राष्ट्रीय
भारत की जीडीपी वित्तवर्ष 22 की पहली तिमाही में 20 फीसदी बढ़ने की उम्मीद : आईसीआरए
रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने बुधवार को कहा कि वित्तवर्ष 22 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी सालाना आधार पर 20 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। यह वित्तवर्ष 2022 की पहली तिमाही में मूल कीमतों पर 2011-12 की स्थिर कीमतों पर 17 प्रतिशत सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) की भी उम्मीद करता है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि इस प्रवृत्ति को स्वस्थ केंद्र और राज्य सरकार के पूंजीगत खर्च, मजबूत व्यापारिक निर्यात और कृषि क्षेत्र से लचीली मांग का समर्थन मिला है।
इसने यह भी कहा कि पिछले साल के राष्ट्रव्यापी तालाबंदी के मौन आधार ने कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रभाव को छिपाने में सहायता की है।
आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, “वॉल्यूम और उपलब्ध आय के हमारे आकलन के आधार पर, हमने निर्माण और विनिर्माण के अनुसार वित्तवर्ष 2022 की पहली तिमाही में उद्योग में जीवीए विस्तार का 37.5 प्रतिशत का अनुमान लगाया है, जिसने पिछले साल के कड़े राष्ट्रव्यापी तालाबंदी के दौरान रही स्थिति की तुलना में अभी समाप्त तिमाही में काफी कम प्रतिबंधों का अनुभव किया है।
उन्होंने कहा, “विशेष रूप से, निर्माण गतिविधि को वित्तवर्ष 2022 की पहली तिमाही में स्वस्थ केंद्र और राज्य सरकार के पूंजीगत व्यय से लाभ हुआ, जो वित्तवर्ष 2020 की पहली तिमाही के पूर्व-कोविड स्तरों से भी अधिक था।”
भारत सरकार का पूंजीगत व्यय और शुद्ध उधार वित्तवर्ष 2022 की पहली तिमाही में 1.1 ट्रिलियन रुपये रहने का अनुमान है, जो 27.6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि और वित्तवर्ष 2020 की पहली तिमाही, जब संसदीय चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू थी, की तुलना में 78.4 प्रतिशत अधिक है।
“भारत सरकार के गैर-ब्याज, गैर-सब्सिडी राजस्व व्यय में संकुचन और संपर्क-गहन सेवाओं की मांग में निरंतर हानि के साथ, हम उम्मीद करते हैं कि सेवा क्षेत्र में जीवीए वित्तवर्ष 2022 की पहली तिमाही में 12.7 प्रतिशत के दोहरे अंकों के विस्तार के बावजूद अपेक्षाकृत कम पोस्ट करेगा।”
“कृषि, वानिकी और मछली पकड़ने में जीवीए की वृद्धि 3 प्रतिशत पर प्रिंट होने की संभावना है, जो स्वस्थ रबी फसल से लाभान्वित होती है। दूसरी लहर में ग्रामीण भारत में कोविड-19 मामलों की उच्च घटनाओं के बावजूद, स्वस्थ फसल उत्पादन और खरीद, जैसा कि साथ ही उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य ने इस चुनौतीपूर्ण अवधि के दौरान कृषि क्षेत्र की मांग को कम कर दिया है।”
नायर के मुताबिक, वित्तवर्ष 22 की पहली तिमाही में जीवीए की कुल वृद्धि 17 फीसदी तक हो सकती है।
“अप्रत्यक्ष करों में तेज वृद्धि को देखते हुए, हम अनुमान लगाते हैं कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) वित्तवर्ष 22 की पहली तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद के विस्तार को अपेक्षाकृत अधिक 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।”
“हमारे विचार में, जीवीए वृद्धि चालू वित्तवर्ष में सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में आर्थिक प्रदर्शन का बेहतर गेज प्रदान करती है।”
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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