अंतरराष्ट्रीय
चेन्नई को जडेजा के आसपास अपनी टीम बनानी चाहिए : वॉन
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने कहा है कि आलराउंड योग्यता को देखते हुए आईपीएल फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपर किंग्स को रवींद्र जडेजा के आसपास अपनी टीम बनानी चाहिए। वॉन ने क्रिकबज से कहा, ” आप कह सकते हैं कि महेंद्र सिंह धोनी दो से तीन साल और खेलेंगे, लेकिन ईमानदारी से बताएं, वह उसके बाद क्या बहुत अच्छा खेलेंगे? इसलिए आपको यह देखना होगा कि आप किसके आसपास टीम बना सकते हैं। रवींद्र जडेजा इस तरह के क्रिकेटर हैं, जिनके साथ मैं टीम बनाना चाहूंगा। मुझे लगता है कि वह गेंद के साथ मैदान में अच्छा है, हाथ में बल्ले के साथ उसकी मानसिकता बहुत अच्छी है।”
जडेजा ने सोमवार को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ चेन्नई की जीत में अहम योगदान दिया। उन्होंने दो विकेट चटकाने के अलावा चार कैच भी पकड़े।
उन्होंने कहा, ” मेरे लिए जडेजा एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें आप कह सकते हैं कि ‘आप नंबर 4 या 5 पर बल्लेबाजी करने जा रहे हैं। हम आपके साथ गेंदबाजी भी कर सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन बल्लेबाजी कर रहा है और हम आपको महत्वपूर्ण क्षेत्ररक्षण की स्थिति में लाएंगे। वह इसके लिए तैयार है। मुझे लगता है कि वह एक अच्छा क्रिकेटर है।”
चेन्नई ने सोमवार को यहां वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए आईपीएल 2021 के 12वें मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स को 45 रन से हरा दिया।
चेन्नई की तीन मैचों की यह दूसरी जीत है और अब उसके चार अंक हो गए हैं और वह तालिका में दूसरे नंबर पर पहुंच गई है। राजस्थान को तीन मैचों में दूसरी हार का सामना करना पड़ा है और वह तालिका में छठे नंबर पर है।
अंतरराष्ट्रीय
खुफिया जानकारी और उन्नत निगरानी का कमाल : सीआईए ने ऐसे लगाया ईरान में फंसे पायलट का पता

वाशिंगटन, 7 अप्रैल : सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) ने ईरान के अंदर फंसे एक अमेरिकी पायलट का पता लगाने में अहम भूमिका निभाई है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे समय के खिलाफ रेस बताया है।
सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने कहा कि यह मिशन मानव इंटेलिजेंस और एडवांस्ड सर्विलांस टूल्स, दोनों पर निर्भर था। उन्होंने कहा, “हमने मानव एसेट्स और बेहतरीन तकनीक, दोनों का इस्तेमाल किया, जो दुनिया की किसी दूसरी इंटेलिजेंस सर्विस के पास नहीं है।”
उन्होंने इस कोशिश को “रेगिस्तान के बीच में रेत के एक कण ढूंढ़ने जैसा” बताया।
लापता हुए पायलट ने खतरनाक इलाके में इजेक्ट किया था और ईरानी सेना से बचते हुए लगभग दो दिनों तक छिपा रहा। रैटक्लिफ ने कहा कि पकड़े जाने से बचने के लिए तेजी और गोपनीयता जरूरी थी।
उन्होंने कहा, “यह बहुत जरूरी था कि हम पायलट का जल्द से जल्द पता लगा लें और साथ ही अपने दुश्मनों को गुमराह भी करते रहें।”
ऐसा करने के लिए, सीआईए ने “ईरानियों को गुमराह करने के लिए एक धोखा देने वाला कैंपेन चलाया, जो हमारे पायलट का बेसब्री से तलाश कर रहे थे।”
रैटक्लिफ ने कहा कि शनिवार सुबह कामयाबी तब मिली जब इंटेलिजेंस एजेंसियों ने पुष्टि किया पायलट जिंदा है और पहाड़ी इलाके में छिपा हुआ है।
उन्होंने कहा, “हमने अमेरिका के सबसे अच्छे और बहादुर लोगों में से एक को ढूंढकर और यह पुष्टि करके अपना पहला मकसद हासिल कर लिया।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने और जानकारी देते हुए कहा कि इंटेलिजेंस टीमों ने काफी दूर से गतिविधि को ट्रैक किया। उन्होंने कहा, “हम पहाड़ पर कुछ हिलते हुए देख रहे हैं, 40 मील दूर। लगातार देखने के बाद, उन्होंने कहा कि वह हमारे पास है।”
सीआई की पुष्टि से सेना को दूसरा, बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने में मदद मिली, जिसमें काफी फोर्स शामिल थी।
अधिकारियों ने कहा कि इस मिशन ने इंटेलिजेंस और सैन्य क्षमताओं के इंटीग्रेशन को दिखाया, जिसमें रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन से सटीक टारगेटिंग और तेजी से रिस्पॉन्स मुमकिन हुआ।
रैटक्लिफ ने जोर देकर कहा कि ऑपरेशन के कई पहलू अभी भी गोपनीय हैं। मिशन की सफलता इंटेलिजेंस एजेंसियों और मुश्किल हालात में काम कर रही मिलिट्री यूनिट्स के बीच तालमेल को भी दिखाती है।
यह ऑपरेशन ईरान में अमेरिका की बड़ी मिलिट्री कार्रवाई के बीच हुआ है, जहां अधिकारियों का कहना है कि हाल के हफ्तों में हजारों उड़ानें भरी गई हैं।
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ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर नाटो देशों और सहयोगियों पर निशाना साधा

वाशिंगटन, 7 अप्रैल : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के सैन्य अभियान का समर्थन न करने के लिए नाटो और अमेरिका के खास सहयोगियों की कड़ी आलोचना की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस गठबंधन को कागजी शेर कहा।
ट्रंप ने कहा, “नाटो एक कागजी शेर है। लड़ाई के दौरान अलायंस आगे आने में नाकाम रहा।” उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों ने मदद न करने के लिए अपनी हदें पार कर दीं और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने से भी मना कर दिया। वे हमें लैंडिंग स्ट्रिप भी नहीं देना चाहते थे।
ट्रंप ने जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को भी अपनी आलोचना में शामिल किया। उन्होंने कहा, “जापान ने हमारी मदद नहीं की, ऑस्ट्रेलिया ने हमारी मदद नहीं की, दक्षिण कोरिया ने हमारी मदद नहीं की।”
उन्होंने कहा कि लड़ाई का बोझ अकेले अमेरिका ने उठाया है। उन्होंने सहयोगियों में अमेरिका के दबदबे पर जोर देते हुए कहा, “नाटो हम हैं।”
ये टिप्पणी ईरान के साथ संघर्ष बढ़ने के बीच अमेरिका और उसके साथियों के बीच बढ़ते तनाव को दिखाते हैं।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, कई अमेरिकी साझेदार वाशिंगटन के तरीके को अप्रत्याशित मानते हैं और अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर भरोसा करने के बावजूद लड़ाई में शामिल होने से हिचकिचा रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब एनर्जी में रुकावटें और आर्थिक नुकसान बढ़ रहे हैं, इस संघर्ष ने सहयोगियों को एक परेशानी में डाल दिया है। ट्रंप ने यूरोपीय साथियों के रवैये की भी आलोचना की और कहा कि उन्होंने लंबे समय से चले आ रहे संबंधों के बावजूद हिस्सा लेने से मना कर दिया था।
सहयोगियों की भागीदारी की कमी, अमेरिका के नेतृत्व वाली पिछली लड़ाइयों से अलग है, जहां गठबंधन का सपोर्ट एक अहम हिस्सा था।
ट्रंप ने एक सवाल के जवाब में कहा, “मुझे आपको बताना है, मैं नाटो से बहुत निराश हूं। मुझे लगता है कि यह नाटो पर एक ऐसा दाग है जो कभी नहीं मिटेगा।”
ट्रंप ने कहा, “हम नाटो गए थे। मैंने बहुत जोर देकर नहीं पूछा। मैंने बस कहा, अगर आप मदद करना चाहते हैं तो बढ़िया, तो उन्होंने कहा ‘नहीं, नहीं नहीं, हम मदद नहीं करेंगे’। मैंने कहा, कोई बात नहीं। मैंने हमेशा कहा है कि नाटो एक कागजी शेर है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “पुतिन नाटो से नहीं डरते। पुतिन हमसे डरते हैं, बहुत डरते हैं। वे खुद मुझे कई बार यह बात बता चुके हैं। मैं उन्हें बहुत अच्छे से जान गया हूं। नाटो एक कागजी शेर है। उन्होंने असल में मदद न करने के लिए अपनी हदें पार कर दीं। वे हमें लैंडिंग स्ट्रिप भी नहीं देना चाहते थे।”
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “जरा सोचिए। यह सिर्फ नाटो नहीं है। आप जानते हैं कि और किसने हमारी मदद नहीं की? दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने। हमारे पास जापान में उत्तर कोरिया से उन्हें बचाने के लिए 50,000 सैनिक हैं। हमारे पास दक्षिण कोरिया में किम जोंग उन से बचाने के लिए 45,000 सैनिक हैं, जिनके साथ मेरी बहुत अच्छी बनती है, जैसा कि आप जानते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका-भारत संबंधों में तेजी आने के साथ ही प्राथमिकताओं के तालमेल पर जोर

वॉशिंगटन, 6 अप्रैल : संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत ने अपनी रणनीतिक साझेदारी में नई गति का संकेत दिया है। यह संकेत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के लिए आयोजित व्हाइट हाउस रात्रिभोज से पहले मिला। वहीं वॉशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय बैठकों की श्रृंखला ने सुरक्षा और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर बढ़ती समानता को भी रेखांकित किया।
व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति भारत में अमेरिकी राजदूत के साथ एक रात्रिभोज में भाग लेने वाले हैं। गोर इस समय अमेरिकी राजधानी में हैं और कई बैठकों में शामिल हो रहे हैं।
गोर ने वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों, जिनमें एफबीआई निदेशक काश पटेल भी शामिल हैं, के साथ बैठकों के बाद सहयोग के विस्तार पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि उन्होंने “रचनात्मक चर्चा” की, जिसमें “सीमा पार खतरों, साइबर अपराध, मादक पदार्थों और अवैध नेटवर्क” से निपटने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
उन्होंने कहा, “सुरक्षा प्राथमिकताओं पर मजबूत तालमेल है,” और जोड़ा कि पटेल “एफबीआई में शानदार काम कर रहे हैं।” उन्होंने हालिया कानून-प्रवर्तन उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कहा: “2025 में: हिंसक अपराधों में गिरफ्तारियों में साल-दर-साल 112% की वृद्धि। हत्याओं में 20 प्रतिशत की कमी। डकैती में 20 प्रतिशत की कमी!”
ये संपर्क वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच साझा सुरक्षा चुनौतियों, विशेष रूप से साइबर खतरों और संगठित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ परिचालन सहयोग को गहरा करने के व्यापक प्रयासों के बीच हो रहे हैं।
गोर ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ अपनी बैठक के बाद संबंधों के राजनीतिक पहलू पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “अभी-अभी उपराष्ट्रपति के साथ शानदार बैठक समाप्त हुई। अमेरिका-भारत संबंधों पर उपराष्ट्रपति के निरंतर नेतृत्व और ध्यान के लिए धन्यवाद।”
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में व्हाइट हाउस इस क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय है,” और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र तथा उसमें भारत की भूमिका पर अमेरिका के निरंतर ध्यान की ओर इशारा किया।
कूटनीतिक प्रयासों में गोर और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के बीच बैठक भी शामिल रही, जो दोनों पक्षों के बीच करीबी समन्वय को दर्शाती है। गोर ने कहा, “मेरे मित्र क्वात्रा से मिलकर हमेशा खुशी होती है। वे हमारे रणनीतिक संबंधों की गहराई से परवाह करते हैं!”
क्वात्रा ने इस बातचीत को दोनों लोकतंत्रों के बीच संबंधों को मजबूत करने के जारी प्रयासों का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “वॉशिंगटन डीसी की यात्रा के दौरान अपने मित्र, राजदूत सर्जियो गोर से मिलकर खुशी हुई। उनके सहयोग का सम्मान करता हूं और हम दोनों देशों के नेताओं द्वारा तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपने मजबूत प्रयास जारी रखेंगे।”
ये बातचीत सुरक्षा, कूटनीति और राजनीतिक नेतृत्व को शामिल करते हुए बहु-स्तरीय जुड़ाव को दर्शाती है, जिसमें दोनों पक्ष प्रमुख प्राथमिकताओं पर तालमेल पर जोर दे रहे हैं।
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