अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-यूके सीईटीए के लागू होने से स्थानीय सेवाओं और सामानों की मांग बढ़ेगी: फिक्की
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने बुधवार को भारत-यूके सीईटीए के लागू होने का स्वागत करते हुए कहा कि यह अहम समझौता भारतीय इंडस्ट्री के लिए नए मौके खोलेगा, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाएगा और ग्लोबल वैल्यू चेन के साथ देश की भागीदारी को मजबूत करेगा।
इस समझौते के लागू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए, फिक्की के सेक्रेटरी जनरल अनंत स्वरूप ने कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) से सामान और सेवाओं, दोनों ही क्षेत्रों में कारोबार के लिए नए मौके बनेंगे।
स्वरूप ने कहा, “भारत-यूके सीईटीए के लागू होने पर फिक्की की ओर से पीएम मोदी को बहुत-बहुत बधाई। यह समझौता भारतीय इंडस्ट्री के लिए सामान और सेवाओं, दोनों में नए मौके खोलेगा। इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और टैलेंट मोबिलिटी में सहयोग से भारतीय इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।”
उन्होंने इस समझौते को भारत की मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) यात्रा में एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि इससे ग्लोबल वैल्यू चेन में देश की भागीदारी बढ़ेगी और भारत व यूके, दोनों जगह इनोवेशन-बेस्ड ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।
फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि यह अहम समझौता भारत की लगातार आर्थिक वृद्धि, वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता और इंटरनेशनल मार्केट के साथ गहरे जुड़ाव की आकांक्षाओं को मजबूत करके ‘विकसित भारत’ के विजन को पूरा करने में मदद करेगा।
गोयनका ने कहा, “जैसे-जैसे भारत एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उच्च-गुणवत्ता वाली आर्थिक साझेदारियां व्यापार के अवसरों को बढ़ाने, औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक व्यापार और निवेश नेटवर्क में देश की भागीदारी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।”
इंडस्ट्री बॉडी के अनुसार, यह समझौता आर्थिक जुड़ाव के प्रति एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है और भारत की अधिक समृद्धि, नवाचार और आर्थिक परिवर्तन की यात्रा का समर्थन करेगा।
भारत-यूके एफटीए बुधवार से लागू हो गया, जिससे भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात के लिए बिना किसी शुल्क के बाजार तक पहुंच मिली और इसमें द्विपक्षीय व्यापार मूल्य का लगभग 100 प्रतिशत हिस्सा शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बोस्टन की सड़कों पर भारतीय नौसैनिकों का कदमताल, बिखेरा तिरंगे का रंग

अमेरिका के ऐतिहासिक शहर बोस्टन में भारतीय नौसेना के जवानों ने कदमताल किया है। यहां शहर की मुख्य सड़कों पर भारतीय नौसैनिकों ने परेड की। दरअसल अमेरिका में यह परेड नौकायन पोत आईएनएस सुदर्शिनी द्वारा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं का एक भव्य प्रदर्शन था।
बोस्टन पहुंचा यह पोत दुनिया भर के 20 से अधिक देशों के 60 से ज्यादा विशाल नौकायन पोतों के साथ प्रतिष्ठित ‘सेल बोस्टन 2026’ समारोह में भाग ले रहा है। बोस्टन की ऐतिहासिक सड़कों पर आयोजित क्रू एवं कैडेट सिटी परेड में आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल और प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्ण यह मार्च किया। भारतीय दल की अनुशासित और आकर्षक प्रस्तुति ने स्थानीय नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों का ध्यान खींचा। परेड के दौरान भारत की समुद्री परंपराओं, नौवहन इतिहास और सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिली।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस सहभागिता ने भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग को और मजबूत करने का संदेश दिया। साथ ही यह भी दर्शाया कि समुद्र केवल व्यापार और सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि देशों और समाजों को जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु भी है। इससे पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने न्यूयॉर्क में आयोजित भव्य ‘सेल फोर्थ 250’ समारोह में हिस्सा लेकर हजारों दर्शकों के बीच भारतीय तिरंगे की शान बढ़ाई थी। न्यूयॉर्क में अपनी सफल उपस्थिति दर्ज कराने के बाद यह पोत बोस्टन पहुंचा। यहां दुनिया के विभिन्न देशों के पारंपरिक नौकायन पोत एक साथ समुद्री विरासत का उत्सव मना रहे हैं।
‘लोकायन 2026’ अभियान के तहत आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के विभिन्न बंदरगाहों की यात्रा कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की समुद्री विरासत, नौवहन परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के संदेश को दुनिया तक पहुंचाना है। नॉरफॉक से बोस्टन तक की यात्रा के दौरान पोत ने भारतीय संस्कृति, मित्रता और सद्भावना का संदेश भी प्रसारित किया। भारतीय नौसेना का यह ऐतिहासिक नौकायन पोत जहां भी पहुंच रहा है, वहां भारत की समुद्री शक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि और वैश्विक साझेदारी की नई कहानी लिख रहा है।
बोस्टन में उसकी मौजूदगी ने एक बार फिर साबित किया कि भारत की समुद्री विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी दुनिया को जोड़ने वाली एक जीवंत शक्ति है। गौरतलब है कि आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का पाल वाला पोत है। प्राचीन जहाज निर्माण पद्धति पर आधारित इस पोत का उपयोग प्रशिक्षण, समुद्री जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सद्भावना यात्राओं के लिए किया जा रहा है। वर्तमान में यह पोत लोकायन 2026 वैश्विक समुद्री अभियान पर है। इसके तहत विभिन्न यह अलग-अलग देशों के बंदरगाहों का दौरा कर भारत की समुद्री विरासत, संस्कृति और नौसैनिक परंपराओं का प्रचार-प्रसार कर रहा है।
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अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, हॉर्मुज स्ट्रेट के पास 7 घंटे चली सैन्य कार्रवाई

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास और तटीय क्षेत्रों में दर्जनों ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए सात घंटे तक हमले किए।
सेंटकॉम ने अपने एक बयान में कहा कि यह ऑपरेशन रात 10 बजे (अमेरिकी समयानुसार) खत्म हुआ। अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोन और नौसैनिक जहाजों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन साइटों, नौसैनिक क्षमताओं और तटीय रक्षा प्रणालियों पर सटीक हमले किए।
अमेरिकी कमांड के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और नागरिक चालक दल के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
हॉर्मुज स्ट्रेट वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ये हमले उसी दिन हुए जब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों के खिलाफ अपनी नाकाबंदी फिर से शुरू की। यह नाकाबंदी अमेरिकी समयानुसार शाम 4 बजे लागू हुई।
कमांड ने बताया कि मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसेना के 20 से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों सैन्य विमान तैनात थे। उसने कहा कि अमेरिकी सेना सतर्क, घातक और तैयार है। अमेरिकी कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिकी सेना की यह हालिया कार्रवाई कमर्शियल जहाजों और पड़ोसी खाड़ी देशों पर ईरान के कई हमलों के जवाब में की गई है।
कूपर ने कहा कि पिछले सात दिनों में, ईरान ने इस इलाके में जान-बूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए सात कमर्शियल जहाजों पर हमले किए हैं, जिनमें लगभग एक दर्जन नागरिक क्रू मेंबर मारे गए, लापता हुए या घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी सेना ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन भी दागे हैं।
कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने आगे कहा, “अमेरिकी सेना ईरान को उस गैर-जरूरी आक्रामकता के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है जिससे बेगुनाह लोगों की जान को खतरा बना हुआ है।”
हालांकि, अमेरिकी कमांड ने उन ठिकानों की सटीक जानकारी नहीं दी, जहां हमले किए गए। उसने नुकसान का आकलन भी नहीं बताया और न ही यह बताया कि कोई हताहत हुआ या नहीं।
कमांड ने उन व्यापारिक जहाजों की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की, जिनका जिक्र एडमिरल कूपर ने किया था। साथ ही, चालक दल के सदस्यों की राष्ट्रीयता या उन खाड़ी देशों के नाम भी नहीं बताए गए, जिन्हें कथित रूप से ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया।
सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी सेना कमांडर-इन-चीफ के आदेश पर आगे के ऑपरेशन करने के लिए तैयार है।
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फिलिस्तीन के समर्थन में भारत ने दोहराई प्रतिबद्धता, दो राष्ट्र समाधान और यूएन में सदस्यता का किया समर्थन

ब्रुसेल्स में आयोजित फिलिस्तीन डोनर ग्रुप (पीडीजी) की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत ने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपना लगातार समर्थन दोहराया। साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सदस्यता के लिए फिलिस्तीन की सदस्यता का भी समर्थन किया।
विदेश मंत्रालय की सचिव (सीपीवी एंड ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन ने मीटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह मीटिंग यूरोपीय कमीशन और फिलिस्तीन अथॉरिटी ने मिलकर स्थानीय समयानुसार सोमवार को आयोजित की थी। मीटिंग में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों, फिलिस्तीन और दूसरे जरूरी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और वित्तीय संस्थानों ने भी हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत लंबे समय से फिलिस्तीनी लोगों का विश्वसनीय साझेदार रहा है। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के निरंतर समर्थन और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सदस्यता के लिए फिलिस्तीन की दावेदारी के समर्थन को दोहराया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, उन्होंने फिलिस्तीन के लोगों के लिए भारत की निरंतर विकासात्मक सहायता, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और मानवीय मदद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की विकास परियोजनाएं फिलिस्तीन की आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित की जाती हैं और उनका मुख्य फोकस स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण पर है।
सचिव ने कहा कि भारत इस समय फिलिस्तीन में स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण और संस्थागत क्षमता निर्माण से जुड़े कई प्रमुख परियोजनाओं पर काम कर रहा है। उन्होंने पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर केंद्रित कई नई परियोजनाओं की भी घोषणा की।
ब्रुसेल्स प्रवास के दौरान सचिव ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) की सलाहकार आयोग की आने वाली अध्यक्षता की ओर से आयोजित एक बैठक में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने एजेंसी और फिलिस्तीन में उसके मानवीय प्रयासों के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, “भारत फिलिस्तीन के लोगों की मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने में ठोस योगदान देने वाला एक प्रतिबद्ध साझेदार बना हुआ है।”
पिछले महीने भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने विश्वास जताया था कि भारत दो-राष्ट्र समाधान का मजबूत समर्थक है।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में अब्दुल्ला अबू शावेश ने कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि भारत दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) का मजबूती से समर्थन करता है। संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तावों पर भारत लंबे समय से फिलिस्तीनी लोगों के पक्ष में मतदान करता रहा है। इसके साथ ही भारत जमीनी स्तर पर भी शांति प्रक्रिया में सक्रिय रूप से निवेश कर रहा है और फिलिस्तीन में कई विकास परियोजनाएं लागू कर चुका है।”
उन्होंने आगे कहा, “एक बेहद महत्वपूर्ण पहल जल्द शुरू होने वाली है। भारत फिलिस्तीन, खासकर वेस्ट बैंक में एक अस्पताल के निर्माण की अहम परियोजना पर काम शुरू करने जा रहा है।”
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