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Thursday,11-June-2026
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राजनीति

मिस्र और इजरायल के विदेश मंत्रियों ने गाजा युद्धविराम पर चर्चा की

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मिस्र के विदेश मंत्री समेह शौकरी और इजरायली समकक्ष गाबी अशकेनाजी ने गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष विराम को मजबूत करने के साथ-साथ इजरायल-फिलिस्तीन शांति प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने के तरीकों पर चर्चा की।

यह यात्रा लगभग 13 वर्षों में किसी इजरायली विदेश मंत्री की मिस्र की पहली औपचारिक यात्रा है।

मिस्र के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, रविवार को अपनी बैठक के दौरान, शौकरी और अशकेनाजी दोनों देशों और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के बीच “शांति पथ में मौजूदा गतिरोध से बाहर निकलने के तरीकों का पता लगाने के लिए परामर्श जारी रखने पर सहमत हुए।”

वार्ता में हाल ही में इजरायली बम विस्फोटों के बाद गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण की सुविधा के लिए आवश्यक उपायों पर भी चर्चा हुई, जिससे एन्क्लेव के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ।

मिस्र ने पुनर्निर्माण के लिए 50 करोड़ डॉलर आवंटित किए हैं।

अशकेनाजी की यात्रा 21 मई को मिस्र द्वारा मध्यस्थता किए गए युद्धविराम के 10 दिन बाद हुई, जिसने गाजा पट्टी में और उसके आसपास 11 दिनों के रक्तपात को समाप्त कर दिया, जिसमें कम से कम 248 फिलिस्तीनी और 12 इजरायली मारे गए।

बैठक के दौरान, शौकरी ने शांति को मजबूत करने और “वांछित राजनीतिक पथ को पुनर्जीवित,अनुकूल माहौल और जरूरी शर्तें देने के लिए मौजूदा संघर्ष विराम के दौरान और उपाय करने का आह्वान किया।”

उन्होंने 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम के साथ एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के समर्थन में मिस्र की निश्चित स्थिति को भी दोहराया।

अपनी ओर से, अशकेनाजी ने कहा कि “मिस्र एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सहयोगी है, जो सुरक्षा और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है,और क्षेत्र में शांति के रखरखाव और विस्तार के लिए भी प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने कहा, “हम सभी को चरमपंथी तत्वों को मजबूत होने से रोकने के लिए कार्य करने की आवश्यकता है जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं।”

शीर्ष इजरायली राजनयिक ने कहा कि उन्होंने और शौकरी ने “हमारे देशों के बीच सीधी उड़ानों के नवीनीकरण सहित आर्थिक और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।”

अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान के व‍िरोध में उतरे अमेरिका और कई यूरोपीय देश, अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया

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नई द‍िल्‍ली, 11 जून: अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड और कई यूरोपीय देशों ने एक संयुक्‍त बयान में ईरान की सुरक्षा एजेंसियों पर अस्थिरता फैलाने और लोगों को निशाना बनाने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। साथ ही उन्होंने ऐसे सभी हमलों को रोकने और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की बात कही है।

यूएस ड‍िपार्टमेंट ऑफ स्‍टेट के अनुसार, अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम, अल्बानिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, चेकिया, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड, नॉर्थ मैसेडोनिया, नॉर्वे, पुर्तगाल और स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की खुफिया इकाई, कुद्स फोर्स और मंत्रालय ऑफ इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी की ओर से की जा रही जानलेवा साजिशों और अन्य नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों की निंदा की।

इनमें ईरानी असंतुष्टों, पत्रकारों और यहूदी तथा इजरायली समुदायों और उनके हितों के खिलाफ की गई कार्रवाइयां भी शामिल हैं। हम अपने देशों और अपने लोगों को इन खतरों से बचाने के लिए एकजुट हैं।

बयान में कहा गया क‍ि ईरान की सरकार के सुरक्षा तंत्र और अंतरराष्ट्रीय तथा स्थानीय आपराधिक समूहों के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं। इन समूहों का इस्तेमाल करना बहुत निंदनीय है।

यूएस ड‍िपार्टमेंट ऑफ स्‍टेट के अनुसार, इन देशों ने अपने संयुक्‍त बयान में कहा क‍ि हम हाल ही में यूरोप में हुए उन हमलों की भी निंदा करते हैं, जो यहूदी समुदायों, ईरानी पत्रकारों और अमेरिका से जुड़े हितों को निशाना बनाकर किए गए। जिन्हें ‘हरकत अशाब अल-यमीन अल-इस्लामिया’ ने अपने सहयोगियों के जरिए अंजाम दिया या समर्थन दिया।

हमारे देशों में लोगों को मारने, अगवा करने, परेशान करने, डराने या किसी भी तरह से हमला करने की कोशिशें हमारे राष्ट्रीय अधिकार और अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमजोर करती हैं। ऐसी कार्रवाइयां तुरंत बंद होनी चाहिए। हम इन गतिविधियों को रोकने के लिए मिलकर किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हैं। हम मिलकर आगे और कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि इन्हें रोका जा सके।

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फ‍िर युद्ध को शोर शुरू हो गया है। ईरानी व‍िदेश मंत्री अराघची का कहना है क‍ि मौजूदा तनाव के ल‍िए अमेर‍िका ज‍िम्‍मेदार है। वहीं अमेर‍िका इसे ईरान के हमलों की जवाबी कार्रवाई बता रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य देशों से अपील की है कि वे संयुक्त राष्ट्र की इस परमाणु निगरानी संस्था को एक बार फिर अमेरिका के राजनीतिक हथ‍ियार के रूप में इस्तेमाल न होने दें।

इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की र‍िपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल देशों के विदेश मंत्रियों को भेजे गए एक पत्र में अराघची ने ईरान के खिलाफ अमेरिका की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव को राजनीतिक मकसद से प्रेरित और गलत नीयत वाला बताया। उन्होंने यह पत्र उस समय भेजा है, जब आईएईए बोर्ड की जून महीने की तिमाही बैठक वियना में चल रही है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत-बुल्गारिया संबंधों को आधुनिक और आगे की सोच वाली साझेदारी में बदलने की जरूरत: जयशंकर

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सोफिया, 11 जून: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को भारत और बुल्गारिया के रिश्तों पर कहा कि इन संबंधों को अब एक आधुनिक और भविष्य के लिए अहम साझेदारी में बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों का राजनीतिक नजरिया एक जैसा है।

सोफिया में बुल्गारिया की विदेश मंत्री वेलीस्लावा पेट्रोवा के साथ बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने बताया, “आज हमारी बातचीत तीन हिस्सों में रही। पहला, भारत और बुल्गारिया के बीच द्विपक्षीय सहयोग। दूसरा, भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी। तीसरा, हम दोनों देश मिलकर दुनिया के लिए क्या कर सकते हैं।”

भारत-बुल्गारिया संबंधों पर उन्होंने कहा, “हमारे रिश्ते बहुत पुराने और अच्छे हैं। अब हमारा काम इन्हें एक आधुनिक और आगे की सोच वाले संबंध में बदलना है। राजनीतिक रूप से, हमारी बातचीत में यह साफ हुआ कि हमारी सोच और नजरिया काफी हद तक एक जैसे हैं।”

इस यात्रा के दौरान जयशंकर ने बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं।

भारत-यूरोपीय संघ संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने हाल ही में हुए समझौतों का जिक्र किया, जिनमें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी और मोबिलिटी फ्रेमवर्क शामिल हैं। ये सभी समझौते इस साल जनवरी में हुए थे। उन्होंने कहा कि इनसे दोनों पक्षों के बीच सहयोग काफी बढ़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया काफी अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है, इसलिए विवादों को लड़ाई-झगड़े के बजाय बातचीत से हल करना जरूरी है।

जयशंकर ने कहा, “हम सभी मानते हैं कि दुनिया इस समय बहुत ज्यादा अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। इसमें कई बड़े संघर्ष, आर्थिक सुरक्षा की चिंताएं, हाल में महामारी का अनुभव और आतंकवाद का लगातार खतरा शामिल है। भारत का इन सभी मुद्दों पर साफ रुख है। हम मानते हैं कि यह युद्ध का समय नहीं है।”

उन्होंने कहा, “संघर्षों का समाधान सिर्फ बातचीत और कूटनीति से ही हो सकता है। आर्थिक जोखिमों के मामले में समाधान सप्लाई चेन को मजबूत और विविध बनाना है। यह भी बहुत जरूरी है कि समुद्री व्यापार को रोका या खतरे में न डाला जाए।”

विदेश मंत्री ने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर भारत के लगातार जोर देने की बात भी कही, खासकर ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा के मुद्दों पर।

उन्होंने कहा, “ग्लोबल साउथ की ओर से भारत ने बार-बार ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उठाया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में कोविड के समय ने दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितना जरूरी है और यह भारत और बुल्गारिया दोनों ने देखा।”

जयशंकर ने आतंकवाद पर सख्त रुख की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि इस पर पूरी दुनिया में ‘जीरो टॉलरेंस’ यानी बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों पर भारत और बुल्गारिया के बीच काफी सहमति बनी है।

उन्होंने अंत में कहा, “आतंकवाद के मामले में दुनिया को साफ तौर पर जीरो टॉलरेंस अपनाना चाहिए। इन सभी विषयों पर भारत और बुल्गारिया की सोच काफी हद तक एक जैसी रही है।”

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

फिलीपींस के विनाशकारी भूकंप में अब तक 47 की मौत, सैकड़ों घायल

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मनीला, 11 जून: फिलीपींस के दक्षिणी द्वीप क्षेत्र मिंडानाओ तट के पास सोमवार को आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। देश की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, इस आपदा में अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है, 31 लापता हैं और 688 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट काउंसिल (एनडीआरआरएमसी) ने गुरुवार को बताया कि 75,000 से अधिक परिवार भूकंप पीड़ित हैं, जबकि लगभग 3.46 लाख लोगों पर इसका सीधा असर पड़ा है। 45,000 से ज्यादा लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा और 12,600 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

भूकंप के बाद 45 अन्य घटनाएं भी दर्ज की गईं, जिनमें अधिकांश भूस्खलन (लैंडस्लाइड) से जुड़ी थीं। कई सड़कें, पुल, एक हवाई अड्डा और दो बंदरगाह प्रभावित हुए हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं। इसके अलावा कृषि, पशुपालन और मत्स्य उद्योग को भी भारी नुकसान पहुंचा है। 48 शहरों और नगरपालिकाओं में बिजली आपूर्ति बाधित हुई।

फिलीपींस इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्कैनोलॉजी एंड सिसमोलॉजी के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 7:37 बजे आया। इसका केंद्र मासिम तट से लगभग 32 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में और 33 किलोमीटर की गहराई पर था।

सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में जनरल सैंटोस शामिल है, जहां कई इमारतों को नुकसान पहुंचा। एक दो-मंजिला स्कूल भवन ढह गया, जिसमें छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई गई। अधिकारी घटना की पुष्टि और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

ऑनलाइन सामने आए वीडियो में विश्वविद्यालयों, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक इमारतों के ढहने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर इमारतों के शीशे टूट गए और साइनबोर्ड गिर गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। जान बचाने के लिए स्थानीय निवासी तुरंत घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।

यह भूकंप ऐसे समय आया जब गर्मियों की छुट्टियों के बाद पूरे फिलीपींस में स्कूल दोबारा खुलने शुरू हुए थे। कई स्कूलों के सीसीटीवी फुटेज में भूकंप के दौरान तेज झटके महसूस होते दिखाई दिए, जहां शिक्षक और छात्र या तो तुरंत बाहर निकले या फिर मेज के नीचे शरण लेते नजर आए।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक छह क्षेत्रों के 43 शिक्षा प्रभागों के कुल 8,642 स्कूलों को किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचा है।

राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं, जबकि अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों और घायलों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।

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