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वैश्विक स्तर पर चैटजीपीटी हुआ डाउन, यूजर्स को लॉगइन करने में हो रही परेशानी
नई दिल्ली, 6 फरवरी। दुनिया में सबसे अधिक चर्चित चैटबॉट ओपनएआई का चैटजीपीटी वैश्विक स्तर पर डाउन हो गया है। यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे एक्स पर शिकायत की है कि चैटजीपीटी काम नहीं कर रहा है।
चैटजीपीटी को लेकर यूजर्स अलग-अलग देशों से शिकायत दर्ज करा रहे हैं और ऐसा लगता है कि करीब पूरी दुनिया में यूजर्स को चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने में समस्या आ रही है।
जानकारी के मुताबिक, ऐप किसी भी कमांड का जवाब नहीं दे रहा है और कुछ यूजर्स को लॉगइन करने में भी समस्या आ रही है। वहीं, कुछ यूजर्स द्वारा चैट रिक्वेस्ट भेजने पर ओपनएआई का चैटबॉट “इंटरनल सर्वर एरर” दिखा रहा है।
ऑनलाइन आउटेज ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म डाउनडिटेक्टर के अनुसार, इससे हजारों यूजर्स प्रभावित हुए हैं। हालांकि, ओपनएआई ने अभी तक आउटेज के कारण या इसके दायरे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।
डाउनडिटेक्टर पर पिछले 24 घंटों में चैटजीपीटी आउटेज के ग्राफ में उछाल आया और जैसे-जैसे अधिक लोग इस समस्या की रिपोर्ट कर रहे हैं, यह ग्राफ बढ़ता जा रहा है।
डाउनडिटेक्टर पर कोई भी अपनी समस्या रिपोर्ट कर सकता है, लेकिन जब भी किसी विशेष ऐप या वेबसाइट पर यूजर्स को समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो शिकायतों के आधार पर तैयार ग्राफ तेजी से बढ़ता है।
यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर अपनी नाराजगी भी व्यक्त की।
एक यूजर ने लिखा कि चैटजीपीटी करीब 20 मिनट से जवाब नहीं दे रहा है। मुझे 2015 की तरह महसूस हो रहा है, जब गूगल सर्च कई घंटों के लिए ऑफलाइन हो जाता था।
एक अन्य यूजर ने लिखा कि चैटजीपीटी डाउन हो गया है और कोई भी चैट रिक्वेस्ट भेजने पर “इंटरनल सर्वर एरर” लिखा आ रहा है।
चैटजीपीटी की यह पहली आउटेज नहीं है। इससे पहले 23 जनवरी को यूजर्स चैटजीपीटी के वेब और ऐप को पूरी दुनिया में एक्सेस नहीं कर पा रहे थे। इस दौरान डाउनडिटेक्टर पर हजार से भी ज्यादा शिकायतें रिपोर्ट की गई थीं।
पिछले वर्ष क्रिसमस के एक दिन बाद भी ओपनएआई का चैटबॉट काम नहीं कर रहा था। इस दौरान कई यूजर्स ने शिकायत की थी कि चैटजीपीटी काम नहीं कर रहा है।
व्यापार
केंद्र कोयला गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए नए इंसेंटिव पैकेज देने की कर रहा तैयारी, आत्मनिर्भर बनने में मिलेगी मदद

केंद्र सरकार देश में कोयला गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए नया इंसेंटिव पैकेज देने की तैयारी कर रहा है और इसका परिव्यय 35,000 करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से दी गई।
इसे कोयला मंत्रालय द्वारा जनवरी 2024 में शुरू किए गए 8,500 करोड़ रुपए के इंसेंटिव प्रोग्राम का की विस्तार माना जा रहा है, जिसने देश में कोयला गैसीफिकेशन की नींव रखी थी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विचाराधीन प्रस्तावित योजना का उद्देश्य देशभर में सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं में तेजी लाना है, जिससे एलएनजी, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट और अमोनिया पर आयात निर्भरता कम करके आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति को तेज करना भी है।
देश में कोल गैसीकरण को ऐसे समय पर बढ़ावा दिया जा रहा है, जब मध्य पूर्व संघर्ष के कारण एलएनजी, उर्वरक और उर्वरक कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला में बाधा बनी हुई है।
इस वर्ष फरवरी में कोयला मंत्रालय ने घोषणा की थी कि उसने देश के कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई 8,500 करोड़ रुपए की कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना की श्रेणी II के तहत चयनित आवेदकों को लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी कर दिए हैं।
योजना की श्रेणी II के तहत, निजी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को प्रति परियोजना 1,000 करोड़ रुपए या पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) का 15 प्रतिशत, जो भी कम हो, आवंटित किया गया है।
ओडिशा के अंगुल में जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड की 2 मिमीपीए कोयला गैसीकरण परियोजना को 569.05 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है। 3,793 करोड़ रुपए की इस परियोजना में कोयला गैसीकरण के माध्यम से कोयले को डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) में परिवर्तित किया जाएगा।
न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती में स्थित अपने कोयला गैसीकरण परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है। 6,976 करोड़ रुपए की कुल परियोजना लागत वाली इस परियोजना का लक्ष्य प्रति वर्ष 0.33 मिलियन मीट्रिक टन अमोनियम नाइट्रेट और 0.1 मिलियन मीट्रिक टन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
इसी प्रकार, ग्रेटा एनर्जी लिमिटेड को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती जिले के एमआईडीसी में स्थित अपने कोयला गैसीकरण परियोजना के लिए 414.01 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है।
कोयला गैसीकरण पहल का उद्देश्य कोयला गैसीकरण में तकनीकी प्रगति को गति देना, कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और अधिक टिकाऊ ऊर्जा परिदृश्य की नींव रखना है।
व्यापार
हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बीच ओपेक प्लस ने बढ़ाया तेल उत्पादन कोटा, कुवैत का कच्चा तेल निर्यात शून्य

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ओपेक प्लस देशों ने जून के लिए अपने तेल उत्पादन कोटे को बढ़ाने का फैसला किया है।
कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि सात ओपेक प्लस देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन को अगले महीने के लिए 1.88 लाख बैरल प्रति दिन बढ़ाने पर सहमति जताई है। हालांकि, यह वृद्धि सांकेतिक होगी, क्योंकि मौजूदा समय में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट बंद है।
भू-राजनीतिक संकट और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समूह से अलग होने के बावजूद, यह लगातार तीसरी मासिक वृद्धि होगी।
यूएई के अलग होने के बाद ओपेक प्लस में ईरान सहित 21 सदस्य देश रह गए हैं।
हालांकि, मासिक उत्पादन निर्णयों में केवल सात देशों की ही भागीदारी रही है। नाकाबंदी के कारण ईरान के निर्यात में भारी गिरावट देखी जा रही है।
मार्च में सभी ओपेक प्लस सदस्यों का औसत कच्चा तेल उत्पादन 35.06 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा, जो फरवरी से 7.70 मिलियन बैरल प्रति दिन कम है।
पिछले सप्ताह, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ओपेक और ओपेक प्लस कार्टेल से अलग होने की घोषणा की, जिसे सऊदी अरब के नेतृत्व वाले तेल निर्यातक देशों के समूह के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यूएई ने कहा कि यह निर्णय उसकी “दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि और विकसित हो रही ऊर्जा प्रोफाइल” को दर्शाता है।
यूएई के इस बाहर निकलने से तेल कार्टेल के कमजोर होने की आशंका है, ऐसे समय में जब ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के कारण फारस की खाड़ी के देशों के निर्यात को भारी नुकसान हुआ है। ओपेक के तेल निर्यात में यूएई की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है।
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत ने अप्रैल में कच्चे तेल का शून्य बैरल निर्यात किया, जो 1991 में इराक के कब्जे के बाद से पहली बार हुआ है। यह स्थिति होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के कारण उत्पन्न हुई है।
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने फोर्स मेज्योर घोषित किया, जिससे लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन का उत्पादन प्रभावित हुआ। इस नाकाबंदी के कारण कुवैती निर्यात पूरी तरह से ठप हो गया है।
राष्ट्रीय समाचार
एयर इंडिया ने ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल लागू करने के फैसले का किया स्वागत, कहा- इससे भारत के एविएशन सेक्टर में आएगा बड़ा बदलाव

एयर इंडिया ने बुधवार को सरकार के ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल को अपनाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश के एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा।
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन के सीईओ और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने सरकार की इस पहल को एविएशन सेक्टर के लिए एक ‘परिवर्तनकारी कदम’ बताया और कहा कि इससे कनेक्टिविटी मजबूत होगी और देश भर में एयरपोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर का अधिकतम उपयोग संभव होगा।
इस दौरान एयर इंडिया ने ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के अंतर्गत वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लॉन्च किया।
विल्सन ने आगे कहा,“यह भारतीय एविएशन के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। भारत को वैश्विक विमानन केंद्र बनाने और पूरे एविएशन इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी प्रयासों के लिए हम उन्हें धन्यवाद देना चाहते हैं।”
साथ ही, उन्होंने एक बड़े एविएशन इकोसिस्टम के विकास और वैश्विक हवाई यात्रा में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि की सराहना की।
इस मॉडल के अनुरूप अपनी विस्तार रणनीति के तहत, एयर इंडिया वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी शुरू करने की तैयारी कर रही है, जिसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी क्षेत्रों के यात्रियों के लिए सुगम्य यात्रा सुनिश्चित करना है।
एयर इंडिया के गवर्नेंस, रिस्क, कंप्लायंस और कॉर्पोरेट अफेयर्स के ग्रुप हेड पी. बालाजी ने कहा कि इस कदम से भारत के ग्लोबल एविएशन को महानगरों से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और टियर 2 और टियर 3 शहरों के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अधिक सुलभ हो जाएगी।
इसी महीने की शुरुआत में, नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने हब-एंड-स्पोक संचालन को लागू करने के लिए दिल्ली हवाई अड्डे की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए प्रमुख हितधारकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
मंत्री ने कहा कि यह मॉडल उड़ान योजना के तहत विकसित टियर-II और टियर-III हवाई अड्डों और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी को सक्षम करेगा।
उन्होंने बताया कि भारत से लगभग 35 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय यात्री वर्तमान में दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी हब के माध्यम से पारगमन करते हैं। उन्होंने आगे कहा, “हमारा लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय केंद्रों का विकास करके इस ट्रेंड को पलटना है।”
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