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Monday,19-October-2026
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इमरान ने ‘ध्रुवीकरण’ करने के लिए मैंक्रों की आलोचना की

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Imran-Khan...

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामोफोबिया पर अपनी टिप्पणी को लेकर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनानेल मैक्रों की आलोचना करते हुए कहा कि ‘आगे के लिए ध्रुवीकरण और हाशिए पैदा करना, अनिवार्य रूप से कट्टरता की ओर लेकर जाता है।’ खान मैक्रों के 21 अक्टूबर के बयान का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा कि ‘फ्रांस कार्टून को लेकर हार नहीं मानेगा।’ उन्होंने यह टिप्पणी सैमुअल पैटी को श्रद्धांजलि देते हुए की थी।

गौरतलब है कि सैमुअल पैटी की इस महीने पैगंबर मुहम्मद का कार्टून दिखाने को लेकर सिर काट कर हत्या कर दी गई थी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कई ट्वीट के माध्यम से कहा, “एक नेता की पहचान इंसानों को एकजुट करना है, जैसा कि (नेल्सन) मंडेला ने किया था, न कि उन्हें विभाजित करना। लेकिन एक आज का समय है, जब राष्ट्रपति मैक्रों देश से रेसिज्म, ध्रुवीकरण हटाने की बजाय अतिवादियों को हीलिंग टच और अस्वीकृत स्थान देने में लगे हैं, जो निश्चित रूप से उनकी कट्टरवादी सोच को दिखाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह हिंसा करने वाले आतंकवादियों, भले ही वह मुसलमान, श्वेत वर्चस्ववादी या नाजी विचारक वाला हो, उस पर हमला करने के बजाय इस्लाम पर हमला करके इस्लामोफोबिया को प्रोत्साहित कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “अफसोस की बात है कि राष्ट्रपति मैक्रों इस्लाम और हमारे पैगंबर को निशाना बनाने वाले ईशनिंदा कार्टून के प्रदर्शन को बढ़ावा दे रहे हैं अपने स्वयं के नागरिकों सहित मुसलमानों को जानबूझकर भड़कने पर मजबूर कर रहे हैं।”

इमरान खान ने आगे कहा, “बिना इस्लाम को सही तरह से जाने उस पर हमला करके राष्ट्रपति मैक्रों ने यूरोप और दुनियाभर में लाखों मुसलमानों की भावनाओं पर हमला किया और उन्हें चोट पहुंचाई।”

उन्होंने आगे कहा, “आखिरी चीज जिसे दुनिया चाहती है या जरूरत है, वह और अधिक ध्रुवीकरण है। अज्ञानता पर आधारित सार्वजनिक बयान अधिक नफरत, इस्लामोफोबिया के साथ चरमपंथियों के लिए जगह बनाएंगे।”

डॉन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा खान ने रविवार को सोशल मीडिया, फेसबुक को इस्लामोफोबिया पर प्रतिबंध लगाने और इस्लाम के खिलाफ नफरत फैलाने वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए भी लिखा।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री ने प्योंगयांग के साथ बातचीत फिर से शुरू करने पर दिया जोर

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दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने रविवार को कहा कि सरकार सोल और प्योंगयांग के बीच बातचीत फिर से शुरू करने का प्रयास करेगी और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करेगी।

सोल में विस्थापित उत्तर कोरियाई नागरिकों के लिए आयोजित एक प्रतियोगिता में शामिल होते हुए, हान ने कहा, “दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत के रास्ते खोलने और शांति तथा साझा समृद्धि पर चर्चा करने के प्रयास किए जाएंगे।”

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दोनों देशों के विभाजन को एक “हकीकत” बताया और इस बात पर जोर दिया कि विस्थापित नागरिकों और अलग हुए परिवारों का दर्द आज भी “जारी” है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता खोलने के हमारे प्रयास रुक नहीं सकते।” उन्होंने प्रतिभागियों से शांति स्थापित करने में सहयोग मांगा और दक्षिण कोरिया के आर्थिक विकास तथा लोकतंत्रीकरण में उनके योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

8 अक्टूबर को, दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया से “जिम्मेदार कदम” उठाने का आग्रह किया। दक्षिण कोरिया ने प्योंगयांग पर ‘युद्धविराम समझौते’ के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर एक बारूदी सुरंग बिछाई थी, जिसकी चपेट में आने से पिछले महीने दोनों कोरियाई देशों की सीमा के पास तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए थे।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की एक समिति बैठक के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण कोरिया के राजदूत चा जी-हून ने बताया कि दक्षिण कोरियाई सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान (यूएनसी) की संयुक्त जांच से पुष्टि हुई है कि 21 सितंबर को हुआ विस्फोट एक बारूदी सुरंग के कारण हुआ था। इस सुरंग को उत्तर कोरियाई सैन्य बलों ने जानबूझकर ‘सैन्य सीमा रेखा’ (एमडीएल) के दक्षिण में बिछाया था, जो दोनों कोरियाई देशों को अलग करती है।

चा ने कहा, “दक्षिण कोरियाई सेना और यूएनसी की संयुक्त जांच, जिसे फोरेंसिक विश्लेषण का भी समर्थन प्राप्त है, से पुष्टि हुई है कि यह विस्फोट उत्तर कोरियाई बलों द्वारा सैन्य सीमा रेखा के दक्षिण में जानबूझकर बिछाई गई बारूदी सुरंग के कारण हुआ था।” उन्होंने दोनों कोरियाई देशों को उनके आधिकारिक नामों – ‘रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (दक्षिण कोरिया) और ‘डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (उत्तर कोरिया) – से संबोधित किया।

चा ने कहा कि यह घटना ‘युद्धविराम समझौते’ का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने आगे कहा, “हम उत्तर कोरिया (डीपीआरके) से आग्रह करते हैं कि वह माफी मांगे, तनाव बढ़ाने वाली ऐसी गतिविधियों को रोके और जिम्मेदार कदम उठाए।”

हालांकि, उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि ने सोल के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्योंगयांग द्वारा अपनी दक्षिणी सीमा को मजबूत करने के प्रयासों को ‘सैन्य घुसपैठ’ के रूप में पेश करने की एक कोशिश है। प्रतिनिधि ने कहा, “यह आरओके (दक्षिण कोरिया) सेना की एक घटिया चाल के अलावा और कुछ नहीं है, जिसका मकसद अपनी गलतियों का दोष डीपीआरके (उत्तर कोरिया) पर मढ़ना है।”

दोनों कोरियाई देशों ने प्योंगयांग के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अपने-अपने विपरीत रुख को फिर से दोहराया।

चा ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रति सोल की प्रतिबद्धता को दोहराया और उत्तर कोरिया से आग्रह किया कि वह ‘परमाणु अप्रसार संधि’ और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का पूरी तरह से पालन करे।

उत्तर कोरियाई प्रतिनिधि ने प्योंगयांग के परमाणु हथियारों का बचाव करते हुए कहा कि अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए यह एक अनिवार्य विकल्प था, क्योंकि उन्हें “दशकों से अमेरिकी परमाणु खतरे” का सामना करना पड़ रहा है।

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ईरान पर सैन्‍य कार्रवाई का ट्रंप ने क‍िया बचाव; कहा-परमाणु हथियारों का खतरा गंभीर था, इसलिए क‍िया हस्तक्षेप

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नॉर्दर्न केंटकी यूनिवर्सिटी के ‘ट्रूइस्ट एरिना’ में आयोजित एक रिपब्लिकन चुनावी रैली में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के अपने फैसले का बचाव किया। ट्रंप ने अपने दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल की सबसे बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा क‍ि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता पूरी तरह नष्ट कर दी गई है और तेहरान को दोबारा यह क्षमता विकसित नहीं करने दी जाएगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान का खतरा इतना गंभीर था कि अमेरिका के लिए हस्तक्षेप करना जरूरी हो गया था।

ट्रंप ने समर्थकों से कहा, “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि अगर उनके पास होगा तो वे उसका इस्तेमाल करेंगे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु ढांचे को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं कि यह कार्यक्रम फिर से शुरू न हो सके। उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह दोबारा वापस न आए।”

ट्रंप ने बताया कि सैन्य अभियान के दौरान उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसी दिशा में काम करने के निर्देश दिए थे। ट्रंप ने इस कार्रवाई को अपने उस बड़े दावे से भी जोड़ा, जिसमें वे कहते रहे हैं कि उनके नेतृत्व में अमेरिका की सैन्य ताकत फिर से मजबूत हुई है और देश अब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। राष्ट्रपति ने माना कि इस अभियान के कारण अमेरिका को मध्य पूर्व पर अतिरिक्त ध्यान और संसाधन लगाने पड़े, लेकिन उनका कहना था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना किसी भी अल्पकालिक आर्थिक प्रभाव से ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सैन्य अभियान खत्म होने के बाद ऊर्जा की कीमतों में गिरावट आएगी।

ट्रंप ने कहा, “यह बहुत जल्दी खत्म होने वाला है।” उन्होंने आगे कहा कि अभियान समाप्त होने के बाद पेट्रोल की कीमतें पहले के मुकाबले और नीचे आ जाएंगी। अपने भाषण में बाद में ट्रंप फिर इस मुद्दे पर लौटे और इसे अपनी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया।

उन्होंने कहा, “ईरान के पास न परमाणु हथियार है, न होगा, और कभी नहीं होगा। बात बिल्कुल साफ है।” ट्रंप का कहना था कि इस समस्या का समाधान पहले की अमेरिकी सरकारों को ही कर देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ईरान का सामना करने के लिए जरूरी दृढ़ता और इच्छाशक्ति दिखाई है।

राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ अभियान को अपनी अन्य विदेश नीति पहलों, जैसे वेनेजुएला और ग्रीनलैंड से जुड़े घटनाक्रमों के साथ भी जोड़ा।

ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा खर्च में बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार और रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस ने सेना के लिए एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है और देश की रक्षा क्षमताएं ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा और प्रभाव को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

बांग्लादेश को झटका, कप्तान लिटन दास ‘त्रिकोणीय सीरीज’ से बाहर

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बांग्लादेश के वनडे कप्तान लिटन दास, अफगानिस्तान और जिम्बाब्वे के साथ खेली जा रही त्रिकोणीय सीरीज से बाहर हो गए हैं। हिप जॉइंट में चोट के कारण लिटन दास को सीरीज शुरू होने से ठीक पहले ही टीम से बाहर होना पड़ा है। उनकी गैर-मौजूदगी में तौहीद हृदोय टीम की कमान संभाल रहे हैं।

लिटन दास को इस साल की शुरुआत में मेहदी हसन मिराज की जगह बांग्लादेश की वनडे टीम का पूर्णकालिक कप्तान बनाया गया था। यह फैसला टीम प्रबंधन ने अगले वर्ष होने वाले आईसीसी मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप की तैयारियों को मद्देनजर रखते हुए लिया था, ताकि टीम एक स्थिर नेतृत्व के साथ अपने अभियान को मजबूत कर सके।

त्रिकोणीय सीरीज के पहले मैच में बांग्लादेश का सामना जिम्बाब्वे से हो रहा है, जिसमें जिम्बाब्वे ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला लिया है। बांग्लादेश की टीम में मेहदी हसन मिराज भी नहीं खेल रहे हैं, क्योंकि उन्हें बुखार है।

शेख जायद स्टेडियम में टॉस गंवाने के बाद तौहीद हृदय ने कहा, “टॉस जीतकर मैं भी बल्लेबाजी करना चाहता था, लेकिन विकेट एकदम ताजा लग रही है, इसलिए हम इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। लिटन को चोट की कुछ समस्या है, इसलिए वह नहीं खेल रहे हैं। हमारे पास तीन तेज गेंदबाज और दो स्पिनर हैं, इसलिए उम्मीद है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे। वर्ल्ड कप 2027 की तैयारियों के मद्देनजर हमारे लिए हर एक मैच अहम है, सिर्फ वर्ल्ड कप ही नहीं। हमारे यहां एशिया कप होने वाला है, इसलिए यह खुद को अच्छी तरह तैयार करने का एक अच्छा मौका है।”

वहीं, टॉस जीतने के बाद जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने कहा, “हम पहले बल्लेबाजी करेंगे। विकेट काफी सूखा लग रहा है और अबू धाबी की परिस्थितियों को देखते हुए, यहां पहले बल्लेबाजी करना फायदेमंद साबित हो सकता है। यही एक मुख्य कारण है कि हम आज पहले बल्लेबाजी करना चाहते हैं। हमारे पास तीन सीमर और दो स्पिनर हैं, और सबसे खास बात यह है कि तफदजवा त्सिगा आज अपना डेब्यू करने जा रहे हैं।”

बांग्लादेश की प्लेइंग इलेवन में तंजीद हसन तमीम, सौम्या सरकार, नजमुल हुसैन शांतो, तौहीद हृदोय (कप्तान), मोसादेक हुसैन, सैफ हसन, नुरुल हसन (विकेटकीपर), रिशद हुसैन, शोरफुल इस्लाम, तस्कीन अहमद और मुस्तफिजुर रहमान शामिल हैं।

वहीं, सिकंदर रजा की कप्तानी में जिम्बाब्वे ब्रायन बेनेट, बेन कुरेन, ब्रेंडन टेलर, क्रेग एर्विन, वेस्ली मधेवेरे, तफदजवा त्सिगा (विकेटकीपर), ब्रैड इवांस, न्यूमैन न्यामुरी, ब्लेसिंग मुजाराबानी और वेलिंगटन मसाकाद्जा के साथ इस मुकाबले में उतरी है।

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