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इस साल देश के वर्कफोर्स में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 26 दिसंबर। इस साल देश के वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी में जबरदस्त उछाल दिखा। आधी आबादी के साथ ही युवाओं की तादाद भी बढ़ी है।
नौकरी और पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म अपना डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं ने 2.8 करोड़ नौकरियों के लिए आवेदन किए हैं, जो 2023 की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह, युवाओं ने नौकरी के आवेदनों में सालाना आधार पर 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
2024 में कुल 7 करोड़ में से महिलाओं ने 2.8 करोड़ नौकरियों के लिए आवेदन किए, जो सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
फ्लेक्सिबल काम के अवसर, जेंडर-फोक्स्ड पहल और महिलाओं के नेतृत्व वाले क्षेत्र जैसे ई-कॉमर्स और हेल्थकेयर का विस्तार होने की वजह से यह उछाल देखा गया।
महिलाओं ने हेल्थकेयर, होस्पिटैलिटी, रिटेल और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर में बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया है और फील्ड सेल्स, लॉजिस्टिक्स और सिक्योरिटी सर्विस जैसी भूमिकाओं को अपनाया है।
सीनियर और मैनेजर भूमिकाओं के लिए आवेदनों में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो भारत के नए युग के वर्कफोर्स को आकार देने में महिलाओं के बढ़ते प्रभाव का संकेत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और मुंबई जैसे टियर 1 शहरों ने 1.52 करोड़ आवेदनों के साथ इस उछाल का नेतृत्व किया, जबकि जयपुर, लखनऊ और भोपाल जैसे टियर 2 और टियर 3 शहरों ने 1.28 करोड़ आवेदनों का योगदान दिया, जो मेट्रो हब से परे अवसरों में शानदार वृद्धि को दिखाता है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का फ्रेशर जॉब मार्केट भी फल-फूल रहा है, जिसमें नौकरी के आवेदनों में सालाना आधार पर 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 2 करोड़ को पार कर गया है।
आईटी, मोबिलिटी, रिटेल, बीएफएसआई और सेवाओं जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर इस मांग को बढ़ा रहे हैं क्योंकि युवा प्रोफेशनल इनोवेशन और विस्तार को बढ़ावा दे रहे हैं।
चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरी केंद्रों ने 60 लाख आवेदनों का योगदान दिया, जबकि पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे क्षेत्रों ने 82 लाख आवेदन जोड़े।
इस बीच, इस साल 12 लाख ओपनिंग के साथ ऑनलाइन जॉब पोस्टिंग में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वृद्धि डिजिटल अपनाने, लघु और मध्यम व्यवसाय (एसएमबी) क्षेत्र में वृद्धि और टियर 2 और टियर 3 शहरों में व्यापार विस्तार की वजह से देखी गई।
बीएफएसआई, रिटेल, हेल्थकेयर और लॉजिस्टिक्स जैसी प्रमुख इंडस्ट्री ने सबसे ज्यादा मांग पैदा की, जिसने भारत के उभरते और लचीले जॉब मार्केट को आकार दिया।
भारत का एसएमबी सेक्टर, जिसमें 63 मिलियन से अधिक उद्यम शामिल हैं, जीडीपी में 30 प्रतिशत का योगदान देता है और देश भर में लाखों लोगों को रोजगार देता है।
हायरिंग बूम एआई-ड्रिवन रिक्रूटमेंट टेक्नोलॉजी द्वारा भी संचालित है, जिसमें 45 प्रतिशत एसएमबी हायरिंग में एआई को अपना रहे हैं।
इससे 2.4 लाख नौकरियों के अवसर पैदा हुए, टैलेंट सर्च का समय 30 प्रतिशत कम हुआ और हायरिंग लागत 25 प्रतिशत कम हुई।
व्यापार
डीजीएमए ने शिपिंग कंपनियों को होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने का दिया निर्देश

नौवहन महानिदेशालय (डीजीएमए) ने खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात का हवाला देते हुए जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और भर्ती एवं तैनाती सेवा लाइसेंस (आरपीएसएल) कंपनियों को अगले आदेश तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने का निर्देश दिया है।
समुद्री नियामक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि यह कदम संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
डीजीएमए के अनुसार, हाल के दिनों में मोम्बासा बी, अल बह्याह, जीएफएस गैलेक्सी, एमटी वेडयान और अल रेकय्यात जैसे व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों से इस क्षेत्र में काम कर रहे नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों के सामने जोखिम काफी बढ़ गया है।
एडवाइजरी में फारस की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में परिचालन कर रहे जहाजों के कप्तानों को भी उच्च स्तर की सुरक्षा सतर्कता बनाए रखने, नौवहन संबंधी चेतावनियों और सुरक्षा परामर्शों पर लगातार नजर रखने और अंतरराष्ट्रीय जहाज एवं बंदरगाह सुविधा सुरक्षा (आईएसपीएस) संहिता के तहत जहाज सुरक्षा योजना और अन्य सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि, डीजीएमए ने स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक जहाज मालिक, जहाज प्रबंधन कंपनियां और आरपीएसएल कंपनियां होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली यात्राओं पर भारतीय नाविकों की तैनाती नहीं करें।
आपातकालीन सहायता के लिए डीजीएमए ने नाविकों और जहाजों से कहा है कि वे तुरंत डीजी कम्युनिकेशन सेंटर (एमएमडीएसी) या भारतीय नौसेना के इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) से संपर्क करें।
डीजीएमए ने कहा कि वह खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदल रहे सुरक्षा हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यह एडवाइजरी ऐसे समय में जारी की गई है, जब ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका के हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। इससे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले समुद्री व्यापार में संभावित व्यवधान की आशंका बढ़ गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने बुधवार को ईरान के बंदरगाहों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने के बाद उसके तटीय रक्षा और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया।
इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र से होने वाले ऊर्जा निर्यात को सीमित करने की चेतावनी देते हुए कहा कि वह अमेरिका के साथ अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
ई20 पेट्रोल विवाद: उपभोक्ता के पक्ष में देश का पहला फैसला, रायपुर कोर्ट ने कंपनी को वाहन बदलने का दिया आदेश

ई20 पेट्रोल से वाहन में खराबी को लेकर आए देश के पहले फैसले में अदालत ने उपभोक्ता को राहत पहुंचाई है। कार मालिक ने आरोप लगाया था कि ई20 पेट्रोल ने उसकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद रायपुर जिला उपभोक्ता अदालत ने कार मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है। साथ ही, अदालत ने कंपनी और संबंधित पक्षकारों को कार मालिक की शिकायत को देखते हुए वाहन बदलने या निर्धारित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।
रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में परिवाद की ऑनलाइन 12 मार्च 2025 को की गई थी, जबकि इसका पंजीयन 16 अप्रैल 2025 को हुआ। 14 जुलाई को आयोग ने अपना आदेश जारी किया।
उपभोक्ता प्रेमराज देवता ने आरोप लगाया था कि उनकी मारुति ग्रैंड विटारा कार में ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद बार-बार समस्याएं आने लगीं। शिकायत में इंजन संबंधी परेशानी, परफॉर्मेंस के खराब होने, मिसफायरिंग और लगातार माइलेज घटने जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया। उपभोक्ता का कहना था कि ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद वाहन की समस्या दूर नहीं हुई, जबकि कई बार सर्विस सेंटर में जांच और मरम्मत कराई गई।
आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने माना कि ई20 पेट्रोल के संबंध में उपभोक्ता के पास व्यवहारिक रूप से अन्य ईंधन विकल्प उपलब्ध नहीं था, क्योंकि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर यही ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा था।
आयोग ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे उपभोक्ता की कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई ई20 ईंधन समर्थित कार आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। अगर निर्धारित अवधि में वाहन नहीं बदला जाता है, तो विपक्षी पक्षकारों को वाहन की कीमत और संबंधित खर्चों का भुगतान (कुल राशि 20,50,494) करना होगा।
आयोग ने यह भी आदेश दिया कि संबंधित पक्षकारों को मानसिक क्षति और वाद व्यय की राशि भी अदा करनी होगी। आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए एक लाख रुपए और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपए का भुगतान करने को कहा है। आदेश में कहा गया कि राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर नहीं किया जाता है, तो भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
राष्ट्रीय समाचार
कच्चे तेल में गिरावट से भारतीय इक्विटी बाजार में जोखिम घटा; 84,000 के स्तर तक जा सकता है सेंसेक्स : रिपोर्ट

भारतीय शेयर बाजार के आउटलुक में सुधार हुआ है और सेंसेक्स इस साल के अंत तक 84,000 के स्तर को छू सकता है। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट होना, घरेलू स्तर पर खपत मजबूत रहना और कंपनियों में आय से जुड़ा जोखिम कम होना है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
एचएसबीसी ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में भारतीय इक्विटी के लिए व्यापक आर्थिक माहौल में काफी सुधार हुआ है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें उम्मीद से अधिक तेजी से संघर्ष से पहले के स्तर पर वापस आ गई हैं।
इसमें कहा गया है कि तेल की कीमतों में गिरावट से कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव कम हुआ है और कमाई के अनुमानों में भारी कटौती की संभावना भी घटी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब वैल्यूएशन सामान्य हो गई हैं, जबकि ऊर्जा की कम कीमतों और मजबूत खपत ने कमाई के आउटलुक को बेहतर बनाया है।
इसके अलावा, हालिया भारी खरीदारी के बाद आने वाले महीनों में खपत धीमी हो सकती है, जबकि अल नीनो ग्रामीण मांग के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वित्त वर्ष 27 में कमाई में बढ़ोतरी के आम अनुमान (कमोडिटी को छोड़कर) को पहले के 18 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, इसमें और कटौती होने की उम्मीद है।
एचएसबीसी के एनालिस्ट के अनुसार, बॉन्ड और बैंक डिपॉजिट में विदेशी निवेश लाने के लिए आरबीआई के हालिया कदमों से रुपए को स्थिर करने और विदेशी निवेश की निकासी को कम करने में मदद मिली है।
उन्होंने बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशक भी शुद्ध खरीदार बन गए हैं और जुलाई में अब तक लगभग 1.8 अरब डॉलर का निवेश आया है।
भारतीय इक्विटी को ‘अंडरवेट’ से ‘न्यूट्रल’ कैटेगरी में अपग्रेड करने के बावजूद, ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि विदेशी निवेश शायद लंबे समय तक बना न रहे, क्योंकि ग्लोबल निवेशक एक बार फिर दूसरे बाजारों में एआई से जुड़े मौकों पर ध्यान दे सकते हैं।
हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि इक्विटी के लिए घरेलू निवेशकों की मांग मजबूत बनी रहेगी।
इसके अलावा, ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में भारत के प्राइवेट बैंकों, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, रियल एस्टेट, कमोडिटी और चुनिंदा इंडस्ट्रियल कंपनियों को प्राथमिकता दी है। हालांकि, एआई से जुड़ी चिंताओं के कारण सॉफ्टवेयर सर्विस सेक्टर को लेकर सतर्क हैं, भले ही इस सेक्टर के वैल्यूएशन में काफी सुधार हुआ है।
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