राजनीति
विपक्ष ने दोनों सदनों में दिया नोटिस, किसानों को एमसपी और मुआवजा देने की मांग की
दोनों सदनों में विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है क्योंकि वह सोमवार को कृषि कानूनों को निरस्त करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस और अन्य पार्टियों के कई सांसदों ने अपने-अपने सदनों में नोटिस भेजा है। लोकसभा में कांग्रेस के फ्लोर लीडर अधीर रंजन चौधरी ने प्रश्नकाल स्थगित करने और एमएसपी मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सदन में स्थगन नोटिस दिया है। नोटिस में चौधरी ने कहा कि ‘सरकार को कानूनी गारंटी के साथ सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करना चाहिए।’
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने जान गंवाने वाले किसानों को मुआवजा देने की मांग को लेकर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। ऐसा ही नोटिस मनिकम टैगोर ने राज्यसभा में भी दिया है।
भाकपा के बिनॉय विश्वम ने कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने पर चर्चा की मांग करते हुए सदन में निलंबन का नोटिस दिया है।
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने नियम 267 के तहत ‘किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी पर चर्चा’ की मांग करते हुए बिजनेस नोटिस का निलंबन किया है।
तेलंगाना में फसल खरीद को लेकर टीआरएस सांसद के. केशव राव ने राज्यसभा में निलंबन नोटिस दिया है। उनका नोटिस ‘फसलों की खरीद न होने पर केंद्र सरकार की भेदभावपूर्ण फसल खरीद नीति’ पर चर्चा करने को लेकर है।
तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के संवैधानिक प्रावधानों को पूरा करने के लिए सरकार सोमवार को लोकसभा में ‘द फार्म लॉ रिपील बिल, 2021’ पेश करेगी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर निचले सदन में इसे पेश करेंगे।
राजनीति
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक स्कैम: पूर्व सीएम पिनाराई विजयन और रियास दो अलग-अलग मामलों में पहले आरोपी बनाए गए

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और सीपीआई (एम) विधायक और पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास को अलग-अलग मामलों में पहला आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) की ओर से सोमवार को विजिलेंस कोर्ट में विवादित मामलों में दो एफआईआर दर्ज कराएगी।
पहला केस सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मंथली पेमेंट से जुड़ा है, जिसमें विजयन पहले आरोपी हैं। दूसरा केस रियास को मिले कथित करप्शन के पैसे से जुड़ा है, जो दूसरे एलडीएफ कैबिनेट में टूरिज्म मिनिस्टर थे और विजयन की बेटी टी. वीना के पति हैं। वीना दोनों केस में दूसरी आरोपी हैं।
केरल हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के उस निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसमें कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) की ओर से एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को किए गए मंथली पेमेंट और सरकारी पद पर बैठे लोगों द्वारा कंपनी को दिए गए कथित फायदों से जुड़े आरोपों की पूरी जांच करने और केस दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री विजयन की बेटी वीना की यह कंपनी है। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक ट्रांजैक्शन से जुड़े पहले केस में, विजयन पहले आरोपी और वीना दूसरी आरोपी होंगी।
वहीं, दूसरे केस में पी.ए. मोहम्मद रियास पहले आरोपी और वीना दूसरी आरोपी होंगी। दोनों एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग आरोपों, पेमेंट और कथित फेवर से जुड़े हालात की जांच की जाएगी। हाई कोर्ट ने विजिलेंस को शुरुआती जांच करने के बजाय एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने सरकार की मंजूरी के बिना स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाने के पुलिस चीफ के आदेश को भी रद्द कर दिया था। सरकार से उम्मीद है कि वह विजिलेंस डायरेक्टर द्वारा सुझाई गई स्पेशल टीम को नियुक्त करने के लिए एक नया आदेश जारी करेगी, जो ऐसी टीम बनाने के अधिकार पर कोर्ट की टिप्पणियों के अनुसार होगा।
क्राइम ब्रांच के पास मौजूद सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स विजिलेंस को सौंप दिए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि हाईकोर्ट के खास निर्देश को देखते हुए जांच आगे बढ़ाने के लिए पहले से मंजूरी की जरूरत नहीं है। इस बीच, घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने कहा कि विजयन सोमवार को बाद में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने एक याचिका के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी गई है।
महाराष्ट्र
एमपीएससी में गड़बड़ियों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाई समिति, तुकाराम मुंडे को मिली सचिव की जिम्मेदारी

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) में गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर जारी उम्मीदवारों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आयोग से जुड़े मामलों की जांच और सुधार के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार का यह फैसला रविवार को सामने आया। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने पुणे में एसएम जोशी पुल पर आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों से मुलाकात के दौरान समिति के गठन की जानकारी दी। यहां उम्मीदवार पिछले 10 दिनों से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग में सुधार समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। तुकाराम मुंडे के अलावा इसमें लक्ष्मी गौतम, गणेश पाटील और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक को शामिल किया गया है। समिति से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर विचार करने की अपेक्षा है।
सरकार के इस फैसले को आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों की मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग पर सरकार ने क्या निर्णय लिया है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है।
आंदोलनकारी उम्मीदवारों की मांगों में केवल महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार ही शामिल नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन में शामिल कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती करने और जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठाई है।
इसके अलावा, उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों के आंदोलन का समर्थन कर रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पाटील ने समिति में तुकाराम मुंडे को शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की भी खबर है।
राष्ट्रीय समाचार
अधूरे इश्क ने उठवाई कलम, अल्फाज ऐसे कि लाखों दिलों की आवाज बन गए निदा फाजली

शायरी करना आसान हो सकता है लेकिन ऐसे अल्फाज लिखना बहुत मुश्किल है, जिन्हें पढ़कर किसी को अपना दर्द याद आ जाए, किसी को मोहब्बत का एहसास हो और किसी को जिंदगी जीने का नया नजरिया मिल जाए। हिंदी और उर्दू साहित्य में निदा फाजली एक ऐसा ही नाम हैं, जिनकी शायरी सीधे दिल तक पहुंचती है। उन्होंने आम आदमी की जिंदगी, उसके संघर्ष, रिश्तों, मोहब्बत और इंसानियत को इतने सरल शब्दों में बयां किया कि उनके शेर लोगों की जुबान पर चढ़ गए। आज भी उनकी शायरी पढ़ते हुए लगता है, जैसे उन्होंने हमारे ही मन की बात कह दी हो।
निदा फाजली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ था। उनका असली नाम मुक्तदा हसन था। बचपन ग्वालियर में बीता और वहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई। उनके पिता मुर्तुजा हसन भी शायरी करते थे, इसलिए साहित्य से उनका परिचय बचपन से ही हो गया था। हालांकि, निदा की शायरी की आवाज धीरे-धीरे जिंदगी के अनुभवों से निखरी।
कॉलेज के दिनों में उन्हें एक लड़की से लगाव हो गया था। वह लड़की उनके आगे की पंक्ति में बैठा करती थी। फिर एक दिन कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर खबर मिली कि एक दुर्घटना में उसकी मौत हो गई। यह खबर निदा के लिए गहरा सदमा थी। उनके भीतर जो दर्द उमड़ा, उसे बयां करने के लिए उनके पास शब्द ही नहीं थे। यही एहसास उन्हें अपनी भावनाओं को समझने और उन्हें अल्फाज देने की तरफ ले गया।
कहा जाता है कि एक सुबह निदा फाजली मंदिर के पास से गुजर रहे थे। वहां उन्होंने सूरदास का भजन सुना— ‘मधुबन तुम क्यौं रहत हरे?’ कृष्ण के वियोग में दुखी राधा और गोपियों की भावनाओं को व्यक्त करने वाला यह भजन उनके दिल में उतर गया। उन्हें लगा कि विरह और बिछड़ने का दर्द केवल उनका निजी अनुभव नहीं है। इसके बाद उन्होंने कबीर, तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई और बाबा फरीद जैसे रचनाकारों को पढ़ा। गालिब और मीर की शायरी से भी प्रेरणा ली। इन सबका असर उनके लेखन पर दिखाई दिया। उन्होंने ऐसी भाषा में लिखना शुरू किया, जिसे आम आदमी भी आसानी से समझ सके और अपने जीवन से जोड़ सके।
देश के बंटवारे के समय निदा फाजली के माता-पिता पाकिस्तान चले गए लेकिन उन्होंने भारत में ही रहने का फैसला किया। परिवार से दूर रहकर अपनी जिंदगी बनाना आसान नहीं था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी और लेखन के क्षेत्र में संघर्ष किया।
साल 1964 में वह बंबई चले गए। वहां उन्होंने पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी पहचान बनने लगी और 1969 में उनका उर्दू कविता संग्रह भी प्रकाशित हुआ। उनकी शायरी में बनावट नहीं थी। वे जिंदगी को जैसा देखते और महसूस करते थे, उसे वैसे ही शब्दों में उतार देते थे।
निदा फाजली ने साहित्य के साथ हिंदी फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई। फिल्म रजिया सुल्तान से उनके फिल्मी गीतों के सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने कई यादगार गीत लिखे। फिल्म आहिस्ता-आहिस्ता का गीत ‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता’ और सरफरोश का ‘होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है’ आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।
उन्होंने अपने अनुभवों और भावनाओं को शायरी में ढाला लेकिन उनकी रचनाएं केवल उनकी अपनी कहानी बनकर नहीं रह गईं। वे लाखों लोगों के दिलों की आवाज बन गईं।
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