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Tuesday,31-March-2026
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पहला वनडे : महिला ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इंग्लैंड को 27 रनों से हराया

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शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को यहां मनुका ओवल में खेले गए पहले वनडे में महिला इंग्लैंड टीम को 27 रन से हराकर बहु-प्रारूप एशेज सीरीज को बरकरार रखा। केट क्रॉस (3/33) और कैथरीन ब्रंट (3/40) की शानदार गेंदबाजी के कारण इंग्लैंड ने 50 ओवरों में ऑस्ट्रेलिया को 205/9 पर रोकने में सफल रहा। टीम की ओर से बेथ मूनी ने 73 रन बनाए।

जवाब में, डार्सी ब्राउन (4/34) ने मेगन शुट्ट 2/39 और ताहलिया मैकग्राथ 2/34 के साथ मिलकर इंग्लैंड को 45 ओवर में 178 रनों पर समेट दिया। जिससे कंगारूओं ने 27 रनों से जीत दर्ज की।

इस जीत के साथ, ऑस्ट्रेलिया जिसे केवल एशेज बनाए रखने के लिए श्रृंखला ड्रा करना है, अब 8-4 से अंक तालिका में आगे है। इंग्लैंड, जो अभी भी एकदिवसीय जीत के लिए उपलब्ध दो अंकों के साथ श्रृंखला ड्रा कर सकता है।

पहले गेंदबाजी का विकल्प चुनते हुए इंग्लैंड को शुरुआती सफलता मिली, जब चौथे ओवर में अन्या श्रुबसोल ने रशेल हेन्स (4) को कैच आउट कराया। जबकि कप्तान मेग लैनिंग और एलिसा हीली ने पारी को संभाला, लेकिन केट क्रॉस ने लैनिंग को जल्दी ही पवेलियन भेज दिया।

इसके बाद, सोफी एक्लेस्टोन ने एलिसे पेरी को बिना खाता खोले पवेलियन भेज दिया। ऑस्ट्रेलिया का संकट बढ़ गया, जब एनी जोन्स की शानदार स्टंपिंग ने क्रॉस की गेंद पर एलिसा हीली का भी अंत हो गया।

ऑस्ट्रेलिया 67/4 मुश्किल में था, लेकिन बेथ मूनी ने ताहलिया मैकग्राथ के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया। इस जोड़ी ने अर्धशतकीय साझेदारी करके ऑस्ट्रेलिया को मैच में वापस ले आई, लेकिन जल्द ही मैकग्रा को कैथरीन ब्रंट ने आउट कर ऑस्ट्रेलिया को पांचवा झटका दे दिया।

इसके बाद मूनी की 73 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेल की वजह से ऑस्ट्रेलिया 50 ओवरों में नौ विकेट के नुकसान पर 205 रन बना सका।

206 रनों का पीछा करते हुए इंग्लैंड, 18 वर्षीय ब्राउन ने चौथे ओवर में टैमी ब्यूमोंट को आउट किया और उसके तुरंत बाद हीथर नाइट भी बिना खाता खोले ही आउट होकर पवेलियन लौट गईं।

इसके बाद, नट साइवर (45) के अलावा टीम के किसी सदस्य ने लंबी पारी नहीं खेली, जिससे इंग्लैंड की टीम 178 रनों पर ही सिमट गई और मेजबान टीम ने 27 रनों से यह मैच अपने नाम कर लिया।

संक्षिप्त स्कोर :

ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम 50 ओवर में 205/9 (बेथ मूनी 73, केट क्रॉस 3/33) इंग्लैंड 45 ओवर में 178 (नताली साइवर 45, डार्सी ब्राउन 4/34)।

अंतरराष्ट्रीय

गाजा में मानवीय मदद की कमी के कारण लेबनान में स्वास्थ्य सुविधाओं पर हमले बढ़े: संयुक्त राष्ट्र

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संयुक्त राष्ट्र, 31 मार्च : मिडिल ईस्ट में संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यकर्ताओं ने लेबनान में स्वास्थ्य सुविधाओं पर हमलों में तेजी से बढ़ोतरी और गाजा पट्टी में मानवीय कामों में बढ़ती रुकावटों की ओर इशारा किया। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने कहा कि लेबनान में स्वास्थ्य सुविधाओं, एम्बुलेंस और मेडिकल कर्मचारियों पर हमले खतरनाक दर से बढ़े हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अकेले वीकेंड में सात घटनाओं की रिपोर्ट दी, जिसमें ड्यूटी पर तैनात कम से कम नौ स्वास्थ्यकर्मी मारे गए।

दक्षिणी लेबनान में ओसीएचए ने कहा कि हमलों में एम्बुलेंस को नुकसान हुआ, जिसमें नबातीह गवर्नरेट गवर्नोरेट के कफर सर शहर में हुए हमले में घायल हुए लोगों को ले जा रही गाड़ियां भी शामिल हैं। ओसीएचए ने कहा कि जब से तनाव बढ़ना शुरू हुआ है, स्वास्थ्य सुविधाओं पर 87 हमले हुए हैं, जिसमें 52 स्वास्थ्यकर्मी मारे गए और 126 घायल हुए हैं।

हफ्ते के अंत में जारी एक संयुक्त बयान में लेबनान के लिए यूएन के खास संयुक्त राष्ट्र के उप विशेष समन्वयक और मानवीय समन्वयक इमरान रिजा और लेबनान में डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि अब्दिनासिर अबुबकर ने स्वास्थ्यकर्मी और फर्स्ट रेस्पॉन्डर की सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि मेडिकल स्टाफ और सुविधाओं को कभी टारगेट नहीं किया जाना चाहिए।

लेबनानी अधिकारियों ने बताया कि वीकेंड में कम से कम 96 लोग मारे गए, जिससे तनाव बढ़ने के बाद से मरने वालों की कुल संख्या 1,238 हो गई, और 3,500 से ज्यादा घायल हुए।

ओसीएचए ने कहा कि बिगड़ते सुरक्षा हालात के बावजूद, ऑफिस और उसके पार्टनर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य साझेदार ने बेघर लोगों को 33,500 से ज्यादा मेडिकल सलाह दी है और 22,500 से ज्यादा लोगों को जरूरी दवाइयां पहुंचाई हैं।

ओसीएचए ने कहा कि कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाकों में, गाजा और वेस्ट बैंक दोनों में आम लोगों पर जानलेवा हमले जारी हैं। मानवीय मदद के कामों पर पाबंदियां बढ़ती जा रही हैं।

गाजा के रिहायशी इलाकों में हवाई हमले और गोलाबारी हुई। अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन ने सोमवार को कहा कि वे इजरायली हाईकोर्ट ऑफ जस्टिस में एक अपील याचिका फाइल करने पर विचार कर रहे हैं। इस याचिका में इजरायल के नए एनजीओ रजिस्ट्रेशन सिस्टम को चुनौती दी जाएगी। उनका कहना है कि यह सिस्टम इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाकों में उनके काम करने की काबिलियत को और कम करता है।

ओसीएचए ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एनजीओ मानवीय मदद में अहम भूमिका निभाते हैं, जो मिलकर इन इलाकों में हर साल लगभग 1 बिलियन डॉलर की मदद देते हैं। नई रजिस्ट्रेशन जरूरतें उन कई तरीकों में से हैं जो लोगों की मानवीय सेवाओं तक पहुंच को कमजोर कर रहे हैं।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक ऑफिस ने इजरायली अधिकारियों से मानवीय राहत को तेजी से और बिना किसी रुकावट के पहुंचाने में मदद करने, मानवीय कामों में रुकावट डालने वाली नीतियों को बदलने के लिए कहा है। इसके साथ ही ओसीएचए ने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि मानवीय संगठन मानवीय सिद्धांतों के हिसाब से काम कर सकें।

ओसीएचए ने कहा कि आम लोगों को हमेशा सुरक्षित रखना चाहिए और कानून लागू करने के मामले में जानलेवा ताकत का इस्तेमाल सिर्फ आखिरी तरीके से किया जाना चाहिए। गैरकानूनी हमले करने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

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अंतरराष्ट्रीय

इजरायल ने घातक हमलों के दोषी फिलिस्तीनियों के लिए फांसी की सजा का कानून किया पारित

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तेल अवीव : इजरायल की संसद ने एक विवादास्पद कानून पारित किया है। जिसके तहत सैन्य अदालतों द्वारा घातक हमलों के दोषी पाए गए फिलिस्तीनियों के लिए फांसी की सजा अनिवार्य कर दी गई है। यह कानून प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के धुर दक्षिणपंथी सहयोगियों की एक प्रमुख मांग में शामिल था।

इस कानून की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हुई है। विरोधियों ने इसे भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया है। आलोचकों का तर्क है कि यह कानून पहचान के आधार पर एक अलग कानूनी ढांचा तैयार करता है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

नए कानून के तहत, हत्या के दोषी पाए गए इजरायलियों को मृत्युदंड तभी दिया जाएगा, जब यह कृत्य “इजरायल के अस्तित्व को समाप्त करने” के इरादे से किया गया हो।

आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान प्रभावी रूप से यह सुनिश्चित करता है कि यह सजा असमान रूप से फिलिस्तीनियों को निशाना बनाएगी जबकि इसी तरह के अपराधों के आरोपी यहूदी इजरायलियों को इससे बाहर रखा जाएगा।

कानून में यह भी अनिवार्य है कि फांसी की सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के भीतर ही दी जाए, जिसमें देरी के लिए केवल सीमित आधार दिए गए हैं और क्षमादान का कोई प्रावधान नहीं है।

अदालतों के पास आजीवन कारावास की सजा देने का विकल्प बरकरार है लेकिन केवल विशेष परिस्थितियों में ही मान्य होगा।

गौरतलब है कि इजरायल ने 1954 में हत्या के लिए मृत्युदंड समाप्त कर दिया था। नागरिक मुकदमे के बाद दी गई एकमात्र फांसी 1962 में एडॉल्फ आइचमैन की थी, जो होलोकॉस्ट में शामिल एक प्रमुख व्यक्ति था।

हालांकि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में सैन्य अदालतों के पास पहले से ही फिलिस्तीनी दोषियों को मृत्युदंड देने का अधिकार था लेकिन ऐसी सजा कभी लागू नहीं की गई थी।

इस विधेयक को धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर का जोरदार समर्थन प्राप्त था, जिन्होंने मतदान से पहले फांसी के फंदे के आकार के लैपल पिन पहनकर ध्यान आकर्षित किया।

विधेयक के पारित होने के बाद यायर लैपिड की येस एटिड, अरब-बहुसंख्यक हदाश-ताअल और वामपंथी डेमोक्रेट्स पार्टी जैसी विभिन्न विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ कई मानवाधिकार संगठनों ने उच्च न्यायालय में इस कानून को चुनौती देने का मन बनाया है।

टाइम्स ऑफ इजरायल द्वारा नेसेट की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य और इस कानून के सबसे कड़े आलोचकों में से एक डेमोक्रेट सांसद गिलाद कारिव के हवाले से कहा गया है, “यह एक अनैतिक कानून है जो एक यहूदी और लोकतांत्रिक राज्य के रूप में इजरायल के मूलभूत मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून के उन प्रावधानों के विपरीत है, जिनका पालन करने का इजरायल ने वादा किया है।”

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अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका कुछ हफ्तों में ईरान ऑपरेशन कर देगा खत्म: मार्को रुबियो

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वाशिंगटन : अमेरिकी सरकार की तरह से बार-बार इस बात को दोहराया जा रहा है। कि वह लक्ष्य पूरा करने में तय समय से आगे चल रहे हैं और जल्द ही खत्म कर देंगे। अब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य महीनों में नहीं, बल्कि हफ्तों में पूरा कर लेगा।

इस बीच अमेरिकी विदेश सचिव ने लड़ाई खत्म करने के लिए वाशिंगटन की शर्तें बताईं और तेहरान को होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी।

स्थानीय समयानुसार, सोमवार को अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि सैन्य ऑपरेशन जारी रहने के बावजूद, “ईरान और अमेरिका के अंदर कुछ लोगों के बीच खासकर बिचौलियों के जरिए मैसेज और कुछ सीधी बातचीत चल रही थी।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन की मुख्य मांगें वैसी ही हैं, “ईरानी सरकार के पास कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकते और उन्हें आतंकवाद को स्पॉन्सर करना बंद करना होगा और उन्हें ऐसे हथियार बनाना बंद करना होगा जो उनके पड़ोसियों के लिए खतरा बन सकते हैं।”

रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने बताए गए मकसद को पाने में बहुत आगे या तय समय से आगे है, जिसमें ईरान की एयर फोर्स और नेवी को खत्म करना और “उनके पास मौजूद मिसाइल लॉन्चर की संख्या में काफी कमी शामिल है।

उन्होंने कहा, “हम ये मकसद, हफ्तों में हासिल कर लेंगे, महीनों में नहीं।” उन्होंने साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोई भी कोशिश मंजूर नहीं होगी। दुनिया का कोई भी देश इसे स्वीकार नहीं कर सकता है।

रुबियो ने चेतावनी दी कि ऐसा कदम दूसरे देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर दावा करने का एक उदाहरण बनेगा। रुबियो ने आगे कहा, “अमेरिका यह शर्त नहीं मानेगा। वे जो मांग रहे हैं, वह एक गैर-कानूनी शर्त है। ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है।”

उन्होंने कहा कि स्ट्रेट किसी न किसी तरह से खुला रहेगा, या तो ईरान के अंतरराष्ट्रीय कानून मानने से या देशों के एक साथ आकर कार्रवाई करने से।

रुबियो ने ईरान पर पूरे इलाके में आवासीय और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “उन्होंने दूतावास, डिप्लोमैटिक फैसिलिटी, एयरपोर्ट, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया है।”

ईरान को 10 सालों में सबसे कमजोर बताते हुए, उन्होंने कहा कि भविष्य में बड़े खतरों को रोकने के लिए अभी उसकी सैन्य क्षमताओं को कम करना जरूरी है।

डिप्लोमेसी को लेकर रुबियो ने कहा कि तेहरान को न्यूक्लियर हथियार रखने की किसी भी इच्छा को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाने और मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम छोड़ने की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, “अगर ईरान ऐसा करता है, तो देश का भविष्य अच्छा हो सकता है। दशकों से उस देश की सरकार ने इस रास्ते को नहीं अपनाया है।”

इस दौरान रुबियो ने ऑपरेशन के दौरान एयरस्पेस और बेस एक्सेस न देने का जिक्र करते हुए कुछ नाटो सहयोगियों से भी निराशा जताई और कहा, “अगर नाटो का मकसद सिर्फ यूरोप की रक्षा करना है, लेकिन फिर जब हमें जरूरत हो तो हमें बुनियादी अधिकार देने से मना करना, तो यह बहुत अच्छा इंतजाम नहीं है। इन संबंधों को फिर से देखना होगा।”

रुबियो ने कहा कि अमेरिका के मकसद में ईरान में शासन बदलना शामिल नहीं था। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को माना कि अगर ईरान के नेतृत्व में बदलाव होता है तो वाशिंगटन इसका विरोध नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “इस ऑपरेशन का मकसद यह नहीं था।

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