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Friday,30-October-2026
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पेट्रोलियम की तरह ऑक्सीजन के रणनीतिक भंडार की जरूरत : नेशनल टास्क फोर्स

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 सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञों के राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) ने सुझाव दिया है कि देश में चल रही कोविड-19 महामारी के बीच सरकार को दो से तीन सप्ताह की खपत के लिए ऑक्सीजन गैस का अतिरिक्त भंडार रखना चाहिए। शीर्ष अदालत द्वारा गठित 12 सदस्यीय एनटीएफ यानी नेशनल टास्क फोर्स ने कहा, हमारे पास पेट्रोलियम उत्पादों के लिए की गई व्यवस्था के समान दो से तीन सप्ताह की खपत को कवर करने के लिए देश के लिए ऑक्सीजन का रणनीतिक भंडार होना चाहिए। इसी तरह, सभी अस्पतालों में आपात स्थितियों से निपटने के लिए अतिरिक्त भंडार होना चाहिए।

इसने सुझाव दिया कि बड़े शहरों में तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (एलएमओ) का उत्पादन करने के लिए व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि उनकी मेडिकल ऑक्सीजन की 50 प्रतिशत मांग को तुरंत पूरा किया जा सके। क्योंकि देश का सड़क परिवहन कमजोर है, इसलिए इसने स्थानीय तौर पर या फिर अस्पतालों के पास में ही ऑक्सीजन के निर्माण की रणनीति बनाने की सलाह दी है।

पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, दिल्ली और मुंबई को उनकी जनसंख्या घनत्व के कारण प्राथमिकता के आधार पर लिया जा सकता है। सभी 18 मेट्रो शहरों को कम से कम 100 मीट्रिक टन भंडारण के साथ ऑक्सीजन स्वतंत्र बनाया जाना चाहिए।

एनटीएफ ने देश के लिए ऑक्सीजन की जरूरतों को निर्धारित करने के लिए एक फॉर्मूला प्रस्तावित किया, जो महामारी के बीच देखभाल के सभी स्तरों पर विचार करता है।

एनटीएफ ने रिपोर्ट में उदाहरण देते हुए समझाया है कि 100 बिस्तरों वाला अस्पताल, जिसमें 25 प्रतिशत आईसीयू बेड हों, उसमें तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की आवश्यकता 1.5 मीट्रिक टन होगी। कार्य बल ने कहा है कि इसी फार्मूले का इस्तेमाल किया जा सकता है। पैनल ने कहा कि ऐसा फॉर्मूला एक गतिशील, विकसित प्रक्रिया का हिस्सा होगा।

पैनल ने सिफारिश करते हुए कहा, कोरोना के बढ़ते मामलों वाले राज्यों को मांग से अधिक आवंटन करने के लिए अपने यहां करीब 20 प्रतिशत भंडारण क्षमता बढ़ानी चाहिए।

एनटीएफ ने कहा है कि महामारी की अगली लहर से लड़ने की तैयारी में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन और बढ़ाने की कोशिशें की जानी चाहिए। मौजूदा वक्त में तत्काल मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन पांच प्रतिशत से बढ़ाकर आठ प्रतिशत करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार को ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाले उद्योगों की मदद करनी चाहिए।

समिति ने कहा कि ऑक्सीजन के न्यायसंगत उपयोग के लिए अस्पतालों का ऑडिट किया जाना चाहिए, जिसमें उनकी पाइपलाइन प्रणाली को भी देखा जाए। इसने कहा कि इस तरह के ऑडिट से 10 से 20 प्रतिशत तक ऑक्सीजन की बचत होगी।

पैनल ने जोर देकर कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के अनुरूप राज्यवार ऑक्सीजन ऑडिट समितियों का गठन किया जाना चाहिए। इसके अलावा केंद्रीय स्तर पर सिलेंडरों की खरीद, ऑक्सीजन का उत्पादन और आपूर्ति बढ़ाना, उपरोक्त सिद्धांत के आधार पर ऑक्सीजन की राज्यों की जरूरतों का आकलन करना, आपूर्ति श्रंखला की जरूरत को देखने जैसे कदम उठाने चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एनटीएफ के सदस्य वर्तमान महामारी के प्रबंधन में सरकार द्वारा की गई कड़ी मेहनत को पहचानते हैं।

एनटीएफ के सदस्य इस बात की सराहना करते हैं कि उनकी कई सिफारिशें पहले ही लागू हो चुकी हैं और अन्य पर काम भी शुरू हो चुका है।

पैनल ने सुझाव दिया कि ऑक्सीजन बेड और आईसीयू बेड की संख्या के आधार पर प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता की गणना के लिए एक सूत्र विकसित करने की आवश्यकता है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में व्याप्त आक्सीजन संकट के मद्देनजर इस 12 सदस्यीय समिति का गठन किया था। शीर्ष अदालत ने छह मई को एनटीएफ का गठन किया था, ताकि कोविड मरीजों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन के आवंटन की पद्धति तैयार की जा सके।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

भूटान की हिमनद झील के फटने से बंगाल-असम में बाढ़ की चेतावनी, प्रशासन सतर्क

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उत्तर-पश्चिमी भूटान में शिंताफू झील के फटने से पश्चिम बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ आने की चेतावनी जारी की गई है। अधिकारी इन दोनों राज्यों की ओर बहने वाली नदियों के किनारे स्थित संवेदनशील इलाकों पर नजर रख रहे हैं।

यह घटना गुरुवार शाम भूटान के गासा जिले में हुई। इससे गासा त्साचू में मौजूद बुनियादी ढाँचा बह गया। गासा त्साचू, मो छू नदी के पास स्थित एक लोकप्रिय प्राकृतिक गर्म पानी का स्रोत है। बाढ़ का पानी पहुँचने से पहले ही इस इलाके को खाली करा लिया गया था, इसलिए किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

मो छू नदी के उद्गम स्थल पर स्थित शिंताफू झील, भूटान की उन 17 हिमनद झीलों (ग्लेशियल लेक्स) में से एक है, जिन्हें संभावित रूप से खतरनाक माना गया है। इससे पहले 26 अगस्त 2021 को भी गासा त्साचू को अचानक आई बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा था, जब उफान पर बह रही मो छू नदी ने अपना रास्ता बदलकर गर्म पानी के स्रोत की ओर रुख कर लिया था।

रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ का पानी पुनाखा जोंग से लगभग आठ किलोमीटर दूर, काबेसा गेवोग के श्रीगंग इलाके से आगे निकल गया है, जिससे नदी के निचले इलाकों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

भूटान ने पश्चिम बंगाल और असम के प्रशासन को इस हिमालयी देश की सीमा से लगे जिलों के लिए संभावित खतरे के बारे में सतर्क कर दिया है। असम का धुबरी जिला और पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग पहाड़ियां, अलीपुरद्वार तथा जलपाईगुड़ी को संवेदनशील इलाकों के रूप में चिह्नित किया गया है।

पश्चिम बंगाल में, कूच बिहार प्रशासन ने संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क कर दिया है। यह नदी उत्तरी भूटान से निकलती है और उस नदी प्रणाली का हिस्सा है, जो हिमालयी क्षेत्र से पानी को असम में ब्रह्मपुत्र नदी तक पहुंचाती है।

अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

अलीपुरद्वार जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित कुमार शॉ ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। आईएएनएस से बात करते हुए, एसपी शॉ ने गुरुवार को कहा, “लोग थोड़े घबराए हुए हैं। मेरी सभी से अपील है कि किसी भी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है। हम अलर्ट मोड पर हैं, प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और सभी एजेंसियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, इसलिए कोई समस्या नहीं है। हमें उम्मीद है कि हम कोई समाधान निकाल लेंगे और जनता को हो रही परेशानियों को दूर कर देंगे।”

इस अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भूटान में बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुनाखा के गुमा गेवोग के अंतर्गत डोचुखा-जोमलिंगथांग-रित्सा चिवोग इलाके में इस साल की शुरुआत में लगाए गए सौर-ऊर्जा संचालित सिंचाई लिफ्टिंग सिस्टम को मो छू नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि के कारण आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है।

एक स्थानीय नेता ने बताया कि सिंचाई प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया है, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि नुकसान कितना हुआ है।

इस बीच, बाढ़ के साथ बहकर आए मलबे ने जोमलिंगथांग इलाके में पुनाखा-गासा राजमार्ग के एक हिस्से को ढक दिया है, जिससे सड़क संपर्क प्रभावित हो सकता है।

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लेशियर झील के फटने से आई बाढ़) तब होती है, जब ग्लेशियर के पीछे हटने से बनी झील में जमा पानी अचानक बाहर निकल आता है – अक्सर ऐसा किसी प्राकृतिक बांध के टूटने के कारण होता है। ऐसी घटनाएं भारी बारिश, भूस्खलन, हिमस्खलन, भूकंप या ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के कारण हो सकती हैं।

मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पीछे हटने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है, जिससे ग्लेशियर झीलों की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। पानी का अचानक बाहर निकलना एक शक्तिशाली बाढ़ का रूप ले सकता है, जिससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, बुनियादी ढांचे और कृषि भूमि को खतरा पैदा हो सकता है।

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अपराध

दिल्ली पुलिस ने 1073 किलोग्राम से अधिक पटाखे जब्त किए, 10 एफआईआर दर्ज

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त्योहारों के मौसम को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पटाखों की अवैध बिक्री और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने पांच थाना क्षेत्रों में 10 एफआईआर दर्ज की हैं और 1,073.426 किलोग्राम पटाखे जब्त किए हैं।

पुलिस के अनुसार, त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों के तहत लाहौरी गेट, बुराड़ी, कोतवाली, बारा हिंदू राव और सब्जी मंडी थाना क्षेत्रों में ये बरामदगी की गई है। सबसे ज्यादा 622.88 किलोग्राम पटाखे सब्जी मंडी इलाके से बरामद हुए।

इसके बाद बारा हिंदू राव से 178.5 किलोग्राम, कोतवाली से 107.6 किलोग्राम, लाहौरी गेट से 88.916 किलोग्राम और बुराड़ी से 75.53 किलोग्राम पटाखे जब्त किए गए।

लाहौरी गेट थाना क्षेत्र में 16 अक्टूबर को बीएनएस की धारा 223(बी) और 288, तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 5 और 9बी के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई। सर शोभा सिंह पॉलीक्लिनिक के सामने वाले इलाके से कुल 88.916 किलोग्राम पटाखे बरामद किए गए।

बुराड़ी इलाके में, 18 अक्टूबर को बीएनएस की धारा 223(ए) और 288, तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 9बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने हिमगिरी के इलाके से 75.53 किलोग्राम पटाखे बरामद किए।

कोतवाली पुलिस ने इन बरामदगी के संबंध में दो एफआईआर दर्ज की हैं। 18 अक्टूबर को, प्रभा धर्मशाला के पास अंगूरी बाग फूल वाला रोड से 93 किलोग्राम पटाखे बरामद होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद, 27 अक्टूबर को चांदनी चौक में मोती सिनेमा के पास 14.6 किलोग्राम पटाखे मिलने पर एफआईआर दर्ज की गई।

नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने कहा कि पटाखों का अनधिकृत भंडारण और असुरक्षित तरीके से उन्हें संभालना आग लगने और चोट लगने का गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, खासकर भीड़-भाड़ वाले बाजारों और रिहायशी इलाकों में।

निवासियों, व्यापारियों, दुकानदारों और संपत्ति मालिकों से नियमों का पालन करने और पटाखों की अनधिकृत बिक्री, उन्हें अपने पास रखने या उनका भंडारण करने से बचने की अपील की गई है। नागरिकों से यह भी कहा गया है कि वे नियमों के उल्लंघन का कोई भी मामला सामने आने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।

पुलिस ने लोगों की जान-माल की सुरक्षा करने और त्योहारों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से मनाना सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराया। इन मामलों में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही है।

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राष्ट्रीय समाचार

पीएनबी ग्रेटर नोएडा फ्रॉड: बैंक ने खाताधारकों के शिकायतों का लिया संज्ञान, अब तक 43 लाख रुपए का किया निपटारा

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पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने ग्रेटर नोएडा शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और बचत खातों से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेने की बात कही है। बैंक ने शुक्रवार को बताया कि मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है और अब तक 43 लाख रुपए के दावों का निपटारा किया जा चुका है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में बैंक ने कहा कि वह पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है और संबंधित एजेंसियों को पूरा सहयोग प्रदान कर रहा है। बैंक के अनुसार, तथ्यों का सत्यापन, कथित अनियमितताओं की सीमा का आकलन और प्रभावित ग्राहकों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

पीएनबी ने बताया कि अब तक तीन दावों का निपटारा किया गया है, जिनकी कुल राशि 43 लाख रुपए है। बैंक ने आश्वासन दिया कि सभी वास्तविक और वैध दावों का सम्मान किया जाएगा तथा ग्राहकों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।

बैंक ने दोहराया कि वित्तीय धोखाधड़ी, अनियमितताओं और कदाचार के प्रति उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैंक ने यह भी कहा कि वह ग्राहकों के हितों की सुरक्षा, परिचालन की पारदर्शिता और आंतरिक नियंत्रण तंत्र को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

यह बयान ऐसे समय आया है जब ग्रेटर नोएडा की सेक्टर पी-1 शाखा के कई ग्राहकों ने आरोप लगाया है कि उनके खातों से बिना अनुमति बड़ी रकम निकाल ली गई। प्रभावित खाताधारकों का दावा है कि उनके खातों से करोड़ों रुपए तक की राशि गायब हो गई।

ग्राहकों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद बैंक ने शाखा के पूरे स्टाफ को बदल दिया और उन्हें भरोसा दिलाया कि समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

इससे पहले, एक खाताधारक सोनू ने आरोप लगाया कि उनके खाते से करीब 90 लाख रुपए गायब हो गए। उनका कहना है कि बैंक अधिकारियों ने उन्हें धनराशि के गायब होने के कारणों के बारे में जानकारी दी है और पैसा वापस करने का आश्वासन भी दिया है।

एक अन्य ग्राहक राहुल ने दावा किया कि उनकी मां के खाते से लगभग 51 लाख रुपए बिना अनुमति निकाल लिए गए। उन्होंने कहा कि खाता किसी मोबाइल नंबर से लिंक नहीं था, जिसके कारण परिवार को लेनदेन संबंधी कोई अलर्ट नहीं मिला।

इसी तरह, सोनू सागर ने आरोप लगाया कि उनके पिता के खाते में लगभग 88 लाख रुपए की राशि थी, जो घटकर केवल 1,290 रुपए रह गई। उनका दावा है कि यह कथित गबन कई वर्षों से जारी था।

प्रभावित ग्राहकों ने मामले में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। कुछ खाताधारकों का आरोप है कि अनियमितताओं की शिकायत करने के बाद बैंक अधिकारियों ने पहले उन्हें एक-दो दिन बाद आने के लिए कहा। बाद में जब वे शाखा पहुंचे तो वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध नहीं थे और सामान्य बैंकिंग गतिविधियां भी प्रभावित थीं।

फिलहाल बैंक की ओर से जांच जारी है और ग्राहकों को आश्वासन दिया गया है कि प्रत्येक शिकायत की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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