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Sunday,18-October-2026
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स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने को आगे आएं प्राइवेट सेक्टर: पीएम मोदी

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स्कूल और कॉलेज फिर से खुलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसन्नता जाहिर की है। छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि डेढ़ 2 सालों में पहली बार छात्रों के चेहरे पर अलग सी चमक दिख रही है। यह चमक संभवत स्कूल खुलने की लगती है। प्रधानमंत्री ने प्राइवेट सेक्टर से कहा कि वे आगे आएं और सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में योगदान दे। प्रधानमंत्री ने छात्रों समेत सभी लोगों से कहा कि कोरोना नियमों का पालन भी पूरी कड़ाई से करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) की नई पहल के अन्तर्गत मंगलवार को यूडीएल आधारित 10,000 शब्दों की आईएसएल डिक्शनरी, टॉकिंग बुक्स, निष्ठा 3.0, विद्यांजलि 2.0 और एसक्यूएएएफ को लॉन्च किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिक्षक पर्व के अवसर पर देशभर के शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों एवं अन्य हित धारकों को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज जो योजनाएं शुरू हुई हैं वह भविष्य के भारत को आकार देने में भूमिका निभाएंगी। मुझे पूरा भरोसा है यह न केवल हमारे एजुकेशन सिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी बल्कि हमारे युवाओं को भी भविष्य के लिए तैयार करने में मदद करेगी।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “ऑनलाइन क्लासेस, ग्रुप वीडियो कॉल, ऑनलाइन प्रोजेक्ट, ऑनलाइन एग्जाम पहले ऐसे शब्द बहुत लोगों ने सुने भी नहीं थे। लेकिन हमारे शिक्षकों ने अभिभावकों ने हमारे युवाओं ने इन्हें सहजता से दैनिक जीवन का हिस्सा बना दिया। अब समय है अपनी क्षमताओं को हम आगे बढ़ाएं।”

पीएम मोदी ने कहा, “विद्या सभी संपत्तियों में सबसे बड़ी संपत्ति है क्योंकि विद्या ही ऐसी संपत्ति है जो दूसरों को दान में देने से बढ़ती है। विद्यांजलि 2.0 इसी पुरातन परंपरा को अब एक नए कलेवर में मजबूत करेगी। देश ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के साथ सब का प्रयास का जो संकल्प लिया है इस कड़ी में विद्यांजलि 2.0 उसके लिए एक जीवंत प्लेटफार्म की तरह है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे समाज को हमारे प्राइवेट सेक्टर को आगे आना है और सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में अपना योगदान देना है। उन्होंने कहा,साथियों अनादि काल से भारत में समाज की सामूहिक शक्ति पर भरोसा किया गया है। यह अर्से तक हमारी सामाजिक परंपरा का हिस्सा रहा है। जब समाज मिलकर कुछ करता है तो निश्चित परिणाम हम अवश्य मिलते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जन भागीदारी के जरिए स्वच्छता आंदोलन हो, हर गरीब के घर में गैस का कनेक्शन पहुंचाना हो हर क्षेत्र में भारत की प्रगति हुई है। अब विद्यांजलि भी इसी कड़ी में एक सुनहरा अध्याय बनने जा रही है। विद्यांजलि देश के हर नागरिक के लिए आह्वान है कि वह इसमें भागीदार बने देश के भविष्य गढ़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दो कदम आगे आए।

प्रधानमंत्री ने आवाहन करते हुए कहा, “आप एक इंजीनियर हो सकते हैं, एक डॉक्टर हो सकते हैं, एक रिसर्च साइंटिस्ट हो सकते हैं या फिर आईएएस अफसर, आप किसी स्कूल में जाकर बच्चों को कितना कुछ सिखा सकते हैं। आप के जरिए उन बच्चों को जो सीखने को मिलेगा उससे उनके सपनों को नई दिशा मिल सकती है।”

पीएम मोदी ने कहा कि आप और हम ऐसे कितने ही लोगों के बारे में जानते हैं जो ऐसा कर भी रहे हैं। कोई बैंक का रिटायर्ड मैनेजर है लेकिन उत्तराखंड के दूरदराज पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ा रहा है। कोई मेडिकल फील्ड से जुड़ा है लेकिन गरीब बच्चों को ऑनलाइन क्लासेज दे रहा है। उनके लिए संसाधन उपलब्ध करा रहा है, यानी आप चाहे समाज में किसी भी भूमिका में हो सफलता की किसी भी श्रेणी पर हों, युवाओं के भविष्य निर्माण में आपकी भूमिका भी है और भागीदारी भी है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि आधुनिक बनाने में शिक्षा को आधुनिक बनाने में नेशनल डिजिटल एजुकेशनल आर्कीटेक्चर की भी बड़ी भूमिका होने वाली है। जैसे यूपीआई इंटरफेस है, बैंकिंग सेक्टर में क्रांति ला दी है, वैसे ही नेशनल डिजिटल एजुकेशनल आर्कीटेक्चर सभी शैक्षणिक गतिविधियों के गतिविधियों के बीच एक सुपर कनेक्टर की भूमिका अदा करेगा। यह सभी बदलाव हमारी आधुनिक शिक्षा का चेहरा भी बनेंगे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में भेदभाव को भी खत्म करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज देश टॉकिंग बुक और ऑडियोबुक जैसी तकनीक को शिक्षा का हिस्सा बना रहा है। ऐसा इसलिए ताकि सबको समान शिक्षा के अवसर मिल सके 10,000 शब्दों की इंडियन साइन लैंग्वेज डिक्शनरी को भी लॉन्च किया गया है। असम के बिहू से लेकर भारतनाट्यम तक सांकेतिक भाषा हमारे यहां सदियों से कला और संस्कृति का हिस्सा रही है। अब देश पहली बार साइन लैंग्वेज एक सब्जेक्ट के रूप में पाठ्यक्रम का हिस्सा बन रहा है। यह तकनीक दिव्यांगों की भी मदद करेगी। निपुण भारत के अंतर्गत 3 वर्ष से 8 साल तक के बच्चों के लिए एक मिशन लॉन्च किया गया है। 3 साल की उम्र से ही सभी बच्चे अनिवार्य तौर पर प्री स्कूल शिक्षा प्राप्त करेंगे। इस दिशा में जरूरी कदम उठाए जाएंगे।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है पूरे ब्रह्मांड में गुरु की कोई उपमा नहीं होती। कोई बराबरी नहीं होती, जो काम गुरु कर सकता है वह कोई नहीं कर सकता। इसलिए आज देश अपने युवाओं के लिए शिक्षा से जुड़े जो भी प्रयास कर रहा है उसकी बागडोर हमारे शिक्षक भाई-बहनों के ही हाथ में है। तेजी से बदलते इस दौर में हमारे शिक्षकों को भी नई व्यवस्थाओं और तकनीकों के बारे में तेजी से सीखना होता है। निष्ठा ट्रेनिंग प्रोग्राम से जरिए शिक्षकों को तैयार किया जा रहा है। निष्ठा 3.0 अब इस दिशा में एक और अगला कदम है। मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण कदम मानता हूं। हमारे शिक्षक नए तौर-तरीकों से परिचित होंगे तो भविष्य के लिए युवाओं को और सहजता से गढ़ पाएंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय छात्रों की विशेष पूंजी उनके भीतर के भारतीय संस्कार है। भूटान का राज परिवार हो या वहां के शासक, भारतीय शिक्षकों के बारे में बात करते हुए बड़े गर्व महसूस करते हैं। जब मैं सऊदी अरबिया के किंग से बात कर रहा था वह मुझे इतने गौरव से बता रहे थे कि उन्हें भारत के शिक्षक ने पढ़ाया है। शिक्षक के प्रति, कोई भी व्यक्ति कहीं भी पहुंचे, उसके मन में विशेष भाव होता है। हमारे शिक्षक अपने काम को एक पवित्र नैतिक कर्तव्य मानते हैं। इसलिए हमारे यहां शिक्षक और छात्र के बीच एक प्रोफेशनल रिश्ता नहीं होता बल्कि एक पारिवारिक रिश्ता होता है। यह रिश्ता व सम्मान पूरे जीवन का होता है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री ने प्योंगयांग के साथ बातचीत फिर से शुरू करने पर दिया जोर

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दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने रविवार को कहा कि सरकार सोल और प्योंगयांग के बीच बातचीत फिर से शुरू करने का प्रयास करेगी और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करेगी।

सोल में विस्थापित उत्तर कोरियाई नागरिकों के लिए आयोजित एक प्रतियोगिता में शामिल होते हुए, हान ने कहा, “दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत के रास्ते खोलने और शांति तथा साझा समृद्धि पर चर्चा करने के प्रयास किए जाएंगे।”

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दोनों देशों के विभाजन को एक “हकीकत” बताया और इस बात पर जोर दिया कि विस्थापित नागरिकों और अलग हुए परिवारों का दर्द आज भी “जारी” है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता खोलने के हमारे प्रयास रुक नहीं सकते।” उन्होंने प्रतिभागियों से शांति स्थापित करने में सहयोग मांगा और दक्षिण कोरिया के आर्थिक विकास तथा लोकतंत्रीकरण में उनके योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

8 अक्टूबर को, दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया से “जिम्मेदार कदम” उठाने का आग्रह किया। दक्षिण कोरिया ने प्योंगयांग पर ‘युद्धविराम समझौते’ के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर एक बारूदी सुरंग बिछाई थी, जिसकी चपेट में आने से पिछले महीने दोनों कोरियाई देशों की सीमा के पास तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए थे।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की एक समिति बैठक के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण कोरिया के राजदूत चा जी-हून ने बताया कि दक्षिण कोरियाई सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान (यूएनसी) की संयुक्त जांच से पुष्टि हुई है कि 21 सितंबर को हुआ विस्फोट एक बारूदी सुरंग के कारण हुआ था। इस सुरंग को उत्तर कोरियाई सैन्य बलों ने जानबूझकर ‘सैन्य सीमा रेखा’ (एमडीएल) के दक्षिण में बिछाया था, जो दोनों कोरियाई देशों को अलग करती है।

चा ने कहा, “दक्षिण कोरियाई सेना और यूएनसी की संयुक्त जांच, जिसे फोरेंसिक विश्लेषण का भी समर्थन प्राप्त है, से पुष्टि हुई है कि यह विस्फोट उत्तर कोरियाई बलों द्वारा सैन्य सीमा रेखा के दक्षिण में जानबूझकर बिछाई गई बारूदी सुरंग के कारण हुआ था।” उन्होंने दोनों कोरियाई देशों को उनके आधिकारिक नामों – ‘रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (दक्षिण कोरिया) और ‘डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (उत्तर कोरिया) – से संबोधित किया।

चा ने कहा कि यह घटना ‘युद्धविराम समझौते’ का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने आगे कहा, “हम उत्तर कोरिया (डीपीआरके) से आग्रह करते हैं कि वह माफी मांगे, तनाव बढ़ाने वाली ऐसी गतिविधियों को रोके और जिम्मेदार कदम उठाए।”

हालांकि, उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि ने सोल के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्योंगयांग द्वारा अपनी दक्षिणी सीमा को मजबूत करने के प्रयासों को ‘सैन्य घुसपैठ’ के रूप में पेश करने की एक कोशिश है। प्रतिनिधि ने कहा, “यह आरओके (दक्षिण कोरिया) सेना की एक घटिया चाल के अलावा और कुछ नहीं है, जिसका मकसद अपनी गलतियों का दोष डीपीआरके (उत्तर कोरिया) पर मढ़ना है।”

दोनों कोरियाई देशों ने प्योंगयांग के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अपने-अपने विपरीत रुख को फिर से दोहराया।

चा ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रति सोल की प्रतिबद्धता को दोहराया और उत्तर कोरिया से आग्रह किया कि वह ‘परमाणु अप्रसार संधि’ और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का पूरी तरह से पालन करे।

उत्तर कोरियाई प्रतिनिधि ने प्योंगयांग के परमाणु हथियारों का बचाव करते हुए कहा कि अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए यह एक अनिवार्य विकल्प था, क्योंकि उन्हें “दशकों से अमेरिकी परमाणु खतरे” का सामना करना पड़ रहा है।

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राष्ट्रीय समाचार

शीर्ष 10 कंपनियों की मार्केट वैल्यू में 3.65 लाख करोड़ रुपए का उछाल; टीसीएस, भारती एयरटेल और इंफोसिस रहीं टॉप गेनर्स

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भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह आई तेज उछाल के बीच देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 9 के संयुक्त बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) में 3.65 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), भारती एयरटेल और इंफोसिस सबसे अधिक लाभ पाने वाली कंपनियों के रूप में उभरीं।

दलाल स्ट्रीट पर सकारात्मक माहौल के बीच सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,256.94 अंक यानी 3.11 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी में 625.7 अंकों यानी 2.77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

शीर्ष 10 कंपनियों में टीसीएस सबसे बड़ी वेल्थ क्रिएटर रही। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1,08,542.63 करोड़ रुपए बढ़कर 8,91,134.96 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

इसके बाद भारती एयरटेल का स्थान रहा, जिसकी मार्केट वैल्यू 61,406.53 करोड़ रुपए बढ़कर 11,88,815.45 करोड़ रुपए हो गई। वहीं इंफोसिस ने 55,893.05 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की और उसका बाजार पूंजीकरण 4,71,409.41 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण भी 53,047.56 करोड़ रुपए बढ़कर 16,37,437.19 करोड़ रुपए हो गया और उसने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा।

निजी क्षेत्र के बैंकों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक की मार्केट वैल्यू 32,379.05 करोड़ रुपए बढ़कर 11,22,628.07 करोड़ रुपए हो गई, जबकि आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप 30,769.95 करोड़ रुपए बढ़कर 10,02,871.44 करोड़ रुपए हो गया।

अन्य बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियों में बजाज फाइनेंस शामिल रही, जिसकी वैल्यू 14,786.65 करोड़ रुपए बढ़कर 6,11,326.72 करोड़ रुपए हो गई। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के बाजार पूंजीकरण में 4,933.5 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई और यह 5,02,204.82 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वहीं भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मार्केट वैल्यू 3,323.07 करोड़ रुपए बढ़कर 8,87,722.84 करोड़ रुपए हो गई।

शीर्ष 10 कंपनियों में केवल लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ऐसी कंपनी रही, जिसके बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई, और कंपनी की मार्केट वैल्यू 9,232.26 करोड़ रुपए घटकर 4,99,725.06 करोड़ रुपए रह गई।

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों की रैंकिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद क्रमशः भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, एसबीआई, बजाज फाइनेंस, एलआईसी, लार्सन एंड टुब्रो और इंफोसिस का स्थान रहा।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत की आर्थिक प्रगति जश्न मनाने लायक, अगले वर्षों में भी मजबूत विकास की संभावनाएं : शीर्ष अर्थशास्त्री

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शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने रविवार को कहा कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक प्रगति सराहना की हकदार है। उन्होंने कहा कि देश की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती आर्थिक स्थिति भविष्य के लिए आशावाद के पर्याप्त कारण प्रदान करती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में किम ने कहा कि भारत के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक रूप से तेजी से आगे बढ़ने की देश की क्षमता और मध्यम अवधि की विकास संभावनाएं बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने कहा, “मेरा निष्कर्ष वही है। भारत के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन विशेष रूप से पिछले दशक में उसकी आर्थिक प्रगति और मध्यम अवधि में सकारात्मक विकास संभावनाएं जश्न मनाने योग्य हैं। 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए यह प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है।”

किम की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने एक दिन पहले ही भारत की मजबूत विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक जैसे लगभग सभी प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7 प्रतिशत से अधिक कर दिया है।

अर्थशास्त्री के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने असाधारण मजबूती का प्रदर्शन किया है। महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी, लेकिन इसके बाद 2021 में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अगले चार वर्षों तक विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रही।

किम ने कहा कि उनके सहित कई अर्थशास्त्रियों को लगातार अपनी विकास दर संबंधी भविष्यवाणियों में ऊपर की ओर संशोधन करना पड़ा, क्योंकि प्रत्येक तिमाही के जीडीपी आंकड़े उम्मीदों से बेहतर रहे।

उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप भारत ने लगातार पांच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर दर्ज की है। यह प्रदर्शन 2003 से 2007 के उस दौर के बराबर है, जब भारत पहली बार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।

किम ने यह भी कहा कि वर्ष 2021 से 2025 के दौरान 7.83 प्रतिशत की औसत वार्षिक विकास दर 1960 के बाद किसी भी पांच वर्षीय अवधि की दूसरी सबसे ऊंची औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक केवल 2003 से 2007 के दौरान 7.89 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर रही थी।

भारत की अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार का उल्लेख करते हुए किम ने कहा कि आज का भारत दो दशक पहले की तुलना में बिल्कुल अलग आर्थिक स्तर पर खड़ा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 1 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक था, जबकि अब यह 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। ऐसे में समान विकास दर का अर्थ अब कहीं अधिक बड़े पैमाने पर आर्थिक विस्तार और मूल्य सृजन से है।

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