व्यापार
मजबूत शुरुआत के बाद फिसला बाजार, सेंसेक्स, निफ्टी में लाल निशान के साथ कारोबार
विदेशी बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों से मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत तेजी के रुझानों के साथ हुआ, लेकिन जल्द ही बिकवाली के दबाव में गिरावट आ गई और सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लाल निशान के साथ कारोबार चल रहा था। सेंसेक्स सुबह 9.24 बजे पिछले सत्र से 22.51 अंकों यानी 0.07 फीसदी की कमजोरी के साथ 34348.07 पर जबकि निफ्टी 7.70 अंकों यानी 0.08 फीसदी की नरमी के साथ 10159.75 पर बना हुआ था।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र की क्लोजिंग के मुकाबले 150.21 अंकों की बढ़त के साथ 34520.79 पर खुला और 34527.20 तक उछला लेकिन जल्द ही बिकवाली के दबाव में फिसलकर 34319.96 पर आ गया।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी भी पिछले सत्र के मुकाबले 13.70 अंकों की तेजी के साथ 10181.15 पर खुला और 10214.80 तक चढ़ा लेकिन बाद में फिसलकर 10150.95 पर आ गया।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार बड़ी तेजी के साथ बंद, सेंसेक्स 943.52 अंक उछला

मुंबई, 2 फरवरी : भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 943.52 अंक या 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,666.46 और निफ्टी 262.95 अंक या 1.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,088.40 पर था।
बाजार में तेजी का नेतृत्व इन्फ्रा और ऑटो शेयरों ने किया। निफ्टी इन्फ्रा (2.26 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (2.13 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (2.04 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (2.04 प्रतिशत), निफ्टी ऑयलएंडगैस (2.04 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (1.88 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (1.87 प्रतिशत) की तेजी के साथ बंद हुआ।
केवल निफ्टी आईटी (0.47 प्रतिशत) और निफ्टी हेल्थकेयर (0.08 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 546.80 अंक या 0.96 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,667.60 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.20 अंक या 0.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,523.35 पर था।
सेंसेक्स पैक में पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, एमएंडएम, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी गेनर्स थे। एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, ट्रेंट, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक लूजर्स थे।
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे ने कहा कि बड़ी गिरावट के बाद निफ्टी में मजबूत उछाल देखने को मिला है। हालांकि, व्यापक ट्रेंड अभी भी कमजोर बना हुआ है। इंडेक्स अभी भी 200 डीएमए से नीचे है।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी तेजी को लीवरेज पॉजिशन को कम करने और शॉर्ट पॉजिशन बनाने के लिए करना चाहिए। निफ्टी के लिए रुकावट का स्तर 25,200 है और सपोर्ट 24,900 के आसपास है।
मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला था। इस दौरान, बीएसई सेंसेक्स 167.26 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 80,555.68 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 28.95 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,796.50 पर खुला। हालांकि कुछ ही मिनटों बाद बाजार हरे निशान में आ गया।
राजनीति
लोकसभा में ‘डोकलाम’ पर हंगामा, राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर लगाया सदन को गुमराह करने का आरोप

नई दिल्ली, 2 फरवरी : संसद के बजट सत्र के चौथे दिन सोमवार को लोकसभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच डोकलाम मुद्दे को लेकर तीखी बहस हो गई। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया और उनके बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
इसी चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया और कहा कि उनकी पार्टी इसका जवाब देगी। इसके बाद राहुल गांधी ने डोकलाम से जुड़े मुद्दे पर पूर्व थल सेनाध्यक्ष मनोज नरवणे की एक किताब का हवाला देते हुए बोलना शुरू किया।
राहुल गांधी के इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तुरंत खड़े हो गए। उन्होंने सवाल किया कि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, क्या वह वास्तव में प्रकाशित हुई है या नहीं?
राजनाथ सिंह ने कहा कि किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है, इसलिए उसके आधार पर बयान देना ठीक नहीं है। इस पर सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया।
स्पीकर ने राहुल गांधी से अपने स्रोत को प्रमाणित करने के लिए कहा। राहुल गांधी ने जवाब दिया कि यह किताब सरकार द्वारा प्रकाशित नहीं होने दी जा रही है, लेकिन यह ‘सौ फीसदी ऑथेंटिकेटेड’ है।
इस पर राजनाथ सिंह ने फिर कहा कि राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं, क्योंकि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ही नहीं है।
इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने खुद ही विवाद खत्म कर दिया है, क्योंकि वह मान रहे हैं कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है।
स्पीकर ओम बिरला ने सदन को याद दिलाया कि अखबार की कटिंग या अप्रकाशित किताबों पर चर्चा करने की परंपरा नहीं रही है और सदन की कार्यवाही नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है। उन्होंने राहुल गांधी से आगे बढ़ने के लिए कहा।
राहुल गांधी ने कहा कि वह यह मुद्दा उठाना नहीं चाहते थे, लेकिन जब कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाए गए, तो उन्हें इसका जवाब देना पड़ा। इसके बाद उन्होंने फिर से मनोज नरवणे की किताब का जिक्र किया।
स्पीकर ने दोहराया कि सदन में बोलने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार नियमों और परंपराओं के तहत ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में हंगामा जारी है।
व्यापार
इस सप्ताह ब्याज दरों में और कटौती करने से परहेज कर सकता है आरबीआई: अर्थशास्त्री

नई दिल्ली, 2 फरवरी : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 4 से 6 फरवरी के बीच आयोजित होने वाली है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, इस बैठक में आरबीआई नीतिगत ब्याज दरों में कटौती पर फिलहाल विराम लगाने की उम्मीद है। हालांकि केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी, बॉन्ड बाजार की स्थिरता और करेंसी से जुड़े जोखिमों को संभालने के लिए सीधे कदम उठा सकता है।
आरबीआई फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है, जिससे रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया है।
डीबीएस बैंक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव ने कहा कि सरकार अपने फिस्कल कंसोलिडेशन (राजकोषीय घाटा कम करने) के रास्ते पर बनी हुई है, इसलिए मौद्रिक नीति की दिशा में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
एमपीसी ने दिसंबर 2025 में ब्याज दरें घटाई थीं, लेकिन फरवरी की बैठक में और कटौती से बचा जा सकता है।
राधिका राव ने कहा कि इस तिमाही और अप्रैल-जून 2026 के दौरान आरबीआई बॉन्ड खरीद जारी रख सकता है। वित्त वर्ष 2027 के बजट में सरकार की उधारी रिकॉर्ड स्तर पर रहने की बात कही गई है, इसलिए आरबीआई मनी मार्केट से जुड़े कदमों में सतर्कता बरतते हुए उधारी की लागत को काबू में रखना चाहेगा।
व्यापार से जुड़े तनाव के बावजूद आर्थिक ग्रोथ बनी हुई है, लेकिन महंगाई अब अपने निचले स्तर से ऊपर आ चुकी है। वहीं, रुपया लगातार दबाव में है और नए निचले स्तर पर पहुंच रहा है। इसके अलावा, बैंकों के लिए डिपॉजिट जुटाना भी एक चुनौती बना हुआ है।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, यूनियन बजट 2026 अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनाए रखता है और नीतियों में निरंतरता दिखाता है। फिस्कल कंसोलिडेशन जारी रहेगा, जिसमें केंद्र सरकार का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 0.5 प्रतिशत घटने और फिस्कल डेफिसिट 4.3 प्रतिशत पर आने का अनुमान है।
राधिका राव ने कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट और प्राइमरी डेफिसिट में और सुधार हो सकता है। साथ ही, ब्याज दरों में और कटौती करने से रेट-सेंसिटिव पोर्टफोलियो निवेश (विदेशी निवेश) बाहर जा सकता है, इसलिए आरबीआई सतर्क है।
आरबीआई ने हाल ही में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है, जिसके तहत बैंकिंग सिस्टम में 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम डाली जाएगी। इसके लिए ओपन मार्केट में बॉन्ड खरीद, फॉरेन एक्सचेंज स्वैप और वेरिएबल रेट रेपो ऑपरेशन का इस्तेमाल किया जाएगा। ये कदम मौजूदा लिक्विडिटी और वित्तीय हालात की समीक्षा के बाद उठाए गए हैं।
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, आरबीआई ने रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है और चालू वित्त वर्ष में ओएमओ के जरिए 6.6 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी डाली है। इसके बावजूद बॉन्ड यील्ड में ज्यादा गिरावट नहीं आई है, क्योंकि लिक्विडिटी का असर बाजार के सभी हिस्सों में बराबर नहीं पड़ा।
एसबीआई रिसर्च का सुझाव है कि आरबीआई को ऐसे बॉन्ड में ओएमओ करना चाहिए जो ज्यादा लिक्विड हों, ताकि यील्ड पर सही असर दिखे। उदाहरण के तौर पर, आरबीआई मौजूदा 10 साल के 6.48 प्रतिशत (2035) बॉन्ड की बजाय 6.33 प्रतिशत (2035) वाले पुराने 10 साल के बॉन्ड में ओएमओ कर सकता है।
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