राजनीति
योगी सरकार की कैबिनेट ने 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी, चित्रकूट और विंध्यधाम विकास परिषद गठित
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इस दौरान विंध्यधाम विकास परिषद तथा चित्रकूट धाम विकास परिषद के गठन को मंजूरी मिली है। इन दोनों परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी तथा पर्यटन-धर्मार्थ कार्य मंत्री नीलकंठ तिवारी उपाध्यक्ष होंगे। उत्तर प्रदेश में पर्यटन के विकास को लेकर योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल ने बड़े प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस बैठक में 12 प्रस्तावों को पास किया है। जिसमें धार्मिक स्थलों के विकास के लिए सरकार ने चित्रकूट के विकास का मॉडल तैयार किया है। सरकार ने यूपी बृज तीर्थ विकास परिषद के तर्ज पर अब विंध्यधाम विकास परिषद और चित्रकूट धाम विकास परिषद का गठन कर दिया है। सरकार के इस फैसले से विंध्यधाम तथा चित्रकूट धाम को एक धामक स्थल के तौर पर विकसित किया जा सकेगा। इस पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है।
इसके साथ ही यूपी नगरपालिका में 2021 नियमावली के प्रख्यापन का प्रस्ताव पास किया गया। कैबिनेट बैठक में जेवर एयरपोर्ट को लेकर दो प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर के भूमि विस्तार के लिए लीज पर देने के लिए स्टैम्प शुल्क और निबंधन शुल्क में छूट की मंजूरी दी गई।
कोविड में 102 ऐम्बुलेंस के संचालन के लिए सेवा प्रदाता की शर्तों को छूट दिये जाने के सम्बन्ध में प्रस्ताव। पीजीआई में एडवांस अपथलेमिक सेंटर व सर्विस ब्लॉक के निर्माण में उच्च विशिष्ट। राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट के नए भवन में विद्युत के बाह्य संयोजन के सम्बन्ध में प्रस्ताव हुआ पास। पीजीआई की विभिन्न योजनाओं के लिए पुनरीक्षित लागत के सबंध में प्रस्ताव पर मुहर लगी है। 30 करोड़ पौध रोपण के लिए सभी विभागों को नि:शुल्क पौधे दिए जाने का प्रस्ताव हुआ है।
इसके अलावा यूपी लघु उद्योग निगम के कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के लाभ को हरी झंडी मिली है। साथ ही 6600 सरकारी नलकूपों के आधुनिकीकरण के लिये 285.79 करोड़ लागत पर मुहर लगी। बेसिक शिक्षा में मृतक आश्रित की नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन को हरी झंडी मिली है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सम्पन्न कैबिनेट बैठक में इसमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा भी शामिल हुए। इनके साथ ही सभी कैबिनेट मंत्री भी थे।
राष्ट्रीय समाचार
पीएनबी ग्रेटर नोएडा फ्रॉड: बैंक ने खाताधारकों के शिकायतों का लिया संज्ञान, अब तक 43 लाख रुपए का किया निपटारा

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने ग्रेटर नोएडा शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और बचत खातों से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेने की बात कही है। बैंक ने शुक्रवार को बताया कि मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है और अब तक 43 लाख रुपए के दावों का निपटारा किया जा चुका है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में बैंक ने कहा कि वह पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है और संबंधित एजेंसियों को पूरा सहयोग प्रदान कर रहा है। बैंक के अनुसार, तथ्यों का सत्यापन, कथित अनियमितताओं की सीमा का आकलन और प्रभावित ग्राहकों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
पीएनबी ने बताया कि अब तक तीन दावों का निपटारा किया गया है, जिनकी कुल राशि 43 लाख रुपए है। बैंक ने आश्वासन दिया कि सभी वास्तविक और वैध दावों का सम्मान किया जाएगा तथा ग्राहकों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।
बैंक ने दोहराया कि वित्तीय धोखाधड़ी, अनियमितताओं और कदाचार के प्रति उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैंक ने यह भी कहा कि वह ग्राहकों के हितों की सुरक्षा, परिचालन की पारदर्शिता और आंतरिक नियंत्रण तंत्र को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ग्रेटर नोएडा की सेक्टर पी-1 शाखा के कई ग्राहकों ने आरोप लगाया है कि उनके खातों से बिना अनुमति बड़ी रकम निकाल ली गई। प्रभावित खाताधारकों का दावा है कि उनके खातों से करोड़ों रुपए तक की राशि गायब हो गई।
ग्राहकों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद बैंक ने शाखा के पूरे स्टाफ को बदल दिया और उन्हें भरोसा दिलाया कि समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
इससे पहले, एक खाताधारक सोनू ने आरोप लगाया कि उनके खाते से करीब 90 लाख रुपए गायब हो गए। उनका कहना है कि बैंक अधिकारियों ने उन्हें धनराशि के गायब होने के कारणों के बारे में जानकारी दी है और पैसा वापस करने का आश्वासन भी दिया है।
एक अन्य ग्राहक राहुल ने दावा किया कि उनकी मां के खाते से लगभग 51 लाख रुपए बिना अनुमति निकाल लिए गए। उन्होंने कहा कि खाता किसी मोबाइल नंबर से लिंक नहीं था, जिसके कारण परिवार को लेनदेन संबंधी कोई अलर्ट नहीं मिला।
इसी तरह, सोनू सागर ने आरोप लगाया कि उनके पिता के खाते में लगभग 88 लाख रुपए की राशि थी, जो घटकर केवल 1,290 रुपए रह गई। उनका दावा है कि यह कथित गबन कई वर्षों से जारी था।
प्रभावित ग्राहकों ने मामले में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। कुछ खाताधारकों का आरोप है कि अनियमितताओं की शिकायत करने के बाद बैंक अधिकारियों ने पहले उन्हें एक-दो दिन बाद आने के लिए कहा। बाद में जब वे शाखा पहुंचे तो वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध नहीं थे और सामान्य बैंकिंग गतिविधियां भी प्रभावित थीं।
फिलहाल बैंक की ओर से जांच जारी है और ग्राहकों को आश्वासन दिया गया है कि प्रत्येक शिकायत की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय समाचार
भारत और श्रीलंका की नौसेना का शक्ति प्रदर्शन, युद्धपोतों ने किया संयुक्त अभ्यास

भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने श्रीलंकाई नौसेना के साथ एक महत्वपूर्ण समुद्री अभ्यास भी किया है। इस नौसैनिक अभ्यास में भारत के तीन बड़े समुद्री जहाज शामिल हुए। नौसेना के आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज आईसीजीएस सारथी इस अभियान का हिस्सा थे। इस दौरान दोनों नौसेनाओं ने समुद्र में समन्वित गतिविधियां कीं।
इससे एक-दूसरे के साथ तालमेल बढ़ाने और मिलकर समुद्री अभियान संचालित करने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिली। अभियान में शामिल यह भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन है।
नौसेना के मुताबिक, 29 अक्टूबर को श्रीलंका के कोलंबो से सफल दौरा पूरा कर पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन आगे रवाना हो गया। इस दौरान आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज आईसीजीएस सारथी ने श्रीलंकाई नौसेना के साथ कई गतिविधियों में हिस्सा लिया। वापसी के दौरान तीनों जहाजों ने श्रीलंका नौसेना के जहाज एसएलएनएस विजयबाहु के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास किया।
कोलंबो में इस दौरे का मकसद सिर्फ नौसैनिक संबंधों को मजबूत करना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के नौसैनिकों को एक-दूसरे के अनुभवों और कार्यप्रणाली से परिचित कराना भी था। प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के वरिष्ठ अधिकारी ने तीनों जहाजों के कमांडिंग अधिकारियों के साथ श्रीलंका नौसेना के पश्चिमी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर से मुलाकात की। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और समुद्री साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं ने त्रिंकोमाली स्थित नौसेना एवं समुद्री अकादमी का दौरा किया। यहां उन्होंने श्रीलंका नौसेना के प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए। वहीं, श्रीलंका नौसेना के प्रशिक्षु भी भारतीय जहाजों पर पहुंचे। उन्होंने जहाजों पर उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं और वहां होने वाली गतिविधियों को करीब से देखा। इस तरह दोनों देशों के भावी नौसैनिक अधिकारियों को एक-दूसरे की प्रशिक्षण व्यवस्था और कामकाज समझने का अवसर मिला।
समुद्री सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी इस दौरे का हिस्सा रहा। भारतीय नौसेना के जवानों ने कोलंबो में समुद्र तट की सफाई के अभियान में हिस्सा लिया। इसके अलावा, तीनों जहाजों को स्थानीय लोगों और श्रीलंका में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों के लिए खोला गया। लोगों को जहाजों पर पहुंचकर नौसैनिकों से बातचीत करने और भारतीय नौसेना की प्रशिक्षण एवं परिचालन गतिविधियों को करीब से जानने का मौका मिला। कोलंबो से विदाई के समय संयुक्त समुद्री अभ्यास हुआ। यह इस दौरे का अहम पड़ाव रहा।
भारतीय जहाजों और श्रीलंका के एसएलएनएस विजयबाहु ने पैसेक्स अभ्यास में हिस्सा लिया। यह दौरा भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी का एक और उदाहरण बना। साथ ही, दोनों देशों ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, आपसी सहयोग और नौसैनिक क्षमता निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नौसेना के मुताबिक यह भारत की महासागर परिकल्पना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को साझा प्रयासों से आगे बढ़ाना है।
राष्ट्रीय समाचार
ईएसआईसी ने 31 दिसंबर तक बढ़ाई एमनेस्टी स्कीम की अवधि, कोर्ट के बाहर सुलझ सकेंगे विवाद

भारत सरकार ने गुरुवार को कहा कि उसने नई एमनेस्टी स्कीम 2025 की अवधि 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है, ताकि नियोक्ताओं और बीमित व्यक्तियों को लंबित मामले सुलझाने के लिए ज्यादा समय मिल सके।
विभिन्न हितधारकों के सुझावों की समीक्षा के बाद कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) ने इसकी समय सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। पहले यह योजना 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक थी, अब इसे मौजूदा नियमों और शर्तों पर तीन महीने और बढ़ाकर 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है।
नई एमनेस्टी स्कीम एक वन-टाइम विवाद समाधान पहल है, जिसका मकसद कोर्ट में लंबित मामलों के बैकलॉग को कम करना और पुराने ईएसआई एक्ट के तहत अनुपालन को बढ़ावा देना है।
यह योजना नियोक्ताओं को ईएसआईसी के साथ कानूनी विवादों को कोर्ट के बाहर सुलझाने के लिए एक व्यवस्थित तरीका देती है। ‘नई एमनेस्टी स्कीम, 2025’ विवाद समाधान का एक व्यावहारिक और नियोक्ता-अनुकूल रास्ता है और यह कारोबार करने में आसानी बढ़ाने के साथ-साथ ईएसआईसी से जुड़े नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के सरकार के बड़े लक्ष्य का भी समर्थन करती है।
इस स्कीम के तहत तदर्थ आकलन का निपटान वास्तविक अंशदान और ब्याज का भुगतान करके किया जा सकता है, इस पर कोई हर्जाना नहीं लगाया जाएगा। जिन मामलों में नियोक्ताओं ने पहले ही बकाया राशि का भुगतान कर दिया है, उनमें विवादित हर्जाने का 10 प्रतिशत भुगतान करने पर केस वापस ले लिए जाएंगे। साथ ही ईएसआईसी द्वारा रिकॉर्ड जमा न करने या देर से भुगतान के लिए दायर किए गए मामले, जिनका बाद में अनुपालन कर दिया गया था, वे भी कोर्ट की अनुमति से वापस ले लिए जाएंगे।
आधिकारिक बयान के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक दायर किए गए कोर्ट केस इस योजना के तहत पात्र हैं। इस स्कीम की अवधि बढ़ने से पात्र नियोक्ताओं और बीमित व्यक्तियों को इसका लाभ उठाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
श्रम मंत्रालय ने कहा, “सभी संबंधित हितधारकों को सलाह दी जाती है कि वे 31 दिसंबर 2026 को बंद होने से पहले बढ़ाई गई इस अवधि का लाभ उठाएं।”
इस बीच केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने हाल ही में कहा था कि भारत कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के जरिए 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रहा है।
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