अंतरराष्ट्रीय
दक्षिण अफ्रीका ने भारत पर किया क्लीन स्वीप, आखिरी वनडे में 4 रनों से दी मात
न्यूलैंड्स में रविवार को खेले गए सीरीज के आखिरी और रोमांचक वनडे मैच में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 4 रनों हरा दिया, जिससे तीन मैचों की सीरीज में प्रोटियाज ने भारत पर क्लीन स्वीप किया। दक्षिण अफ्रीका के 288 रनों के लक्ष्य के जवाब में भारतीय टीम 49.2 ओवरों में 283 रनों पर सिमट गई। भारत की ओर से विराट कोहली (65) ने सबसे ज्यादा रन बनाए। दक्षिण अफ्रीका की ओर से लुंगी एनगिडी और एंडिले फेहलुकवायो ने तीन-तीन सफलताएं अपने नाम कीं। वहीं ड्वेन प्रिटोरियस ने दो विकेट अपने नाम किए, जबकि केशव महाराज और सिसांडा मगला ने एक-एक विकेट लिया।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को शुरुआत में ही कप्तान केएल राहुल के रूप में झटका लगा, जब एनगिडी ने उन्हें 9 रनों पर जन्नेमैन मलान के हाथों कैच आउट कराया। इसके बाद, तीसरे नंबर पर आए विराट कोहली और सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने मिलकर पारी को संभाला और टीम के लिए महत्वपूर्ण स्कोर बनाते चले गए।
धवन ने 58 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, जिससे भारत का स्कोर 19वें ओवर में एक विकेट विकेट के नुकसान पर 100 के पार हो गया। दूसरी छोर पर कोहली ने भी अच्छे शॉट लगाए। लेकिन दोनों के बीच होती इस लंबी साझेदारी (98) को फेहलुकवायो ने तोड़ा, जब धवन पांच चौके और एक छक्के की मदद से 61 रन बनाकर आउट हो गए। इस समय तक 22 ओवरों में भारत ने दो विकेट खोकर 116 रन बनाए लिए थे।
वहीं, भारत को जल्द ही तीसरा झटका फेहलुकवायो ने तब दिया, जब ऋषभ पंत बिना खाता खोले ही पवेलियन भेज दिया। चौथे नंबर पर श्रेयस अय्यर ने कोहली के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया। इस बीच, कोहली ने अपना अर्धशतक पूरा कर लिया और दोनों के बीच 38 रनों की साझेदारी हुई। लेकिन 32वें ओवर में कोहली पांच चौके की मदद से 65 रन बनाकर महाराज की गेंद पर आउट हो गए। इस समय भारत का स्कोर चार विकेट के नुकसान पर 154 रन लिए थे और अब जीतने के लिए 134 रनों की जरूरत थी।
इसके बाद छठे नंबर पर आए सूर्यकुमार यादव ने श्रेयस के साथ मिलकर लक्ष्य का पीछा करना शुरू किया। लेकिन जल्द ही सिसांडा की गेंद पर श्रेयस (26) भी पवेलियन लौट गए। अब भारत की स्थिति खराब होने लगी, क्योंकि एक के बाद एक विकेट गिरते चले जा रहे थे। भारतीय टीम ने 38 ओवरों में पांच विकेट के नुकसान पर 200 रन पूरे कर लिए थे।
इस बीच, सूर्यकुमार ने चार चौके और एक छक्के की मदद से 39 रन बनाकर आउट हो गए। जल्द ही जयंत यादव (2) भी चलते बने। इस समय तक भारत ने 42 ओवरों में सात विकेट खोकर 227 रन बना लिए थे, टीम को अभी भी जीतने के लिए 61 रनों की जरूरत थी। सातवें स्थान पर आए दीपक चाहर और जसप्रीत बुमराह ने मिलकर भारत को लक्ष्य के करीब पहुंचने की कोशिश की। इस दौरान, चाहर ने पांच चौके और दो चक्कों की मदद से 54 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद बुमराह (12) भी पवेलियन लौट गए। युजवेंद्र चहल (2) रन बना कर आउट हो गए, जिससे भारतीय टीम लक्ष्य का पीछा नहीं कर पाई और 49.2 ओवरों में 283 रन पर ही ऑलआउट हो गई। तीसरे वनडे में साउथ अफ्रीका ने जीतने के साथ सीरीज भी 3-0 से अपने नाम कर ली।
इससे पहले, बल्लेबाजी करने उतरी साउथ अफ्रीका की टीम की शुरुआत खराब रही, क्योंकि उन्होंने 34 रनों पर ही दो विकेट खो दिए। इस दौरान, सलामी बल्लेबाज जन्नेमैन मलान (1) को चाहर ने पंत के हाथों कैच आउट कराया। इसके बाद, सातवें ओवर में कप्तान टेम्बा बावुमा (8) भी कप्तान राहुल द्वारा रन आउट हो गए। सलामी बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक और एडेन मार्करम ने पारी को संभालते हुए टीम के स्कोर को आगे बढ़ाया। लेकिन मार्करम (15) भी डीकॉक के साथ 36 रनों की साझेदारी करने के बाद चाहर की गेंद पर पवेलियन लौट गए। इस समय तक साउथ अफ्रीका का स्कोर 12.2 ओवरों में तीन विकेट के नुकसान पर 70 रन हो चुका था।
इसके बाद आए रस्सी वैन डेर डूसन ने डीकॉक के साथ लड़खड़ाती पारी को संभाला। 19वें ओवर में डीकॉक ने 59 गेंदों में अपना 28वां अर्धशतक पूरा कर लिया। 23 ओवरों के बाद साउथ अफ्रीका का स्कोर तीन विकेट पर 129 रन पहुंच गया। दोनों खिलाड़ियों ने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ तेज गति से रन जोड़े। इस बीच, डीकॉक ने 108 गेंदों में अपने करियर का 17वां शतक जड़ दिया।
डीकॉक और डूसन ने मिलकर कई लंबी-लंबी बाउंड्री लगाई। लेकिन डीकॉक 12 चौके और दो छक्के की मदद से 124 रन बनाकर बुमराह की गेंद पर आउट हो गए, जिससे दोनों के बीच 143 गेंदों पर 144 रनों की साझेदारी का अंत हो गया।
इसके बाद, डूसन भी जल्द चार चौके और एक छक्के की मदद से 52 रन बनाकर चहल के शिकार बन गए। प्रोटियाज का स्कोर 37 ओवरों में पांच विकेट के नुकसान पर 219 रन थे। क्रीज में डेविड मिलर और एंडिले फेहलुकवायो मौजूद थे। इस बीच, फेहलुकवायो (4) रन बनाकर आउट हो गए। वहीं, मिलर ने आखिरी के कुछ ओवरों में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की। दूसरी छोर से ड्वेन प्रिटोरियस ने उनका साथ दिया। दोनों के बीच 43 गेंदों में 44 रनों की साझेदारी हुई, जिसके बाद प्रिटोरियस 20 रन बनाकर आउट हो गए।
केशव महाराज (6), मिलर (39) और सिसांडा मगला (0) भी जल्द आउट होकर पवेलियन लौट गए, जिससे साउथ अफ्रीका की टीम 49.5 ओवरों में 287 रनों पर सिमट गई थी। भारत की ओर से सबसे ज्यादा प्रसिद्ध कृष्णा ने तीन विकेट अपने नाम किए। वहीं, दीपक चाहर और जसप्रीत बुमराह ने दो-दो विकेट चटकाए, जबकि युजवेंद्र चहल ने एक विकेट लिया।
अंतरराष्ट्रीय
भारत ने अफगानिस्तान को फिर से भेजी मदद, जीवनरक्षक चिकित्सीय सहायता काबुल पहुंची

काबुल, 28 नवंबर : भारत हमेशा से अफगानिस्तान के लिए मजबूती से खड़ा रहा है। समय-समय पर मदद की खेप भेजता है। भारत ने निरंतर समर्थन को दोहराते हुए, शुक्रवार को अफगानिस्तान को 73 टन जीवनरक्षक दवाइयों, टीकों और आवश्यक पोषक सप्लीमेंट्स की खेप भेजी। यह सहायता अफगान स्वास्थ्य प्रणाली की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से काबुल पहुंचाई गई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने एक्स पर लिखा, “अफगानिस्तान के स्वास्थ्य प्रयासों को मजबूती देते हुए भारत ने 73 टन जीवनरक्षक दवाइयां, टीके और आवश्यक सप्लीमेंट्स तत्काल चिकित्सा जरूरतों के लिए काबुल पहुंचाए हैं। अफगान लोगों के प्रति भारत का अटूट समर्थन जारी है।”
पिछले सप्ताह नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अल्हाज नूरुद्दीन अजीजी के बीच मुलाकात हुई थी। बैठक में व्यापार, संपर्क और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “अफगानिस्तान के उद्योग और वाणिज्य मंत्री अल्हाज नूरुद्दीन अज़ीज़ी से मुलाकात कर खुशी हुई। व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। अफगान जनता के विकास और कल्याण के लिए भारत के समर्थन को दोहराया।”
इससे पहले भी भारत ने अफगानिस्तान के भूकंप प्रभावित परिवारों की मदद के लिए खाद्य सामग्री भेजी थी। बाल्ख, समनगन और बगलान प्रांतों में आए विनाशकारी भूकंप में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे।
10 अक्टूबर को भारत ने अतिरिक्त खाद्य सहायता भी भेजी थी। उसी दिन विदेश मंत्री जयशंकर की अफगान समकक्ष मौलवी आमिर खान मुत्ताकी से नई दिल्ली में मुलाकात हुई। बैठक में विकास सहयोग, व्यापार, अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता व स्वतंत्रता, आपसी संपर्क और क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर वार्ता हुई।
जयशंकर ने मुत्ताकी की भारत यात्रा को “द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम” बताया और अफगानिस्तान को पांच एम्बुलेंस सौंपने की घोषणा भी की।
भारत की यह मानवीय सहायता अफगानिस्तान के लिए हाल के महीनों में की गई कई निरंतर मददों की नवीनतम कड़ी है, जो दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और जन-संपर्क आधारित रिश्तों को मजबूत करती है।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने तीसरे देश के जरिए नहीं भेजा अमेरिका को कोई मैसेज, खामेनेई बोले-झगड़े बढ़ा रहा अमेरिका

तेहरान, 28 नवंबर : हाल ही में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद अमेरिका दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात की। ट्रंप से मुलाकात के पहले क्राउन प्रिंस को ईरान की एक चिट्ठी मिली थी। इस चिट्ठी को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं कि इस चिट्ठी में अमेरिका के लिए एक मैसेज था। हालांकि, ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने इन सभी दावों को मनगढ़ंत बताया है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार खामेनेई ने गुरुवार रात को टीवी पर दिए गए संदेश में मीडिया के इन सभी दावों को खारिज कर दिया। अफवाह थी कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सऊदी क्राउन प्रिंस को उनके यूएस दौरे से पहले जो मैसेज भेजा था, वह वॉशिंगटन के लिए था।
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने कहा, “वे अफवाहें फैला रहे हैं कि ईरानी सरकार ने किसी तीसरे देश के जरिए अमेरिका को मैसेज भेजा है, जो सरासर झूठ है।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेजेशकियन की चिट्ठी में कहा गया कि ईरान टकराव नहीं चाहता है। उसका मकसद क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करना है और वह कूटनीति के जरिए न्यूक्लियर विवाद को सुलझाने के लिए तैयार है, बशर्ते उसके अधिकारों की गारंटी हो।
खामेनेई ने अपने भाषण के दौरान इजरायल के हमलों और अपराधों में अमेरिका के समर्थन की कड़ी आलोचना की। ईरानी सुप्रीम ने अमेरिका पर अपनी रणनीति और रिसोर्स के फायदे के लिए झगड़ों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने पहले ही इस बात को साफ कर दिया था कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस को जो चिट्ठी दी गई, वह सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर थी।
तेहरान और वॉशिंगटन ने इसी साल अप्रैल और जून के बीच ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और अमेरिकी बैन पर बातचीत की थी। दोनों पक्षों के बीच ओमान की मध्यस्थता में पांच राउंड की बातचीत हुई। इसके बाद छठे राउंड की बातचीत की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन उससे पहले ही इजरायल ने ईरान में कई जगहों पर अचानक हमले कर दिए।
इस हमले में ईरान के न्यूक्लियर वैज्ञानिक और सीनियर कमांडर मारे गए। इसके बाद ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई की।
22 जून को अमेरिकी सेना ने नतांज, फोर्डो और इस्फहान में ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया। ईरान ने अगले दिन कतर में अमेरिकी अल उदीद एयर बेस को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद ईरान और इजरायल के बीच 24 जून से सीजफायर लागू हुआ।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप के टैरिफ वॉर से दुनिया को राहत? अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में आज हो सकता है आखिरी फैसला!

नई दिल्ली, 6 नवंबर : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के ऐलान के साथ वैश्विक व्यापार जगत में उथल-पुथल मच गई। ट्रंप के टैरिफ को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी रही, जिसके बाद उम्मीद की जा रही है कि इसपर आखिरी फैसला भी आज आ जाए। वहीं, दूसरी ओर पूरी दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं।
5 नवंबर को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में आखिरी सुनवाई शुरू हुई, जिसमें अधिकांश जजों ने अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले पर सवाल खड़े किए।
निचली फेडरल कोर्ट ने इससे पहले टैरिफ के मामले में फैसला सुनाया था कि ट्रंप के पास अमेरिका के कई व्यापारिक साझेदारों से आयात पर टैरिफ लगाने और कनाडा, चीन और मैक्सिको के उत्पादों पर फेंटानिल टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है। निचले कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
बता दें, टैरिफ को लेकर करीब ढाई घंटे से ज्यादा कोर्ट में बहस चली। कोर्ट ने ट्रंप सरकार के टैरिफ के फैसले पर सवाल उठाए। जस्टिस सोनिया सोतोमयोर ने कहा, “आप कहते हैं कि टैरिफ टैक्स नहीं हैं, लेकिन वास्तव में वे टैक्स ही हैं। वे अमेरिकी नागरिकों से पैसा, राजस्व कमा रहे हैं।”
इस पर सॉलिसिटर जनरल जॉन सॉयर ने कहा, “मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता, यह एक नियामक टैरिफ है, टैक्स नहीं। यह सच है कि टैरिफ से राजस्व बढ़ता है और यह केवल आकस्मिक है।”
इसके अलावा जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा, “अगर मैं सही नहीं हूं तो मुझे सुधारें, लेकिन यह तर्क किसी भी देश के किसी भी उत्पाद पर, किसी भी मात्रा में, किसी भी अवधि के लिए टैरिफ लगाने की शक्ति के लिए दिया जा रहा है।”
जस्टिस रॉबर्ट्स की इस टिप्पणी के बाद अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने तर्क दिया कि आईईईपीए राष्ट्रपति को इमरजेंसी की स्थिति के दौरान ‘आयात को विनियमित करने’ की इजाजत देता है।
अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल के तर्क से जस्टिस एमी कोनी बैरेट सहमत नहीं थीं। उन्होंने सॉयर से कहा, “क्या आप संहिता में ऐसे किसी दूसरे स्थान या इतिहास में किसी दूसरे समय का जिक्र कर सकते हैं, जहां ‘आयात को विनियमित करना’ वाक्यांश का उपयोग टैरिफ लगाने का अधिकार देने के लिए किया गया हो?”
इसके अलावा, जस्टिस बैरेट ने कहा कि अगर कांग्रेस भविष्य में आपातकालीन टैरिफ पर किसी भी सीमा को मंजूरी देना चाहती है, तो उसे राष्ट्रपति के वीटो को पार करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
जस्टिस बैरेट ने पूछा, “अगर कांग्रेस कहती है, ‘अरे, हमें यह पसंद नहीं है, इससे राष्ट्रपति को आईईईपीए के तहत बहुत ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं,’ तो उसे आईईईपीए से उस टैरिफ शक्ति को वापस लेने में बहुत मुश्किल होगी, है ना?”
हालांकि, कोर्ट की तरफ से मामले में अब तक आखिरी फैसला सामने नहीं आया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ वाले फैसले पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं।
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