व्यापार
मध्य पूर्व में तनाव से सोने और चांदी में कमजोरी, कीमतें करीब आधा प्रतिशत तक लुढ़कीं
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को गिरावट देखने को मिली। इससे दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब आधा प्रतिशत कम हो गया है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर जारी कीमतों के मुताबिक, सोने का 5 अगस्त, 2026 का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,42,257 रुपए के मुकाबले 1,109 रुपए की कमजोरी के साथ 1,41,148 रुपए पर खुला।
सुबह 9:54 पर यह 607 रुपए या 0.43 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,41,650 रुपए पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,40,740 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,41,695 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।
सोने के साथ चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का 04 सितंबर, 2026 का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,23,189 रुपए के मुकाबले 2,21,926 रुपए पर खुला।
अब तक के कारोबार में यह 609 रुपए या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,22,580 रुपए पर था।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में बिकवाली देखी जा रही है। सोना 0.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,040 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.45 प्रतिशत की गिरावट के साथ 58.84 डॉलर प्रति औंस पर था।
जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह मध्य पूर्व में जारी तनाव होना है, जिसके चलते डॉलर इंडेक्स 100 के पार बना हुआ है। यह दोनों की कीमती धातुओं की कीमतों को बढ़ाने का काम कर रहा है।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक बाजारों से मजबूत संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी करीब आधा प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे।
ज्यादातर वैश्विक बाजारों में तेजी देखी जा रही है। टोक्यो, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता हरे निशान में थे। केवल शंघाई लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को हरे निशान में बंद हुआ, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स मामूली तेजी के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.90 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
व्यापार
भारत-यूके सीईटीए आज से लागू, कपड़ा और आभूषण एवं रत्न समेत कई क्षेत्रों के निर्यातकों के लिए बढ़ेंगे अवसर

भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) बुधवार से लागू हो गया है। इससे देश में कपड़ा, चमड़े, आभूषण एवं रत्न, समुद्री उत्पादों, केमिकल और अन्य क्षेत्रों से जुड़े निर्यातकों के लिए यूके का बाजार खुला गया और उन्हें अब पहले के मुकाबले निर्यात के अधिक अवसर मिलेंगे।
भारत-यूके सीईटीए के लागू होने को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ यह समझौता, दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक मील का पत्थर है। इससे देश के करीब 99 प्रतिशत निर्यात को यूके में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जो कि भारत की 100 प्रतिशत ट्रेड वैल्यू को कवर करता है।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, इस व्यापार समझौते से कपड़ा, चमड़े, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग का सामान, समुद्री उत्पाद, केमिकल, प्रोसेस्ड फूड के साथ-साथ एमएसएमई, किसानों और अन्य मैन्युफैक्चरर्स को निर्यात के बड़े अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के आईटी, प्रोफेशनल, फाइनेंशियल, एजुकेशन और बिजनेस सर्विस सेक्टरों के लिए भी नए रास्ते खोलता है और साथ ही भारतीय टैलेंट के लिए आवाजाही के मौके भी बढ़ाता है।
सोशल सिक्योरिटी समझौते का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि इससे यूके में अस्थायी काम पर गए भारतीय पेशेवरों को पांच साल तक दोहरी सोशल सिक्योरिटी का योगदान देने से छूट मिलती है, जिससे देश के वर्कफोर्स की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।
इसके अलावा, गोयल ने समझौते को अंतिम रूप देने में अपनी भूमिका के लिए यूके के अपने समकक्ष पीटर काइल और दोनों देशों की बातचीत करने वाली टीमों का धन्यवाद किया।
इस ट्रेड एग्रीमेंट के तहत, स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे कई ब्रिटिश प्रोडक्ट्स पर लगने वाले टैरिफ अब कम होने लगेंगे।
हालांकि, कई प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी में कटौती आने वाले सालों में धीरे-धीरे लागू की जाएगी।
यह अहम व्यापार समझौता 14 दौर की बातचीत के बाद 24 जुलाई, 2025 को साइन किया गया था। इसमें 30 चैप्टर हैं, जिनमें सामान और सर्विस का व्यापार, डिजिटल व्यापार, फाइनेंशियल सर्विस, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और सरकारी खरीद जैसे विषय शामिल हैं।
इस समझौते के तहत, भारत 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर टैरिफ कम करेगा या खत्म कर देगा, इनमें से 85 प्रतिशत लाइनें अगले दशक में पूरी तरह से ड्यूटी-फ्री हो जाएंगी।
ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ शुरू में 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा और 10 सालों में इसे और घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया जाएगा, जबकि ब्रिटिश ऑटोमोबाइल पर ड्यूटी को कोटा-बेस्ड सिस्टम के तहत धीरे-धीरे कम किया जाएगा।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 561 अंक फिसला, निफ्टी 0.6 प्रतिशत लुढ़का

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 0.72 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 158.95 अंक यानी 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर था। इस तरह घरेलू बाजार में लगातार तीन दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया।
इस दौरान करीब 1,422 शेयरों में बढ़त, 2,632 शेयरों में गिरावट और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला क्षेत्र बनकर उभरा, जिसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक (-1.8 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (-1.6 प्रतिशत), निफ्टी बैंक (-1.1 प्रतिशत) और निफ्टी आईटी (-1 प्रतिशत) भी गिरावट के साथ बंद हुए।
इसके बाद, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.8 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 0.3 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रा में 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं इसके विपरीत, निफ्टी फार्मा ने 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया, इसके बाद निफ्टी मेटल का स्थान रहा, जिसमें 0.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
निफ्टी 50 इंडेक्स में कुल 39 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिनमें एचसीएल टेक्नोलॉजीज, श्रीराम फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे, जबकि भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, टीसीएस और डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे।
इस बीच, भारतीय रुपया 57 पैसे गिरकर 96.25 अमेरिकी डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले सत्र में रुपया 95.68 डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत में 4 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई और यह 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए बड़े आर्थिक संकट पैदा कर रही हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और तेज हो गया है, ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी व्यापार पर एक नई नाकाबंदी की घोषणा की है। इससे आगामी कारोबारी सत्रों में भी बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से रोजगार में आएगा बड़ा उछाल, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की होगी जरूरत: रिपोर्ट

भारत का तेजी से बढ़ता डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े रोजगार सृजक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। एक नई रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में करीब 1 लाख कुशल पेशेवरों (स्किल्ड प्रोफेशनल्स) की आवश्यकता होगी।
एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा लगभग 1.5 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से बढ़कर दशक के अंत तक 6.5 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, देश का डेटा सेंटर बाजार 22 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं हो चुकी हैं। यही वजह है कि डेटा सेंटर उद्योग भारत के सबसे तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में शामिल हो गया है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा संस्थान, उद्योग और नीति-निर्माता मिलकर भविष्य के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार नहीं करते हैं, तो कौशल की कमी (स्किल गैप) इस क्षेत्र की तेज रफ्तार वृद्धि में बड़ी बाधा बन सकती है।
एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सचिन अलुग ने कहा कि भारत में डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण का बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा, “भारत जिस तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उससे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ पेशेवरों की नई पीढ़ी की मांग तेजी से बढ़ रही है।”
उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरियां भरने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देने वाले कुशल कार्यबल का निर्माण करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेजी से अपनाने के कारण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग, क्लाउड ऑपरेशंस, प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, डेवऑप्स, एमएलऑप्स और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई-आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर उद्योग में प्रवेश करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की समझ एक महत्वपूर्ण कौशल बनती जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी कई नई विशेषज्ञ भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इनमें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज इंजीनियर और पावर सिस्टम एक्सपर्ट जैसे पद प्रमुख हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगली पीढ़ी के एआई-संचालित डेटा सेंटरों को उन्नत कूलिंग सिस्टम, बेहतर ऊर्जा प्रबंधन और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी, जिसके कारण इन विशेषज्ञों की मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
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