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रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती विकास को देगी बढ़ावा : अर्थशास्त्री

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मुंबई, 5 दिसंबर: भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती के फैसले का शुक्रवार को अर्थशास्त्रियों ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति के असाधारण रूप से निचले स्तर पर बने रहने की इस स्थिति में आरबीआई का यह कदम विकास को बढ़ावा देगा।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि पॉलिसी एक्शन और लिक्विडिटी उपायों को लेकर की गई घोषणाएं दिखाती हैं कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति की वर्तमान स्थिति का इस्तेमाल आर्थिक गतिविधी को मजबूत बनाने के लिए करना चाहता है।

केयरएज रेटिंग्स की चीफ इकोनॉमिस्ट रजनी सिन्हा ने कहा, “आरबीआई का ब्याज दरों में कटौती और मौद्रिक नीति के रुख को न्यूट्रल रखने का फैसला हमारी उम्मीदों के अनुरूप रहा।”

उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई ने विकास को बढ़ावा देने के लिए कम मुद्रास्फीति की वर्तमान स्थिति का लाभ उठाया है।

सिन्हा के अनुसार, लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम रेट कट के ट्रांसमिशन को आसान बनाने में मददगार साबित होंगे।

क्रिसिल की चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी ने कहा, “आरबीआई एमपीसी के निर्णय उनकी भी उम्मीदों के अनुरूप रहे।”

उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था ने इस वर्ष विकास और महंगाई दोनों को लेकर आश्चर्यजनक प्रदर्शन किया है, जिससे केंद्रीय बैंक को रेट में कटौती को लेकर पर्याप्त गुंजाइश मिल गई।

जोशी ने कहा, “खुदरा मुद्रास्फीति में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिसकी मुख्य वजह खाद्य पदार्थों की कम कीमतें हैं, जबकि कोर मुद्रास्फीति भी कम हुई है। ब्याज दरों में कटौती अगले वित्त वर्ष में विकास को बढ़ावा देगी क्योंकि मौद्रिक नीति कुछ देरी से काम करती है।”

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा कि मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट ने आरबीआई के लिए ब्याज दरों में कटौती को लेकर देरी करना कुछ मुश्किल बना दिया।

उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई ने ग्रोथ के अनुमान को भी रिवाइज किया है, जो कि देश की मजबूत अर्थव्यवस्था में विश्वास का संकेत देता है।

अरोड़ा ने कहा, “1.45 लाख करोड़ रुपए का ओपन मार्केट ऑपरेशन्स के जरिए लिक्विडिटी इन्फ्यूजन और फॉरेक्स स्वैप्स ब्याज दरों में कटौती का फायदा लोगों तक पहुंचाने में मददगार होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि रुपए में कमजोरी ब्याज दरों में आगे की राहत को लेकर बाधार के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए

व्यापार

वैश्विक तनावों के चलते बाजार लाल निशान में बंद; सेंसेक्स 121 अंक लुढ़का, निफ्टी 0.34 प्रतिशत गिरा

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पश्चिम एशिया में जारी तनावों के चलते वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार दिन के निचले स्तर से उबरकर लाल निशान में बंद हुआ। इस बीच आईटी, एफएमसीजी और बैंक शेयरों के समर्थन से प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में 0.34 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी 50 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,398.10 पर आ गया।

दिन के शुरुआत में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,902.59 से 593.42 अंकों यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,309.16 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय इसने 14.55 अंक चढ़कर 74,17.15 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि एक समय यह 742.42 अंक यानी करीब 1 प्रतिशत फिसलकर 74,160.16 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। यानी सेंसेक्स दिन के निम्नतम स्तर से 621.59 अंक उबरकर बंद हुआ।

वहीं निफ्टी की बात करें तो यह अपने पिछले बंद 23,477.80 से 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत फिसलकर 23,270.30 पर खुला। हालांकि दिन के कारोबार में एक समय यह 23,448.10 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि एक समय 246.4 अंक यानी 1 प्रतिशत फिसलकर यह 23,231.40 के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया था।

व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में क्रमशः 0.26 प्रतिशत और 0.58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जिनमें क्रमशः 2.7 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी एफएमसीजी में भी गिरावट दर्ज की गई। इनके विपरीत, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया और निफ्टी आईटी में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

निफ्टी50 इंडेक्स में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली, जबकि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि भारतीय इक्विटी पर दबाव बने रहने की संभावना है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ गई है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से सप्लाई में रुकावट की चिंता बढ़ गई है।

क्रूड की बढ़ती कीमतों ने ग्लोबल बॉन्ड यील्ड को ऊपर धकेल दिया है; अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है, जिससे इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ रहा है और फेड के सख्त रुख की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं।

इस बीच रुपया गिरकर 95.6 प्रति डॉलर पर आ गया, जबकि एफआईआई की लगातार बिकवाली ने दबाव और बढ़ा दिया।

एक्सपर्ट ने कहा कि शुक्रवार की गिरावट के बाद पूरे हफ्ते में निफ्टी 50 में 2.1 प्रतिशत की गिरावट आई।

मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.3 प्रतिशत और 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। प्राइवेट बैंकों ने बेहतर प्रदर्शन किया और 0.5 प्रतिशत की बढ़त हासिल की, जबकि रियल्टी सेक्टर पिछड़ने वालों में शामिल रहा। व्यापक रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के बीच, निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में भारी गिरावट आई और यह दो महीने से अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गया; इसमें गोदरेज प्रॉपर्टीज और लोढ़ा की बड़ी भूमिका रही।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि बैंक यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल से बैंकिंग कामकाज प्रभावित हुआ। वे हफ्ते में पांच दिन काम करने और पीएलआई स्कीम में बदलाव की मांग कर रहे थे। इस महीने के आखिर में और 26 अक्टूबर से और हड़तालें होनी हैं।

एक्सपर्ट के मुताबिक, प्राइमरी मार्केट में, एनएसई ने अपने आईपीओ के लिए 1,700-1,785 रुपए प्रति शेयर का प्राइस बैंड घोषित किया है। यह सब्सक्रिप्शन के लिए 17 सितंबर को खुलेगा और इस इश्यू से लगभग 22,662 करोड़ रुपए जुटाने की उम्मीद है।

एक्सपर्ट ने बताया कि अगले हफ्ते निवेशकों की नजर भारत के अगस्त सीपीआई और डब्ल्यूपीआई महंगाई के आंकड़ों, यूएस फेड के पॉलिसी फैसले, यूएस रिटेल सेल्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर रहेगी। साथ ही, क्रूड की कीमतें, रुपया और ग्लोबल यील्ड भी बाजार के लिए अहम कारक बने रहेंगे।

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व्यापार

सोने और चांदी धड़ाम, महंगाई के डेटा को लेकर निवेशक सतर्क

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सोने और चांदी की शुरुआत शुक्रवार को गिरावट के साथ हुई। इस दौरान दोनों कीमती धातुओं में करीब 1.10 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,52,341 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,571 रुपए या 1.03 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,50,770 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

हालांकि, शुरुआती कारोबार में इसमें तेजी देखी गई और सुबह 9:48 पर यह 867 रुपए या 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,51,474 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोना ने 1,50,695 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,51,483 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी जा रही है।

चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,34,099 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,530 रुपए या 1.08 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,31,569 रुपए प्रति किलो पर खुला।

अब तक के कारोबार में सोने ने 2,30,270 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,32,096 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी में गिरावट देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 1.29 प्रतिशत की कमजोरी 4,350 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63.63 डॉलर प्रति औंस पर था।

जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की वजह मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से डॉलर का मजबूत होना है। दुनिया की कई अहम मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स एक सप्ताह के उच्चतम स्तर 99.12 पर पहुंच गया है।

इसके अलावा, देर शाम अमेरिका में महंगाई के आंकड़े आएंगे, इससे आने वाले समय में सोने की दिशा तय होगी। इसे लेकर निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

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राजनीति

असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”

मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”

उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।

आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।

इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।

सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।

यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।

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