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Monday,20-April-2026
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भारत के बढ़ते मुद्रा भंडार से परेशान हुए चीन और तुर्की

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चीन को इन दिनों एक खास तरह की परेशानी खाए जा रही है, वह अपने पड़ोसी देश भारत के बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार से खासा चिंतित है। खुद चीन का न तो व्यापार बढ़ रहा है और न ही उसके विदेशी मुद्रा भंडार में कोई बढ़ोतरी हो रही है, हालांकि चीन के पास इस समय 3.236 खरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, लेकिन वह यह नहीं देख सकता कि किसी दूसरे देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़े इसलिए चीन ने भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है, जिसे हम आम भाषा में ‘खिसयानी बिल्ली खंभा नोंचे’ कहते हैं। इस समय भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 642.453 अरब डॉलर है, हाल ही में इसमें 8.895 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। ये डाटा भारतीय रिजर्व बैंक ने जारी किया है। इतना ही नहीं, इसमें हर सप्ताह 5 से 6 अरब डॉलर का इजाफा भी हो रहा है। इसे देखते हुए चीन ने आशंका जताई है कि इससे भारत के अन्य देशों को कर्ज देने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी, जिससे भारत अफ्ऱीकी महाद्वीप में चीन के बढ़ते विस्तारवाद को चुनौती दे सकता है।

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्ह्वा ने भारत के बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार को चीन के लिए कई मोर्चो पर चीन की राह में रोड़ा बताया है। चीन के शासन तंत्र को इस बात की चिंता है कि चीन जैसे कर्ज देता रहा है, उसी तरह भारत भी कर्ज देने की अपनी क्षमता बढ़ा सकता है। चीन को इस समय यह चिंता सता रही है कि चीन की जो कर्ज देने की नीति है, ठीक वैसी ही नीति भारत लाकर चीन का प्रतिद्वंद्वी बन सकता है। लेकिन चीन को यह नहीं मालूम कि भारत ने आजतक किसी देश को कर्ज देकर उसे अपने कर्जजाल में नहीं फंसाया, उस देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार को चौपट नहीं किया, कर्ज लेने वाले देश को भारत ने कभी अपना आर्थिक गुलाम नहीं बनाया। जबकि चीन दुनियाभर में इस बात के लिए बदनाम है कि वह गरीब देशों को कर्ज देकर अपने आर्थिक जाल में फंसा लेता है, फिर उनका आर्थिक शोषण करता है।

चीन को इस बात से भी परेशानी है कि भारत के तेजी से बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार से भारत की सैन्य और सामरिक क्षमता और अंतरिक्ष मिशन को तेजी मिलेगी। चीन चाहता है कि हथियारों और अंतरिक्ष मिशन में केवल वही सफल होकर आगे निकले, बाकी दुनिया उससे पीछे रहे।

चीन को यह नहीं भूलना चाहिए कि 90 के दशक में जब अमेरिका ने भारत को उसके अंतरिक्ष मिशन के लिए क्रायोजेनिक इंजन नहीं दिए और भारत ने जब रूस से क्रायोजेनिक इंजन लेने का प्रयास किया तो अमेरिका द्वारा रूस पर दबाव के कारण रूस ने भी अपने कदम पीछे खींच लिए। तब भारतीय वैज्ञानिकों ने तय किया कि अब हम खुद क्रायोजेनिक इंजन बनाएंगे और इसमें 17-18 वर्ष लगेंगे। इतने ही वर्षो में भारत ने क्रायोजेनिक इंजन पूरी तरह देसी तकनीक से बना लिया।

चीन को इस बात का भी डर है कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम गुणवत्ता में सर्वोत्तम और दुनिया में सबसे सस्ता है, जिससे इस बाजार में भी चीन भारत से पिछड़ जाएगा। भारत ने जो भी तकनीक हासिल की है, वह या तो खुद बनाई है या फिर विदेशी कंपनियों से साझेदारी की है। कभी किसी तकनीक की चोरी नहीं की, जो चीन हमेशा हर क्षेत्र में करता रहता है, चाहे वो क्षेत्र मोबाइल, इंटरनेट, ऑटोमोटिव, तेल शोधन, हथियार या फिर अंतरिक्ष का ही क्यों न हो।

इन सारे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए शोध की खासी जरूरत होती है, जिसके लिए धन की आवश्यकता है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से भारत को इन सभी परियोजनाओं में कामयाबी मिलेगी।

चीनी मीडिया ने भी कहा है कि तुर्की भारत के तजी से बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार को सही नहीं मानता। शिन्ह्वा के अनुसार, “तुर्की का मानना है कि अगर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार ऐसे ही बढ़ता रहा, तो वह तुर्की और पाकिस्तान के हितों को जरूर नुकसान पहुंचाएगा। वहीं, अगर हम तुर्की की बात करें तो उसका विदेशी मुद्रा भंडार अर्श से फर्श पर आ गिरा है और तुर्की के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार कम होने की वजह से तुर्की की ढेर सारी सैन्य परियोजनाएं भी बंद हो चुकी हैं। इसके अलावा तुर्की अपना खुद का अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करने वाला है। लेकिन तुर्की के पास अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करने के लिए बजट नहीं है, जिस वजह से तुर्की की यह परियोजना अधर में लटकी हुई है।”

ऐसे में भारत के इन ‘शत्रु’ देशों का भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से परेशान होना लाजिमी है, क्योंकि इन्हें लगता है कि इसके बाद भारत अपनी वर्चस्व मजबूत करेगा और वैश्विक स्तर पर इनके लिए चुनौती बनेगा, लेकिन ये दोनों देश इस बात को भूल जाते हैं कि भारत ने जब तरक्की की है तो अपने मित्र देशों के साथ-साथ पिछड़े देशों को आगे बढ़ाने के लिए भी काम किया है। बावजूद इसके, अगर इन देशों को भारत की तरक्की से ईष्र्या होती है तो इस ईष्र्या को सहने की इन्हें आदत डाल लेनी चाहिए, क्योंकि अब तो भारत सिर्फ तरक्की ही करेगा।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने से सोने और चांदी करीब 2 प्रतिशत तक फिसले

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अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने से सोमवार को सोने और चांदी दबाव के साथ खुले और शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुओं में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 9:50 पर सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रै्क्ट 1.06 प्रतिशत या 1,641 रुपए की गिरावट के साथ 1,52,968 रुपए पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,52,829 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,53,251 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि एमसीएक्स गोल्ड की शुरुआत मामूली गैप डाउन के साथ हुई, लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी की बढ़ती दिलचस्पी के चलते यह 1,52,000 रुपए के स्तर से ऊपर बना हुआ है। अगर यह 1,55,000 रुपए से ऊपर निकलता है तो यह 1,57,000-1,58,000 रुपए के स्तर तक जा सकता है।

दूसरी ओर, 1,52,500 रुपए से नीचे टूटने पर, यह 1,51,000-1,50,000 रुपए और उससे आगे 1,48,000 रुपए तक जा सकता है।

चांदी का 5 मई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 1.96 प्रतिशत या 5,045 रुपए की गिरावट के साथ 2,52,100 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,52,016 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,54,089 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।

चांदी पर विश्लेषक ने कहा कि चांदी गैप डाउन के साथ 2,52,000 रुपए के आसपास बनी हुई है। इसके लिए रुकावट का स्तर 2,55,000-2,60,000 रुपए है और अगर यह इस स्तर को तोड़ता है तो 2,68,000–2,70,000 रुपए के स्तर देखने को मिल सकते हैं। अगर चांदी 2,48,000 रुपए का स्तर तोड़ती है तो यह 2,44,000-2,40,000 रुपए के स्तर तक जा सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में दबाव देखा जा रहा है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 1.34 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,814 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80 डॉलर प्रति औंस पर थी।

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व्यापार

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के चलते इस सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी मजबूत बढ़त के साथ हुए बंद

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अमेरिका-ईरान के बीच जारी शांति वार्ता की उम्मीदों ने भारतीय शेयर बाजार को इस हफ्ते मजबूत सपोर्ट दिया। सकारात्मक वैश्विक संकेतों, रुपए में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते निवेशकों का भरोसा बढ़ा और बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली।

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 504.86 अंक यानी 0.65 फीसदी की तेजी के साथ 78,493.54 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 156.80 अंक या 0.65 फीसदी चढ़कर 24,353.55 के स्तर पर बंद हुआ।

सेक्टोरल स्तर पर लगभग सभी सेक्टरों में खरीदारी का माहौल रहा। बजाज ब्रोकिंग रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार बाजार का रुख पूरे हफ्ते सकारात्मक बना रहा। खासतौर पर निफ्टी एफएमसीजी, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में 1 से 3 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

बड़े सूचकांकों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 1.27 फीसदी की तेजी आई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 1.48 फीसदी चढ़ा।

विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय बाजारों में इस हफ्ते धीरे-धीरे लेकिन स्थिर रिकवरी देखने को मिली। वैश्विक माहौल में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया। हालांकि, बाजार में सतर्कता का माहौल भी बना रहा, लेकिन लगातार खरीदारी और जोखिम लेने की बढ़ती क्षमता ने इंडेक्स को मजबूती दी।

पोनमुडी आर ने कहा कि हाल के हफ्तों के मुकाबले इस बार बाजार का उतार-चढ़ाव काफी नियंत्रित रहा। गिरावट आने पर निवेशकों ने खरीदारी दिखाई, जो इस बात का संकेत है कि बाजार का सेंटिमेंट धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। हालांकि, अभी भी बाजार ऊपरी स्तर पर निर्णायक ब्रेकआउट देने में सफल नहीं हुआ है, जिससे यह साफ है कि ट्रेंड अभी बदलाव के दौर में है।

बाजार का रुख अब सतर्क आशावाद की ओर बढ़ता दिख रहा है। कच्चे तेल की नरम कीमतें, बेहतर वैश्विक संकेत और स्थिर निवेश प्रवाह इस रिकवरी को सहारा दे रहे हैं। निकट भविष्य में गिरावट का जोखिम सीमित नजर आ रहा है, जबकि तेजी की संभावना धीरे-धीरे बढ़ रही है।

इस बीच, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रुख में भी सुधार के संकेत मिले हैं। लंबे समय से बिकवाली करने के बाद एफआईआई ने हफ्ते के आखिरी तीन सत्रों में खरीदारी की, जिससे बाजार को सहारा मिला। हालांकि, पूरे हफ्ते के आधार पर उनका निवेश लगभग 250 करोड़ रुपए की हल्की निकासी के साथ नकारात्मक ही रहा।

दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई), जो अब तक बाजार को लगातार सपोर्ट दे रहे थे, हफ्ते के आखिरी सत्रों में मुनाफावसूली करते नजर आए। पूरे हफ्ते में डीआईआई की ओर से करीब 6,300 करोड़ रुपए की निकासी दर्ज की गई।

इसके बावजूद, बाजार में स्थिरता बनाए रखने में घरेलू निवेशकों की भूमिका अब भी मजबूत बनी हुई है और वे आगे भी बाजार को संरचनात्मक सहारा देते रहेंगे।

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व्यापार

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई 2 प्रतिशत तक की गिरावट

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने की उम्मीद के बीच शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के खत्म होने की उम्मीदों के कारण आई है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 97.99 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जो शुरुआती कारोबार में दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया और इसमें 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई।

वहीं, अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी करीब 2 प्रतिशत गिरकर 92.91 डॉलर के इंट्रा-डे लो तक पहुंच गया।

हालांकि, इससे पहले के कारोबारी सत्र में ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट करीब 5 प्रतिशत की तेजी के साथ 99.39 डॉलर पर बंद हुआ था। इसी तरह, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई भी 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 93.32 डॉलर पर बंद हुआ था।

घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली, जहां यह 2.6 प्रतिशत तक गिरकर 8,625 रुपए तक आ गया।

ट्रेडर्स को उस समय राहत मिली जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन के युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान ने 20 साल से ज्यादा समय तक परमाणु हथियार नहीं रखने का प्रस्ताव दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि हिजबुल्लाह इस अहम समय में समझदारी दिखाएगा। अगर ऐसा होता है तो यह उनके लिए बड़ा मौका होगा। अब और हिंसा नहीं, हमें आखिरकार शांति चाहिए।”

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “हम देखेंगे कि आगे क्या होता है, लेकिन मुझे लगता है कि हम ईरान के साथ समझौते के काफी करीब हैं।”

शेयर बाजार की बात करें तो वैश्विक बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। वहीं घरेलू बाजार में बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी सपाट खुले। हालांकि बाद में इनमें थोड़ी तेजी देखने को मिली।

एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, जहां प्रमुख इंडेक्स 1 प्रतिशत तक नीचे रहे।

वहीं, अमेरिका में वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जहां नैस्डैक 0.36 प्रतिशत और एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

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