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Monday,12-October-2026
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हिंदू पक्ष को बड़ी राहत, वाराणसी कोर्ट ने वुज़ुखाना को छोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के एएसआई सर्वेक्षण की अनुमति दी

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वाराणसी: मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले विष्णु शंकर जैन ने शुक्रवार को कहा कि एक अदालत ने वज़ू टैंक को छोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एएसआई सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है, जिसे सील कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “मुझे सूचित किया गया है कि मेरा आवेदन मंजूर कर लिया गया है और अदालत ने वाजू टैंक को छोड़कर, जिसे सील कर दिया गया है, ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एएसआई सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है। मुझे लगता है कि सर्वेक्षण 3 से 6 महीने के भीतर पूरा किया जा सकता है।” ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि अदालत का फैसला मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। उन्होंने कहा, “एएसआई सर्वेक्षण के लिए हमारा आवेदन स्वीकार कर लिया गया है। यह मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।” अदालत ने हिंदू पक्ष द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा पूरे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर अपना आदेश सुनाया। हिंदू पक्ष ने वाराणसी कोर्ट में एक याचिका पत्र दाखिल कर विश्वनाथ मंदिर स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के पूरे परिसर का एएसआई अध्ययन कराने की मांग की थी. हिंदू पक्ष के वकील और समर्थक आशान्वित हैं और याचिका पर कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

अदालत ने पिछले शुक्रवार को एक याचिका पर बहस पूरी की. याचिका इस साल मई में पांच महिलाओं द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने पहले एक अन्य याचिका में मंदिर परिसर के अंदर प्रार्थना करने की अनुमति मांगी थी। सर्वेक्षण में वज़ुख़ाना को बाहर रखा जाएगा जिसमें ‘शिवलिंग’ जैसी संरचना है। उस इलाके को सील कर दिया गया है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है. मुस्लिम पक्ष इस आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दे सकता है, विष्णु शंकर जैन ने 14 जुलाई को कहा था कि उन्होंने हमारी बात कोर्ट के सामने रखी. इससे पहले 6 जुलाई को, ज्ञानवापी मामले में हिंदू याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द से जल्द एक याचिका पर सुनवाई करने का आग्रह किया था, जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को पिछले साल एक वीडियो ग्राफिक्स सर्वेक्षण के दौरान वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पाए गए “शिवलिंग” की कार्बन डेटिंग सहित “वैज्ञानिक सर्वेक्षण” करने का निर्देश दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को एक पत्र लिखा जिसमें कहा गया कि मामला 19 मई, 2023 को शीर्ष अदालत के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था, जब उसने निर्देशों के कार्यान्वयन को 6 जुलाई, 2023 तक के लिए स्थगित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले “शिवलिंग” की कार्बन डेटिंग पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश में निहित निर्देशों का कार्यान्वयन सुनवाई की अगली तारीख तक स्थगित रहेगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीश, वाराणसी की देखरेख और निर्देशन में ज्ञानवापी परिसर के परिसर में “शिवलिंग” के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अनुमति दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और केवी विश्वनाथन की पीठ ने “वैज्ञानिक सर्वेक्षण” को यह कहते हुए स्थगित कर दिया था, “चूंकि विवादित आदेश के निहितार्थ बारीकी से जांच के योग्य हैं, इसलिए आदेश में संबंधित निर्देशों का कार्यान्वयन अगली तारीख तक स्थगित रहेगा।”

पीठ ने “शिवलिंग” की आयु निर्धारित करने के लिए एएसआई द्वारा वैज्ञानिक जांच के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की अपील पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया था। ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी ने पीठ को बताया था कि कार्बन डेटिंग और सर्वेक्षण जल्द ही शुरू होगा। उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि संरचना को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए, जिसे एक पक्ष “शिवलिंग” का दावा करता है और दूसरा इसे फव्वारा कहता है। मामले में हिंदू याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि एएसआई के विशेषज्ञ पहले ही बता चुके हैं कि ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. सर्वेक्षण के दौरान, पिछले साल 16 मई को काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित मस्जिद के अदालत-आदेशित सर्वेक्षण के दौरान मस्जिद परिसर में एक संरचना पाई गई थी – जिसे हिंदू पक्ष ने “शिवलिंग” और मुस्लिम पक्ष ने “फव्वारा” होने का दावा किया था। उच्च न्यायालय ने 12 मई को वाराणसी जिला न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 14 अक्टूबर, 2022 को “शिवलिंग” के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और कार्बन डेटिंग के आवेदन को खारिज कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने वाराणसी जिला न्यायाधीश को “शिवलिंग” की वैज्ञानिक जांच करने के लिए हिंदू उपासकों के आवेदन पर कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता लक्ष्मी देवी और तीन अन्य ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

राष्ट्रीय समाचार

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने पर अभिजीत दिपके का हमला, बोले-सरकार को विरोध की आवाज से दिक्कत

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र को लोगों के विरोध करने के विचार से दिक्कत थी।

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज पीएम मोदी ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगह के तौर पर हटा दिया। कल वे लोकतंत्र को ही खत्म कर देंगे। तानाशाह को कभी विरोध-प्रदर्शन की जगह से दिक्कत नहीं थी। दिक्कत तो लोगों के विरोध करने के विचार से थी।”

दरअसल, गृह मंत्रालय की कमेटी की सिफारिश के आधार पर दिल्ली पुलिस ने नई गाइडलाइंस जारी करते हुए जंतर-मंतर को तय विरोध स्थल की सूची से हटा दिया है। अब विरोध प्रदर्शन के लिए तीन नई जगहें; रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबी मैदान (पूर्वी दिल्ली) तय की गई है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के लिए मौजूदा तय जगह के अलावा अन्य उपयुक्त स्थानों की जांच के लिए एक समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला किया गया है। इन तीनों जगहों पर प्रदर्शन के लिए विस्तृत और संशोधित एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) अलग से जारी की जाएगी। दिल्ली पुलिस का यह आदेश 28 अप्रैल 2022 के पुराने स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक बदलाव है।

जंतर-मंतर लंबे समय से देश में लोकतांत्रिक विरोध का केंद्र रहा है। लगातार किसी न किसी मुद्दे को लेकर वहां प्रदर्शन होते रहे हैं। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। उस दौरान पुलिस और प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए थे। सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था।

उस प्रदर्शन के दौरान स्थिति ऐसी बनी थी कि दिल्ली सरकार को करीब 45 मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े थे और कई ट्रेनों को भी रद्द करना पड़ा था, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सरकार का कहना है कि जंतर-मंतर पर बार-बार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से मध्य दिल्ली में यातायात और जनजीवन प्रभावित होता है। इसी को देखते हुए प्रदर्शन स्थलों को शहर के बाहरी इलाकों में शिफ्ट किया गया है। वहीं विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश बताया है।

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राष्ट्रीय समाचार

वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में मिले-जुले रह सकते हैं नतीजे, चुनिंदा क्षेत्रों में मांग मजबूत : रिपोर्ट

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वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में कॉरपोरेट नतीजे अलग-अलग सेक्टर्स में मिले-जुले रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरान लागत पर दबाव बने रहने के बावजूद, कुछ खास इंडस्ट्रीज को मजबूत मांग से सहारा मिलेगा। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) को मौजूदा अच्छे औसत इक्विटी एसेट्स से फायदा होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, कवरेज दायरे में आने वाली कंपनियों की मुख्य आय में तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 3.6 प्रतिशत और साल-दर-साल आधार पर 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।

इसके अलावा, बैंकों में लोन ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है, जबकि शुद्ध ब्याज मार्जिन पर निगरानी रखनी होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑटो और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की तरफ से लोन बांटने की स्थिर वृद्धि से ग्रोथ को सहारा मिल सकता है, लेकिन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑटो सेक्टर में रिटेल मांग और त्योहारों के लिए स्टॉक जमा करने से आपूर्ति को बढ़ावा मिला, लेकिन कच्चे माल की ऊंची लागत और सप्लाई-चेन में रुकावटों से मुनाफे पर असर पड़ने की उम्मीद है।

इसके अलावा, बिल्डिंग मटीरियल सेक्टर में अलग-अलग ट्रेंड देखने को मिल सकते हैं। पाइप का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहने की उम्मीद है, जबकि वुड पैनल को निर्यात से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सीमेंट इंडस्ट्री के वॉल्यूम में सालाना आधार पर लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है, हालांकि ईंधन की ऊंची लागत से मुनाफे पर दबाव पड़ने की संभावना है।

इसी तरह, कंज्यूमर स्टेपल्स में दोहरे अंकों की ग्रोथ का अनुमान है, हालांकि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में महंगाई और बारिश की अनिश्चितताओं का असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वायर और केबल की ग्रोथ से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्ट्रियल सेक्टर में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस करने वाली कैपिटल गुड्स कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है, जबकि इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर काम पूरा करने से जुड़ी चुनौतियों का असर पड़ सकता है।

इसमें आगे कहा गया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम की रफ्तार स्थिर रहने की उम्मीद है, हालांकि नए ऑर्डर मिलने की गति धीमी हुई है।

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अपराध

ओडिशा से रायपुर लाया जा रहा 23.5 किलो गांजा जब्त, चार तस्कर गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अंतर्राज्यीय चेकपोस्ट पर बड़ी सफलता हासिल की है।

पुलिस ने एक कार से 23.500 किलोग्राम गांजा बरामद कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में करीब 19.95 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि किआ कैरेंस कार (ओडी 02 सीटी 3301) में अवैध गांजा लेकर कुछ तस्कर ओडिशा से छत्तीसगढ़ की ओर आ रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने एनएच-53 स्थित अंतर्राज्यीय चेकपोस्ट पर नाकेबंदी की। कुछ देर बाद संदिग्ध वाहन को रोककर उसकी जांच की गई।

कार में सवार चारों व्यक्तियों से पूछताछ के दौरान उनके जवाब संदिग्ध पाए गए। पूछताछ करने पर उन्होंने कार में गांजा होने की बात स्वीकार की। तलाशी लेने पर वाहन की पिछली सीट के पीछे रखी सफेद रंग की बोरी से 23.500 किलो गांजा बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 11.75 लाख रुपए बताई गई है।

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे गांजा ओडिशा के बौध जिले से लेकर रायपुर (छत्तीसगढ़) पहुंचाने जा रहे थे।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गांजे के अलावा तस्करी में प्रयुक्त किआ कैरेंस कार (कीमत 8 लाख रुपए) और चार मोबाइल फोन (कीमत 20,500 रुपए) भी जब्त कर लिए। कुल जब्त संपत्ति की कीमत 19,95,500 रुपए आंकी गई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान केशव गाई गौउरिया (32), स्वागत महाकुल (26), मनतोष पौड (28) और रविन्द्र बस्तिया (26) के रूप में हुई है। सभी आरोपी ओडिशा के बौध जिले के निवासी हैं।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना सिंघोडा में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) II(बी) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब गांजे की सप्लाई चेन, सोर्स प्वाइंट, डेस्टिनेशन प्वाइंट और आर्थिक लेन-देन की भी जांच कर रही है।

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