राजनीति
बच्चों के लिए योगी सरकार ने इंग्लिश रीडिंग प्रोग्राम को किया लॉन्च
योगी आदित्यनाथ की सरकार अंग्रेजी माध्यम वाले सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए एक रीडिंग प्रोग्राम की शुरुआत कर रही हैं, ताकि पढ़ने की क्षमता को बेहतर बनाने में उनकी मदद हो सकें। इस योजना के तहत, 12 जिलों में 820 प्राथमिक विद्यालयों के कम से कम 1.25 लाख बच्चे लाभान्वित होंगे। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश कुमार द्विवेदी बुधवार को वर्चुअली इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
बच्चों में अंग्रेजी पढ़ने के कौशल में सुधार करने और उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करने के लिए दुनिया भर के विद्यालयों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले एक एजुकेशनल टूल, स्कॉलिस्टिक शॉर्ट रीड कार्ड का उपयोग बच्चों में पढ़ने की क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में किया जाएगा। स्कॉलिस्टिक एक अमेरिकी कंपनी है, जो पिछले 50 सालों से बच्चों के लिए किताबों के प्रकाशन में कार्यरत है।
सामान्यत: शहरों के बड़े-बड़े स्कूलों में इस्तेमाल में लाए जाने वाले इस कार्ड में तमाम तस्वीरें, काल्पनिक कहानियां, नॉन-फिक्शन शैलियां रहती हैं, और इसी के साथ टीचर्स के लिए कुछ इंस्ट्रक्शंस भी रहते हैं और इनके अलावा कुछ ऐसी गतिविधियां भी रहती हैं जिनसे पढ़ने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।
बेसिक शिक्षा के निदेशक सरवेंद्र विक्रम सिंह ने कहा, “विद्यालयों में इस्तेमाल किए जाने वाले इस सेट के कुछ कार्डो को विशेषज्ञों का एक पैनल दोबारा परिभाषित करेगा, जिससे कि इनमें प्रान्तीय पहलुओं को जोड़ा जा सके।”
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सभी 820 स्कूलों के लिए स्कॉलिस्टिक कॉर्ड्स को एचसीएल फाउंडेशन समुदाय प्रोजेक्ट को प्रायोजित कर रहा है। जिन जिलों में इस कार्यक्रम को पेश किया जाएगा, उनमें बुलंदशहर (60 विद्यालय), लखीमपुर खीरी (75), सिद्धार्थ नगर (65), हरदोई (319), सोनभद्र (40), श्रावस्ती (25), चित्रकूट (25), वाराणसी (40), गोरखपुर (95), गौतम बुद्ध नगर (20), लखनऊ (40) और बाराबंकी (16) शामिल हैं।
शिक्षाविदों का मानना है कि ये कार्यक्रम समय की मांग है, खासकर अगर बात एएसईआर की रिपोर्ट की करें, तो इसमें दिखाया गया था कि उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से 3 तक के लगभग एक तिहाई विद्यार्थियों को पढ़ने में काफी दिक्कत रहती है।
जानी-मानी शिक्षाविद अमृता दास ने कहा, “रीडिंग से बच्चों में कई और महत्वपूर्ण कौशल जागृत होते हैं। इनमें भाषा की समझ, रचनात्मकता, गंभीर सोच, भावनाओं को अभिव्यक्त करने की ताकत शामिल है, और इन सभी के साथ दिमाग का भी विकास होता जाता है।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
फिलीपींस में भूकंप से 61 लोगों की मौत, 75 हजार से ज्यादा घर बर्बाद

फिलीपींस के दक्षिणी द्वीप मिंडानाओ के तट के पास 8 जून को आए 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप में कम से कम 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा में 1,403 लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी रविवार को फिलीपींस की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन परिषद (एनडीआरआरएमसी) ने दी।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, इससे पहले एनडीआरआरएमसी ने बताया था कि इस भूकंप से 75,300 से अधिक परिवार यानी करीब 3.46 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से 45,000 से अधिक लोगों को विस्थापित होना पड़ा, जबकि 12,600 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हो गए। भूकंप के कारण 45 तरह की घटनाएं भी हुईं, जिनमें ज्यादातर भूस्खलन शामिल हैं।
परिषद ने कहा कि भूकंप से 45 सड़क खंड, आठ पुल, एक हवाई अड्डा और दो बंदरगाहों पर आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके अलावा कृषि, पशुपालन और मछली पालन के कामों पर भी असर पड़ा है। 48 शहरों और नगरपालिकाओं में बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई।
फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी (पीएचआईवीओएलसीएस) ने बताया कि यह भूकंप टेक्टोनिक था, जो सुबह 7:37 बजे स्थानीय समय पर 33 किलोमीटर की गहराई में आया। इसका केंद्र सरंगानी प्रांत के मिंडानाओ द्वीप पर मासीम शहर के तट से लगभग 32 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था।
इससे पहले फिलीपींस के ऑफिस ऑफ सिविल डिफेंस के प्रवक्ता जूनी कैस्टिलो ने बताया था कि दक्षिण कोटाबाटो के जनरल सैंटोस शहर में 10 लोगों की मौत हुई है। यह एक बंदरगाह शहर है जिसकी आबादी सात लाख से ज्यादा है। साथ ही कम से कम 12 लोग अभी लापता हैं।
ज्यादातर मौतें मलबा गिरने, इमारतों के ढहने और भूस्खलन की वजह से हुई हैं। फिलीपींस राष्ट्रीय पुलिस ने पहले बताया था कि कम से कम 134 लोग घायल हुए हैं।
जनरल सैंटोस में एक दो मंजिला स्कूल की इमारत भी गिर गई, जिसमें कई छात्र फंस गए थे। अधिकारी अभी इस घटना की पुष्टि कर रहे हैं। ऑनलाइन वीडियो में प्रभावित इलाकों में विश्वविद्यालय और रेस्तरां की इमारतें ढही हुई दिखाई दीं।
कई व्यावसायिक इमारतों को भी नुकसान हुआ है, जहां साइनबोर्ड गिर गए और खिड़कियों के शीशे टूट गए। स्थानीय लोग तुरंत निकलकर सुरक्षित जगहों पर चले गए।
यह तेज भूकंप उस समय आया जब फिलीपींस में स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों के बाद फिर से कक्षाएं शुरू होने वाली थीं। कई स्कूलों की निगरानी वीडियो में भूकंप के दौरान तेज झटके दिखे, जिसके बाद शिक्षक और छात्र या तो तुरंत बाहर निकल गए या डेस्क के नीचे छिप गए।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भूकंप से 6 क्षेत्रों में 43 डिवीजनों के तहत 8,642 स्कूल प्रभावित हुए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु: मछली पकड़ने पर लगी रोक आज खत्म होगी, समुद्र में लौटने की तैयारी में जुटे मछुआरे

तमिलनाडु में मछली पकड़ने पर 61 दिनों के लिए लगी रोक रविवार को खत्म हो रही है। हजारों मछुआरे मछली पकड़ने का काम फिर से शुरू करने की तैयारी में जुट गए हैं।
बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से 15 अप्रैल से 14 जून तक मछली पकड़ने पर रोक लगाई गई थी। सरकार की ओर से मछलियों की आबादी को उनके सबसे ज्यादा प्रजनन के समय बचाना और समुद्री संसाधनों को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लगाया गया था।
दो महीनों के ब्रेक के दौरान मछुआरों ने नावों की मरम्मत की, इंजन ठीक किए और मछली पकड़ने के सामान को ठीक किया। सरकार की ओर से लगी रोक 14 जून की आधी रात को खत्म हो जाएगी। यही वजह है कि पूरे तमिलनाडु में मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों पर हलचल बढ़ गई है। मछुआरे समुद्र में जाने से पहले आखिरी तैयारी में जुटे हुए हैं।
बंदरगाह अधिकारियों और मत्स्य पालन अधिकारियों की ओर से भी काम फिर से शुरू करने के लिए जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 15,000 से ज्यादा मशीनीकृत नावों पर एक लाख से ज्यादा मछुआरों के समुद्र में जाने की उम्मीद है।
इनमें चेन्नई का कासिमेडु, तिरुवल्लुर, चेंगलपट्टू, विल्लुपुरम, कुड्डालोर, तंजावुर, तिरुवरुर, नागपट्टिनम, मयिलादुथुराई, पुडुचेरी, कराईकल, पुदुक्कोट्टई, रामनाथपुरम, थूथुकुडी, तिरुनेलवेली और कन्याकुमारी के तटीय इलाके शामिल हैं।
मछली व्यापारी, नीलामी करने वाले, ट्रांसपोर्टर और सीफूड प्रोसेसिंग में लगे कर्मचारी भी रोक हटने के बाद व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
बता दें कि मत्स्य पालन विशेषज्ञों का लंबे समय से मानना है कि सालाना मछली पकड़ने की रोक बंगाल की खाड़ी में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और मछली के टिकाऊ उत्पादन को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है।
महाराष्ट्र
मुंबई: विवादित बयानों और टिप्पणियों के कारण डॉ. सेजल पवार छुट्टी पर गईं; जांच से पहले ही के ई एम अस्पताल ने सख्त कार्रवाई की।

मुंबई की स्टूडेंट डॉ. सेजल एक कॉमेडी इवेंट में सेजल को डिपार्टमेंटल जांच के साथ 15 दिन की छुट्टी पर भेज दिया गया है और इसकी फाइनल रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। डॉ. सेजल पवार से जुड़े मामले में इंस्टीट्यूशनल कार्रवाई
सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज और केईएम हॉस्पिटल ने एमबीबीएस थर्ड ईयर की स्टूडेंट सेजल पवार की एक कॉमेडी इवेंट के दौरान की गई टिप्पणियों और उसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उससे जुड़े वीडियो के सर्कुलेशन से पैदा हुई लोगों की चिंता का ध्यान रखा है।
शिकायतें मिलने के तुरंत बाद, इंस्टिट्यूट ने शुरुआती फैक्ट-फाइंडिंग प्रोसेस शुरू किया। संबंधित स्टूडेंट को बुलाया गया, उसकी सफाई/माफी रिकॉर्ड में ली गई, और उससे जुड़े मटीरियल का रिव्यू किया गया। शुरुआती नतीजों, मामले की सेंसिटिविटी, और मरे हुए लोगों, बॉडी डोनर्स की इज्ज़त बनाए रखने और मेडिकल स्टूडेंट्स से उम्मीद किए जाने वाले प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स को देखते हुए, आज पवार के खिलाफ एक अंतरिम डिसिप्लिनरी/एडमिनिस्ट्रेटिव ऑर्डर जारी किया गया है।
इसके मुताबिक, पवार को 13 मई से 15 दिनों के लिए कंपलसरी छुट्टी पर रखा गया है, जब तक कि डिटेल्ड जांच और आगे के ऑर्डर पेंडिंग न हो जाएं। आज सुबह 10:30 बजे, उसे इस दौरान अपने माता-पिता/गार्जियन की देखभाल और सुपरविज़न की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। उसे इंस्टीट्यूशनल जांच में पूरा सहयोग करने और जांच कमिटी के बुलाने पर खुद आकर या ऑनलाइन मोड से मौजूद रहने का भी निर्देश दिया गया है।
सीनियर फैकल्टी, एक बाहरी/नॉन-फैकल्टी मेंबर और सही इंस्टीट्यूशनल रिप्रेजेंटेशन वाली पांच सदस्यों की एक पूरी जांच कमिटी बनाने का भी प्रस्ताव दिया गया है। कमिटी से उम्मीद है कि वह सोशल मीडिया सर्कुलेशन के पहलू सहित फैक्ट्स, कॉन्टेक्स्ट, असर और ज़रूरी रिकॉर्ड की जांच करेगी और आगे की कार्रवाई के लिए अपनी सही सिफारिशें देगी। इंस्टिट्यूट दोहराता है कि मरीज़ों, मृतकों, बॉडी डोनर्स और उनके परिवारों का सम्मान मेडिकल एजुकेशन की एक मुख्य वैल्यू है। इस मामले को गंभीरता, संवेदनशीलता और सही प्रोसेस के साथ निष्पक्षता से निपटाया जाएगा। डिटेल्ड जांच रिपोर्ट मिलने के बाद लागू एनएमसी एमयूएचएस, बीएमसी और इंस्टीट्यूशनल नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस स्टेज पर कोई आखिरी नतीजा नहीं निकाला जाना चाहिए, क्योंकि अभी पूरी जांच चल रही है।
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