अंतरराष्ट्रीय
तीसरे सीआईआईई में भाग लेने वाली फ्रांसीसी कंपनियों की संख्या बढ़ी
तीसरा चीन अंतर्राष्ट्रीय आयात एक्सपो (सीआईआईई) 4 नवंबर को शांगहाई में उद्घाटित होने जा रहा है। हाल ही में चीन स्थित फ्रांसीसी राजदूत लॉरेंट बिली ने सीएमजी को दिये एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि इस साल सीआईआईई में भाग लेने वाली फ्रांसीसी कंपनियों की संख्या पिछले साल से अधिक है। राजदूत लॉरेंट ने कहा कि इस साल फ्रांस की लगभग 90 कंपनियां सीआईआईई में भाग लेंगी, जो पिछले साल से अधिक हैं। इनमें से 80 कंपनियों के पास अपने प्रदर्शन क्षेत्र हैं और लगभग 10 कंपनियां कृषि-खाद्य प्रदर्शन क्षेत्र में शामिल होंगे। कई फ्रांसीसी उत्पादों को पहले से ही चीनी उपभोक्ताओं द्वारा पसंद किया जाता है और भविष्य में और अधिक उत्पाद चीनी उपभोक्ताओं द्वारा खोजे जाने की प्रतीक्षा में खड़े होंगे।
लॉरेंट का मानना है कि फ्रांसीसी कंपनियां चीनी बाजार में कीमत प्रतियोगिता के रास्ते पर नहीं चलती हैं, बल्कि नवाचार के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा में भाग लेती हैं। चीनी बाजार तेजी से विकसित हो रहा है और जीवंत शक्ति से सराबोर है। विश्वास है कि चीन और फ्रांस के बीच नवाचार के क्षेत्र में सहयोग की और बड़ी गुंजाइश होगी।
चीनी अर्थव्यवस्था और चीनी बाजार के विकास की चर्चा करते हुए फ्रांसीसी राजदूत लॉरेंट ने कहा कि चीनी अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी के बाद जल्द बहाल हो गयी है, जो चीन, यूरोपीय संघ और फ्रांस के लिए बहुच अच्छी खबर है। उदाहरण के लिए वैश्विक उड्डयन उद्योग के संकट व नुकसान से जूझने की स्थिति में चीन का घरेलू बाजार बहाल होने लगा है और उड्डयन उद्योग में एक प्रमुख देश के रूप में फ्रांस भी चीन की आर्थिक बहाली से लाभ उठाएगा।
व्यापार
वैश्विक तनावों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सपाट खुला बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव, आईटी शेयरों ने किया सपोर्ट

पश्चिम एशिया में जारी तनावों के बीच कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। यह लगातार सातवां दिन है जब प्रमुख बेंचमार्कों सेंसेक्स और निफ्टी में बिकवाली का दबाव बना रहा, लेकिन आईटी शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को कुछ समर्थन मिला।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) में उछाल के बीच, बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,235.46 से 17.41 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 77,218.05 पर सपाट खुला। हालांकि, बाद में गिरावट और बढ़ गई, और एक समय इसने 0.31 प्रतिशत यानी 244 अंक गिरकर 76,991.28 का इंट्रा-डे लो छुआ, जबकि 77,347.81 का स्तर दिन का हाई रहा।
वहीं, एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,154.90 से 0.01 प्रतिशत यानी 2.85 अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,152.05 पर सपाट खुला। हालांकि बाद के सत्र में गिरावट और बढ़ गई, और एक समय इसने 0.37 प्रतिशत या करीब 90 अंक फिसलकर 24,065.10 का दिन का लो और 24,172.85 का दिन का हाई छुआ।
खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 222.87 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,012.59 पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 74.00 (0.31 प्रतिशत) अंक गिरकर 24,080.90 पर ट्रेड करता नजर आया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.39 प्रतिशत और 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
क्षेत्रवार प्रदर्शन में आईटी शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी सूचकांक 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष पर रहा। इसके अलावा, निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 0.59 प्रतिशत की तेजी और निफ्टी एफएमसीजी में 0.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। रियल्टी और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट्स) से जुड़े सूचकांकों में भी लगभग 0.2 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली, जबकि वहीं, ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली।
दूसरी ओर, मेटल और ऑटो शेयरों में दबाव बना रहा। निफ्टी मेटल 0.35 प्रतिशत टूट गया, जबकि निफ्टी ऑटो में 0.14 प्रतिशत की गिरावट रही। हेल्थकेयर, फार्मा और केमिकल्स से जुड़े सूचकांकों में भी हल्की कमजोरी दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा कमजोरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल कीमतों में तेजी बनी हुई है। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव पड़ा है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड वर्ष 2007 के बाद के उच्चतम स्तरों पर पहुंच गई है, जिससे वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत मजबूती दिखा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि की बेहतर संभावनाएं, वित्त वर्ष 2026-27 में कॉरपोरेट आय में सुधार की उम्मीद और घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी बाजार को सहारा दे रही है।
उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट गुणवत्तापूर्ण वृद्धि वाले शेयरों में निवेश बढ़ाने का अवसर हो सकती है। विशेष रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अभी भी अपेक्षाकृत बेहतर गति बनी हुई है।
इस बीच एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। सेमीकंडक्टर शेयरों में दबाव और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले तीन सप्ताह का उच्चतम स्तर है।
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने के संकेत और अमेरिका द्वारा युद्धविराम अवधि बढ़ाने से इनकार किए जाने के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति में स्पष्ट सुधार नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक बाजार को बड़े नुकसान से बचाए रख सकते हैं।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में 2030 तक करीब 62 प्रतिशत लोगों के पास होगा 5जी कनेक्शन

भारत में लगभग 2030 तक 62 प्रतिशत लोगों के पास 5जी कनेक्शन होने की उम्मीद है, यह एशिया प्रशांत क्षेत्र के औसत 50 प्रतिशत से ज्यादा है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
जीएसएमए की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के साथ-साथ भारत को भी इस क्षेत्र के ‘अग्रणी देशों’ में गिना जाता है, जहां डिजिटल-इकोनॉमी की ग्रोथ को तेज करने और मोबाइल-इंडस्ट्री की स्थिरता को बनाए रखने के लिए रेगुलेटरी आधुनिकीकरण जरूरी है।
भारत में कनेक्टिविटी की चुनौती अब कवरेज से हटकर इस्तेमाल और अपनाने की ओर बढ़ रही है, क्योंकि दक्षिण एशिया में कवरेज का अंतर लगभग 30 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत से भी कम हो गया है।
इस वजह से मोबाइल इंटरनेट अपनाने में खर्च, डिवाइस तक पहुंच, डिजिटल स्किल्स, भरोसा और ऑनलाइन सुरक्षा मुख्य बाधाएं बन गई हैं।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि 2030 तक मोबाइल टेक्नोलॉजी और सेवाएं एशिया-प्रशांत की अर्थव्यवस्था में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देंगी, जो आज के 1 ट्रिलियन डॉलर के मुकाबले 40 प्रतिशत ज्यादा है।
डिजिटल ग्रोथ का अगला दौर इस बात से तय होगा कि सरकारें, ऑपरेटर और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर चार अहम प्राथमिकताओं पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का तेजी से बढ़ना, डिजिटल भरोसे में कमी, ज्यादा मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग और डिजिटल संप्रभुता में बढ़ती रुचि शामिल हैं।
रिपोर्ट में इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की कोशिशों के उदाहरण के तौर पर भारतनेट और पीएमजीडीआईएसएचए का जिक्र किया गया है। पीएमजीडीआईएसएचए ने 6.4 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण नागरिकों को बुनियादी डिजिटल स्किल्स की ट्रेनिंग दी है।
भारत के लिए डिजिटल भरोसा एक आर्थिक प्राथमिकता बनता जा रहा है। 2026 में इन्फॉर्मेशन-सिक्योरिटी पर खर्च में 11.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जो साइबर-सिक्योरिटी, पहचान, प्राइवेसी और भरोसे से जुड़ी दूसरी सेवाओं की बढ़ती मांग को दिखाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स’ संवेदनशील डेटा को स्टोर करने, प्रोसेस करने और मैनेज करने के लिए भरोसेमंद माहौल बनाने की दिशा में योगदान दे रहे हैं। साथ ही, लोकल, ऑडिट-योग्य और सुरक्षित एआई वर्कलोड के लिए सॉवरेन क्लाउड एनवायरनमेंट में भी दिलचस्पी बढ़ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत उन देशों में भी शामिल है जिन्होंने 6जी स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी किया है, जो कनेक्टिविटी और स्पेक्ट्रम प्लानिंग के प्रति इसके लंबे समय के नजरिए को दिखाता है।
व्यापार
एआई से प्रभावित क्षेत्रों में युवा रोजगार में भारी गिरावट, जनरेटिव एआई के आने के बाद रोजगार पर बढ़ा दबाव: बीओके

सेंट्रल बैंक की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग का असर रोजगार बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। जनरेटिव एआई तकनीकों, विशेषकर चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट्स के आने के बाद एआई से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के रोजगार में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
बैंक ऑफ कोरिया (बीओके) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2022 से जून 2026 के बीच 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लोगों द्वारा किए जा रहे कुल रोजगारों की संख्या में 2.85 लाख की कमी आई, जिसमें सबसे बड़ी गिरावट उन क्षेत्रों में देखी गई जो एआई के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल घटे रोजगारों में से 2.68 लाख नौकरियां, यानी लगभग 94 प्रतिशत, एआई-प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित थीं, जिनमें आईटी सेवाएं, प्रकाशन, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।
इसके विपरीत, 50 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के रोजगार में वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में इस आयु वर्ग के रोजगार में 2.30 लाख की बढ़ोतरी हुई, जिसमें से 1.73 लाख नौकरियां एआई प्रभावित क्षेत्रों में ही बढ़ीं। इससे संकेत मिलता है कि एआई के दौर में अनुभव और विशेषज्ञता वाले कर्मचारियों की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट ने वर्ष 2022 को अध्ययन का आधार वर्ष माना है, क्योंकि इसी वर्ष के अंत में चैटजीपीटी लॉन्च हुआ था और उसके बाद जनरेटिव एआई तकनीकों का उपयोग दुनिया भर में तेजी से बढ़ा।
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक गिरावट आईटी सेवाओं में देखी गई, जहां युवाओं का रोजगार 31.4 प्रतिशत घट गया। प्रकाशन क्षेत्र, जिसमें सॉफ्टवेयर और वेब डिजाइन से जुड़े पेशे भी शामिल हैं, वहां रोजगार में 27.4 प्रतिशत की कमी आई।
इसी प्रकार, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्षेत्र में युवाओं का रोजगार 16.6 प्रतिशत और प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में 11.6 प्रतिशत घटा। ये वे क्षेत्र हैं जहां एआई-आधारित ऑटोमेशन और कंटेंट जनरेशन टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
शिक्षा के आधार पर बेरोजगारी के आंकड़े भी युवाओं की चुनौतियों को उजागर करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारकों की औसत बेरोजगारी दर 8.2 प्रतिशत थी, जबकि माध्यमिक शिक्षा या जूनियर कॉलेज स्तर तक पढ़े युवाओं की बेरोजगारी दर 8 प्रतिशत थी।
लेकिन 2022 के बाद यह अंतर बढ़ गया। उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर 7 प्रतिशत रही, जबकि कम शैक्षणिक योग्यता वाले युवाओं में यह 5.4 प्रतिशत रही। इस प्रकार दोनों के बीच अंतर बढ़कर 1.6 प्रतिशत अंक हो गया।
बैंक ऑफ कोरिया ने कहा कि देश की लगातार घटती जनसंख्या भी युवाओं के रोजगार में बदलाव का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। हालांकि एआई के आगमन ने इस प्रवृत्ति को और तेज कर दिया है।
बीओके के शोध विभाग के शोधकर्ता ओह सैम-इल ने कहा, “एआई युवा कर्मचारियों की उत्पादकता को काफी बढ़ा सकता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि इन्हें एआई द्वारा प्रतिस्थापित भी किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि युवाओं की नौकरियों में कमी के लिए पूरी तरह एआई को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन यह निश्चित रूप से उस प्रवृत्ति को तेज कर रहा है जिसमें युवाओं के लिए पारंपरिक करियर सीढ़ी धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।
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