के चलते बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है। एशियाई बाजारों में कमजोर माहौल और हालिया कंसोलिडेशन के बाद मुनाफावसूली से शुरुआती कारोबार पर असर पड़ सकता है, हालांकि अहम सपोर्ट स्तरों के पास चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल सकती है।

एक्सपर्ट ने कहा कि टेक्निकल नजरिए से निफ्टी 50 अभी भी एक बड़े कंसोलिडेशन दायरे में कारोबार कर रहा है, लेकिन निकट अवधि में रुख थोड़ा सतर्क दिखाई देता है। निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट 26,000 से 26,050 के बीच है, जबकि 26,000 के पास मजबूत आधार माना जा रहा है। ऊपर की ओर 26,250 से 26,300 के बीच रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि अगर निफ्टी सपोर्ट के नीचे फिसलता है तो आगे और दबाव बन सकता है। वहीं रेजिस्टेंस के ऊपर मजबूती से टिकने पर तेजी की वापसी हो सकती है। ट्रेडर्स को शुरुआती उतार-चढ़ाव में अग्रेसिव ट्रेड्स से बचने की सलाह दी जाती है।

राष्ट्रीय समाचार

लगातार दूसरे दिन सोने की चमक पड़ी फीकी; चांदी में भी छाई सुस्ती

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सोने और चांदी की कीमत में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इससे सोने का दाम 1.45 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.32 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे आ गया है।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 3,123 रुपए कम होकर 1,44,970 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,48,093 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने का दाम 1,35,653 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,32,793 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। 18 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,08,728 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,11,070 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।

चांदी का दाम 8,218 रुपए कम होकर 2,31,93 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,40,191 रुपए प्रति किलो था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स पर सोना 1.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,174.47 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.91 डॉलर प्रति औंस पर थी।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में ब्याज दरें एक बार बढ़ाने के संकेत के बाद सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो गया। फेड के सख्त रुख के कारण बुलियन बाजारों में बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई।

उन्होंने आगे कहा कि फेड की पॉलिसी के ऐलान के बाद पिछले कुछ सेशन में कॉमेक्स गोल्ड की कीमत लगभग 4375 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 4150 डॉलर प्रति औंस हो गई है, जबकि एमसीएक्स गोल्ड का दाम लगभग 1,54,000 रुपए से घटकर 1,47,200 रुपए पर आ गया। डॉलर के मजबूत होने की संभावना और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।

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व्यापार

एससी और ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति के लिए अब नहीं देना होगा डोमिसाइल प्रमाण पत्र

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केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) छात्रों के छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को ज्यादा आसान बना दिया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए डोमिसाइल (निवास) प्रमाण पत्र जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।

इस फैसले से छात्रों पर दस्तावेजों का बोझ कम होगा और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करना पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगा। खास तौर पर उन हजारों छात्रों को इसका लाभ मिलेगा जो अपने गृह राज्य के बाहर स्थित शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं।

सरकार के अनुसार, एससी और ओबीसी वर्ग के लिए संचालित प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत हर वर्ष लगभग 1.2 करोड़ छात्रों को लाभ मिलता है। डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता हटने से आवेदन प्रक्रिया अधिक छात्र-अनुकूल बनेगी, दस्तावेजी औपचारिकताएं घटेंगी और छात्रों का समय और खर्च दोनों बचेंगे।

डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए विभाग ने उमंग प्लेटफॉर्म पर एसईटीयू (शैक्षिक बदलाव और उत्थान के लिए स्कॉलरशिप) भी शुरू किया है। यह छात्रवृत्ति से जुड़ी सभी सेवाओं के लिए एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

इस प्लेटफॉर्म के जरिए पात्र छात्र, संस्थागत नोडल अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी और राज्य स्तरीय अधिकारी एक ही जगह पर आवेदन पंजीकरण, आवेदन की निगरानी, सत्यापन और अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।

मंत्रालय ने कहा कि ये पहल सरकार के उस व्यापक लक्ष्य का हिस्सा हैं, जिसके तहत समावेशी विकास को बढ़ावा देना, अनावश्यक प्रक्रियागत बाधाओं को कम करना और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना शामिल है।

विभाग ने यह भी दोहराया कि वह तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंच बनाने और उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

वित्त वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति वर्ग के 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को 7,981.47 करोड़ रुपए की सहायता राशि वितरित की गई थी। छात्रवृत्ति योजनाओं पर खर्च में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 21 प्रतिशत, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 11.23 प्रतिशत और टॉप क्लास एजुकेशन छात्रवृत्ति योजना के तहत 13.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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व्यापार

टाटा मोटर्स ने कमर्शियल वाहनों के दाम 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाए, 1 जुलाई से लागू होंगी नई कीमतें

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टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स (टीएमसीवी) ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है और नई कीमतें 1 जुलाई से लागू होंगी। यह जानकारी गुरुवार को कंपनी की ओर से दी गई।

एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने कहा कि इस बढ़ोतरी की वजह कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी होना और लागत का बढ़ना है। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल पर विभिन्न होगी और 2.5 प्रतिशत तक सीमित होगी।

इस बढ़ोतरी से टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स भी उन कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने मध्य पूर्व संकट के चलते कच्चे माल और लागत में बढ़ोतरी के कारण कीमतों में इजाफा किया है।

इससे पहले, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (टीएमपीवी) ने 12 जून को अपनी ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। नई कीमतें एक जुलाई से लागू होंगी।

कंपनी की ओर से जारी की गई एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि कीमतों में बढ़ोतरी की वजह इनपुट लागत में बढ़ोतरी होना था।

टीएमपीवी ने कहा कि वह लागत में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है, जबकि हालिया कीमत संशोधन के जरिए बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल रही है।

कंपनी ने कहा कि कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी। वहीं, मध्य पूर्व तनाव के चलते मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर इंडिया जैसी कंपनियां गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं।

इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में, टीएमसीवी के मुनाफे में सालाना आधार पर 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि आय 22 प्रतिशत बढ़कर 24,452 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान कंपनी का एबिटा मार्जिन 13.90 प्रतिशत रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर 4 रुपए का डिविडेंड भी घोषित किया।

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