Connect with us
Saturday,31-October-2026
ताज़ा खबर

व्यापार

चालू वित्त वर्ष में 3.2 फीसदी गिर सकती है भारत की आर्थिक विकास दर : विश्व बैंक

Published

on

world-bank

कोरोना काल में भारत की अर्थव्यवस्था 1979 के बाद के सबसे बुरे दौर से गुजरने वाली है। यह आकलन विश्व बैंक का है। विश्व बैंक का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर में 3.2 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है जोकि 1979 के बाद की सबसे खराब स्थिति होगी।

विश्व बैंक ने सोमवार को कहा कि कोरोना महामारी के मौजूदा हालात में दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की मंदी के सबसे खराब दौर से गुजर रही है और प्रति व्यक्ति आय में गिरावट के चलते करोड़ों लोगों गरीबी का शिकार बन रहे हैं।

भारत के संदर्भ में अपने अनुमान में विश्व बैंक ने कहा, “वित्तीय और मौद्रिक प्रोत्साहन के बावजूद कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए उठाए गए सख्त कदमों से आर्थिक गतिविधि प्रभावित रहेगी। कमजोर वैश्विक आर्थिक विकास और वित्तीय क्षेत्र में तुलन पत्र पर दबाव का असर आर्थिक गतिविधियों पर रहेगा।”

विश्व बैंक ग्लोबल इकॉनोमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट में बीते वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 4.2 फीसदी कर दिया गया है और चालू वित्त वर्ष यानी 2020.21 में जीडीपी वृद्धि दर में 3.2 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया गया है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट की मुख्य वजह कोरोना महामारी है। विश्व बैंक ने कहा कि 1979 में भारत की नकारात्मक आर्थिक विकास दर शून्य से 5.24 फीसदी नीचे रही थी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर में इस साल 5.2 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है क्योंकि अधिकांश अर्थव्यवस्था में प्रतिव्यक्ति आय घटकर 1870 के बाद के निचले स्तर पर आ गया है।

रिपोर्ट में इस साल प्रति व्यक्ति आय में 3.6 फीसदी की गिरावट से करोड़ों लोग घोर गरीबी के शिकार हो जाएंगे।

वल्र्ड बैंक ग्रुप वाइस प्रेसीडेंट सेयला पजरबसियोगलू ने कहा, “यह काफी गंभीर आउटलुक है क्योंकि संकट का असर लंबे समय तक रहने वाला है और दुनियाभर के लिए चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।”

रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक विकास दर अगले साल वापस 4.2 फीसदी तक रहने की उम्मीद की गई है।

विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं के विकास दर में इस साल सात फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन अगले साल 3.9 फीसदी वृद्धि हो सकती है।

विश्व बैंक ने जनवरी में भारत को दुनिया के सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बताते हुए इसकी विकास दर 2019.20 और 2020.21 में 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जारी किया था, लेकिन हालिया रिपोर्ट में बैंक का नजरिया भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर नकारात्मक है। पिछले ही महीने संयुक्त राष्ट्र ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 1.2 फीसदी रहने का अनुमान जारी किया था।

चीन की आर्थिक विकास दर 2020 में एक फीसदी जबकि 2021 में 6.9 फीसदी रहने का अनुमान है। विश्व बैंक के अनुसार पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर बीते वित्त वर्ष में 1.2 फीसदी जबकि अगले में 0.2 फीसदी गिर सकती है।

वहीं, बांग्लादेश की आर्थिक विकास दर पिछले वित्त वर्ष में 1.6 फीसदी जबकि अगले में एक फीसदी रहने का अनुमान है। श्रीलंका की आर्थिक विकास दर में इस साल 3.2 फीसदी की गिरावट आ सकती है जबकि अगले साल सपाट रह सकती है।

व्यापार

धनतेरस पर सोना या चांदी? छोटे निवेशकों के लिए क्या है बेहतर विकल्प, जानिए फायदे और जोखिम

Published

on

gold

रोशनी का पर्व ‘दीपावली’ बस आने वाला ही है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है, जो 6 नवंबर को पड़ रहा है। इस दिन लोग सोना और चांदी समेत कई कीमती धातुएं खरीदते हैं।

वहीं, धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना केवल परंपरा नहीं, बल्कि निवेश का भी एक अहम माध्यम माना जाता है। हालांकि सीमित बजट वाले निवेशकों के सामने अक्सर यह सवाल होता है कि सोना खरीदें या चांदी। ऐसे में फैसला केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि बजट, जोखिम क्षमता और निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

सोना लंबे समय से संपत्ति सुरक्षित रखने (वेल्थ प्रिजर्वेशन) का सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जाता है। इसकी मांग लगातार बनी रहती है और जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से बेचा भी जा सकता है। हालांकि आभूषण खरीदने पर मेकिंग चार्ज और टैक्स अलग से देने पड़ते हैं, जिससे कुल लागत बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश के नजरिए से गोल्ड कॉइन, गोल्ड बार, गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्प ज्यादा व्यावहारिक माने जाते हैं। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है, लेकिन आमतौर पर यह चांदी की तुलना में कम अस्थिर माना जाता है।

वहीं, चांदी छोटे निवेशकों के लिए अधिक किफायती विकल्प हो सकती है। कम बजट में निवेशक ज्यादा मात्रा में चांदी खरीद सकते हैं। इसके अलावा सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे क्षेत्रों में बढ़ती औद्योगिक मांग चांदी को अतिरिक्त समर्थन देती है। हालांकि चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक रहता है, क्योंकि इस पर निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों का भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में तेजी से मुनाफे के अवसर तो मिल सकते हैं, लेकिन जोखिम भी ज्यादा होता है।

ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपका उद्देश्य संपत्ति सुरक्षित रखना और अपेक्षाकृत स्थिर निवेश है, तो सोना बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं यदि आपका बजट सीमित है, आप ज्यादा मात्रा में धातु खरीदना चाहते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं, तो चांदी पर विचार किया जा सकता है।

मौजूदा स्थिति में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि सोना अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 25 प्रतिशत और चांदी लगभग 55 प्रतिशत तक नीचे आ चुकी है। ऐसे में कई निवेशक इसे खरीदारी का अवसर भी मान रहे हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल धनतेरस के दिन एकमुश्त खरीदारी करने के बजाय निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों और समयावधि के अनुसार फैसला लेना चाहिए।

जो निवेशक शुद्धता, सुरक्षा और स्टोरेज की चिंता से बचना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ जैसे विकल्प भी उपयोगी हो सकते हैं। इनमें फिजिकल धातु रखने की जरूरत नहीं होती और निवेश एक्सचेंज के माध्यम से किया जा सकता है।

Continue Reading

राष्ट्रीय समाचार

1 नवंबर को प्रस्तावित रैली से व्यापारी वर्ग में चिंता, सीटीआई ने इंडिया ब्लॉक के घटक दलों को लिखा पत्र

Published

on

1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली को लेकर दिल्ली के व्यापारियों में दहशत का माहौल है। दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे समेत सभी घटक दलों को पत्र लिखकर रैली को दीपावली के बाद कराने की मांग की है।

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि व्यापारी वर्ग रैली का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन 1 नवंबर, धनतेरस और दीपावली से पहले की तैयारियों के लिए पीक दिन है। अगर महारैली का आयोजन होता है तो 20 ऐतिहासिक बाजारों में रोजाना होने वाला 10-12 हजार करोड़ का कारोबार ठप हो जाएगा।

सीटीआई ने इसके लिए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को टालने का अनुरोध किया। सीटीआई इससे पहले राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर अपनी स्थिति से अवगत करा चुकी है।

सीटीआई के अनुसार, रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर दायरे में 20 बाजार आते हैं जो 300 साल पुराने हैं और पूरे भारत को माल सप्लाई करते हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।

इन बाजारों में रोजाना नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर, मंगोलपुरी सहित 56 इंडस्ट्रियल एरिया से 5000 ट्रक-टेम्पो माल लाते हैं और यहां से 3000 ट्रक रोजाना गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों समेत देशभर के सभी राज्यों में माल ले जाते हैं।

व्यापारी वर्ग के अनुसार, ऐसी स्थिति में अगर महारैली होती है तो 31 अक्टूबर दोपहर से ही बसें और गाड़ियां दिल्ली बॉर्डर (सिंघु, टिकरी, गाजीपुर, बदरपुर) पर आना शुरू हो सकती हैं और शाम से ही बहादुर शाह जफर मार्ग, जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग लग सकती है। ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही गाड़ी भेजने से मना कर रहे हैं। तो असर 1 नवंबर नहीं, 31 अक्टूबर से ही शुरू हो जाएगा।

सीटीआई ने कहा कि 1 नवंबर की रैली को दीपावली बाद 10 या 11 नवंबर के बाद कर दिया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली पर कारोबार में कोई विघ्न न पड़े। अगर रैली करनी ही है तो रामलीला मैदान से हटाकर बुराड़ी मैदान में की जाए, जहां 15,000 गाड़ियों की पार्किंग की जगह हो।

Continue Reading

व्यापार

एआई पर ज्यादा खर्च से मेटा की रेटिंग पर संकट, एसएंडपी ने ‘आउटलुक’ को किया निगेटिव

Published

on

अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स के लिए एआई पर भारी-भरकम खर्च अब चिंता का कारण बन गया है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने मेटा की एए- क्रेडिट रेटिंग के आउटलुक को स्थिर से घटाकर निगेटिव कर दिया है।

रेटिंग एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि कंपनी की बैलेंस शीट पर एआई से जुड़े ज्यादा खर्च के कारण दबाव बढ़ रहा है। कंपनी का बढ़ता कर्ज भी इस फैसले की एक बड़ी वजह है। कर्ज को कमाई के अनुपात में देखा जाता है, जिसे लेवरेज कहा जाता है।

एसएंडपी ने कहा कि मेटा की अपने एआई निवेश से कमाई करने की क्षमता अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ज्यादा सीमित है। एजेंसी को इस बात को लेकर भी अनिश्चितता है कि मेटा का पूंजीगत खर्च कब तक इतना ज्यादा बना रहेगा और फ्री ऑपरेटिंग कैश फ्लो कब तक निगेटिव रहेगा। इसी वजह से आउटलुक घटाने का फैसला लिया गया।

एजेंसी को शक है कि पूंजीगत खर्च से होने वाली कमाई बढ़ती लागत से ज्यादा कब होगी। निगेटिव आउटलुक का मतलब है कि अगले दो साल में रेटिंग घटने की संभावना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एसएंडपी अभी तुरंत रेटिंग काटने पर विचार कर रही है।

मेटा की एए- रेटिंग अभी भी चौथी सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग है और एक पायदान नीचे जाने पर भी कंपनी मजबूती से इन्वेस्टमेंट-ग्रेड में बनी रहेगी।

रेटिंग एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि मेटा का पूंजीगत खर्च इस साल 140 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा और 2027 में बढ़कर 225 अरब डॉलर से ज्यादा हो जाएगा। कंपनी का लेवरेज 2027 में 1.0 गुना से ऊपर जा सकता है, जबकि पिछले साल यह करीब 0.1 गुना था।

निवेशक भी इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि मेटा और अन्य कंपनियां एआई पर किए गए भारी निवेश से ठोस रिटर्न कब पैदा करेंगी। शुक्रवार को नैस्डैक 100 में 3.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जो निराशाजनक टेक कमाई के कारण दबाव में था।

मेटा ने अक्टूबर की शुरुआत में बताया था कि उसने भविष्य में 800 अरब डॉलर से अधिक खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें से लगभग आधा हिस्सा उन लीज से जुड़ा है जो अभी शुरू भी नहीं हुई हैं और ये ज्यादातर डेटा सेंटर और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हैं।

सीईओ मार्क जुकरबर्ग और अन्य अधिकारियों ने बताया है कि कंपनी अपने हाल ही में जारी किए गए म्यूज मॉडल और पर्सनल एआई एजेंट से कैसे कमाई कर सकती है। रेवेन्यू मॉडल में सब्सक्रिप्शन, ट्रांजैक्शन फीस और यहां तक कि विज्ञापन भी शामिल हैं, जो पहले से ही इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे ऐप के जरिए कंपनी के राजस्व का बड़ा हिस्सा पैदा करता है।

Continue Reading
Advertisement
मनोरंजन6 hours ago

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में 12वां आरोपी अमर हरियाणा से गिरफ्तार, 6 नवंबर तक पुलिस कस्टडी में

अपराध6 hours ago

मध्य प्रदेश: शाजापुर में बाइक-पिकअप की टक्कर, 5 महीने के बच्चे और पति-पत्नी की मौत

अंतरराष्ट्रीय समाचार6 hours ago

कैलिफोर्निया के शॉपिंग मॉल में गोलीबारी, 1 की मौत और 6 घायल

राजनीति6 hours ago

वोट चोरी की शुरुआत नेहरू ने की थी, सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनने से वंचित रखा गया: संबित पात्रा

राष्ट्रीय समाचार6 hours ago

केशव का अखिलेश पर निशाना, बोले- यूपी की जनता 2027 में सपा की साइकिल पंचर कर सैफई भेज देगी

राजनीति6 hours ago

आंध्र प्रदेश स्कूल में छात्रा पर चेनसॉ से हमले को लेकर जगन मोहन रेड्डी ने सरकार पर साधा निशाना

मनोरंजन7 hours ago

‘रामायण’ में सीता बनने के लिए साई पल्लवी ने लिया मेडिटेशन का सहारा, बताया किरदार से मिली सीख

राष्ट्रीय समाचार8 hours ago

कैसे एक ही तारीख बनी ऐतिहासिक? 1 नवंबर को 8 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस

खेल8 hours ago

विश्व आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत ने अब तक जीते 20 पदक, अंक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा

खेल8 hours ago

डब्ल्यूटीसी प्वाइंट्स टेबल: वेस्टइंडीज की जीत से भारत को पहुंचा फायदा, बांग्लादेश का हुआ नुकसान

अपराध3 weeks ago

दिल्ली पुलिस ने मकोका के दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया, 30 लाख रुपए बरामद

मनोरंजन3 weeks ago

कनिका-लव की लड़ाई में कूदी आम्रपाली, गुल्लू से हुई बहस

राजनीति3 weeks ago

“आप” का आरोप: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली छावनी में तब्दील

राष्ट्रीय समाचार3 weeks ago

दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों से विरोध-प्रदर्शन के कारण यात्रा की योजना पहले से बनाने की दी सलाह

खेल4 weeks ago

‘आपकी जीत बेहतरीन प्रदर्शन, दृढ़ संकल्प और टीम वर्क की भावना का सबूत,’ गोल्ड जीतने पर राष्ट्रपति मुर्मु ने टीम इंडिया को सराहा

मनोरंजन4 weeks ago

‘तुम झूठे हो गौतम गुलाटी’, प्रियंका चाहर चौधरी से भिड़े गौतम, ‘राइज एंड फॉल 2’ में छिड़ी तीखी जंग

व्यापार4 weeks ago

गांधी जयंती के चलते भारतीय शेयर बाजार बंद, एनएसई और बीएसई पर नहीं होगा कारोबार

राजनीति3 weeks ago

जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेता हिरासत में लिए गए

महाराष्ट्र2 weeks ago

टाइगर श्रॉफ से जुड़ी फायरिंग की घटना पर सियासत तेज, विपक्ष ने महाराष्ट्र सरकार और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल

फिल्मी खबरे2 weeks ago

टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना पर अमाल मलिक की प्रतिक्रिया, बोले, ‘आखिर मुंबई में यह सब क्या हो रहा है?’

रुझान