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Monday,03-August-2026
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गृहमंत्री से की गई सुदर्शन टीवी के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील

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prakashjavadekar

विवाद का रूप ले चुके ‘यूपीएससी जिहाद’ को लेकर 91 पूर्व सिविल सेवकों के एक समूह ने गृहमंत्री अमित शाह को और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर सुदर्शन न्यूज टीवी चैनल के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि सिविल सेवाओं में मुस्लिम अधिकारियों के साजिशन घुसपैठ या यूपीएससी जिहाद और सिविल सर्विसेज जिहाद जैसे बयान विकृत विचारधारा का उदाहरण और दंडनीय अपराध है। पत्र में हस्ताक्षरकतार्ओं ने कहा, “ऐसे सांप्रदायिक और गैरजिम्मेदाराना बयानों से नफरत फैलती है और पूरे समुदाय की बदनामी होती है।”

पत्र में गृहमंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण, दिल्ली के उपराज्यपाल व दिल्ली के मुख्यमंत्री सचिव, गृह मंत्रालय सचिव, सूचना और प्रसारण मंत्रालय और पुलिस आयुक्त दिल्ली को संबोधित किया गया है।

पूर्व सिविल सेवकों ने कहा, “हम इस पत्र के माध्यम से सुदर्शन न्यूज टीवी चैनल द्वारा एक सांप्रदायिक आरोप, विभाजनकारी और सनसनीखेज सीरीज के प्रसारण को लेकर एक जरूरी मुद्दा उठा रहे हैं। यह सीरीज देश के दो सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं आईएएस और आईपीएस में मुस्लिम अधिकारियों की संख्या में अचानक वृद्धि होने को लेकर भर्ती प्रक्रिया में साजिश का पदार्फाश करने का दावा करती है।”

उन्होंने समाचार चैनल के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आगे कहा, “इस संबंध में जामिया मिलिया इस्लामिया को चुना गया है। हम जानते हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सीरीज के टेलीकास्ट पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि, हमें लगता है कि इसे लेकर मजबूत कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है।”

पत्र में कहा गया, “यह आरोप लगाना कि सिविल सेवाओं में मुस्लिम अधिकारियों की साजिशन घुसपैठ करने, या इस संबंध में यूपीएससी जिहाद या सिविल सेवा जिहाद जैसे शब्दों का प्रयोग अत्यंत अनुचित है। ऐसे सांप्रदायिक और गैरजिम्मेदाराना बयान और भाषण से घृणा फैलने के साथ पूरे समुदाय की बदनामी होती है।”

हस्ताक्षरकतार्ओं ने पत्र में कहा, “यदि इस कार्यक्रम के प्रसारण की अनुमति दी जाती है तो यह देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय यानी मुस्लिमों के प्रति बिना किसी ठोस आधार के घृणा उत्पन्न करेगा। देश में मुस्लिमों के खिलाफ कोरोना जिहाद और लव जिहाद के आरोप सहित कई घृणित भाषण के मुद्दे पहले ही सुलग रहे हैं, जिसे विभिन्न अदालतों ने भी गलत माना है। यह टेलीकास्ट उसी आग को बढ़ाने में ईंधन का काम करेगा।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि यह सिविल सेवा भर्ती के लिए प्रमुख संगठन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की त्रुटिहीन प्रतिष्ठा को, इसके भर्ती प्रकिया के पक्षपाती होने का दावा करते हुए धूमिल करेगा।

पत्र में आगे कहा गया है, “यह सरकारी सेवाओं में खासकर आईएएस और आईपीएस सेवाओं के लिए चुने जाने वाले मुसलमानों की संख्या में वृद्धि के बारे में गलत धारणा फैलाएगा।”

उन्होंने कहा, ” ‘यूपीएससी जिहाद’ और ‘सिविल सेवा जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल देश के नागरिक प्रशासन को धर्म के आधार पर बांटने का एक प्रयास है और पूरे भारत के विकास के लिए प्रशासकों द्वारा किए गए उत्कृष्ट योगदान को नजरअंदाज करने वाला है।”

हाल ही में इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कार्यक्रम के प्रसारण पर कोई रोक न लगाते हुए कहा, “हम ध्यान दें कि सक्षम प्राधिकरण, वैधानिक प्रावधानों के तहत कानून के पालन को सुनिश्चित करने के लिए शक्तियों के साथ निहित है, जिसमें सामाजिक सौहार्द और सभी समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक कानून के प्रावधान भी शामिल हैं।”

उन्होंने मांग करते हुए कहा, “इसलिए हम केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने का आग्रह करते हैं। हम सूचना और प्रसारण मंत्रालय और न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्डस अथॉरिटी ऑफ इंडिया से यह भी जांच करने का अनुरोध करते हैं कि वे जांच करे कि यह शो केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994, केबल टेलीविजन नेटवर्क्‍स (रेगुलेशन) अधिनियम के तहत चलना चाहिए या नहीं और उसके बाद कोड ऑफ एथिक्स और ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड के अनुसार उन पर कार्रवाई करें।”

इस पत्र पर दिल्ली के पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग, आईएफएस (सेवानिवृत्त) व पूर्व विदेश सचिव और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष राहुल खुल्लर, मध्य प्रदेश सरकार में काम कर चुके हर्ष मंदर, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग में पूर्व सचिव अनीता अग्निहोत्री और सीबीआई में पूर्व स्पेशल डायरेक्टर के. सलीम अली ने हस्ताक्षर किए हैं।

वहीं अन्य हस्ताक्षरकतार्ओं में राजस्थान में पूर्व मुख्य सचिव सलाउद्दीन अहमद, कैबिनेट सचिवालय में पूर्व विशेष सचिव आनंद अरनी, मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्य सचिव शरद बेहर, पूर्व स्वास्थ्य सचिव जाविद चौधरी, भारतीय खाद्य निगम के पूर्व अध्यक्ष पी. आर. दासगुप्ता, यूनाइटेड किंगडम के पूर्व उच्चायुक्त नरेश्वर दयाल, वित्त मंत्रालय में पूर्व सचिव और मुख्य आर्थिक सलाहकार नितिन देसाई, पूर्व स्वास्थ्य सचिव केशव देसीराजू, पूर्व सचिव (राजस्व) और एशियन डेवलपमेंट बैंक के पूर्व एक्जीक्यूटिव निर्देशक पी.के. लाहिड़ी भी शामिल हैं।

वहीं पत्र पर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई कुरैशी, संस्कृति मंत्रालय के पूर्व सचिव और प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जौहर सिरकार, इंटर स्टेट काउंसिल के पूर्व सचिव अमिताभ पांडेय, गुजरात सरकार में पूर्व पुलिस महानिदेशक पी. जी. जे नामपूथिरी, पूर्व विदेश सचिव व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी के पूर्व चेयरमैन श्याम सरन और वित्त मंत्रालय में पूर्व सचिव नरेंद्र सिसोदिया ने भी हस्ताक्षर किए हैं।

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महाराष्ट्र

मुंबई: म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने बिना इजाज़त के फेरीवालों और कब्ज़ों को तुरंत हटाने और फुटपाथों से रुकावटें हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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मुंबई; मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) मुंबई के लोगों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और बिना परेशानी वाला सफर पक्का करने के मकसद से ‘पैदल यात्री पहले’ कैंपेन को असरदार तरीके से लागू कर रही है। इस पहल के पहले फेज में, 320 केएम फुटपाथ से कब्ज़ा हटाया जाएगा। क्योंकि मुंबई में रोज़ाना लगभग 50% सफर पैदल ही होता है, इसलिए पैदल यात्रियों की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए। म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने सख्त निर्देश दिए हैं कि फुटपाथ से सभी बिना इजाज़त वाले फेरीवालों, कब्ज़ों और दूसरी रुकावटों को तुरंत हटा दिया जाए, ताकि वे पूरी तरह से रुकावटों से मुक्त हों। इसके अलावा, फुटपाथों के सुधार, सुंदरता और सुरक्षा से जुड़े ज़रूरी कदम तुरंत लागू किए जाएं। सभी एडमिनिस्ट्रेटिव वार्ड के असिस्टेंट कमिश्नर को रोज़ाना वार्ड लेवल पर काम का रिव्यू करना होगा, जबकि डिप्टी कमिश्नर को हफ़्ते में एक बार ज़ोनल लेवल पर रिव्यू करना होगा और एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर को रिपोर्ट देनी होगी। एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर को हर 15 दिन में रिव्यू करना होगा। इस कैंपेन में कोई लापरवाही, देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमिश्नर भिड़े ने चेतावनी दी है कि इन आदेशों का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और ऐसी लापरवाही के लिए जवाबदेही तय की जाएगी। मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अलग-अलग डिपार्टमेंट की एक रिव्यू मीटिंग हाल ही में म्युनिसिपल हेडक्वार्टर में म्युनिसिपल कमिश्नर के गाइडेंस में हुई थी।

सभी असिस्टेंट कमिश्नरों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में फुटपाथों का रोज़ाना खुद इंस्पेक्शन करना चाहिए और अतिक्रमण हटाने के उपायों को असरदार तरीके से लागू करना पक्का करना चाहिए। यह प्रोसेस सिर्फ एक्शन लेने तक ही सीमित नहीं होना चाहिए। अतिक्रमण को दोबारा होने से रोकने के लिए लगातार मॉनिटरिंग ज़रूरी है। ‘पहले’ और ‘बाद’ की तस्वीरों के साथ रोज़ाना प्रोग्रेस रिपोर्ट का रिव्यू किया जाना चाहिए। भिड़े ने चेतावनी दी है कि काम में देरी, लापरवाही या लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने कहा कि फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त रखना सिर्फ एक बार का अभियान नहीं है, बल्कि यह एक लगातार चलने वाली एडमिनिस्ट्रेटिव ज़िम्मेदारी है। कंस्ट्रक्शन मटीरियल, मलबा, छोड़ी हुई या गलत तरीके से पार्क की गई गाड़ियां, जमा हुए कचरे के ढेर और ऊबड़-खाबड़ सतहें पैदल चलने वालों के लिए रुकावटें पैदा करती हैं। इसलिए, पब्लिक जगहों, खासकर स्कूल, हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, बस डिपो, मार्केट और ज़्यादा भीड़ वाली जगहों के पास फुटपाथ पर सभी तरह के कब्ज़े तुरंत हटाए जाने चाहिए ताकि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकें।

फुटपाथ पर बिना इजाज़त वाले एडवरटाइज़मेंट बोर्ड, होर्डिंग, बिल्डिंग से बाहर की ओर खुलने वाले दरवाज़े, ऊँचे रैंप और दूसरी रुकावटें तुरंत हटा दी जानी चाहिए। अश्विनी भिड़े ने आगे साफ़ किया कि संबंधित अधिकारियों को रेगुलर तौर पर यह वेरिफ़ाई करना चाहिए कि लाइसेंस वाले वेंडर अपनी बिक्री, सामान रखने, स्टॉल और साइनेज को अपने तय एरिया तक ही रखें। इसके अलावा, जो रैंप ठीक से नहीं बने हैं या ऊबड़-खाबड़ हैं, उन्हें हटा दिया जाना चाहिए। यह पक्का किया जाना चाहिए कि बिल्डिंग के एंट्रेंस और दरवाज़े प्रॉपर्टी की बाउंड्री के अंदर ही खुलें। फुटपाथ में रुकावट डालने वाली पेड़ों की डालियों को ज़रूरत के हिसाब से साइंटिफिक तरीके से काटा जाना चाहिए। फुटपाथ का डिज़ाइन मौजूदा स्टैंडर्ड के हिसाब से तैयार किया जाना चाहिए। नए फुटपाथ तय स्टैंडर्ड डिज़ाइन के हिसाब से और एम-40 ग्रेड कंक्रीट का इस्तेमाल करके बनाए जाने चाहिए। किसी भी हालत में पेवर ब्लॉक या स्टैम्प्ड कंक्रीट का इस्तेमाल पूरी तरह मना है। इसके अलावा, फुटपाथों से गैप, ऊबड़-खाबड़ सतह और दूसरी सभी रुकावटों को हटाकर उन्हें सुरक्षित बनाया जाना चाहिए। भिड़े ने संबंधित अधिकारियों को यह पक्का करने का निर्देश दिया कि इस मामले में कोई लापरवाही न बरती जाए। भिड़े ने कहा कि अतिक्रमण हटाने और फुटपाथों को पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित और चलने लायक बनाने से स्टूडेंट्स, सीनियर सिटिजन, दिव्यांग लोगों और आम लोगों को बहुत फायदा होगा। इससे पैदल चलने वालों की सुरक्षा बढ़ेगी, सड़क हादसों में कमी आएगी और ज़्यादा से ज़्यादा लोग फुटपाथ इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। नतीजतन, इससे सड़क ट्रैफिक की कुशलता और स्पीड को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, जिससे ट्रैफिक जाम कम होगा। जाम कम होने से हवा की क्वालिटी बेहतर होगी और लोगों की सेहत पर अच्छा असर पड़ेगा। सभी संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर फुटपाथों की लिस्ट बनानी चाहिए। अतिक्रमण को दोबारा होने से रोकने के लिए लगातार फॉलो-अप करके असरदार तरीके से लागू करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अधिकारियों को अपनी ड्यूटी में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने साफ कर दिया है कि फुटपाथ में रुकावट डालने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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महाराष्ट्र

मुंबई: एमआईडीसी इलाके में बीईएसटी बसों में यात्रियों के मोबाइल फोन छीनने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 7 लोग गिरफ्तार: डीसीपी दत्ता नलवाडे

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मुंबई पुलिस ने बीईएसटी बस यात्रियों के मोबाइल फोन चुराने वाले एक गैंग का पर्दाफाश किया है। आंध्र के एमआईडीसी पुलिस स्टेशन इलाके के रहने वाले 49 साल के जगत ज्योति महंत 6 जून दोपहर को एसपीजेड बस स्टॉप एमआईडीसी से आंध्र के लिए रूट नंबर 415 की बस में सवार हुए थे। इस दौरान उनका मोबाइल फोन गायब हो गया। शिकायत करने वाले ने बताया कि उन्होंने अपना मोबाइल फोन अपनी पैंट की जेब में रखा था और किसी अनजान आदमी ने उसे चुरा लिया। इस मामले में पुलिस ने चोरी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान, एमआईडी पुलिस ने 40 से 45 सीसीटीवी फुटेज की जांच की और शिवाजी नगर में बीईएसटी बस यात्रियों के मोबाइल फोन चुराने वाले गैंग का पर्दाफाश करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से 12 लाख रुपये से ज़्यादा का सामान और 135 मोबाइल फोन जब्त किए। यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती के निर्देश पर डीसीपी दत्ता नलावड़े ने की।

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राष्ट्रीय समाचार

ई-20 पेट्रोल के विरोध में 4 अगस्त को पीएम आवास तक मार्च करेंगे अरविंद केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि ई-20 पेट्रोल नीति के विरोध में मंगलवार को वह पार्टी के 100 कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करेंगे। उनका कहना है कि इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम तैयार की गई ऑनलाइन याचिका और जनता के पत्र उन्हें सौंपने का प्रयास किया जाएगा। केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री उनसे मुलाकात करेंगे और इस मुद्दे पर लोगों की चिंताओं को सुनेंगे।

अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि ई-20 पेट्रोल के खिलाफ शुरू किए गए ऑनलाइन अभियान को कुछ ही दिनों में 2,33,238 लोगों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि इतने लोगों ने प्रधानमंत्री के नाम याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इस नीति को लेकर जनता की चिंता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि वह मंगलवार दोपहर 12 बजे आम आदमी पार्टी मुख्यालय से प्रधानमंत्री आवास के लिए रवाना होंगे। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले प्रधानमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा था, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि अब वह स्वयं प्रधानमंत्री आवास जाकर लोगों की ओर से तैयार की गई याचिका और पत्र सौंपने का प्रयास करेंगे तथा इस विषय पर चर्चा करना चाहेंगे। केजरीवाल ने केंद्र सरकार की ई-20 नीति पर कई सवाल उठाए। उनका आरोप था कि सरकार बिना पर्याप्त वैज्ञानिक और तकनीकी जवाब दिए देशभर में ई-20 पेट्रोल को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि इस ईंधन के उपयोग से लोगों की गाड़ियों की माइलेज प्रभावित हो रही है और कई वाहन मालिकों को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास इस नीति के पक्ष में ठोस तर्क हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से रखा जाना चाहिए। केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि ई-20 के विरोध में आवाज उठाने वालों को डराने और दबाव में लेने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और आम नागरिक यदि इस मुद्दे पर सवाल उठाते हैं तो उन्हें ट्रोल किया जाता है और कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज होने की बात भी सामने आती है। उनके अनुसार इससे लोगों में भय का माहौल बन रहा है।

उन्होंने दावा किया कि हाल ही में आयोजित ई-20 विरोधी टाउनहॉल कार्यक्रम को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिला। केजरीवाल के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद थे, जबकि लाखों लोगों ने इसे ऑनलाइन भी देखा। उन्होंने इसे ई-20 के खिलाफ बढ़ते जनसमर्थन का संकेत बताया। अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि ई-20 नीति के पीछे कोई ‘छिपा हुआ एजेंडा’ हो सकता है।

उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या भारत पर इथेनॉल नीति को किसी बाहरी दबाव में लागू किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अगले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर इथेनॉल आयात किए जाने की संभावना है और इस संबंध में केंद्र सरकार को देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आम आदमी पार्टी ने कहा है कि मंगलवार का मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और उसका उद्देश्य केवल प्रधानमंत्री तक जनता की चिंताओं और मांगों को पहुंचाना है।

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