खेल
मैचों में झिंगन के योद्धा जैसे रुख के अनुकरण की कोशिश : गहलोत
भारतीय फुटबाल टीम के युवा डिफेंडर नरेन्द्र गहलोत ने कहा है कि मैच के दौरान वह सीनियर खिलाड़ी संदेश झिंगन के रवैये का अनुकरण करने की कोशिश करते हैं। 18 वर्षीय गहलोत ने पिछले साल सात जुलाई को अहमदाबाद में ताजिकिस्तान के खिलाफ खेले गए इंटरकॉन्टिनेंटल कप से अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण किया था। उन्होंने अपने पदार्पण के बाद नौ दिन बाद ही सीरिया के खिलाफ अपना पहला गोल किया था।
गहलोत ने एआईएफएफ वेबसाइट से कहा, ” सबसे बड़ी सीख यह रही है कि हर कोई गलती करता है। लेकिन उन्हें नहीं दोहराना महत्वपूर्ण है। एक डिफेंडर के रूप में मुझे पता है कि मुझे किन क्षेत्रों में सुधार करने की जरूरत है और सीनियर भी हमें उस संबंध में हमारा मार्गदर्शन करते हैं।”
उन्होंने कहा, “सीनियर सभी पहलुओं पर बेहद ध्यान केंद्रित करते हैं और अनुशासित रहते हैं। जब मजे करने का समय होता है, तो हम मजे करते हैं लेकिन जब काम में उतरना होता है, तो वे वास्तव में गंभीर होते हैं।”
गहलोत ने कहा, “उदाहरण के लिए, संदेश (झिंगन) पाजी मैचों के दौरान योद्धा जैसे रवैये के साथ खेलते हैं और बहुत आक्रामक होते हैं। प्रशिक्षण में वह हर समय अपना 100 फीसदी देते हैं और शारीरिक रूप से बहुत मजबूत हैं। उनकी इन्हीं चीजों को मैं अनुकरण करने की कोशिश करता हूं। वे समय-समय पर हमारे साथ अपने अनुभवों को भी साझा करता है, जिनसे हमें काफी कुछ सीखने को मिलता है। इसी तरह सुनील (छेत्री) भाई भी हम सभी के लिए बड़ी प्रेरणा हैं। वे हम सभी को बेशकीमती सलाहें देते हैं।”
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‘हारने पर भी आपको सिर ऊंचा रखना पड़ता है’, फ्रांस के फीफा विश्व कप 2026 से बाहर होने पर बोले एम्बाप्पे

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में फ्रांस को स्पेन के खिलाफ 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने माना कि उनकी टीम अपने प्लान के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि फ्रांस ने मुकाबले में कई तकनीकी और रणनीतिक गलतियां कीं, जिसका फायदा स्पेन ने उठाया।
एम्बाप्पे ने हार के बाद खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, “जब आप जीतते हैं तो सिर ऊंचा रखते हैं, लेकिन जब हारते हैं तब भी सिर ऊंचा रखना पड़ता है।” उन्होंने कहा कि टीम को इस हार से सीख लेकर आगे बढ़ना होगा। सेमीफाइनल मुकाबले में स्पेन ने शुरुआत से ही फ्रांस पर दबाव बनाए रखा। स्पेन के खिलाड़ियों ने शानदार टीमवर्क दिखाते हुए फ्रांस के मजबूत आक्रमण को रोक दिया और पूरे मैच की गति अपने नियंत्रण में रखी। फ्रांस के स्टार फॉरवर्ड भी इस मुकाबले में अपना प्रभाव नहीं छोड़ सके।
मैच के बाद एम्बाप्पे ने कहा, “हमने उस तरह का खेल नहीं खेला जैसा हम चाहते थे। चाहे बात रणनीति की हो, तकनीक की हो या पूरी टीम के प्रदर्शन की, हम अपने स्तर तक नहीं पहुंच पाए। विश्व कप सेमीफाइनल जैसे मुकाबले में अगर आप अपनी योजना को सही तरीके से लागू नहीं करते हैं तो जीतना मुश्किल हो जाता है।”
उन्होंने स्पेन की तारीफ करते हुए कहा कि विपक्षी टीम ने अपने गेम प्लान पर पूरी तरह भरोसा रखा और मैच को नियंत्रित किया। वहीं, फ्रांस ऐसा करने में सफल नहीं रहा। एम्बाप्पे ने कहा, “स्पेन ने खेल को नियंत्रित करने में हमसे बेहतर प्रदर्शन किया। हमने उन्हें मैच की गति तय करने का मौका दिया। जब स्पेन जैसी टीम गेंद पर नियंत्रण हासिल कर लेती है तो उनके खिलाफ वापसी करना बहुत मुश्किल हो जाता है।”
फ्रांस के कप्तान ने माना कि टीम को शुरुआत से ही ज्यादा आक्रामक रवैया अपनाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि प्रेसिंग और मिडफील्ड में बेहतर तालमेल के जरिए स्पेन को परेशान किया जा सकता था। उन्होंने कहा, “हमें आमने-सामने की लड़ाई के लिए तैयार रहना था। स्पेन ऐसी टीम है जिसे ज्यादा दौड़ना पसंद नहीं है। जब हमने गेंद वापस हासिल की तो हमारे शुरुआती पास और टच उस स्तर के नहीं थे जो विश्व कप सेमीफाइनल में होने चाहिए थे।”
इस हार के साथ, फ्रांस का विश्व कप नॉकआउट में लंबा, शानदार रिकॉर्ड भी खत्म हो गया। 2014 विश्व कप में जर्मनी के खिलाफ क्वार्टर फाइनल हारने के बाद यह पहला मौका है जब फ्रांस को विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले में हार झेलनी पड़ी है। इससे पहले, फ्रांस ने खेले 11 नॉकआउट मुकाबलों में से 10 मैच जीते थे, जबकि एक मैच ड्रॉ रहा था।
विश्व कप इतिहास में सेमीफाइनल में फ्रांस की यह चौथी हार है। इससे पहले टीम को 1958, 1982 और 1986 में टीम को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, स्पेन के खिलाफ किसी बड़े टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में फ्रांस की यह लगातार तीसरी हार है। इससे पहले, यूरो 2024 और नेशंस लीग 2025 में भी स्पेन ने फ्रांस को हराया था।
एम्बाप्पे ने कहा कि टीम के लिए यह हार बेहद निराशाजनक है क्योंकि फाइनल में पहुंचकर देशवासियों को खुशी देने का सपना था। उन्होंने कहा, “यह बहुत निराशाजनक है। फाइनल में पहुंचना और अपने देश को सपने देखने का मौका देना हमारा लक्ष्य था। अभी हमारे पास शब्द नहीं हैं, लेकिन हमें खुद को संभालना होगा। छुट्टी के बाद हमें फिर से आगे बढ़ना होगा, क्योंकि क्लब और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी कई चुनौतियां बाकी हैं।” फ्रांस अब टूर्नामेंट में तीसरे स्थान के लिए प्लेऑफ मुकाबला खेलेगा, जो अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच होने वाले सेमीफाइनल मुकाबले में हारने वाली टीम से होगा।
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फीफा विश्व कप: डेक्लान राइस सेमीफाइनल में खेलेंगे या नहीं, इंग्लैंड आखिरी समय में फैसला लेगी

इंग्लैंड के स्टार मिडफील्डर और उप-कप्तान डेक्लान राइस बीमारी से उबर चुके हैं, लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में उनके खेलने पर अंतिम फैसला मैच से ठीक पहले लिया जाएगा। इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस ट्यूशेल उनकी फिटनेस पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और अंतिम निर्णय लेने से पहले आखिरी ट्रेनिंग सत्र का इंतजार करेंगे।
राइस नॉर्वे के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले से पहले बीमार पड़ गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, वह मैच से पहले तीन दिनों तक बिस्तर पर रहे। इसके बावजूद उन्होंने मुकाबले में शुरुआत की, लेकिन पहले हाफ में असहज दिखे और हाफ-टाइम पर उन्हें मैदान से बाहर बुला लिया गया। अब उनकी तबीयत पहले से काफी बेहतर है और उन्होंने सोमवार को टीम के साथ नियमित ट्रेनिंग भी की।
हालांकि बीमारी के अलावा राइस हैमस्ट्रिंग और पीठ दर्द की समस्या से भी जूझ रहे हैं। इसके बावजूद 27 वर्षीय मिडफील्डर को भरोसा है कि वह अर्जेंटीना के खिलाफ शुरुआती एकादश में जगह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार होंगे। 78 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके राइस इस विश्व कप में इंग्लैंड के लगभग सभी मुकाबलों में शुरुआती टीम का हिस्सा रहे हैं। केवल पनामा के खिलाफ ग्रुप चरण का मैच वह चोट के कारण नहीं खेल पाए थे।
इंग्लैंड की टीम सेमीफाइनल से पहले कैनसस सिटी स्थित अपने प्रशिक्षण केंद्र में आखिरी अभ्यास सत्र करेगी। इसके बाद खिलाड़ियों को रिकवरी सेशन कराया जाएगा और फिर पूरी टीम अटलांटा के लिए रवाना होगी, जहां सेमीफाइनल खेला जाएगा। ट्यूशेल तीन खिलाड़ियों के साथ मैच से पहले स्टेडियम का निरीक्षण भी करेंगे।
इंग्लैंड और अर्जेंटीना दोनों ने सेमीफाइनल तक पहुंचने के लिए कड़ा संघर्ष किया है। इंग्लैंड ने नॉकआउट चरण में कांगो डीआर, मैक्सिको और नॉर्वे को हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। दूसरी ओर, मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना ने काबो वर्डे, मिस्र और स्विट्जरलैंड जैसी टीमों को हराकर अपना अभियान जारी रखा।
इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच सेमीफाइनल गुरुवार को भारतीय समयानुसार 12:30 बजे (एएम) से खेला जाएगा।
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फीफा विश्व कप: इंग्लैंड और अर्जेंटीना मैच का परिणाम मिडफील्ड की लड़ाई पर निर्भर करेगा, पूर्व स्ट्राइकर फाउलर का बयान

फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में अर्जेंटीना और इंग्लैंड की भिड़ंत फुटबॉल की सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्विताओं में से एक है। इंग्लैंड के पूर्व स्टार स्ट्राइकर रॉबी फाउलर ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि फुटबॉल इतिहास की सबसे यादगार प्रतिद्वंद्विताओं में से एक बताया है। दोनों टीमें फाइनल में जगह बनाने के लिए आमने-सामने होंगी और दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें इस मुकाबले पर टिकी हैं।
फाउलर ने जी5 से बातचीत में कहा कि अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच मुकाबले का महत्व केवल मैदान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रतिद्वंद्विता के पीछे दोनों देशों का इतिहास भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने 1986 विश्व कप में डिएगो माराडोना के चर्चित ‘हैंड ऑफ गॉड’ गोल, 1998 विश्व कप में डेविड बेकहम को मिले रेड कार्ड और 2002 में उनकी पेनल्टी के जरिए वापसी जैसे ऐतिहासिक पलों का जिक्र किया। फाउलर का मानना है कि ऐसे मुकाबले खिलाड़ियों को फुटबॉल इतिहास का हिस्सा बनने का अवसर देते हैं।
उन्होंने कहा कि सेमीफाइनल का परिणाम काफी हद तक मिडफील्ड की लड़ाई पर निर्भर करेगा। अर्जेंटीना के एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडीज और रोड्रिगो डी पॉल जैसी मजबूत तिकड़ी इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम की अगुवाई वाले मिडफील्ड को कड़ी चुनौती देगी। फाउलर के अनुसार, अर्जेंटीना गेंद पर कब्जा बनाए रखते हुए खेल की गति नियंत्रित करने की कोशिश करेगा, इसलिए इंग्लैंड को रक्षात्मक अनुशासन बनाए रखना होगा और जरूरत से ज्यादा पीछे नहीं हटना चाहिए।
पूर्व लिवरपूल स्ट्राइकर ने यह भी कहा कि नॉकआउट मुकाबलों में मानसिक मजबूती सबसे बड़ा अंतर पैदा करती है। उनके मुताबिक, बड़ी टीमें दबाव की स्थिति में भी अपने गेम प्लान पर कायम रहती हैं और घबराहट में गलत फैसले नहीं लेतीं। टूर्नामेंट के इस चरण में तकनीकी स्तर पर टीमों के बीच अंतर बेहद कम होता है, इसलिए मानसिकता ही जीत और हार तय कर सकती है।
मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगा। क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड को हराने के बाद कप्तान लियोनेल मेसी की अगुआई में टीम शानदार लय में दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, थॉमस ट्यूशेल के नेतृत्व में इंग्लैंड ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासित प्रदर्शन किया है और अब उसकी नजर 1966 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने पर है। ऐसे में यह मुकाबला केवल फाइनल का टिकट ही नहीं, बल्कि फुटबॉल इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित प्रतिद्वंद्विताओं में एक और यादगार अध्याय लिखने का मौका भी होगा।
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