राजनीति
यूपी में भाजपा का कुशासन खत्म करेगी दिवाली: अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विश्वास जताया है कि यह दिवाली उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के कुशासन का अंत करेगी। उन्होंने धनतेरस, दिवाली और गोवर्धन पूजा पर लोगों को बधाई देते हुए कहा कि भारत के त्योहार सद्भाव, शांति, आपसी सहयोग के महत्व पर रोशनी डालते हैं और प्रेम और सौहार्द का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि सभी भारतीय त्योहार शांति का संदेश देने और समाज और राष्ट्र को समृद्धि के प्रकाश की ओर ले जाने के संकल्प का अवसर हैं।
सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा की दोषपूर्ण नीतियों ने किसानों, बेरोजगार युवाओं और गरीबों को एक अंधकारमय भविष्य की ओर धकेल दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दीवाली रोशनी का त्योहार है, जो लोगों के जीवन को रोशन करेगी और राज्य में कुशासन को समाप्त करेगी।
अखिलेश यादव ने अधिकारियों की पोस्ट को स्थानांतरित करने और लोगों को गुमराह करने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा पर भी हमला किया।
उन्होंने कहा, “भाजपा अपने संकल्प पत्र (घोषणापत्र) में किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है जैसे किसानों की आय दोगुनी करना, बेरोजगार युवाओं को रोजगार और छात्रों को लैपटॉप देना। अब, वे यह मानने लगे हैं कि यूपी में 2022 के विधानसभा चुनाव वास्तव में 2024 में होने वाले चुनाव हैं और इसलिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि धान बिना बिके पड़े रहने से किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। सरकार ने इसके लिए 1,940 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। नतीजतन, किसान बिचौलियों को अपनी उपज बहुत कम दरों पर बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
इस बीच, प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार शाम को मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) उत्तर प्रदेश से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने में घोर विसंगतियों की ओर इशारा किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने कुल नामों के तत्काल प्रकाशन और 16 जनवरी, 2020-21 और 31 अक्टूबर, 2020-21 के बीच मतदाता सूची में हटाए गए, जोड़े गए और बदलाव किए गए नामों की एक अलग सूची की मांग की।
बाद में, सपा के प्रदेश अध्यक्ष ने संवाददाताओं से कहा कि लगभग 16.42 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या जोड़े गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ट्रंप प्रशासन का दावा, 30 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को अमेरिका से निकाला गया

अमेरिका से 30 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को निर्वासित किया गया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि लगातार 15 महीनों से किसी भी अवैध प्रवासी को रिहा नहीं किया गया है। उसने 14 लाख से अधिक अवैध प्रवासियों को करदाताओं के पैसे से संचालित सार्वजनिक सहायता लाभों से बाहर कर दिया है। इसके अलावा अवैध प्रवासियों को करदाताओं द्वारा वित्तपोषित एक दर्जन से अधिक स्वास्थ्य योजनाओं से भी वंचित किया गया है, हालांकि इन योजनाओं के नाम या राज्यवार आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए।
व्हाइट हाउस ने आव्रजन प्रवर्तन के अपने रिकॉर्ड का विस्तृत ब्योरा जारी करते हुए यह जानकारी दी। ये आंकड़े राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित दो कार्यकारी आदेशों के साथ जारी व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में शामिल किए गए हैं।
इन आदेशों के तहत कुछ श्रेणियों के बच्चों के लिए जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) पर प्रतिबंध लगाया गया है और संघीय एजेंसियों को बर्थ टूरिज्म रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार, निर्वासित किए गए लोगों में हिंसक अपराधों में दोषी ठहराए गए हजारों लोग भी शामिल थे। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने निर्वासित प्रवासियों के मूल देशों, निर्वासन की अवधि या विस्तृत आंकड़ों का कोई ब्योरा नहीं दिया।
प्रशासन ने यह भी दावा किया कि पिछले 15 महीनों में किसी भी अवैध प्रवासी को अमेरिका में रिहा नहीं किया गया। व्हाइट हाउस ने इसे ट्रंप के सत्ता में वापसी के पहले सप्ताह में शुरू किए गए कदमों का परिणाम बताया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिणी सीमा पर संकट का हवाला देते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें अवैध आव्रजन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। व्हाइट हाउस का कहना है कि इससे पिछली सरकार की सीमा संबंधी नीतियों को पलटा गया।
फैक्ट शीट में वीजा जांच प्रक्रिया को और सख्त करने तथा 75 देशों के लिए वीजा प्रोसेसिंग निलंबित करने का भी जिक्र है, हालांकि प्रशासन ने इन देशों के नाम, निलंबन की अवधि या प्रभावित वीजा श्रेणियों की जानकारी नहीं दी।
इन कदमों का उद्देश्य अमेरिका की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ऐसे विदेशी नागरिकों को हतोत्साहित करना है जो अनुमति अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रुक जाते हैं।
व्हाइट हाउस ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह एक ऐसा अभियान है जो पहले कभी नहीं चला और जिसमें धोखाधड़ी से अमेरिकी नागरिकता पाने के आरोपी लोगों को निशाना बनाया गया।
इसमें कहा गया कि 88 लोगों के खिलाफ दावे किए गए हैं, जिन्हें अयोग्य होने के बावजूद अमेरिकी नागरिकता मिल गई। हालांकि फैक्ट शीट में उन लोगों की पहचान नहीं बताई गई, न ही कथित उल्लंघनों के बारे में बताया गया और न ही कार्रवाई की स्थिति बताई गई।
फैक्ट शीट में नागरिकता परीक्षा में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन का कहना है कि संशोधित परीक्षा के जरिए आवेदकों के अमेरिकी इतिहास, शासन व्यवस्था और मूल्यों के ज्ञान का बेहतर आकलन किया जाएगा।
प्रशासन ने यह भी कहा कि वह राज्यवार मतदाता सूचियों से हजारों अवैध प्रवासियों के नाम हटाने की दिशा में काम कर रहा है, हालांकि इसमें शामिल राज्यों या अब तक हटाए गए नामों की संख्या संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की गई।
राष्ट्रीय समाचार
विपक्ष के हंगामे पर स्पीकर ओम बिरला बोले- ‘महात्मा गांधी से लें प्रेरणा’, लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित

संसद का मानसून सत्र विपक्ष के हंगामे के कारण लगातार बाधित है। शुक्रवार को भी सदन की कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई। बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्षी सदस्यों के शांत नहीं होने पर स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया।
विपक्षी सांसद लगातार 20 जुलाई को सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘पुलिस कार्रवाई’ और अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मुद्दे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से जवाब दिए जाने की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को भी विपक्ष ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए हंगामा किया।
सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर स्पीकर ओम बिरला ने महात्मा गांधी को याद किया। उन्होंने कहा, “9 अगस्त को ‘भारत छोड़ आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ है। साल 1942 में इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देशवासियों को ‘करो या मरो’ का मंत्र दिया था। भारत छोड़ो आंदोलन, भारत के लोगों की एकता, अदम्य साहस और अन्याय के विरूद्ध सत्य और अहिंसा पर आधारित संघर्ष का अमर प्रतीक है।”
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने स्वतंत्रता प्राप्ति की दिशा में निर्णायक जनजागरण का मार्ग प्रशस्त किया और राष्ट्र के आत्मविश्वास को नई ऊर्जा प्रदान की गई। यह सभा महात्मा गांधी और भारत की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करती है।
इसके बाद, सदन में सभी सदस्यों ने 2 मिनट का मौन रखा। हालांकि, प्रश्नकाल शुरू होते ही हंगामा होने लगा।
स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के सदस्यों से सदन की कार्यवाही जारी रखने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “महात्मा गांधी का योगदान सिर्फ भारत नहीं, बल्कि पूरी दुनिया मानती है। इसलिए दुनिया भी उनसे प्रेरणा लेती है। देश के अंदर लोकतंत्र को सशक्त और मजबूत करने के लिए आप सब भी उनसे प्रेरणा लो। यहां चर्चा, संवाद और अपने विचारों को अभिव्यक्त करो।”
उन्होंने आगे कहा, “प्रश्नकाल महत्वपूर्ण समय होता है। बाबासाहेब अंबेडकर ने यही विचार दिया था कि देश के अंदर लोकतंत्र को सशक्त और मजबूत करना है, तो चर्चा और संवाद ही इसका रास्ता है।”
विपक्ष के सदस्यों से फिर से आग्रह करते पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि आपका आचरण संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। इस पर आपको विचार करना चाहिए। सदन चर्चा और संवाद, खासकर प्रश्नकाल संसद सदस्यों के सवालों के लिए होता है। आपसे अनुरोध है कि आप प्रश्नकाल को चलने दें।
इसके बावजूद सदन में विपक्ष के सदस्यों का हंगामा जारी रहा। बाद में स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र सरकार ने 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों पर लगाया प्रतिबंध, अधिसूचना जारी

महाराष्ट्र सरकार ने आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार पर रोक लगाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने एक असाधारण राजपत्र अधिसूचना जारी करते हुए आतंकवादी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों, पत्रिकाओं और अन्य साहित्य के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाया है। साथ ही, सभी भौतिक व डिजिटल प्रतियों को सरकार के पक्ष में जब्त करने की घोषणा की गई है।
राजपत्र के अनुसार, एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) की जांच, खुफिया एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं और साइबर निगरानी में यह सामने आया कि कुछ कट्टरपंथी साहित्य और डिजिटल सामग्री का प्रसार लगातार जारी है। सरकार का कहना है कि इस तरह की सामग्री हिंसक उग्रवाद का महिमामंडन करती है, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करती है, आतंकवादी संगठनों में भर्ती को बढ़ावा देती है और देश की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।
अधिसूचना में कहा गया, “खुफिया जानकारी, साइबर निगरानी रिपोर्ट और मुंबई के एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) की जांच से पता चला है कि आतंकवादी और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल या उनका समर्थन करने वाले संगठनों से जुड़े कट्टरपंथी और चरमपंथी साहित्य, प्रकाशन और प्रचार सामग्री का लगातार प्रसार किया जा रहा है। ऐसी सामग्री पाई गई, जिसमें हिंसक चरमपंथ और जिहाद का महिमामंडन किया जा रहा था। कट्टरपंथ को बढ़ावा देना, वैचारिक रूप से प्रेरित करना, भर्ती में मदद करना और भारत की संप्रभुता व अखंडता के खिलाफ कार्यों के लिए उकसाना भी शामिल था।”
मुंबई के एंटी-टेररिज्म स्क्वाड के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने 17 मार्च के पत्र के माध्यम से राज्य सरकार को सूचित किया कि कुछ समाचार पत्रों, पुस्तकों, दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों को जब्त करने की जरूरत है, क्योंकि वे भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ गतिविधियों से जुड़े हैं।
इसी आधार पर राज्य सरकार ने कदम उठाया और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 98(1) के तहत अधिसूचना जारी कर सूचीबद्ध सभी प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाया।
-
दुर्घटना11 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
