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क्रिस गेल के साथ नया गाना ला रहीं ब्रिटिश-भारतीय गायिका अविना शाह
ब्रिटिश भारतीय गायिका अविना शाह क्रिस गेल के साथ मिल कर एक नया डांस ट्रैक लाने वाली हैं, हालांकि मूल रूप से वेस्टइंडीज क्रिकेट सुपरस्टार गेल उनकी साल 2018 में आई ट्रैक प्लेबॉय का रीमिक्स करना चाहते हैं। अविना ने आईएएनएस से कहा, “हमारे एक दोस्त ने सोचा कि हमारा एक साथ गाना लाना बहुत अच्छा होगा। जब मैं हाल ही में ग्रीस में थी तब मुझे एक फोन कॉल के माध्यम से क्रिस से मिलवाया गया था। हमारे मित्र ने उन्हें मेरे पिछले कुछ गाने सुनाए थे और क्रिस को मेरे संगीत में पूर्व-पश्चिम का संगीत पसंद आया था और मूल रूप से मेरे ट्रैक ‘प्लेबॉय’ का रीमिक्स करना चाहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम एक साथ गाना लाने के बारे में बात कर रहे हैं और मेरी आवाज में कैरिबियन स्वाद को जोड़कर कुछ अलग बनाने के लिए, भारत, यूके और जमैका को मिलाकर कुछ अनोखा बनाने के बारे में सोच रहे थे। मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ भी मैंने पहले सुना है, इसलिए मैं परियोजना को लेकर बहुत उत्साहित हूं।”
‘ग्रूव’ गाने के बारे में बात करते हुए, उन्होंने साझा किया कि उन्होंने इस गाने को महामारी से बहुत पहले बनाया था।
गायिका ने कहा, “मेरे पास 2020 के लिए बहुत बड़ी योजनाएं थीं और यह फिलहाल मेरे भविष्य के डांस रिलीज के कारण रुका हुआ है। हालांकि, महामारी ने इस वर्ष के लिए मेरी संगीत की बहुत सारी योजनाओं पर विराम लगा दिया। यह गीत डांस के बारे में है, जो आपको इसके संगीत पर स्वाभाविक रूप से थिरकने को विवश करता है।
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करिश्मा कपूर ने बताया ‘महबूब मेरे’ का मजेदार किस्सा, कहा- गाने में मैं ऋतिक रोशन को ढूंढ रही थीं

अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने 90 के दशक से हिंदी सिनेमा में राज किया है और अभी भी उनके प्रति दीवानगी लोगों के दिलों में कायम हैं। अभिनेत्री ने हाल ही में फिल्म ‘फिजा’ के मशहूर गाने ‘महबूब मेरे’ की अनकही कहानी बताई।
अभिनेत्री ने बताया कि फिल्म में उन्हें गाने की सिचुएशन काफी अजीब लगी थी, जब सुष्मिता सेन गाने पर डांस कर रही थीं, जबकि वह खुद फिल्म में ऋतिक रोशन को ढूंढ रही थीं।
अभिनेत्री ने इस बात का खुलासा डांस रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ में किया था। शो के स्पेशल एपिसोड में कंटेस्टेंट वैदेही और रोमशा ने ‘महबूब मेरे’ समेत कुछ टाइमलेस बॉलीवुड गानों पर दमदार परफॉर्मेंस दी थी। परफॉर्मेंस के बाद करिश्मा ने इस गाने से जुड़ा अपना अनुभव शेयर किया और फिल्म ‘फिज़ा’ से जुड़ा एक कम जाना-पहचाना किस्सा भी बताया।
करिश्मा ने कहा, “आप लोगों को शायद ये पता नहीं होगा, लेकिन इस गाने में भी हूं। ये सिचुएशन बहुत अलग थी और मुझे भी बहुत अजीब लग रहा था कि सुष्मिता डांस कर रही थीं और मैं गाने के बीच में ऋतिक को ढूंढ रही थी। ये फिल्म ‘फिजा’ का गाना है। तो हां, मेरे लिए ये एक बहुत ही अनोखी सिचुएशन थी।”
सॉन्ग ‘महबूब मेरे’ वर्ष 2000 में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म ‘फिजा’ का एक बेहद लोकप्रिय और सदाबहार गाना है। इस गाने में अभिनेत्री सुष्मिता सेन ने एक स्पेशल अपीयरेंस (कैमियो) में शानदार डांस किया था, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।
सुष्मिता सेन वाला यह गाना उस समय के यादगार डांस नंबर्स में से एक बन गया, जबकि ‘फिजा’ में ऋतिक रोशन, करिश्मा कपूर और डिंपल कपाड़िया ने अहम रोल निभाए थे।
‘फिजा’ एक बेहतरीन हिंदी ड्रामा और क्राइम थ्रिलर फिल्म है, जिसे खालिद मोहम्मद ने लिखा और निर्देशित किया है। इस फिल्म में करिश्मा कपूर, ऋतिक रोशन और जया बच्चन ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
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कभी महज 50 रुपए महीने कमाते थे शम्मी कपूर, थिएटर से शुरु किया था बॉलीवुड के ‘याहू स्टार’ बनने तक का सफर

अभिनेता शम्मी कपूर ने अपनी खूबसूरत मुस्कान, गजब की फुर्ती, अलग तरह के डांस और पर्दे पर बेफिक्र अंदाज से लोगों के दिलों में खास पहचान बनाई। लोग उन्हें ‘याहू’ स्टार और ‘इंडिया का एल्विस प्रेस्ली’ कहते थे। उन्होंने करियर की शुरुआत अपने पिता पृथ्वीराज कपूर की थिएटर कंपनी से की थी, और उस समय उन्हें हर महीने सिर्फ 50 रुपए मिलते थे।
शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को बंबई में हुआ था। उनका पूरा नाम शमशेर राज कपूर था। वह मशहूर अभिनेता और रंगमंच कलाकार पृथ्वीराज कपूर के बेटे और राज कपूर व शशि कपूर के भाई थे। उनका मन पढ़ाई से ज्यादा अभिनय की दुनिया में था, जिसके चलते वह साल 1948 में अपने पिता की थिएटर कंपनी पृथ्वी थिएटर्स से जुड़ गए। यहां उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू किया। उनकी शुरुआती तनख्वाह 50 रुपए महीना थी। वह 1952 तक थिएटर से जुड़े रहे और जब उन्होंने इसे छोड़ा तो उनकी आखिरी तनख्वाह 300 रुपए थी।
थिएटर के बाद शम्मी कपूर ने फिल्मों का रुख किया। उन्होंने महेश कौल के निर्देशन में कारदार फिल्म कंपनी के साथ ‘जीवन ज्योति’ में बतौर हीरो काम किया। उनकी पहली हीरोइन चांद उस्मानी थीं। शुरुआती दौर आसान नहीं था। 1952 से 1955 के बीच उन्होंने ‘रेल का डिब्बा’, ‘लैला मजनू’, ‘ठोकर’, ‘शमा परवाना’, और ‘हम सब चोर हैं’ जैसी कई फिल्मों में काम किया लेकिन इनमें से ज्यादातर फिल्में उम्मीद के मुताबिक लोगों के दिलों में जगह नहीं बना सकीं।
कई फिल्मों की असफलता के बाद 1957 में ‘तुमसा नहीं देखा’ ने उनकी किस्मत बदल दी। इसके बाद ‘दिल देके देखो’ ने उनकी नई छवि को मजबूत किया। 1961 में ‘जंगली’ आई और शम्मी कपूर देखते ही देखते बड़े स्टार बन गए। इसी फिल्म ने उन्हें ‘याहू’ स्टार का टैग दिलाया। इसके बाद ‘प्रोफेसर’, ‘चाइना टाउन’, ‘कश्मीर की कली’, ‘ब्लफ मास्टर’, ‘जानवर’, ‘राजकुमार’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘एन इवनिंग इन पेरिस’, ‘ब्रहमचारी’ और ‘अंदाज’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया।
शम्मी कपूर अपने डांस के लिए मशहूर हुए और पर्दे पर उनकी एनर्जी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई। ‘तीसरी मंजिल’ और ‘कश्मीर की कली’ जैसी फिल्मों में उनका अंदाज आज भी याद किया जाता है लेकिन जब उनकी उम्र बढ़ी तो उन्होंने हीरो के बजाय सहायक भूमिकाएं करना शुरू किया। ‘विधाता’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी।
‘ब्रहमचारी’ के लिए शम्मी कपूर को 1969 में फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला। इसके अलावा, उन्हें फिल्मफेयर का लाइफटाइम अचीवमेंट जैसे सम्मान भी मिले।
14 अगस्त 2011 को 79 साल की उम्र में शम्मी कपूर का मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था। वह लंबे समय से किडनी की बीमारी से परेशान थे और डायलिसिस पर थे। उनकी मौत किडनी फेल होने के कारण हुई थी।
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पांच दशक तक राज करने वाले दिलीप कुमार को अमिताभ ने बताया हिंदी सिनेमा का पिलर

भारतीय सिनेमा के ‘अभिनय सम्राट’ और ‘ट्रेजेडी किंग’ के रूप में प्रसिद्ध दिलीप कुमार ने हिंदी फिल्मों में पांच दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। आम दर्शक से लेकर मनोरंजन जगत में भी उनकी अदाकारी का हर कोई कायल रहता है। इसी कड़ी में मेगास्टार अमिताभ बच्चनलेजेंड दिलीप कुमार की तारीफ करने से पीछे नहीं हटे।
अभिनेता ने क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18’ के लेटेस्ट एपिसोड के दौरान दिलीप कुमार के बेमिसाल योगदान पर रोशनी डाली। शो के लेटेस्ट एपिसोड में अभिनेता अमिताभ बच्चन कंटेस्टेंट मंजीत सिंह से दिलीप कुमार के बेमिसाल योगदान के बारे में बताया।
उन्होंने कहा, “जब भी हिंदी सिनेमा का इतिहास लिखा जाएगा, तो हमेशा यही लिखा जाएगा ‘दिलीप कुमार जी से पहले’ और ‘दिलीप कुमार जी के बाद’।” कंटेस्टेंट मंजीत ने भी इस मौके का फायदा उठाकर अमिताभ बच्चन की तारीफ करते हुए कहा, “सर, दिलीप कुमार जी के बाद अमिताभ बच्चन हैं।”
इस बात पर ऑडियंस ने खूब तालियां बजाईं लेकिन अमिताभ ने फिर से हिंदी सिनेमा के इतिहास में दिलीप कुमार की बेमिसाल जगह पर जोर दिया और कहा, “अरे नहीं-नहीं सर, बिफोर दिलीप कुमार जी और आफ्टर दिलीप कुमार जी।”
अभिनेता ने आगे बातचीत में दिलीप कुमार को हिंदी सिनेमा का एक ऐसा पिलर भी बताया जिसकी जगह कोई नहीं ले सकता। उन्होंने कहा, “वह हिंदी सिनेमा का स्तंभ हैं और वे एक ऐसा स्तंभ हैं, जिसे कोई पीछे नहीं कर सकता है।” ‘कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18’ सोमवार से शुक्रवार, रात 9:00 बजे, सिर्फ़ सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन और सोनी लीव पर आता है।
दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन 1982 में रमेश सिप्पी के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘शक्ति’ में साथ नजर आए थे। इस फिल्म में दिलीप कुमार ने एक सख्त पुलिस अधिकारी पिता की भूमिका निभाई थी और अमिताभ बच्चन ने उनके बागी बेटे का किरदार निभाया था। इस दमदार अभिनय के लिए फिल्म को उस साल का सर्वश्रेष्ठ फिल्म का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था और दिलीप कुमार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला था।
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