राष्ट्रीय
आम बजट में 15552 आदर्श विद्यालय बनाने को 4684 करोड़ आवंटित : निशंक
केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सोमवार को कहा कि देश में नए अविष्कारों को बढ़ावा देने के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन को मजबूत किया जाएगा। इस फाउंडेशन के लिए बजट में 50 हजार करोड़ रुपये आवंटन किए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही केंद्रीय बजट में 15000 आदर्श विद्यालय बनाने की घोषणा भी की गई है। उन्होंने बताया कि देशभर में व्यापक स्तर पर आदर्श शिक्षा विद्यालयों की स्थापना की जाएगी। आदर्श विद्यालय योजना का उद्देश्य प्रत्येक ब्लॉक में एक प्राथमिक और एक प्रारंभिक विद्यालय और प्रत्येक जिले में एक माध्यमिक और एक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तैयार करना होगा। यह एक सुरक्षित शिक्षा का वातावरण है, जहां शिक्षा के अनुभवों की एक विस्तृत श्रृंखला की पेशकश की जाती है। यहां शिक्षा के लिए अनुकूल, अच्छे बुनियादी ढांचे और उपयुक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।
निशंक ने कहा कि कुल 15552 विद्यालयों को आदर्श विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा। इन्हें 4684 करोड़ रुपये (राज्य के हिस्से का समावेश) की अतिरिक्त धनराशि, समग्र शिक्षा योजना के एक घटक के रूप में दी जाएगी।
केंद्रीय बजट में शिक्षा के महत्व को ध्यान रखते हुए आदिवासी क्षेत्रों में भी शिक्षा के व्यापक इंतजाम करने की बात कही गई है। शिक्षा मंत्री ने कहा, “आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 750 एकलव्य विद्यालयों की स्थापना और लेह में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना से देश का शिक्षातंत्र मजबूत होगा। एनजीओ और निजी स्कूलों के साथ मिलकर 100 नए सैनिक स्कूल खोले जाने का भी प्रस्ताव किया गया है।”
केंद्रीय मंत्री ने आईएएनएस को बताया कि इस बजट में प्रति ब्लॉक एक प्राथमिक और एक प्रारंभिक विद्यालय यानी कुल 7047 प्राथमिक और 7047 प्रारंभिक विद्यालय प्रस्तावित हैं। एक माध्यमिक और एक उच्च माध्यमिक प्रति जिला, यानी 729 माध्यमिक और 729 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मानदंडों के आधार पर चुने जाएंगे। इन्हें पर्याप्त बुनियादी ढांचे और पूर्व-प्राथमिक स्तर पर बालवाटिका सहित गुणवत्ता के हस्तक्षेप, शिक्षकों की क्षमता निर्माण, शिक्षण सामग्री, आईसीटी और स्मार्ट कक्षा की सुविधाएं के लिए विशिष्ट वित्त पोषण किया जाएगा।
इसके अलावा नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) के लिए प्रस्तावित 50 हजार करोड़ रुपये के आवंटन पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “एक बड़ी और जीवंत अर्थव्यवस्था को विकसित करने तथा बनाए रखने में ज्ञान सृजन एवं अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इससे न केवल समाज का उत्थान होता है, बल्कि राष्ट्र को सतत रूप से और भी अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने में प्रेरणा भी मिलती है।”
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के बजट ने एनआरएफ को महत्व दिया है, जिससे चिन्हित राष्ट्रीय प्राथमिकताओं वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ देश में समग्र अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना सुनिश्चित होगा।
निशंक ने कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की दृष्टि से अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध कराने, सभी के लिए सुलभ और सस्ती बनाने के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत आदर्श विद्यालय योजना, केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय में उत्कृष्ट विद्यालय शुरू करने का प्रस्ताव है।”
केंद्रीय शिक्षामंत्री ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह बजट पूरे देश के विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके प्रावधान देश की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे।”
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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