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Friday,04-April-2025
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नारायण राणे और उनका बेटा ‘झूठे’ हैं, हमें आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रहे-दिशा सालियान के माता-पिता ने की राष्ट्रपति से शिकायत

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बॉलीवुड से जुड़ी पूर्व उद्यमी दिवंगत दिशा सालियान के वृद्ध माता-पिता ने एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटाकर शिकायत की है कि केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नारायण राणे और उनके विधायक पुत्र नितेश राणे ‘झूठे’ हैं और वे उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

सतीश सालियान और उनकी पत्नी वसंती सालियान ने अपने पत्र में राजनेता पिता-पुत्र पर निशाना साधा है और साथ ही उनकी मृत बेटी दिशा को लेकर कुछ टेलीविजन चैनलों और सोशल मीडिया पर ‘झूठी कहानी’ पेश करने करने की बात भी कही है। दिशा ने 8 जून, 2020 को एक इमारत से नीचे कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। वह अनजाने में नीचे गिरी या उन्होंने आत्महत्या की या फिर उनकी मौत के पीछे कोई और कारण है, इस बारे में अभी तक सही प्रकार से कुछ सामने नहीं आया है। इसी के कुछ समय बाद 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी अपने मुंबई के आवास में मृत पाए गए थे। इसके बाद कई तरह की बातें सामने आई थीं।

एक दशक पहले दिल्ली के निर्भया दुष्कर्म-सह-हत्या मामले के साथ समानताएं दिखाते हुए, दिशा के माता-पिता ने बताया कि अब तक, उस पीड़ित की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यहां ‘राणे मेरी बेटी का नाम स्पष्ट रूप से ले रहे हैं’ और कहा कि उसका दुष्कर्म हुआ था।

उन्होंने पूछा कि क्या देश का कानून केंद्रीय मंत्री पर लागू नहीं होता है और कहा कि उनके खिलाफ (पुलिस की ओर से मामला) दर्ज करने के बाद भी, ‘झूठे’ राणे की जोड़ी ने परिवार का नाम खराब करना बंद नहीं किया है।

संपर्क करने पर, सालियान दंपति ने कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखे दो दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई है।

सालियन ने आईएएनएस को बताया, “हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस और बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से भी यही अपील की है कि कुछ राजनेताओं को हमारी बेटी का नाम एवं छवि खराब करने से रोकें।”

उन्होंने बताया कि कैसे जब भी केंद्रीय मंत्री ने उनकी बेटी का नाम लिया, तो यह राष्ट्रीय समाचार बन गया और आश्चर्य जताया कि पुलिस की ओर से ‘राणे जैसे अमीर और शक्तिशाली राजनेताओं’ के खिलाफ मामले को सही ढंग से नहीं निपटा जाता है।

दिशा सालियान के माता-पिता ने कहा, “हमारी बेटी की मौत के बाद हमारा जीवन अस्त-व्यस्त और दयनीय हो गया है और उसके बाद राणे और अन्य लोगों द्वारा फैलाया गया यह झूठ. अपराध दर्ज होने के बाद भी, केंद्रीय मंत्री राणे और उनके बेटे ने हमारा नाम खराब करना बंद नहीं किया है, ऐसा लगता है कि जब तक हम जीवित हैं, हमें न्याय नहीं मिलेगा, क्योंकि झूठ फैलाने का अधिकार हमारे जीवन के मौलिक अधिकार और निजता के अधिकार, गरिमा के साथ जीने से ज्यादा जरूरी है।”

दिशा के माता पिता वसंती सालियान और सतीश सालियान ने राष्ट्रपति से अनुरोध करते हुए कहा, “हम आपसे अनुरोध करते हैं कि संबंधित अधिकारियों को उचित कदम उठाने के निर्देश जारी करें, ताकि न्याय हो सके अन्यथा हमारे पास अपना जीवन समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

ऐसे मामलों में आरोपी शक्तिशाली राजनेताओं का पक्ष लेने के बजाय ऐसे मुद्दों पर न्यायपालिका को संवेदनशील बनाने का आग्रह करते हुए, उन्होंने राणे के जमानत आदेश में सत्र न्यायालय के न्यायाधीश के अवलोकन का भी उल्लेख किया।

उन्होंने याद किया कि कैसे जांचकर्ताओं द्वारा चार घंटे की पूछताछ के बाद, राणे बाहर आए और दावा किया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को फोन किया जिसके बाद उन्हें मालवानी पुलिस स्टेशन से बाहर निकलने की अनुमति दी गई।

उन्होंने आगे कहा, “अगर यह सच है, तो न्याय पाने के लिए हम किस पर भरोसा कर सकते हैं.. जब ऐसे बेईमान तत्वों द्वारा हमारी गरिमा पर हमला किया जाता है।”

अग्रिम जमानत हासिल करने के बाद, नितेश राणे ने इसे ऐतिहासिक जीत करार दिया और दिशा सलियन को न्याय दिलाने का वादा किया।

दिशा के माता-पिता ने कहा, “हमारी बेटी को न्याय दिलाने वाले वे कौन होते हैं? इस तरह के बयान और आरोप हमें निराश कर रहे हैं।”

राणे के इस दावे को चुनौती देते हुए कि उन्हें (मुंबई) पुलिस पर भरोसा नहीं है और वे सीबीआई को सबूत सौंपेंगे, उन्होंने कहा कि अदालती कार्यवाही को ध्यान से सुनने के बाद, वे आश्वस्त हैं कि राणे पिता-पुत्र ‘झूठे’ हैं।

उन्होंने आगे कहा, “उनके पास कोई सबूत नहीं है.. तथ्य हमारी निजी जानकारी में हैं.. और हम अच्छी तरह जानते हैं कि वे दोनों कोई सबूत नहीं दे सकते, क्योंकि वे झूठे हैं.. वे सीबीआई को सबूत देने के झूठे बहाने बना रहे हैं।”

सालियान दंपति ने राष्ट्रपति और अन्य लोगों से संबंधित अधिकारियों को उचित कदम उठाने का निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि न्याय किया जा सके।

दिशा के माता-पिता ने अपनी बातों का निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “अन्यथा, हमारे पास अपने जीवन को समाप्त करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

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वक्फ संपत्तियों पर भूमि माफिया के खिलाफ संघर्ष : नया संशोधित बिल चुनौतियां बढ़ा रहा है

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नई दिल्ली : वक्फ संपत्तियों की रक्षा करने और उनके लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने की लड़ाई पहले से ही भूमि माफिया, अतिक्रमणकारियों और अवैध समूहों के कारण कठिन थी। अब सरकार द्वारा पेश किया गया नया संशोधित बिल इस संघर्ष में एक और बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। एडवोकेट डॉ. सैयद एजाज अब्बास नक़वी ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है और तुरंत सुधारों की मांग की है। उन्होंने कहा कि वक्फ का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाना था, लेकिन दुर्भाग्यवश यह उद्देश्य पूरी तरह असफल हो गया है। दूसरी ओर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), जो सिख समुदाय की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था है, दशकों से अपने समुदाय के कल्याण में सक्रिय रूप से लगी हुई है। इसके परिणामस्वरूप, सिख समाज में भिखारियों और मानव रिक्शा चालकों की संख्या लगभग समाप्त हो गई है।

वक्फ भूमि पर अवैध कब्जे और दुरुपयोग उजागर :
डॉ. नक़वी के अनुसार, वक्फ संपत्तियों को सबसे अधिक नुकसान स्वार्थी समूहों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमणों से हुआ है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि कई वक्फ संपत्तियां मूल रूप से सैयद परिवारों की दरगाहों के लिए दान की गई थीं, लेकिन उनका भारी दुरुपयोग किया गया। उन्होंने खुलासा किया कि एक प्रसिद्ध व्यक्ति ने मुंबई के ऑल्टामाउंट रोड पर स्थित एक एकड़ प्रमुख वक्फ भूमि को मात्र 16 लाख रुपये में बेच दिया, जो वक्फ के सिद्धांतों और कानूनों का खुला उल्लंघन है।

धारा 52 में सख्त संशोधन की मांग :
डॉ. नक़वी ने सरकार से वक्फ संपत्तियों को अवैध रूप से बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने वक्फ अधिनियम की धारा 52 में तत्काल संशोधन कर मृत्युदंड या आजीवन कारावास जैसी कड़ी सजा का प्रावधान करने की मांग की है। यह मुद्दा उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका है जो वक्फ संपत्तियों की रक्षा के लिए पहले से ही भ्रष्ट तत्वों और अवैध कब्जाधारियों से लड़ रहे हैं। यह देखना बाकी है कि क्या सरकार इन चिंताओं को गंभीरता से लेती है और वक्फ भूमि की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून लागू करती है।

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मुंबई क्लीनअप मार्शल और स्वच्छ मुंबई अभियान समाप्त, नागरिकों से जुर्माना वसूली पर भी रोक, बीएमसी हेल्पलाइन नंबर जारी

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मुंबई: मुंबई बीएमसी ने क्लीन-अप मार्शल नीति को खत्म कर दिया है, जिसके बाद अब शहर की सड़कों से क्लीन-अप मार्शल का नामोनिशान मिट गया है। महानगरपालिका ने क्लीन-अप मार्शल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है और स्वच्छ मुंबई मिशन को बंद कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब कोई भी क्लीन-अप मार्शल नागरिकों को जुर्माना भरने या कोई अन्य दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा। क्लीन-अप मार्शल के खिलाफ शिकायत के बाद मुंबई बीएमसी ने आज से क्लीन-अप मार्शल की सेवा बंद करने और स्थगित करने का फैसला किया है।

मुंबई महानगरपालिका का ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग, कचरा और स्वच्छता विभाग के अंतर्गत, मुंबई में सार्वजनिक स्वच्छता की देखरेख करता है और ‘स्वच्छ मुंबई मिशन’ को 4 अप्रैल, 2025 से बंद कर दिया गया है। हालांकि, महानगरपालिका प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि अगर इसके बावजूद उन पर कोई जुर्माना लगाया गया है, तो वे इसकी शिकायत कर सकते हैं। क्लीनअप मार्शल के बारे में शिकायत मुंबई नगर निगम के डिवीजनल कंट्रोल रूम में 022-23855128 और 022-23877691 (एक्सटेंशन नंबर 549/500) पर की जा सकती है।

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न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक गबन के आरोपियों की संपत्ति जब्त

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मुंबई: न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक से करोड़ों रुपये के गबन के मामले में मुंबई आर्थिक शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भी संपत्ति जब्ती की कार्यवाही शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने बताया कि गबन की रकम से प्राप्त संपत्तियों की पहचान करने के बाद उसे कुर्क कर जब्त कर लिया गया है। इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और इन आरोपियों की 21 अचल संपत्तियां पाई गई हैं, जिन्हें कुर्क करने की अनुमति दी गई है।

मुंबई शहर में 107 बीएनएसएस के तहत यह पहली कार्रवाई है जिसमें आरोपियों की संपत्ति जब्त की गई है। मुंबई एओडब्ल्यू ने कहा कि जब्त संपत्तियों से बरामद राशि का भी अनुमान लगाया जाएगा। मुंबई में हुए बैंक घोटाले के बाद ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई की है और आरोपियों की अन्य संपत्तियों का ब्योरा भी खंगाला जा रहा है।

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