राजनीति
ममता ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पर चल रही बहस को ‘न्यायपालिका में हस्तक्षेप’ करार दिया
कोलकाता, 17 जनवरी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पर चल रही बहस में उतरते हुए इस मामले में केंद्र सरकार के रुख को ‘न्यायपालिका में हस्तक्षेप’ करार दिया। उनकी टिप्पणी संयोग से ऐसे समय आई है, जब कलकत्ता हाईकोर्ट में दो याचिकाओं पर चल रही सुनवाई के समय तृणमूल कांग्रेस के करीबी वकीलों के एक वर्ग ने न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की अदालत के सामने हंगामा किया था और जस्टिस मंथा के आवास के सामने लगे अपमानजनक पोस्टर लगाए जाने की घटना सामने आई है।
ममता ने मेघालय में एक रैली में भाग लेने के लिए रवाना होने से पहले मीडियाकर्मियों से कहा, “केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में अपने प्रतिनिधि को धकेलने की कोशिश करके न्यायपालिका में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही है। अदालत मंदिर या चर्च की तरह पवित्र है। न्यायपालिका में कोई भी हस्तक्षेप अंतत: देश के लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित करेगा। हम न्यायपालिका की पूर्ण स्वतंत्रता चाहते हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी देने में केंद्र सरकार द्वारा अपनाई जा रही प्रणाली मनमानी है। उन्होंने दावा किया, “जब केंद्र सरकार को लगता है कि संबंधित न्यायाधीश उसके प्रति नरम रहेगा, तब नियुक्ति के लिए न्यायाधीश के नाम को एक महीने में ही मंजूरी दे दी जाती है, जबकि अन्य के मामले में मंजूरी प्रक्रिया में तीन महीने की देरी की जाती है।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को लेकर केंद्र सरकार की कुछ योजना है। हालांकि, उन्होंने मंगलवार को न्यायमूर्ति मंथा की अदालत पर हुए हालिया उपद्रव के संबंध में पूछे गए किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया।
हालांकि, राज्य भाजपा के एक प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि मुख्यमंत्री अनावश्यक रूप से इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा, “देश में न्यायपालिका पूरी तरह से स्वतंत्र है। लेकिन मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी न्यायपालिका को प्रभावित करने और डराने की कोशिश कर रही है। जस्टिस मंथा के आवास के सामने बदनाम करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इस तरह का माहौल भारत में कहीं भी नहीं देखा गया है। तृणमूल कांग्रेस के नेता हर दिन न्यायपालिका पर हमला कर रहे हैं। मुख्यमंत्री अब ऐसी बातें इसलिए कह रही हैं, क्योंकि वह कलकत्ता हाईकोर्ट की निगरानी में भ्रष्टाचार के विभिन्न मुद्दों पर केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा चल रही जांच को प्रभावित करना चाहती हैं।”
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य, न मानने पर लाइसेंस होगा निलंबित

महाराष्ट्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाले टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। राज्य सरकार ने महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (थर्ड अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 जारी करते हुए यह बड़ा फैसला लिया है।
नए नियमों के तहत अब इलेक्ट्रॉनिक मीटर से चलने वाली टैक्सियों के अधिकृत चालकों और परमिट धारकों दोनों के लिए मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान होना जरूरी होगा।
सरकार ने महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स नियम, 1989 में संशोधन किया है। नियम 4 में ‘पूर्ववृत्त’ शब्द के बाद ‘और मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान’ जोड़ा गया है। नियम 22 का हाशिया बदलकर ‘इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगी मोटर कैब के चालकों के लिए अतिरिक्त नियम’ कर दिया गया है।
सबसे अहम बदलाव नियम 24 में किया गया है। इसके तहत अब हर अधिकृत टैक्सी चालक को मराठी का कार्यसाधक ज्ञान होना अनिवार्य है।
अगर किसी चालक के पास मराठी का ज्ञान नहीं है तो लाइसेंसिंग अथॉरिटी एक महीने का नोटिस देगी। इस एक महीने में चालक को मराठी सीखनी होगी। अगर तय समय में चालक नियम का पालन नहीं करता है तो लाइसेंसिंग अथॉरिटी लिखित कारण दर्ज कर कार्रवाई कर सकती है।
इसके तहत पहले ड्राइविंग लाइसेंस पर अधिकृतता तीन महीने तक निलंबित की जा सकती है। इसके बाद भी अनुपालन न होने पर उचित सुनवाई के बाद चालक का अधिकृत परमिट रद्द भी किया जा सकता है।
सरकार ने नियम 78 और नियम 85 में भी बदलाव किए हैं। नए प्रावधान के अनुसार अब टैक्सी परमिट के नवीनीकरण के लिए भी मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य होगा। प्राधिकरण के संतुष्ट होने पर ही इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली टैक्सी का परमिट रिन्यू किया जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच संवाद को आसान बनाना है। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में लोग मराठी बोलते हैं। ऐसे में टैक्सी चालकों का स्थानीय भाषा जानना जरूरी है ताकि यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सके और उन्हें दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
राष्ट्रीय समाचार
ग्लोबल स्पेस मार्केट का 10 फीसदी हिस्सा हासिल कर सकता है भारत : अमेरिकी वाणिज्य विभाग

अगले सात सालों में ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत की हिस्सेदारी पांच गुना बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि पॉलिसी में सुधार और अमेरिका के साथ करीबी रिश्तों से भारत के प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री की वृद्धि में तेजी आएगी। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने दी है।
अभी ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है। लेकिन विभाग के इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन ने अपने अगस्त के ‘एयरोस्पेस एंड डिफेंस एक्सपोर्टर अलर्ट’ में अनुमान लगाया है कि अगले पांच से सात सालों में यह हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।
विभाग ने कहा, “भारत का प्राइवेट सेक्टर स्पेस इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और भारत सरकार के निजीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों से इंटरनेशनल स्पेस कंपनियों के लिए भी मौके बनेंगे।” इस अलर्ट में भारत के स्पेस सेक्टर को “मार्केट ऑफ द मंथ” बताया गया है। इसमें अमेरिकी कंपनियों के लिए सैटेलाइट सिस्टम, एडवांस्ड स्पेसफ्लाइट, कनेक्टिविटी, मैन्युफैक्चरिंग और संबंधित टेक्नोलॉजी में निवेश के मौकों पर जोर दिया गया।
1963 में भारत के पहले रॉकेट लॉन्च के समय से ही अमेरिका और भारत स्पेस के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। वह रॉकेट अमेरिका में बना ‘नाइक-अपाचे’ था। तब से यह साझेदारी वैज्ञानिक आदान-प्रदान, संयुक्त वर्किंग ग्रुप और मिलकर किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स के जरिए बढ़ी है। नासा और अमेरिकी कंपनियों ने इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) को टेक्नोलॉजी और पार्ट्स भी सप्लाई किए हैं।
विभाग ने कहा कि भारत के नए स्पेस स्टार्टअप्स अमेरिका में अपने कामकाज और मैन्युफैक्चरिंग की मौजूदगी को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। फरवरी 2026 में ‘बिजनेस काउंसिल फॉर इंटरनेशनल अंडरस्टैंडिंग’ ने ‘इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन’ से सर्टिफाइड अमेरिकी कमर्शियल स्पेस मिशन की बेंगलुरु यात्रा का नेतृत्व किया। अलर्ट में इसे सफल बताया गया है।
विभाग ने कहा, “स्पेस अमेरिका और भारत के बीच सहयोग का एक अहम क्षेत्र है, जिससे व्यापार, टेक्नोलॉजी और संयुक्त नीतिगत प्रयासों के ज़रिए दोनों देशों को फायदा होता है।” व्यावसायिक संबंध ‘अमेरिका-इंडिया सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ के जरिए विकसित किए जा रहे हैं। अलर्ट के अनुसार, 2025 में शुरू की गई ‘ट्रस्ट’ पहल से भी सहयोग मजबूत हुआ है।
‘कमर्शियल स्पेस सब-वर्किंग ग्रुप’ का नेतृत्व संयुक्त रूप से अमेरिकी वाणिज्य विभाग और भारत के अंतरिक्ष विभाग द्वारा किया जाता है। इसका मकसद दोनों देशों की कंपनियों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करना है। इसके काम में बाजार तक पहुंच, खरीद, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) और निर्यात नियंत्रण शामिल हैं। फरवरी 2025 में दोनों देशों के नेताओं के संयुक्त बयान में अंतरिक्ष अन्वेषण, सुरक्षा और पेशेवर आदान-प्रदान में और मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया गया था।
वाणिज्य विभाग ने भारत में प्रवेश करने की इच्छुक अमेरिकी कंपनियों से 7 से 9 सितंबर तक होने वाले ‘बेंगलुरु स्पेस एक्सपो’ में शामिल होने का आग्रह किया। यह कार्यक्रम उद्योग के नेताओं और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाएगा और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी क्षमताएं दिखाने का मौका देगा।
राजनीति
मायावती की ब्राह्मण समाज से अपील, बोली-बसपा से जुड़े रहे, 2007 की तरह मिलेगा सम्मान

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पार्टी में सर्वसमाज की भागीदारी और संगठन को मजबूत करने पर जोर देते हुए ब्राह्मण समाज से पार्टी से मजबूती के साथ जुड़े रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों एवं सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है और उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के बजाय संविधान की मूल भावना के अनुरूप सर्वसमाज के हित एवं कल्याण के लिए काम करना है।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जैसाकि सर्वविदित है कि बसपा ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों एवं सिद्धांत पर चलने वाली विशिष्ट पहचान वाली पार्टी है, जो किसी भी समाज के व्यक्ति विशेष से ज्यादा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र संविधान की सच्ची मंशा के मुताबिक, सर्वसमाज के हित व कल्याण के लिए समर्पित है और इसीलिए पार्टी में नेताओं की नहीं, बल्कि पूरे तन, मन, धन से समर्पित अम्बेडकरवादी कार्यकर्ताओं की ही फौज हर स्तर पर अधिकतर सक्रिय है। यही कांशीराम जी द्वारा पार्टी व मूवमेंट के हित में स्थापित परम्परा भी है।”
उन्होंने कहा कि पार्टी से निकाले गए अथवा निजी स्वार्थ के कारण दूसरी पार्टियों में गए लोगों का पार्टी के प्रति समर्पण सवालों के घेरे में रहा है। इसलिए ब्राह्मण समाज व अन्य सभी समाज के जो भी लोग अभी तक पार्टी से निकाले गए हैं या निकाले जा रहे हैं या वे अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गए हैं या फिर वे अपने ग़लत कारनामों की वजह से उनसे बचने के लिए खासकर सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गए हैं, तो उनका पार्टी के प्रति समर्पण भाव लोगों की निगाह में भी उनके कार्यों के ऑकलन के आधार पर काफी सशंकित व निराशाजनक बना रहा है।
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों ने पार्टी की सरकार के दौरान भी अपने निजी और पारिवारिक स्वार्थों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, “खासकर बसपा सरकार के दौरान भी ऐसे लोगों ने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए ही पार्टी से फायदा ज्यादा उठाया है, और अपने समाज व पार्टी के हित के लिए वे लोग अधिकतर निष्क्रिय व उदासीन ही बने रहे हैं। ऐसे लोगों के कारण पार्टी को चुनावों में नुकसान भी उठाना पड़ा।”
मायावती ने आगे कहा, ”इन्हीं सब कारणों से उन लोगों ने अपने समाज को भी सही से बसपा में नहीं जोड़ा है, जो कि पार्टी की अपेक्षा के विरुद्ध इनका यह सब कृत्य होने की वजह से पिछले कई लोकसभा व विधानसभा आम चुनावों में पार्टी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। पार्टी में लंबे समय से ईमानदार, समर्पित और निष्ठावान वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा नए कर्मठ लोगों और विशेषकर युवाओं को तैयार करने का अभियान लगातार जारी है। पार्टी में लंबे अरसे से ईमानदार व हर मामले में पार्टी के प्रति लगातार समर्पित एवं निष्ठावान चले आ रहे पार्टी के वरिष्ठ लोगों द्वारा आए दिन नए कर्मठ व ईमानदार लोगों व खासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जाता रहा है, जो यह अभियान पूरी तरह से जारी है।”
उन्होंने कहा कि नए और पुराने कार्यकर्ताओं से पार्टी को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। मायावती के मुताबिक, ”अब वे लोग काफी हद तक पार्टी की अपेक्षा के अनुसार जी-जान से लगातार लगे हुए हैं। पार्टी को पूरी उम्मीद है कि ये सभी नए व पुराने लोग हर मामले में ज्यादा बेहतर, साफ-सुथरे व मिशनरी मानसिकता के बनकर उभरेंगे और वे सच्चे अम्बेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष के भरपूर तौर पर काम आएंगे।”
बसपा प्रमुख ने ब्राह्मण समाज से पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े रहने की अपील करते हुए 2007 की तरह उचित राजनीतिक भागीदारी और सम्मान देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा, “पार्टी खासकर ब्राह्मण समाज को यह भी विश्वास दिलाना चाहती है कि वे अपनी पूरी मजबूती के साथ पार्टी से जुड़े रहें और उन्हें हर चुनाव में उनकी तैयारी के आधार पर उनकी भागीदारी यानी चुनावी उम्मीदवार बनाने तथा सरकार बनने पर सन 2007 की तरह ही इनको व अन्य सभी समाज को भी पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान जरूर दिया जाता रहेगा।”
मायावती ने कहा कि सर्वसमाज आधारित बसपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में दलित समाज की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और सर्वसमाज आधारित ऐसी अपनी बसपा पार्टी को जमीनी स्तर पर तैयार करने के मामले में अब विशेषकर दलित समाज को ही अपनी अहम भूमिका निभानी है। उन्होंने सर्वसमाज की भागीदारी को पार्टी की ताकत बताते हुए कहा, “वैसे बसपा की नर्सरी, सर्वसमाज के हसीन गुलदस्तों से ही, अधिकतर हरी-भरी व सजी रहती है।
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