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शेयर बाजार सपाट खुला, ऑटो और रियल्टी शेयरों में तेजी
मुंबई, 15 सितंबर। भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में सपाट खुला। सुबह 9:22 पर सेंसेक्स 40.18 अंक या 0.05 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 81,864.52 और निफ्टी 20.75 अंक या 0.08 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,094.55 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार को ऊपर खींचने का काम ऑटो और रियल्टी शेयर कर रहे थे। निफ्टी ऑटो 0.47 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.01 प्रतिशत ऊपर था।
इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मेटल, निफ्टी एनर्जी, इन्फ्रा और कमोडिटी भी हरे निशान में थे। निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा लाल निशान में थे।
स्मॉलकैप और मिडकैप में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 205.30 अंक या 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 58,444.60 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 118.30 अंक या 0.66 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,108.20 पर था।
सेंसेक्स पैक में बजाज फाइनेंस, इटरनल (जोमैटो), टाटा मोटर्स, अदाणी पोर्ट्स, पावर ग्रिड, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, बीईएल, मारुति सुजुकी, एसबीआई, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक टॉप गेनर्स थे। इन्फोसिस, सन फार्मा, टीसीएस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, एमएंडएम, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट टॉप लूजर्स थे।
बाजार के जानकारों ने कहा कि तकनीकी और आधारभूत कारणों के चलते निफ्टी में बीते 8 सत्रों से तेजी जारी है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही से आय में सुधार देखने को मिलेगा। वित्त वर्ष 27 में आय में बढ़त करीब 15 प्रतिशत रह सकती है। आय में बढ़त का सीधा फायदा ऑटोमोबाइल, व्हाइट गुड्स, हेल्थकेयर, सीमेंट और होटल इंडस्ट्री को होगा।
संस्थागत प्रवाह के मोर्चे पर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 12 सितंबर को 129.6 करोड़ रुपए की इक्विटी खरीदी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) ने भी इस दौरान 1,556 करोड़ रुपए का निवेश किया।
भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता हफ्ता काफी अच्छा रहा। इस दौरान निफ्टी 373 अंक या 1.51 प्रतिशत बढ़कर 25,114 और सेंसेक्स 1,193.94 अंक या 1.48 प्रतिशत बढ़कर 81,904.70 पर बंद हुआ।
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सोने में बड़ी तेजी की संभावना, बुल केस में साल के अंत तक 5,600 डॉलर और चांदी 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है: रिपोर्ट

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों की दिशा और कीमती धातुओं की मांग को लेकर जारी बहस के बीच एक नई रिपोर्ट ने सोने और चांदी को लेकर बेहद आशावादी अनुमान जताया है। मोनार्क पीएमएस की रिपोर्ट के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में वर्ष 2026 के अंत तक सोना 5,000 डॉलर से 5,600 डॉलर प्रति औंस और चांदी 95 डॉलर से 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट ने इस सबसे सकारात्मक परिदृश्य या ‘बुल केस’ की संभावना 25 प्रतिशत बताई है। इसके अनुसार, यदि अमेरिकी श्रम बाजार में कमजोरी आती है, फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ती है और वास्तविक प्रतिफल (रियल यील्ड) में गिरावट शुरू होती है, तो सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
इसके साथ ही संस्थागत निवेशकों द्वारा फिर से कीमती धातुओं में निवेश बढ़ाना और चांदी की भौतिक आपूर्ति में तंगी लौटना भी इस तेजी के लिए जरूरी माना गया है।
हालांकि रिपोर्ट का सबसे संभावित परिदृश्य ‘बेस केस’ है, जिसे 55 प्रतिशत संभावना दी गई है। इस स्थिति में वर्ष 2026 के अंत तक सोना 4,300 डॉलर से 4,700 डॉलर प्रति औंस और चांदी 70 डॉलर से 85 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकती है। यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर तक ब्याज दरों को स्थिर रखेगा, ऊर्जा कीमतें सामान्य होंगी, वास्तविक प्रतिफल स्थिर रहेंगे और दुनिया के केंद्रीय बैंक प्रति तिमाही लगभग 250 टन सोने की खरीद जारी रखेंगे।
रिपोर्ट में एक ‘बेयर केस’ परिदृश्य भी प्रस्तुत किया गया है, जिसकी संभावना 20 प्रतिशत आंकी गई है। यदि फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है तथा महंगाई में कमी मांग की कमजोरी में बदल जाती है, तो सोना 3,400 डॉलर से 3,900 डॉलर प्रति औंस और चांदी 45 डॉलर से 55 डॉलर प्रति औंस के दायरे में आ सकती है।
मोनार्क पीएमएस के मुताबिक, सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान में अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी मुद्रास्फीति-संरक्षित प्रतिभूतियों (टीआईपीएस) का वास्तविक प्रतिफल है, जो 2.41 प्रतिशत पर बना हुआ है। चूंकि सोना किसी प्रकार का ब्याज या प्रतिफल नहीं देता, इसलिए ऊंचे वास्तविक प्रतिफल निवेशकों के लिए एक प्रतिस्पर्धी विकल्प बन जाते हैं और सोने की मांग पर दबाव डाल सकते हैं।
वहीं चांदी के बुनियादी कारकों को रिपोर्ट ने काफी मजबूत बताया है, जिसके अनुसार, चांदी का बाजार लगातार छठे वर्ष घाटे की स्थिति में है। वर्ष 2021 से अब तक लगभग 762 मिलियन औंस चांदी सतही भंडार से निकल चुकी है, जबकि वैश्विक खनन उत्पादन पिछले एक दशक से लगभग स्थिर बना हुआ है। इससे भविष्य में मांग बढ़ने पर कीमतों में तेज उछाल की संभावना बन सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि चांदी की मांग बढ़ती है तो सीमित भौतिक उपलब्धता कीमतों को और तेजी से ऊपर ले जा सकती है। कॉमेक्स बाजार में कागजी दावों की तुलना में उपलब्ध भौतिक चांदी का अनुपात अभी लगभग 5.6 गुना है, जो आपूर्ति संबंधी दबाव की संभावनाओं को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “सोने-चांदी का अनुपात भी सामान्य हो गया है, जो जनवरी में 46 गुना से शिखर से बढ़कर आज लगभग 69 गुना हो गया है, जो इसके 21वीं सदी के औसत के करीब है।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में चांदी ने अपनी पहले की बढ़त का बड़ा हिस्सा गंवा दिया है और अब यह सोने की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती दिखाई देती है।
व्यापार
कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते घरेलू बाजार में बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स और निफ्टी में 0.56 प्रतिशत तक की गिरावट

तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के कारण जोखिम भावना कमजोर होने से हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। इस बीच सेंसेक्स और निफ्टी50 में 0.40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,264.51 से 133.78 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 77,130.73 पर खुला। वहीं शुरुआती कारोबार में यह 367.58 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,896.93 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
वहीं, एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,175.65 से मामूली 58.10 अंक यानी 0.24 प्रतिशत फिसलकर 24,117.55 पर खुला, हालांकि शुरुआती कारोबार में यह एक समय 137.25 अंक यानी 0.56 प्रतिशत गिरकर 24,038.40 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि खबर लिखे जाने तक सुबह 9.30 बजे के आसपास सेंसेक्स करीब 311 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,942 के स्तर पर ट्रेड करते हुए नजर आया। वहीं निफ्टी 50 113.65 (0.47 प्रतिशत) फिसलकर 24,062 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.53 प्रतिशत और 0.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी मेटल, निफ्टी आईटी, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी मीडिया का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि निफ्टी बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को निफ्टी 50 में दो सत्रों की गिरावट के बाद 0.35 प्रतिशत की रिकवरी जरूर देखने को मिली थी, लेकिन यह तेजी सीमित दायरे में रही। सूचकांक अभी भी 23,606 से 24,774 तक की तेजी के 50 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर और अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। ऐसे में बाजार की व्यापक तकनीकी तस्वीर अभी भी सतर्कता का संकेत दे रही है। निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण और निकटतम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि इसके नीचे 23,800 का स्तर अगला प्रमुख सपोर्ट है। दूसरी ओर, 24,300 से 24,400 के बीच का क्षेत्र तत्काल प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। यदि निफ्टी 24,400 के ऊपर टिकाऊ बढ़त दर्ज करता है, तभी तकनीकी स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा और सूचकांक 24,800 की ओर बढ़ सकता है।
इस बीच, इंडिया वीआईएक्स में 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 10.68 पर आ गया। पिछले लगभग एक महीने से यह अपने अल्पकालिक मूविंग एवरेज के नीचे बना हुआ है। कम अस्थिरता का यह माहौल बाजार के तेजी वाले निवेशकों को कुछ राहत देता है और संकेत देता है कि फिलहाल बाजार अत्यधिक निकट अवधि की अस्थिरता की आशंका नहीं जता रहा है।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि डेरिवेटिव आंकड़ों की बात करें तो निफ्टी का पुट-कॉल रेशियो (पीसीआर) शुक्रवार को बढ़कर 0.89 हो गया, जो पिछले सत्र में 0.77 था। 0.7 से ऊपर का स्तर बाजार की धारणा में कुछ सुधार का संकेत देता है, लेकिन यह अभी भी 1 से नीचे है। इसका मतलब है कि तेजी का रुझान अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है कि उसे स्पष्ट ट्रेंड रिवर्सल माना जा सके।
तकनीकी दृष्टि से निफ्टी फिलहाल 24,000 से 24,400 के दायरे में फंसा हुआ दिखाई दे रहा है। यदि सूचकांक 24,000 के नीचे और विशेष रूप से 23,800 के नीचे फिसलता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार में कमजोरी गहरा सकती है। वहीं दूसरी ओर, 24,400 के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट ही बाजार की अल्पकालिक तस्वीर को मजबूत कर सकता है और रिकवरी की संभावनाओं को बढ़ा सकता है।
ऐसे में निफ्टी में 24,000 और 23,800 के स्तर निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए महत्वपूर्ण निगरानी क्षेत्र बने रहेंगे। 24,000-24,400 के दायरे से किसी भी दिशा में निर्णायक ब्रेकआउट बाजार की अगली बड़ी चाल तय कर सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही

अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा।
आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है।
बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है।
आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं।
अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है।
आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं।
वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं।
इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं।
हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए।
साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए।
टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है।
इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें।
इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है।
जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।
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