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Friday,20-March-2026
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कोहली बेहद आक्रामक शैली वाले खिलाड़ी : ग्रैग चैपल

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Virat-Kohli

आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल ने कहा है कि विराट कोहली शांत रहने में विश्वास नहीं रखते क्योंकि वह अपनी विपक्षी टीम पर हावी रहना चाहते हैं। सिडनी मॉनिर्ंग हेराल्ड में अपने कॉलम में चैपल ने लिखा है कि कोहली ऐसे गैर आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हैं जो आस्ट्रेलिया खिलाड़ी जैसे हैं।

चैपल ने लिखा, “विराट कोहली शांत नहीं रहते हैं। वह काफी आक्रामक हैं। वह विपक्षी टीम पर दबाव बनाना चाहते हैं। वह नए भारत का विचार लेकर आते हैं। एक मुख्य खिलाड़ी और विश्व क्रिकेट की एक महाशाक्ति के कप्तान के तौर पर वह खेल के प्रति जिम्मेदारी महसूस करते हैं।”

2005 से 2007 तक भारतीय टीम के मुख्य कोच रह चुके चैपल ने कहा, “वह अपने निजी रिकार्ड के बारे में जानते हैं, लेकिन उनका ध्यान इस पर नहीं रहता। उनके लिए भारत के लिए मैच जीतना काफी अहम है और यही उनका मुख्य उद्देश्य रहता है।”

अपने आक्रामक स्वभाव के लिए मशहूर कोहली की दरियादिली की एक मिशाल तब देखने को मिली थी जब 2019 विश्व कप में आस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ को दर्शकों ने चिढ़ाया था और कोहली ने इसका विरोध किया था। इसी कारण उन्हें स्प्रिट ऑफ क्रिकेट पुरस्कार भी मिला था।

चैपल ने लिखा, “एक बड़े पैमाने पर, वह अपने ओहदे से वाकिफ हैं। वह इस बात को जानते हैं कि वह दूसरों पर कैसा प्रभाव डाल सकते हैं। 2019 में विश्व कप में स्मिथ का मजाक बनाने वाले भारतीय प्रशंसकों को जो उन्होंने जवाब दिया था वो शानदार था।”

चैपल ने कोहली की बल्लेबाजी तकनीक की भी तारीफ की है।

चैपल ने लिखा, “वह भारी बल्लों से नहीं खेलते हैं। उन्होंने मुझसे कहा था। वह ताकत से ज्यादा टाइमिंग पर निर्भर रहते हैं।”

भारत और आस्ट्रेलिया के बीच आगामी चार मैचों की टेस्ट सीरीज को लेकर चैपल ने लिखा, “बिना किसी शक के दो सर्वश्रेष्ठ टीमें अपनी पूरी ताकत के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगी। भारत ने पिछली बार आस्ट्रेलिया को हराया था लेकिन उस समय स्मिथ और डेविड वार्नर नहीं थे। कोहली ऊर्जा से भरे हुए इंसान हैं और वह चाहेंगे कि उनकी टीम अपनी बादशाहत कायम रखें। उनके जाने से पहले मैं उनसे कुछ अलग करने की उम्मीद करता हूं।”

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कतर ने रास लफान औद्योगिक शहर पर हुए मिसाइल हमलों से नुकसान की जानकारी दी

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नई दिल्ली, 20 मार्च : ईरान की ओर से रास लफ्फान औद्योगिक शहर पर किए गए हमले के नुकसान के बारे में कतर ने जानकारी दी। कतर के मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि मिसाइल हमलों के कारण कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी आई और वार्षिक राजस्व में लगभग 20 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि हमारी उत्पादन फैसिलिटी को भारी नुकसान हुआ है। जिसकी मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा और इसके चलते हमें दीर्घकालिक फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा।

कतर एनर्जी का अनुमान है कि बुधवार 18 मार्च 2026 और गुरुवार 19 मार्च 2026 की सुबह हुए मिसाइल हमलों के कारण उसके रास लफान औद्योगिक शहर को हुए नुकसान से सालाना लगभग 20 अरब डॉलर का राजस्व नुकसान होगा और मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा, जिससे यूरोप और एशिया के बाजारों में आपूर्ति प्रभावित होगी।

रास लफान औद्योगिक शहर में उत्पादन केंद्रों को हुए नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए, ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री, कतर एनर्जी के अध्यक्ष और सीईओ, साद शेरिदा अल-काबी ने कहा कि मुझे यह पुष्टि करते हुए राहत मिली है कि इन अनुचित और संवेदनहीन हमलों में कोई भी घायल नहीं हुआ। ये हमले न केवल कतर राज्य पर, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता पर भी हमले थे। यह हम सभी पर हमला था जो विकास और मानवीय प्रगति के लिए खड़े हैं, जो ऊर्जा तक निष्पक्ष, विश्वसनीय और सुरक्षित पहुंच पर आधारित है।

इन हमलों में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) उत्पादन करने वाली छह ट्रेनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है, जो कतर के निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत है। ट्रेन 4 कतर एनर्जी (66 प्रतिशत) और एक्सॉनमोबिल (34 प्रतिशत) का संयुक्त उद्यम है, और ट्रेन 6 कतर एनर्जी (70 प्रतिशत) और एक्सॉनमोबिल (30 प्रतिशत) का संयुक्त उद्यम है।

अल-काबी ने कहा कि एलएनजी संयंत्रों को हुए नुकसान की मरम्मत में तीन से पांच साल लगेंगे। इसका असर चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम पर पड़ रहा है। इसका मतलब है कि हमें कुछ दीर्घकालिक एलएनजी अनुबंधों पर पांच साल तक के लिए फोर्स मेज्योर घोषित करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

हमलों में शेल की ओर से संचालित उत्पादन-साझाकरण समझौते के तहत संचालित पर्ल जीटीएल (गैस-टू-लिक्विड्स) संयंत्र को भी निशाना बनाया गया, जो प्राकृतिक गैस को उच्च गुणवत्ता वाले स्वच्छ ईंधन में बदलता है और प्रीमियम इंजन तेल और स्नेहक, साथ ही पैराफिन और मोम बनाने में उपयोग होने वाले बेस ऑयल का उत्पादन करता है।

अल-काबी ने आगे कहा कि पर्ल जीटीएल के दो संयंत्रों में से एक को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और इसके कम से कम एक साल तक बंद रहने की उम्मीद है।

कतर ने बताया कि 18.6 मिलियन बैरल कंडेनसेट की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग 24 प्रतिशत है। 1.281 मीट्रिक टन एलपीजी की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग 13 प्रतिशत है। 0.594 मीट्रिक टन नेफ्था की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग छह प्रतिशत है। 0.18 मीट्रिक टन सल्फर का नुकसान होगा। यह कतर के निर्यात का लगभग छह प्रतिशत है और 309.54 एमसीएफए हीलियम का नुकसान होगा। यह कतर के निर्यात का लगभग 14 प्रतिशत है।

ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री, कतर एनर्जी के अध्यक्ष और सीईओ ने कतर की सैन्य और सुरक्षा बलों और ऊर्जा क्षेत्र की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके साहस और असाधारण व्यावसायिकता ने यह सुनिश्चित किया कि स्थिति को जल्दी और सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सके।

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अंतरराष्ट्रीय

ट्रंप की पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी से जापान की प्रधानमंत्री नाराज

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वॉशिंगटन, 20 मार्च : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी हमलों को गुप्त रखने के फैसले का बचाव करते हुए पर्ल हार्बर का हवाला दिया। हालांकि इस टिप्पणी से व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची असहज नजर आईं। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग के गर्मजोशी भरे प्रदर्शन के बीच एक अटपटा क्षण पैदा हो गया।

यह बातचीत उस समय हुई जब ट्रंप से पूछा गया कि यूरोप और एशिया के सहयोगी देशों, जिनमें जापान भी शामिल है, को हमले से पहले क्यों नहीं बताया गया।

ट्रंप ने कहा, “देखिए, एक बात यह है कि आप बहुत ज्यादा संकेत नहीं देना चाहते।” उन्होंने कहा कि जब हम गए, तो हम बहुत जोरदार तरीके से गए, और हमने किसी को इसके बारे में नहीं बताया क्योंकि हम उन्हें चौंकाना चाहते थे।

इसके बाद उन्होंने जापान के 1941 के पर्ल हार्बर हमले का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, “सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है, ठीक है? आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया।” आप सरप्राइज में हमसे कहीं ज्यादा विश्वास रखते हैं, और हमें उन्हें चौंकाना था, और हमने ऐसा किया।

उन्होंने तर्क दिया कि सहयोगियों को पहले से जानकारी न देने का फैसला सैन्य बढ़त बनाए रखने के लिए था। “इसी सरप्राइज की वजह से, पहले दो दिनों में हमने शायद 50 प्रतिशत लक्ष्य को खत्म कर दिया और जितना हमने अनुमान लगाया था उससे भी ज्यादा। तो अगर मैं पहले ही सबको बता देता, तो फिर सरप्राइज नहीं रहता, है ना?”

विदेशी मीडिया पूल रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की इस तुलना पर ताकाइची ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उनकी आंखें चौड़ी हो गईं और मुस्कान गायब हो गई और वह “पीछे की ओर झुक गईं, अपने हाथ समेटते हुए, पर्ल हार्बर का अचानक जिक्र होने से स्पष्ट रूप से चौंक गईं।”

यह टिप्पणी इसलिए भी अलग नजर आई क्योंकि बाकी दौरे के दौरान दोनों नेताओं की भाषा असामान्य रूप से दोस्ताना रही थी।

ट्रंप ने बार-बार ताकाइची की तारीफ करते हुए उन्हें “महान महिला” बताया और कहा कि उनके बीच “बहुत अच्छे संबंध” हैं। डिनर के दौरान उन्होंने उन्हें “शानदार महिला” कहा और कहा, “व्हाइट हाउस में आपका हमारे साथ होना सम्मान की बात है।”

ताकाइची ने भी इस व्यक्तिगत तालमेल को आगे बढ़ाया। उन्होंने ट्रंप से कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि डोनाल्ड और मैं इस साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे अच्छे साथी हैं,” और बाद में कहा, “जापान वापस आ गया है।”

फिर भी, पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी ने कुछ समय के लिए इस सावधानीपूर्वक बनाए गए माहौल को तोड़ दिया।

जापान के लिए उनका व्यापक संदेश यह था कि जब अपने हित सीधे जुड़े हों, तो सहयोगी देशों को “आगे आना चाहिए”, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में। उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि जापान आगे आएगा क्योंकि हमारे बीच ऐसा संबंध है। जापान के मामले में, मैंने सुना है कि वह अपना 90 प्रतिशत से अधिक तेल इसी जलडमरूमध्य से प्राप्त करता है।”

बैठक के दौरान ताकाइची ने पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। चीन के मुद्दे पर उन्होंने संतुलित रुख अपनाया और कहा कि जापान “चीन के साथ संवाद के लिए लगातार खुला रहा है” और उसे उम्मीद है कि अमेरिका-चीन संबंध “क्षेत्रीय सुरक्षा” और “वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला” को मजबूत करेंगे।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और जापान ने अपने संबंधों को फिर से मजबूत किया और यह वॉशिंगटन के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक बन गया। पर्ल हार्बर आज भी एक बेहद प्रतीकात्मक और संवेदनशील ऐतिहासिक संदर्भ है, भले ही अब दोनों देश रक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा में घनिष्ठ सहयोग कर रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय

यूएन रिपोर्ट में भारत की बड़ी उपलब्धि: बाल मृत्यु दर में भारी गिरावट, पीएम नरेंद्र मोदी ने जताई खुशी

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नई दिल्ली, 19 मार्च : संयुक्त राष्ट्र की तरफ से एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें भारत में बाल मृत्यु दर में भारी गिरावट देखने को मिली। संयुक्त राष्ट्र ने बाल मृत्यु दर में गिरावट को लेकर भारत की जमकर सराहना की। वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। पीएम मोदी ने लिखा कि यूएन की रिपोर्ट में बच्चों की मौत में तेज गिरावट के लिए भारत की तारीफ की गई।

संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्युदर अनुमान अंतर-एजेंसी समूह (यूएनआईजीएमई) की हालिया रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, बच्चों की मौत की दर को कम करने में दुनियाभर में हुई तरक्की में भारत एक अहम योगदान देने वाला देश बनकर उभरा है।

रिपोर्ट में बच्चों के बचने के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए, खासकर नवजात और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में देश की लगातार और बड़े पैमाने पर की गई कोशिशों पर जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नतीजों ने एक मजबूत, केंद्र और राज्यों द्वारा संचालित तथा मानकों पर आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की प्रभावशीलता को उजागर किया है। इसमें यह भी दिखाया गया है कि भारत ने राष्ट्रीय दृष्टिकोण को जमीनी स्तर पर मापने योग्य परिणामों में बदलने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।

नवजात शिशु मृत्यु दर में 70 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो 1990 में 57 से घटकर 2024 में 17 हो गई है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई, जो 1990 में 127 से घटकर 2024 में 27 हो गई है।

पिछले दो दशकों में भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में बच्चों की मृत्यु दर को कम करने की कोशिशों में अहम भूमिका निभाई है। 1990 से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में 76 फीसदी की कमी आई है और 2000 से 68 फीसदी की कमी आई। यह बड़ी कमी मुख्य रूप से भारत जैसे देशों के कारण आई है, जहां लक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप, बेहतर संस्थागत डिलीवरी व्यवस्था और टीकाकरण कवरेज में वृद्धि देखने को मिली है।

इस क्षेत्र में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में काफी कमी आई है। 2000 में हर 1,000 जीवित जन्मों पर 92 मौतों से घटकर 2024 में लगभग 32 हो गई है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के नतीजों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को दिखाता है।

भारत के खास दखल ने निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्म से जुड़ी दिक्कतों जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करने में मदद की है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकांश बच्चों की मौतें रोकी या उनका इलाज किया जा सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम, संस्थान-आधारित नवजात देखभाल और नवजात व बचपन की बीमारियों के एकीकृत प्रबंधन जैसे हस्तक्षेपों के विस्तार से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।

नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल (एनआईसीयू) में भारत के सुधार का खास असर हुआ है। पूरे दक्षिण एशिया में, 2000 से एनआईसीयू वाले बच्चों की मौत के मामले में लगभग 60 फीसदी की कमी आई है और 1-59 महीने के बच्चों की मौत की दर में 75 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है।

हालांकि दक्षिण एशिया में अभी भी दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 25 फीसदी मौतें होती हैं, लेकिन इस इलाके ने दुनिया भर में सबसे तेजी से कमी की है।

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