राष्ट्रीय
क्या आरबीआई को सरकारी बैंकों को विनियमित करने के लिए और अधिकार मिलेंगे?
नई दिल्ली, 5 दिसम्बर : जब भारतीय बैंकों के शासन की बात आती है तो चीजे असंतुलित हो जाती हैं। उदाहरण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) निजी बैंकों या विदेशी बैंकों को दिशा-निर्देश जारी कर सकता है, लेकिन पीएसबी को नहीं। क्या वित्त संबंधी स्थायी समिति इस पहेली का उत्तर दे सकती है? इस विसंगति की चर्चा तब हुई जब आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने मार्च 2018 में ‘बैंकिंग नियामक शक्तियों को स्वामित्व तटस्थ होना चाहिए’ शीर्षक से एक भाषण में कहा कि आरबीआई बैंकिंग नियामक है, पीएसबी को विनियमित करने की शक्तियां सरकार के पास।
भारत सरकार बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 के तहत पीएसबी को विनियमित करती है। पटेल ने कहा था कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम (1949) की धारा 51 स्पष्ट रूप से कहती है कि आरबीआई के पास पीएसबी में शासन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर शक्तियां नहीं हैं।
आरबीआई किसी पीएसबी के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक या निदेशकों को नहीं हटा सकता। पीएसबी के मामले में केंद्रीय बैंक विलय या परिसमापन के लिए बाध्य नहीं कर सकता। पीएसबी को न तो शीर्ष बैंक से लाइसेंस की आवश्यकता होती है और न ही वह उनका लाइसेंस रद्द कर सकता है। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए नियमन और शासन के इस पहलू को दुरुस्त करने की कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, जुलाई 2018 में सरकार ने एक परस्पर विरोधी बयान में संसद को सूचित किया था कि आरबीआई के पास सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विनियमित करने और पर्यवेक्षण करने के लिए व्यापक शक्तियां हैं।
सरकार के बयान ने आरबीआई की स्थिति का प्रतिकार किया कि केंद्रीय बैंक के पास पीएसयू बैंकों को विनियमित करने के लिए शक्तियों की कमी है, जिसमें बैंकों के बोर्ड और प्रबंधन को खारिज करना शामिल है।
राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में केंद्र ने कहा था, आरबीआई की शक्तियां व्यापक हैं और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों सहित सभी बैंकों में उत्पन्न होने वाली विभिन्न स्थितियों से निपटने के लिए व्यापक हैं। आरबीआई के पास बैंक का निरीक्षण करने की शक्तियां हैं। इसके बहीखातों में सरकारी बैंकों के बोर्ड में एक नामित सदस्य होता है और बोर्ड के भीतर एक समिति का हिस्सा होता है जो बड़े ऋणों को मंजूरी देता है।
आरबीआई बैंकों के बोडरें पर अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति कर सकता है, आरबीआई के पास सभी बड़े क्रेडिट एक्सपोजर के साथ-साथ केंद्रीय धोखाधड़ी रजिस्ट्री के लिए एक भंडार है, जहां बैंक 1 लाख रुपये से ऊपर की सभी धोखाधड़ी की रिपोर्ट करते हैं। इसके पास विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत शक्तियां भी हैं।
एक समृद्ध निजी क्षेत्र के बैंकिंग स्थान के बावजूद भारत में अधिकांश बैंकिंग परिसंपत्तियां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पास हैं, जो वित्तीय सेवा विभाग के तत्वावधान में हैं।
पिछले कुछ वर्षों में कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक घोटालों का पता चला है, जिसके कारण विशेषज्ञों ने नियंत्रण के दोहरेपन पर सवाल उठाया है।
राष्ट्रीय
क्या सरकार सोनम वांगचुक को मारना चाहती है: संजय राउत

मुंबई, 13 जुलाई: शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले 16 दिनों से सोनम वांगचुक अनशन पर हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि सरकार की ओर से किसी भी प्रकार के सकारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में यही सवाल उभरकर सामने आ रहा है कि क्या सरकार सोनम वांगचुक को मारना चाहती है?
संजय राउत ने सोनम वांगचुक की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उनके मुताबिक, सोनम वांगचुक असाधारण, पर्यावरणविद, शिक्षाविद और पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित हैं।
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने यह भी बताया कि आखिर सोनम वांगचुक क्यों अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे धर्मेंद्र प्रधान ने पूरी तरह से भ्रष्टाचार किया है। उनके कार्यकाल के दौरान ही नीट जैसी परीक्षा लीक हुई। कई छात्रों ने मौत को भी गले लगा लिया। इन्हीं सब स्थिति को देखते हुए सोनम वांगचुक आज अनशन पर बैठे हुए हैं।
उनके मुताबिक, सरकार को सोनम वांगचुक के पास आकर उनसे बात करनी चाहिए थी। उनसे बात करनी चाहिए थी, लेकिन अफसोस की बात है कि अभी तक सरकार की तरफ से कोई भी उनके पास नहीं आया। कुल मिलाकर हमें यह समझना होगा कि सोनम वांगचुक अनशन पर क्यों बैठे हैं। सोनम वांगचुक हम सभी लोगों के लिए ही बैठे हैं।
इसके अलावा, उन्होंने अन्ना हजारे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब अन्ना हजारे अनशन पर बैठे हुए थे, तब तत्कालीन सरकार की ओर से कई लोग उनके पास गए थे और उनसे संवाद स्थापित करके उनका पक्ष जानने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे के लिए भी यह जरूरी हो जाता है कि वो सोनम वांगचुक का समर्थन करें, उनसे मुलाकात करें।
अपराध
बदरपुर में 17 वर्षीय नाबालिग की चाकू मारकर हत्या, प्रेम संबंध की शक में बुलाकर किया हमला

नई दिल्ली, 13 जुलाई: दक्षिण दिल्ली के बदरपुर इलाके के मोलरबंद एक्सटेंशन में 40 फीट रोड पर एक 17 वर्षीय नाबालिग युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान यश के रूप में हुई है, जो 12वीं कक्षा का छात्र था। घटना शाम करीब पौने सात बजे पांडे मेडिकल स्टोर के पास गली नंबर 4 में हुई। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
मृतक के पिता जगमोहन सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया, “मुझे कुछ पता नहीं था। सूचना मिलने पर जब अस्पताल पहुंचा तो देखा कि मेरा लड़का मर चुका था। उसकी छाती पर चाकू लगा हुआ था। मेरे इकलौते बेटे को ताबड़तोड़ चाकू के वार किए गए। वह 12वीं कक्षा में पढ़ता था। मुझे न्याय चाहिए, अगर इंसाफ नहीं मिला तो मैं कुछ भी कर सकता हूं।”
जगमोहन सिंह का कहना है कि उनका बेटा शांत स्वभाव का था और उन्होंने पुलिस से जल्द से जल्द दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यश उस लड़की के भाई द्वारा मौके पर बुलाया गया था, जिसके साथ वह रिलेशनशिप में था। यश तीन दोस्तों के साथ वहां पहुंचा। वहां दूसरे ग्रुप से झगड़ा हो गया। विवाद के दौरान यश की छाती और पेट में धारदार हथियार से कई वार किए गए। स्थानीय लोगों ने मदद की और घायल यश को तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही थी। चोटों की तीव्रता के कारण इलाज के दौरान यश की मौत हो गई।
थाना बदरपुर के अधिकारियों ने बताया कि रात करीब 8 बजे स्थानीय बीट स्टाफ से सूचना मिली। डीडी नंबर 94ए दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई। क्राइम टीम ने घटनास्थल (एसओसी) का निरीक्षण किया। पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। दो आरोपियों को मौके से पकड़ लिया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें लगाई गई हैं।
दुर्घटना
कानपुर में खड़े ट्रक से टकराई स्कॉर्पियो, दो बच्चों समेत तीन की मौत

कानपुर, 13 जुलाई: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक दुर्घटना में स्कॉर्पियो कार सवार दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, कानपुर जिले के महाराजपुर इलाके में सोमवार सुबह 6 बजे स्कॉर्पियो कार राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक खड़े ट्रक से जा टकराई। स्कॉर्पियो कार में हादसे के समय करीब 8 लोग सवार थे। यह कार फतेहपुर की ओर जा रही थी।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई। बताया गया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि कार चकनाचूर हो गई। अंदर फंसे लोग दर्द से तड़पते रहे।
मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस टीम ने सभी तीन मृतकों के शवों को अपने कब्जे में लिया और बाकी घायलों को अस्पताल के लिए भेजा। बताया गया कि मरने वालों में दो मासूम बच्चे भी शामिल थे। हालांकि, मृतकों की पहचान अभी सामने नहीं आई।
इससे पहले, एटा जिले में एक कार से सांड की टक्कर के बाद ड्राइवर की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि एटा जिले के पिलुआ थाना क्षेत्र में निधोली रोड स्थित जवाहरपुर गोदाम के पास यह हादसा हुआ। मृतक की पहचान 35 वर्षीय नरेंद्र शर्मा के रूप में हुई, जो एटा जिले के जिटौली गांव के निवासी था। बताया गया कि नरेंद्र अपनी दुकान बंद करने के बाद गांव लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में सांड से कार की टक्कर हुई।
अग्निशमन प्रभारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें हादसे की सूचना मिली थी। बताया गया कि कार की सांड से टक्कर हुई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और इस दुर्घटना में घायल युवक को अस्पताल भेजा गया। साथ ही, पुलिस टीम ने कार को सड़क से हटाकर किनारे किया।
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